Rigveda (Hindi) ऋग्वेद 9350652234

ऋग्वेद आर्यों एवं भारतीयों की ही नहीं, विश्व की सब से प्राचीन पुस्तक है। सब से प्राचीन संस्कृति-वैदिक संस्कृति के प्राची

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Rigveda (Hindi) ऋग्वेद
 9350652234

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दशम मंडल

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ऋ वेद

डा. गंगा सहाय शमा

एम.ए. ( हद -सं कृत), पी-एच.डी.,

ाकरणाचाय

सं कृत सा ह य काशन

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© १९७९ सं कृत सा ह य काशन सं करण : २०१६

ISBN : 978-93-5065-223-7 VP : 1750.5H16*

सं कृत सा ह य काशन के लए व बु स ाइवेट ल. एम-१२, कनाट सरकस, नई द ली-११०००१ ारा वत रत

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अपनी बात मने सायण आचाय के भा य पर आधा रत ऋ वेद का अनुवाद कया था. उस समय आशा नह थी क ाचीन भारतीय सं कृ त को जानने क इ छा रखने वाल को यह इतना अ धक चकर लगेगा. मुझ जैसे सामा य के लए यह गौरव क बात है. व ान्, चतक एवं मनीषी पाठक ने अब तक कसी ु ट एवं असंग त का संकेत नह कया है, इससे म अनुमान लगाने का साहस कर सकता ं क इस ंथ का अनुवाद, मु ण आ द संतोषजनक है. इस ंथ म ऋ वेद क ऋचा का वह अनुवाद दया आ है, जो अथ सायणाचाय को अभी था. इस अनुवाद का आधार सायण का भा य है. उ ह ने जस श द का जो अथ बताया है, वही मने इस अनुवाद म दे ने का य न कया है. मने अनुवाद करने के लए चार वेद म से ऋ वेद और ऋ वेद के अनेक भा य म से सायण भा य ही य चुना, इसका उ र दे ने म मुझे संकोच नह है. ऋ वेद भारतीय जनता एवं आय जा त क ही ाचीनतम पु तक नह , व क सभी भाषा म सबसे पुरानी पु तक है. सबसे ाचीन सं कृ त—वै दक सं कृ त—के ाचीनतम ल खत माण होने के कारण ऋ वेद क मह ा सवमा य है. म इस ववाद म पड़ना नह चाहता क ऋ वेद क ऋचा का ऋ षय ने ई रीय ान के प म सा ा कार कया था या उ ह ने वयं इनक रचना क थी. वैसे ऋ वेद म समसाम यक समाज का जस ईमानदारी, व तार एवं त मयता से वणन कया गया है, उससे मेरा गत व ास यही है क ऋ षय ने समयसमय पर इन ऋचा क रचना क होगी. सायण के अ त र ऋ वेद पर वकट माधव, उद्गीथ, कंद वामी, नारायण, आनंद तीथ, रावण, मुदगल, ् दयानंद सर वती आ द अनेक व ान ने भा य लखे ह. इनम कसी का भा य पूण प म उपल ध नह है. केवल सायण ही ऐसे व ान् ह, ज ह ने चार वेद पर पूण भा य लखा है और वह उपल ध है. सायण का जीवनकाल चौदहव शता द है. वह वजयपुर नरेश ह रहर एवं बु क के मं ी रहे थे. स आयुवद ंथ ‘माधव नदान’ लखने वाले माधव आचाय इ ह के भाई थे. कसी भी श द का अथ जानने म परंपरागत ान का ब त मह व है. सायण को ऋ वेद के परंपरागत अथ को जानने क सु वधा बाद म होने वाले आचाय से अ धक थी. यह न ववाद है. मं ी होने के कारण सभी पु तक क ा त और व ान क सहायता उ ह ******ebook converter DEMO Watermarks*******

सहज सुलभ थी. सायण ने ऋचा के येक श द का व तार से अथ कया है. येक श द क ाकरणस मत ु प क है तथा उ ह ने नघंटु, ा तशा य एवं ा ण ंथ के उदाहरण दे कर अपने अथ क पु क है. इस कार सायण का अथ नराधार नह है. वै दक मं के अथ जानने के हेतु या क आचाय ने तीन साधन बताए ह: १. आचाय से परंपरा ारा सुना आ ान एवं ंथ. २. तक. ३. मनन. सायण ने इन तीन का ही सहारा लेकर अपना भा य लखा है. सायण क कोई धारणा अथवा जद नह जान पड़ती. कुछ अ य आचाय के समान उ ह ने सभी मं का आ धभौ तक, आ या मक या आ धदै वक अथ नह कया है. कुछ आचाय का यहां तक व ास रहा है क येक वै दक मं के उ तीन कार के अथ संभव ह. सायण ने संग के अनुकूल कुछ मं का मानव जीवन संबंधी, कुछ का य संबंधी और कुछ का आ मापरमा मा संबंधी अथ दया है. सायण के अनुसार, अ धकांश मं का अथ मानव जीवन संबंधी ही है. शेष दो कार का अथ उ ह ने ब त कम मं का कया है. इस कार एकमा सायण ही ऐसे भा यक ा ह, ज ह ने कसी वाद का च मा लगाए बना वै दक मं का अथ कया है. उनका भा य साधारण को वेदाथ समझने म भी सहायक है. इ ह सब कारण से मने अपने अनुवाद का आधार सायण भा य को बनाया है. इस अनुवाद के साथ ऋ वेद क मूल ऋचाएं भी द जा रही ह. हद म ऋ वेद के अ य अनुवाद भी ए ह, ज ह उनके लेखक ने सायण भा य पर आधा रत बताया है. म यह कहने का साहस तो नह कर पाऊंगा क उन सबके अनुवाद शु नह ह; हां, यह कहने म मुझे संकोच नह है क मने सायण का आशय प करने का पूरा य न कया है. ऋ वेद का वभाजन दस मंडल म कया गया है. येक मंडल म ब त से सू एवं येक सू म अनेक ऋचाएं ह. मने अनुवाद म केवल यही वभाजन दया है. वैसे येक मंडल कुछ अनुवाक म वभ है. अनुवाक सू म बांटे गए ह. संपूण ऋ वेद को चौसठ अ याय म वभ करके उनके आठ अ क बनाए गए ह. येक अ क म आठ अ याय ह. सायण ने ये सब वभाजन दए ह. उनके भा य म अ क एवं अ याय को ही मुखता द गई है. एक तो यह वभाजन कृ म है, सरे इससे थ का म होता है, इस लए मने इनका उ लेख नह कया है. सं हता अथवा भा य म येक मं के ऋ ष, दे वता, छं द और व नयोग का उ लेख है. ऋ ष का ता पय उस मं के नमाता या ा ऋ ष से है. दे वता का अथ है— वषय. यह दे वता श द के वतमान च लत अथ से सवथा भ है. ऋ वेद के दे वता सप नी (सौत), ूत (जुआ), द र ता, वनाश आ द भी ह. छं द से ता पय उस सांचे या नाप से है जस म वह मं न मत है. व नयोग का ता पय है— योग. जो मं समयसमय पर जस काम म आता रहा, ******ebook converter DEMO Watermarks*******

वही उस का व नयोग रहा. वै दक मं का अथ समझने म दे वता ( वषय) ही आव यक है. इस लए मने केवल दे वता का ही उ लेख कया है. अ धकांश सू म एक सू का ऋ ष एवं छं द एक ही है. कुछ सू म अलग-अलग मं के अलग ऋ ष एवं छं द भी ह. सभी वण के पु ष के अ त र कुछ ना रयां भी ऋ ष ई ह. मं के साथ ा ण, य, वै य एवं शू सभी ऋ ष के प म संबं धत ह. ा ण एवं य ऋ षय क सं या ही सवा धक है. वै य एवं शू ऋ ष एकएक ही ह. वै दक आय का समाज पूणतया वक सत एवं उ त समाज था. य द ऋ वेद म व णत बात को मानव जीवन संबंधी वीकार कया जाए तो आय का जीवन सभी कार से पूण था. ऋ वेद म कुछ व तु एवं पशुप य के नाम एवं वणन सा ात् प से आए ह और कुछ का उ लेख अलंकार प म आ है. वणन चाहे कसी भी प म हो, पर इतना स हो जाता है क ऋ वेदकाल के लोग इन सब बात को जानते थे. कुछ बात उ ह ने य दे खी थ और कुछ क उ ह क पना हो सकती है. कवच, लोहे का ार, सोने अथवा लोहे क नकद , सुस जत सेना, ढाल-तलवार, कारावास, हथकड़ी-बेड़ी, आकाश म उड़ने वाला बना घोड़ का रथ, सौ पतवार वाली नाव, लोहे का नकली पैर, अंधे को आंख मलना, बूढ़े का दोबारा जवान होना, जुआ खेलना, भचा रणी ी का र जाकर गभपात करना, कामुक नारी का संकेत थल पर आना, क या के पता ारा क या को अलंकृत करना, लकड़ी का सं क, घोड़ा चलाने का चाबुक, लगाम, अकुंश, सुई, कपड़ा बुनने वाला जुलाहा, घड़ा बनाने वाला कु हार, रथकार, सुनार, कसान, तालाब से सचाई, हल जोतना आ द ऐसी बात ह, जो वै दक आय को सभी कार वक सत स करती ह. कुछ लोग का ऋ वेद म भचा रणी ी, गभपात, ेमी और ेयसी, कामी पु ष, कामुक नारी, क या के पता या भाई ारा उ म वर पाने हेतु दहेज दे ना, अयो य वर का उ म वधू पाने हेतु मू य चुकाना, चोर, जुआरी, व ासघातक म आ द का उ लेख अनु चत लग सकता है. इन श द के वे सरे अथ करगे एवं त कालीन समाज म इन बात को कभी वीकार नह करगे. म वा त वकता बताने के लए उनसे मा चा ंगा, मेरा ढ़ व ास है क एक बु धान एवं वचारशील वक सत समाज म ये बात होनी वाभा वक ह. दनभर जंगल म चरकर घर को लौटती गाय, र सी से बंधे बछड़े का रंभाना, गाय का ध हना, छाछ बलोना, क चे मांस पर म खय का बैठना, च ड़य का चहचहाना आ द पढ़कर ऐसा लगता है क भारत के गांव म आज भी वै दक जीवन क झलक मल जाती है. नाग रकता का व तार एवं व ान क प ंच उसे वकृत कर रही है. आय मु यतया कृ ष जीवी एवं ाम म रहने वाले लोग ही थे. बाद म उ ह ने नगर भी बसाए, पर ऋ वेद म अ धकांश नगर श ु नगर के प म बताए गए ह. मुझे ऋ वेद का सायण भा यानुसार अनुवाद करने म लगभग ढाई वष लगे. य द मुझे ******ebook converter DEMO Watermarks*******

सायण के समान व तृत भा य लखना पड़ता तो संभवतया चालीस वष लगते. मेरे लए इस अनुवाद क एकमा उपल ध यही है क म इस बहाने संपूण ऋ वेद एवं इसका सायण भा य पढ़ सका. य द कसी अ य का इस अनुवाद से कोई योजन स हो सके तो म अपना य न सफल समझूंगा. मेरे वयं के माद अथवा अ ान के कारण अथवा मु ण संबंधी क मय के कारण य द अब भी कुछ ु टयां रह गई ह तो उ ह म आगामी सं करण म सुधारने हेतु कृतसंक प ं. जो महानुभाव इस ओर माग नदशन करगे उनका म आभार मानूंगा. अपनी बात समा त करने से पहले म यह कहने का लोभ संवरण नह कर पा रहा ं क ऋ वेद क एक बात ने मुझे ब त च कत कया है. उ त समाज, वचारशील लोग एवं स य प रवार क सभी साम ी का उ लेख होते ए भी कह भी द पक अथवा कसी कृ म काशसाधन का नाम नह मला. डा. गंगा सहाय शमा

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थम मंडल सू १.

वषय

मं सं.

अ न का वणन एवं तु त १-९ तु त, धन ा त १-३ दे वता

को तृ त करना, यशोगान, क याणकारी, नम कार ४-७

कमफलदातृ, ाथना ८-९ २.

वायु, इं , व ण आ द क तु त १-९ आ ान, तु त, शंसा १-३ अ क

ा त, आ ान ४-८

बल व कम हेतु ाथना ९ ३.

अ नीकुमार क तु त १-१२ पालक, बु

मान्, श ुनाशक १-३

सोमपान हेतु आ ान ४-५ अ

वीकार हेतु ाथना ६

व ेदेवगण का आ ान ७-९ सर वती का आ ान, ध यवाद, तु त १०-१२ ४.

इं का वणन एवं तु त १-१० आ ान, गाय क तु त, आ ान, शरण १-४ दे श नकाला, कृपा ५-६ सोमरस सम पत ७ इं क तु त ८-१०

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५.

इं क तु त १-१० धन-बल, शंसनीय, याचना १-१०

६.

इं एवं म द्गण क तु त १-१० तु त, घ न ता, पूजा-अचना १-१०

७.

इं क तु त १-१० तु त, सूय, पशुलाभ, ाथना १-१०

८.

इं क तु त १-१० जीतना, ान व पु

ा त १-६

सोमरस का न सूखना, वाणी, वभू तयां ७-९ मं ९.

के इ छु क १०

इं क तु त १-१० श ुनाश व काय स धन, वषा क

१-२

ाथना, ेरणा ३-६

धन याचना, दान, आ ान, य म वास ७-१० १०. इं क तु त १-१२ अचना, वषाथ म द्गण व इं का आना १-२ बु

क कामना, तु तगान ३-५

मै ी, धन व श

हेतु सामी य ६

ार खोलने का आ ह, म हमामं डत, तु तयां, धन कामना, आशा ७-१२ ११. इं क तु त १-८ बलशाली, नम कार, दान के नाना

प, असुर को घेरना १-५

दान क म हमा, शु ण का नाश, दे ने का ढं ग ६-८ १२. अ न क तु त १-१२ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

दे व त, आ ान, तु त, र ाथ ाथना, आ ह १-९ धन, संतान, अ क

ा त, दे व त १०-१२

१३. अ न क तु त एवं वणन १-१२ व लत, र क व शंसनीय, तु त १-७ अ न, सूय, इला आ द का आ ान ८-१२ १४. अ न क तु त १-१२ इं , सोमपान हेतु आ ान १-१० आ ह, घोड़े जोड़ना ११-१२ १५. ऋतु इं व म द्गण आ द का वणन १-१२ सोमपान, प थर १-७ वणोदा, धनदाता, सोमपान ८-११ क याण क कामना १२ १६. इं क तु त १-९ ह र नामक घोड़े १-४ सोमपानाथ आ ह, गाएं व अ क कामना ५-९ १७. इं एवं व ण क तु त १-९ र ा, धन व अ क कामना १-४ धन ा त, इं व व ण क उ म सेवा व तु त ५-९ १८.

ण प त क तु त व इं ा द का वणन १-९ आ ह, फलदाता, कृपा याचना १-२ र ाथ, उ त, पाप से र ा, तु त ३-९

१९. अ न एवं म द्गण क तु त १-९ आ ान १-२ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

य क ा सव े , म द्गण क तु त, शंसा, मधु सम पत ३-९ २०. ऋभुगण क तु त १-८ तो , घोड़े, रथ व गाय बनाना १-३ सफलतादायक मं , अपण, पा भाग ४-८

तोड़ना, वण, म ण आ द क

२१. इं एवं अ न का वणन १-६ शंसा, आ ान, संतानहीन, ग त १-६ २२. अ नीकुमार, म आ द क तु त १-२१ आ ान, तु त, नमं ण, दे वप नयां, याचना १-१५ आगमन, प र मा, व णु क कृपा से यजमान के त पूण १६-२१ २३. वायु, इं आ द क तु त १-२४ सोमरस, र ा मांगना, आ ान, महान् व श ुनाशक १-९ संतान, र ा कामना, आ ह, सोमरस क ऋतुए,ं हतकारी जल, क

ा त १०-१४

, अमृत व ओष धयां १५-२०

रोग नवारण, तु त २१-२४ २४. अ न आ द दे व क तु त १-१५ पुकार, धन याचना, शंसा, ाथना १-९ तार व चं मा का का शत होना १० आयु याचना, शुनःशेप, पापमु

हेतु ाथना ११-१५

२५. व ण क म हमा का वणन १-२१ ोध न करने का आ ह, स होना, जीवनदान, अंतयामी व ण १-११ आयुदाता, कवचधारक यशोगान, ह , रथ, काशक ा १२-२१ २६. अ न क तु त १-१० ******ebook converter DEMO Watermarks*******

ा त, य

व तु याचना, स ता, पूजन, तु तयां १-१० २७. अ न क तु त १-१३ वंदना, याचना, फलकारी, तु त १-८ पूजा, ाथना, अनु ान व य , जापालक, तु त ९-१३ २८. इं आ द क तु त १-९ आ ान, ऊखल, मूशल क तु त, पा

१-९

२९. इं क तु त १-७ धन क अ भलाषा १-७ ३०. इं क तु त १-२२ सोमरस अ पत, उदर, ाथना, सोमरस पीने क वग, कृपा, गाय, धन आ द क वृ

ाथना, तु त, र ाथ बुलाना १-७

, रथ, गो ा त ८-१७

रथ, उषा क तु त १८-२२ ३१. अ न क तु त १-१८ अं गरागो ीय ऋ ष, मुखता, कन से वग १-७ सुख, अ , धन, पु व द घायु क कामना ८-१० पु र ा का आ ह ११-१२ य

१३

ान व दशा सुखकारी य

का बोध १४ १५

भूल हेतु मा याचना १६ मनु, अं गरा, यया त १७ संप , अ एवं बु

ा त १८

३२. इं क तु त १-१५ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

माग बदला, मेघ, वृ , दनु का वध १-१० वाह खोलना, माया को जीतना, नडर, पशु वामी ११-१५ ३३. इं क तु त १-१५ गो-इ छा, वनती, अनुचर को मारना १-८ र ा ९ जल बरसाना, वृ वध, दश ु व ै ेय ऋ ष १०-१५ ३४. अ नीकुमार क तु त १-१२ आ ान, सोमा भषेक, रथ १-९ ह व व सोमरस लेने का आ ह, आ ान १०-१२ ३५. सूय क तु त १-१२ र ाथ आ ान, स वता का रथ, सफेद घोड़े, क ल, काशदाता १-५ वग व भूलोक पर अ धकार,

ा त होना, धन मांगना, र ाथ ाथना ६-११

३६. अ न का वणन १-२० अ

ा त, दे व त, श ु क हार, धन वषा, धुआं, धारण, उ त १-१३

पाप , रा स व श ु श ुनाश १४-२०

से र ा, धन

ा त, दमनक ा, क याणकारी,

३७. म त का वणन १-१५ तु त, वाहन, चाबुक, तेज, ेरणा १-१२

ध, कंपाना, चाल, आकाश, व तार, बादल,

पद व न, ाथना, द घायु १३-१५ ३८. म त क तु त १-१५ आ ान, तु त, सेवा, वषा, स चना १-९ गरजना, नद , तु त एवं वंदना १०-१५ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

३९. म त का वणन १-१० समीप जाना, श ु संहार, व न, र ाथ तैयार, ४०.

ोध १-१०

ण प त क तु त १-८ तु तगान व श ुनाशाथ ाथना १-४ दे व नवास,

ण प त, श ुनाश ५-८

४१. व ण म आ द दे व का वणन १-९ ानी से संर ण, उ त, पापनाश, सुगम माग १-५ धन व संतान क

ा त, तो , तृ त, नदा न करना ६-९

४२. पूषा क तु त १-१० माग के पार लगाने, आ ांता

को हटाने, सजा दे ने व श

दे ने क

ाथना १-५

धन ा त, उ रदा य व, अ , धन मांगना ६-१० ४३.

, व ण आ द दे व क तु त १-९ ओष ध व सुख मांगना १-४ चमक ला, सुखकारी, अ व जा कामना ५-९

४४. अ न व म द्गण क तु त १-१४ धन याचना, सेवन, तु त, द घजीवन, ाथना, हतसाधक, लपट, तु त १-१४ ४५. अ न क तु त १-१० आ ान,

क व, र ा याचना, चमक ली लपट, फलदाता १-१०

४६. अ नीकुमार क तु त १-१५ अंधकारनाशक, नवासदाता, तापशोषक, तु त १-५ द र ता मटाना ६ रथ, काश, उ दत सूय, माग, र ा नवास, ७-१३ ह व हण करने व सुख दे ने क ाथना १४-१५ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

४७. अ नीकुमार क तु त १-१० धन याचना, तु त, य स

क इ छा, र ाथ ाथना १-५

सुदास, कुश पर बैठने व सोमपान का आ ह ६-१० ४८. उषा का वणन १-१६ अ व पशु मांगना, पा लका १-५ भ ुक व प ी, समीप जाना ६-७ शोषक को भगाना, तु त, अ याचना ८-१६ ४९. उषा का वणन १-४ लाल गाएं, आगमन, काम म लगाना, अंधकार का नाश १-४ ५०. सूय क तु त १-१३ सूय का जाना, न

का भागना, करण, वगलोक, तु त १-७

घोड़े व सात घो ड़यां ८-९ यो तयु , रोगनाशाथ ाथना १०-१३ ५१. इं क तु त १-१५ बलवान, र क, वषक, तु त, माया वय को हराना, कु स, शंबर, व वरो धय का नाश १-८

वय

ब ,ु घोड़े, शु ाचाय, शायात, क या, अ , रथ, धन दे ना, वजयी बनाना ९-१५ ५२. इं क तु त १-१५ र ाथ ाथना, श

व नमं ण, पूणता, सहायक, घायल वृ

व ा, वृ नाश, आकाश म सूय, वृ वध, बल ७-१२ पालक, अचना १३-१५ ५३. इं क तु त १-११ धन पर अ धकार १ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

१-६

के

कामना पूण हेतु ाथना, गाय घोड़े, मांगना १-५ उप व शांत करना ६ असुर नमु च, करंज एवं पणय, राजा सु वा ७-१० द घजीवन क

ा त ११

५४. इं क तु त १-११ श दायमान व वृ क ा, तु त १-३ शंबर, नगर का वनाश, अतुलनीय, बु

बल, कामनाएं ४-९

पेट म मेघ १० रोग मटाने, धन, संतान व अ दे ने क

ाथना ११

५५. इं का वणन १-८ व रगड़ना, सोमरस के लए दौड़ना, आगे रहना, तु त, होना १-८ ५६. इं का वणन १-६ सोमपान, तो का प ंचना, श

शाली मेघ से अलग करना १-६

५७. इं क तु त १-६ बल हरना असंभव, इ छापूरक, शौय क तु त १-६ ५८. अ न का वणन १-९ अंत र लोक, वालाएं, धनदाता, दाहक, डरना १-५ पूजनीय, सुखदायक, धन याचना व पाप से मु

६-९

५९. अ न क तु त १-७ धारक, वनवास १-३ तु त ४-७ ६०. अ न का वणन १-५ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

ा व कम का

भृगुवंशी, सेवा एवं तु त १-५ ६१. इं का वणन १-१६ अ दे ना व ह

वसजन १-४

अ लाभाथ मं बोलना ५ व , वृ वध, श ुनाश, फल मलना ६-११ पशु काटना, वृ वध, शंसा १२-१४ ऋ ष नोधा, एतश का र ण व ऋ षय क उ त १५-१६ ६२. इं का वणन १-१३ तो , सरमा कु तया को अ

मलना १-३

मेघ का डरना, अंधकार-नाश, न दयां भरना ४-६ वश म करना ७ रात काली व उषा उजली ८ काली व लाल गाय का सफेद ध ९ तु त १०-१३ ६३. इं क तु त १-९ भय, रथ, शु ण असुर, कु स, श ु-असुरसंहारक, नाश १-७ धन व अ

व तार हेतु ाथना ८-९

६४. म द्गण का वणन १-१५ तु तयां, म द्गण, कंपन, स जत, वश म करना, नाश १-६ लाल घोड़ी, वृ -भ ण, गजन, बैठना, आयुधधारक ७-११ धन व पु - ा त १२-१५ ६५. अ न का वणन १-१० समीप आना, रोकना असंभव, काशमान १-१० ******ebook converter DEMO Watermarks*******

६६. अ न का वणन १-१० अ मांगना, आ तयां १-१० ६७. अ न का वणन १-१० कृपा, अ न ा त, अ

वामी, पशु य थान के र ाथ ाथना १-६

तु त, पूजा एवं कम ७-१० ६८. अ न का वणन १-१० तेज ारा र ा १-४ धन व पु कामना, आ ापालन ५-१० ६९. अ न का वणन १-१० तेज वी, सुखकारी, आनंदकारी, सुखदाता, ह

वहन १-१०

७०. अ न का वणन १-११ अ याचना, र ण, पालन, सहायक १-११ ७१. अ न का वणन १-१० सेवा, श

, त, कुशल १-५

नम कार से अ वृ

६-७

ेरणा, म व व ण ८-९ बुढ़ापा भगाने का य न १० ७२. अ न का वणन १-१० अमृत व धन मलना, म द्गण भी ःखी, नाम व शरीर मलना १-४ पूजन, र क, ह ववहन, भ ण, जल बहाना, वालाएं फैलाना ५-१० ७३. अ न का वणन १-१० अ दान, ःख ाता, धनदाता, ध पलाना, नशा, संसार-र क, श ुपु कामना १-१० ******ebook converter DEMO Watermarks*******

का वध व

७४. अ न का वणन १-९ उप थत दे व, धनर क शोभा बढ़ाना, ह दान से धन, अ , ऐ य व श लाभ १-९ ७५. अ न क तु त १-५ तु त, बंध,ु

य म एवं फलदाता १-५

७६. अ न क तु त १-५ स ता के उपाय, पूजा, य र ा, संतान आ द क याचना १-५ ७७. अ न का वणन १-५ तेज वी, ह

दे ना, तेज वी, सोम को पीना १-५

७८. अ न क तु त १-५ गुण काशक तो , गौतम ऋ ष ारा तु त १-५ ७९. अ न का वणन १-१२ मेघ का कांपना व बरसना, भगोना १-३ धन, अ व र ाथ याचना ४-१२ ८०. इं क तु त १-१६ अ ह को पीटना १ येन बनने वाली गाय ी २ भु व का दशन, भयभीत, य कम सम पत ३-१६ ८१. इं का वणन १-९ र ाथ ाथना, सेना के समान, गवहंता, अतुलनीय, धन, बु याचना १-९ ८२. इं क तु त १-६ तु त सुनने समीप जाना १-४ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

व शौय क

ेयसी के पास जाने हेतु आ ह ५-६ ८३. इं का वणन १-६ धन क

ा त १

एक क या अनेक वर २ श

मलना, पूजन, स होना ३-६

८४. इं का वणन १-२० आ ान, स , घोड़े, धन मलना, छत रयां कुचलना १-८ अ धकार दशन ९-१२ दधी च १३ अ



शंसा १४-१६

र ा व शंसा १७-२० ८५. म द्गण का वणन १-१२ अलंकार

य, श

शाली होना १-३

बुंद कय वाली ह र णयां ४-५ घोड़े व नवास थल, भय ६-८ वृ वध ९ वीणा वादन, गौतम, सुख याचना १०-१२ ८६. म द्गण क तु त १-१० सोमपान व ह

वहन १-७

पसीने से नहाना ८ उप व, रा स का नाश ९-१० ८७. म द्गण क तु त १-६ चमकना, वृ , पवत को कंपाना, य पा , धारण, थान १-६ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

८८. म द्गण का वणन १-६ अ लाना, क याण, आयुध, कुआं उठाना, तु त १-६ ८९. व ेदेव का वणन १-१० आयुवृ

, धन व ओष ध हेतु याचना, क याण १-६

सफेद बूंद वाले घोड़े व नाना वण क गाएं ७ मानव क आयु सौ वष तय ८-९ ज म और उसका कारण १० ९०. व ेदेव का वणन १-९ गंत , धन व सुख लाभ १-३ माग व मधु वषा ४-६ आकाश व दे व

ारा सुख ७-९

९१. सोम का वणन १-२३ धन, फलदाता, सुधारक १-३ ह

लेने हेतु ाथना ४-५

जीवनदा यनी ओष ध व धन ६-७ ःख से बचाने क य , संप

क वृ

ाथना ८-९ व दय म वास १०-१३

अनु ही व हतकारी, अ कामना १४-१८ पु र क, शा

, पु दाता १९-२०

श ुजेता, अंधकारनाशक, वामी २१-२३ ९२. उषा एवं अ नीकुमार का वणन १-१८ अंधकारनाशक, पहले तेज पूव म १-६ गोयु अ -धन क याचना ७-८ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

प म म तेज ९ प य क हसा १० तेज का व तार, धन व सौभा य मांगना ११-१५ धन व यो त मलना, आरो य व सुखदाता १६-१८ ९३. अ न एवं सोम क तु त १-१२ सुख, गाएं, अ , पु -पौ क याचना १-३ उपकारी सूय ४ न

धारण व धरती का व तार १-६

अ भ ण, पाप से बचाने क अ य दे व से अ धक



ाथना ७-८ ९

धन मांगना १०-१२ ९४. अ न क तु त १-१६ क याण, धन बटोरना, महान्, पुरो हत, अंधकारनाशक, हसा से बचाने क वन घेरना, प य का डरना, संप य म नवास, आ त १-१४ समृ

बनाना, आयुवृ

ाथना,

क कामना १५-१६

९५. अ न का वणन १-११ रात- दन के पु , यश वी, आकाश का डरना १-५

ापक, ऋतु वभाजक, जल उ प

बल का वामी, करण के समान, अ व धन क

ा त ६-११

९६. अ न का वणन १-९ वायु व जल १ धारण करना २-७ धन व अ क कामना ८-९ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

का कारण, धरती व

९७. अ न क तु त १-८ पूजा से पाप न एवं र ा १-६ पालनाथ याचना ७-८ ९८. अ न का वणन १-३ ातःकाल सूय से मलना १ दवस रा

म श ु से बचाव २

य सफलता हेतु ाथना ३ ९९. अ न का वणन १ ःख व पाप से पार लगाने क

ाथना १

१००. इं का वणन १-१९ र क बनने का आ ह १ सूय क चाल पाना असंभव २ म द्गण क सहायता से र क बनना ३-१५ मानव सेना को इं के अ वृषा गरी के पु श ु

ारा जानना १६

ारा इं क तु त १७

, रा स का वध, भू म, सूय व जल का बंटवारा १८

इं पूजन का आ ह १९ १०१. इं का वणन १-११ कृ ण असुर क प नयां, वृ , शंबर, प ु, आ ान, वामी १-६ म यमा वाणी, उ दत होना, स यधन, ह व दे ना, उप जह्वा खोलने का आ ह, अ पूजन ७-११ १०२. इं क तु त १-११ तु त, सूय व चं का घूमना, रथ, श ु-श

, अ ाकुल व जयशील, असी मत ान,

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तु त १-७ संसार वहन म समथ, श ुनाशक पु मांगना, आ ान, अकु टल ग त ८-११ १०३. इं का वणन १-८ यो त मलन, वृ वध, गमन, समूह नमाता १-४ धन, स होना, शु ण, प ु आ द का नाश ५-८ १०४. इं का वणन १-९ वहन, समीप जाना, शफा, अंजसी, कु लशी, वीरप नी नामक न दयां, कुयव असुर गभ थ संतान,

ा, भो य पदाथ, सोमपान ६-९

१०५. व ेदेव का वणन १-१९ चं मा, सवपीड़ा, पूवपु ष, दे व त, तीन लोक मे वतमान, पापबु क , सौत, करण क तु त १-९

श ,ु मान सक

शंसनीय तो , भे ड़ए को रोकना, नवीन बल, बंधुता, परम ानी, मननीय तु त, अ त मण असंभव, त, लाल वृक, अनु ह १०-१९ १०६. व ेदेव का वणन १-७ माग, शोभनदानयु श

दे व, य वधक ावा-पृ वी, र ाथ ाथना, अ याचना १-४

, वृ हंता, जाग क ५-७

१०७. व ेदेव का वणन १-३ अनु ह याचना, तुत दे व, र ाथ ाथना १-३ १०८. इं व अ न क तु त १-१३ रथ, प रमाण, संयोजन, कुश फैलाना, म ता, के बीच थत होना, धरती-आकाश १-९

ा, आ ह, य , तुवश, अनु आ द

कामवषक, सोमपान, स होना, आदर १०-१३ १०९. इं व अ न क तु त १-८ तु त, जामाता, क यालाभ, परंपरा, हथे लयां १-४ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

बल दशन, महान्,

लोक, असुरनाशक ५-८

११०. ऋभुगण क तु त १-९ तो , घर जाना, साधन, अमरता, अ धकार १-९ १११. ऋभुगण का वणन १-५ ह र नामक दो घोड़े बनाना, नवास, अ पूजन, आ ान, वजयी बाज १-५ ११२. अ नीकुमार क तु त १-२५ शंख बजाना, ा नय क र ा, शासन, ापक, रेभ व वंदन ऋ ष, क व, भु यु, ककधु, व य, पृ गु, पु कु स, ऋजा , ोण, व स , कु स, ुतय, नय वप ला, वश ऋ ष १-१० द घ वा, क ीवान्, शोक, मांधाता, भर ाज, दवोदास, पृ थ, शंयु, अ , ऋ ष पठवा, तो , वमद, अ धगु व ऋतु तुभ ११-२० कृशानु, पु कु स, मधु दे ना, घोड़े, कु स, तुव त आ द, आ ान, तु त २१-२५ ११३. उषा एवं रा

का वणन १-२०

उप थान, वचरण, एक माग, ने ी, भुवन का काशन, अभी , अधी री, चेतन बनाना, क याण, अनुकरण १-१० दे खना, े षय को हटाने वाली, तेज से वचरना, लाल रथ से आना, तेज से बढ़ना, अ बढ़ाना, धन वा मनी उषा, अ दे ने वाली, तो क शंसा, क याणकारी ११-२० ११४.

क तु त १-११ तु तयां, मनु, सुख इ छा, कृपा

, ढ़ांग, तु त वचन बोलना १-६

शरीर का नाश, बुलाना, र ाथ ाथना, हनन का साधन र रखने व तु त के आदर हेतु आ ह ७-११ ११५. सूय का वणन १-६ जंगम- थावर, तु त, प र मण, अंधकार फैलाना, अंधेरा धारण करना, पाप से बचाने क ाथना १-६ ११६. अ नीकुमार क तु त १-२५ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

कशोर वमद, वजय, तु , भु यु, रथ, सागर, पे , क ीवान्, कारोतर पा , अ न बुझाना, यं पीड़ागृह, गौतम, यवन, वंदन, द यंग ऋ ष, बुलाना, व मती, हर यह त, १-१३ व तका, व पला, ऋजा , कां त पाना, लौहरथ १४-२०

तु त, य

के भाग का अपण

श ुवध, जल उठाना, तु त, रेभ, कम का वणन २१-२५ ११७. अ नीकुमार क तु त १-२५ सेवा, घर जाना, पू जत, रेभ, वंदन,

त ा, घोषा, नृषदपु , पे , वीरकाय १-१०

भर ाज, कामवषक, यवन, तु , भु यु, व वाच, ऋजा , मेष को काटना, आ ान, धा बनाना, माहा य, घोड़े का सर, अनु ह बु , जीवनदान, वीर कम का बखान ११-२५ ११८. अ नीकुमार क तु त १-११ रथ, पु ा द, र तानाशक, तेज ग त वाले, सूयक या, वंदन ऋ ष, गाय, यवन, अ , व तका, व पला १-८ पे , आ ान ९-११ ११९. अ नीकुमार क तु त १-१० रथ, ऊजानी, जयशील, भु यु, दवोदास १-४ कुमारी का प त, अ , शंय,ु वंदन ऋ ष, युवा बनाना, कामदे व, कामना, दधी च, पे ५-१० १२०. अ नीकुमार क तु त १-१२ माग, तो , वषट् कार, बु

, क ीवान्, ऋजा , वृक, अग य थान १-८

पोषण, अ र हत रथ, सोमपान, घृणा ९-१२ १२१. इं का वणन १-१५ य म आना, गाएं नकालना, आकाश धारण, दवस का काशन, सोमपान १-८ ऋभु, शु ण, मेघ, वृ , उशना, एतश, पाप, वृ

९-१५

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१२२. व ेदेव का वणन १-१५ तु त, उषा, अ , क ीवान्, घोषा, नयमन १-७ तु त, य मा, नडर, शंसा, सोम, राजा इ ा , इ र म, वणाभूषण धारण करना, राजा मशश र व जयशील अयवस ८-१५ १२३. उषा क तु त १-१३ अंधकारनाश, पहले जागना, छपाना, आगे रहना १-८

काश-अंश, घर जाना, ने ी, धन दशाना, पदाथ

मलना, प करना, दशनीय, क याणकारी, अनुकूलता ९-१३ १२४. उषा का वणन १-१३ काश, वयोग, दशाएं न न करना, नोधा ऋ ष, सुंदर, करना १-८

स , नमल, दांत, काश

ब हन, प ण, लाल बैल जोड़ना, प य का उड़ना, उ त व वृ



ाथना ९-१३

१२५. दान का वणन १-७ राजा वनय, क ीवान्, सोमपान, घृतधाराएं, संतोष १-५ अमर बनना, वृ ाव था ६-७ १२६. भावय

आ द के दान का वणन १-७

वनय, क ीवान्, रथ दे ना, लाल घोड़े, गाएं लेना, लोमशा १-७ १२७. अ न का वणन १-११ अनुसरण, यजनयो य, श ु, सारवान ह , अ

हण, पूजनीय, मंथन, हवन १-८

जरा नवारण, तु त, परमबली ९-११ १२८. अ न का वणन १-८ य वेद , मात र ा, चार ओर चलना, अ त थ १-४ ह

दे ना, वग, पालक, रमणीय ५-८

१२९. इं क तु त १-११ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

तु त वीकारना, ग तशील, मेघ का भेदन, श ुसंहार, जग पालक, नदक का वध १-६ तु तयां, श ुसेना का नाश, मलना, म हमावान, र क ७-११ १३०. इं क तु त १-१० आ ान, सोमरस, सोम व प णय को खोजना, श ुनाश, नद नमाण, शंसा, राजा दवोदास, शंबर १-७ कृ ण, उशना, तु त ८-१० १३१. इं क तु त १-७ नत होना, सेना के आगे रखना, य , श ु-नगर वनाश, सागर को छ नना, सहनाद, असाधारण, कान १-७ १३२. इं का वणन १-६ अ लाना, वग का माग, वृ , गाएं छु ड़ाना, इं लोक, श ु-नाश १-६ १३३. इं क तु त १-७ धरती को जानना, बैरीभ क, श अ वामी बनना १-७

का नाश, श -ु नाश, पीले पशाच, घरा रहना,

१३४. इं क तु त १-६ रथ, च दे ख चलना, सावधान करना, अमृत बरसना, समीप जाना, तु त, सोम यो य १-६ १३५. वायु क तु त १-९ आ ान, अनु ह, बुलाना, अ भ ण, सोम १-५ कुश, श द होना, आ त, पुरोडाश, चाल न कना ६-९ १३६. म एवं व ण का वणन १-७ बल, य म जाना, य

वामी, शो भत, नम कार, स करना १-७

१३७. म एवं व ण का वणन १-३ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

कूटना,

तुत, नचोड़ना १-३

१३८. पूषा क तु त १-४ बल, शंसनीय घोड़े, धन याचना, तो

१-४

१३९. पूषा क तु त १-११ अ न, जल दे ना, काशयु



ोक, रथ, कम प, तु तयां, हना १-७ , पतर, आवाज, म हमा ८-११

१४०. अ न का वणन १-१३ य वेद , धा य, यजमान, उपयोगी, काश, लक ड़यां, तेजोमय बनाना १-७ आ लगन, गमन, दाना भलाषी, तेज, नाव, उषाएं ८-१३ १४१. अ न का वणन १-१३ ढ़ता, धरती पर रहना, उ प , लता उ प १-९

का वेश, चढ़ना, पूजन, तु तयां, भागना,

ह , पु दे ना, वग, तु त १०-१३ १४२. अ न का वणन १-१३ य , तनूनपात, स चना, तु त, य वधक, य पावक, कुश, फलसाधक, भारती, वाक्, सर वती, पु , ह , वाहा १-१३ १४३. अ न का वणन १-८ य , मात र ा, चनगा रयां, श ुसंहार १-५ तु त, बु

, मंगलकारी ६-८

१४४. अ न का वणन १-७ ा, जल, मलाना, अजर १-४ काशमान, वामी, आ यदाता ५-७ १४५. अ न का वणन १-५ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

शासक, सहारा, तु त, कम ान दे ना १-५ १४६. अ न का वणन १-५ म तक,

ा त, ानधारक, अजीण, दशनीय १-५

१४७. अ न क तु त १-५ लपट, वंदना, द घतमा, दय, तोता १-५ १४८. अ न का वणन १-५ बढ़ाना, तो , तु तयां, द त, तृ त १-५ १४९. अ न का वणन १-५ व तुएं दे ना, पुरोडाश, वेद , जलपा , पु वान १-५ १५०. अ न क तु त १-३ ह , दे व वरोधी, आह्लादक १-३ १५१. म एवं व ण क तु त १-९ र ा, इ छापूरक, शंसा, य , रंभाना, पूजन १-६ शोभनम त यजमान, तु त, धन व अ धारण ७-९ १५२. म एवं व ण क तु त १-७ सृ यां, कम, वरोध, उषाएं, गमन, द घतमा, नम कारयु

१-७

१५३. म एवं व ण क तु त १-४ पोषण, सुखभागी, स , अ नदाता १-४ १५४. व णु का वणन १-६ अंत र , पाद ेप, नापना, लोकधारक, बंध,ु परमपद १-६ १५५. इं एवं व णु का वणन १-६ अपराजेय, आदर, श

वधन, प र मा, चरण ेप, कालच

१५६. व णु वणन १-५ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

१-६

सुखक ा, वृ ांत, सेवा, मेघ, य ाथ आना १-५ १५७. अ नीकुमार क तु त १-६ उषा, रथ, सौभा य, कशा, गभर ा, समथ १-६ १५८. अ नीकुमार का वणन १-६ द घतमा, अ , तु पु , पाशब , दास, १५९.

तन, नदशक १-६

ावा-पृ थवी का वणन १-५ अनु ह, अमृत दे ना, हतकारी, ब हन, धन याचना १-५

१६०.

ावा-पृ थवी का वणन १-५ सुखदाता, र क, ध, े , व तार १-५

१६१. ऋभुगण का वणन १-१४ चमस, भाग, युवा करना, भाग १-९ र

ी, पानपा , नवीन रथ, मृतक गाय, सोमरस, चार

रखना, फसल, बलवती वाणी, अ भलाषा १०-१४

१६२. अ मेध के अ का वणन १-२२ परा म, बकरे ले जाना, पुरोडाश, भाग, जल, यूप, सुडौल, लगाम, छु री १-९ मांस, रस, कामनाएं, परी ा, छु री, अ , घास, पा , वषट् कार, व तुए,ं श द करना, ह ड् डयां १०-१८ काशक, अकुशल, समीप जाना, तेज व बल १९-२२ १६३. अ मेध के अ का वणन १-१३ श द, अ ा त, तधारी, बंधन, लगाम, सर, चलना १-१०

प, सौभा य, सर-पैर, पं



वायुवत् चलने वाला, उड़ना, बकरा, कुशल घोड़ा ११-१३ १६४. व ेदेव का वणन १-५२ पु , सूयरथ, गाएं, संसार, धागे, लोक, गाएं, पूजन, तीन माता- पता, प हया, चरण, ******ebook converter DEMO Watermarks*******

सात च , घूमना, पांच वण, सूयमंडल, नमाता १-१५ ांतदश , जाना, लोकपालक, बोझा ढोना, दो प ी, संसार क र ा, करण, पद, पूजामं , वषा रोकना, गाय को बुलाना, आना, तृ त करना, हराना, वधा, सूय का आना-जाना १६-३१ जा का कारण, पालक आकाश, उ प थान, य , घेरना, बंधना, जानना, अ ध त होना, भ ण, वाणी, वषा, सोमरस, धरती को दे खना, चार पद, नाम ३२-४६ भीगना, अरे, धनर ा, यजमान, स होना, आ ान ४७-५२ १६५. इं एवं म द्गण का संवाद १-१५ स चना, उड़ना, पालक, य कम, अनुभव, अ ह, कम करना, कामना, स ता, सर ारा न होना १-९ उ

व ान्, आनंद, यश, अ , मनोरम तो , वाणी १०-१५

१६६. म द्गण क तु त १-१५ वाला, स च , जल, अट् टा लकाएं, डरना, पशुनाश, अचना, पु -पौ ा द, श , शोभन १-१० म हमा, यजमान, मै ी, द घकालीन य , कामना ११-१५ १६७. इं एवं म त का वणन १-११ उपाय, धन, वाणी, य न, बजली, सेवा, म हमा, जल टपकना, हराना, म हमा, तु त १-११ १६८. म द्गण का वणन १-१० समान भावना, कंपनशील, ह त ाण, पापहीन, अ , जल, क याण १-७ बजली, अ , शरीर क पु

८-१०

१६९. इं क तु त १-८ म त्, लड़ना, ह , द णा १-४ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

संतोषदाता, घोड़े, मेघ, तु त ५-८ १७०. इं एवं अग य का संवाद १-५ मन, भाग, बात, अमृत, म

१-५

१७१. म त क तु त १-६ याचना, तो , सुखदाता, भागना, जगाना, श

शाली १-६

१७२. म त क तु त १-३ आगमन, आयुध, ाथना १-३ १७३. इं का वणन १-१३ सामगान, य , अ , तो , उ म,

ा त, यु , सखा १-९

म बनाना, बढ़ना, वंदना १०-१३ १७४. इं क तु त १-१० उ ारक, नग रय का नाश, र क, बढ़ाना, कु स ऋ ष, श ु १-६ य ण, कुयवाच, वृ असुर, य , तुवसु, र क ७-१० १७५. इं क तु त १-६ आ ान, स तादाता, शु ण का वध, वृ घाती, सुख १-६ १७६. इं का वणन १-६ घेरना, ह , पांच जन, धन मांगना, अ

वामी, तु त १-६

१७७. इं क तु त १-५ घोड़े, रथ, तैयार, आ ान, ाथना १-५ १७८. इं क तु त १-५ समथ, ह व, पुकार, हराना, श

शाली १-५

१७९. अग य एवं लोपामु ा का र त वषयक संवाद १-६ स दयनाश, स य, भोग, चय, कामनाएं, आशीवाद १-६ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

१८०. अ नीकुमार क तु त १-१० ने मयां, रथ, तु त, सोमरस, भु यु, अ

१-६

शंसनीय, जगाना, य , रथ ७-१० १८१. अ नीकुमार क तु त १-९ य , शी गामी अ , वषा, आकाशपु , तु तयां १-५ पास आना, तु तयां, य गृह, तोता ६-९ १८२. अ नीकुमार का वणन १-८ नाती, कमकुशल, मेधावी, श ुनाशाथ ाथना, नाव, भु यु, रथ, तु त १-८ १८३. अ नीकुमार क तु त १-६ पास जाना, उषा, आ ान, भाग, गौतम, पु मीढ़, अ

ऋ ष, तो

१-६

१८४. अ नीकुमार क तु त १-६ आ ान, अ वेषण, सूयपु ी, तो , दे वमाग १-६ १८५.

ावा-पृ थवी का वणन १-११ घूमना, धारण करना, धन ा त, अनुगमन, जल, बुलाना, तु त, जामाता, संतु , काशमान, द घायु १-११

१८६. व ेदेव का वणन १-११ ाथना, म , व ण, अयमा दे व, अ त थ, तु त, इ छा, जल के नाती १-६ घेरना, उपजाऊ बनाना, सुखाथ ाथना,



यो त ७-११

१८७. अ का वणन १-११ तु त, र क, सुखदाता, रस, दान, वृ वध १-६ भोजन, वन प तयां, गो भ ण, स ,ू अ

७-११

१८८. अ न क तु त १-११ क व व त, मलना, अ , आ द य, जल गराना, अ न १-६ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

वचन, भारती, आ ान, पशु-वृ

, अ , छं द ७-११

१८९. अ न क तु त १-८ ाता, साधन, काशमान, आ य र ाथ ाथना १-५ हसक, चोर, नदक आ द से बचाना, पा , श ुनाशक ६-८ १९०. बृह प त क तु त १-८ तु य, मधुरभाषी, फल अ , चलना, समीप जाना १-५ नयं क, जल व तट, तु तयां, फल, आयु, अ हेतु ाथना ६-८ १९१. जीव, जंतु

, प य एवं सूय का वणन १-१६

घरना, वषधर, भाव, लपटना, ानशू य, दे खना, अंग, सूची वाले वषधर, पूव म नकलना, उदय ग र १-९ वष फकना, न करना, प ी, न दयां, मयू रयां,

थता १०-१६

तीय मंडल सू १.

वषय

मं सं.

अ न क तु त १-१६ पालक, गृहप त, व णु १-३ र क, दानदाता, श

शाली, य क ा ४-६

र नधारक, तेज वी, पालक, क याणक ा, श ुनाशक ७-९ वभु, ह दाता १०-११ ल मी का वास १२ जह्वा का नमाण १३ वृ , लता आ द म रहना, मलना-अलग होना, गोदाता १४-१६ २.

अ न का वणन १-१३

******ebook converter DEMO Watermarks*******

वग, संयमी, सुदशन, काशमान, शखायु , अ वनाशी, अ का ार १-७ आधार, तु तयां, श ुजेता, स तादायक, गो व अ दाता ८-१३ ३.

अ न का वणन १-११ य यो य, कटक ा, ल य, वीरपु , ार, फलदाता १-६ पूजा, य , सर वती, इला, भारती, अ

७-९

ाता, कामवष १०-११ ४.

अ न का वणन १-९ आ ान, भृगु, म , जीभ फेरना १-६ वाद लेना, र क, गृ समदवंशी ऋ ष ७-९

५.

अ न का वणन १-८ चेतनादाता, नवाहक, धारक, फलदाता, ने ा, ह , मह व १-८

६.

अ न क तु त १-८ तु तयां, य

७.

वामी, ह व, व ान्, धनदाता, वृ क ा, पूजक, हतकारी, य

अ न क तु त १-६ त ण, श ुता, लांघना, वंदनीय, भ ा, व च

८.

१-६

अ न का वणन १-६ यश वी, आ ान, तु तयां, शोभा, ऋ वेद, र त १-६

९.

अ न क तु त १-६ त, धनदाता, ज म थान, धन वामी, कां तयु

१०.

अ न क तु त १-६ ा, जायु , अर ण,

११.

१-६

ा त, वणयु , ह

दे ना १-६

इं क तु त १-२१

बढ़ाना, वृ , कामना, हराना, वृ वध, शंसा, बादल, स होना, व न १-८ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

१-८

कांपना, श द करना, सोम, आ य, वीरपु , धन, घर, म , श उ ारक, उ दन ९-१६ द यु, व १२.

याचना, ढ़ करना,

प, अबुद, बल असुर का नाश, तु त १७-२१

इं का वणन १-१५ डरना, ढ़ करना, न दयां वा हत करना, असुर, श ु संप -नाशक, र क १-६ बुलाना, त न ध, पापीनाशक, शंबर असुर, रो हण का वध, र क ७-१५

१३.

ढ़ भुजाएं,

इं का वणन १-१३ वषा ऋतु, सागर १-२ ाय



धनदाता, दोहन, ओष ध, सहवसु, द यु का नाश, पंचजन जतु र, तुव त, तु त ४-१३ १४.

इं का वणन १-१२ सोम, यो य होना, मीक, उरण, अ , शु ण, प ु, नमु च आ द का वध १-५ नग रय , वरो धय का नाश सोम, फलदाता, राजा, धन याचना ६-१२

१५.

इं का वणन १-१० क क, स , नमाण, माग रोकना, नद सुखाना, गाड़ी तोड़ना, परावृज, खोलना, चुमु र, धु न का वध, भजनीय १-१०

१६.

इं का वणन १-९ आ ान, श तु त १-९

१७.

ार

क , अपरा जत, ानी, अ दाता, इ छापूरक, आयुध, र क, घेरना,

इं का वणन १-९ वतं , शीश, ववश, घेरना, अचल, जल गराना, आ ान १-९

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व-वध धन मांगना, भजनीय,

१८.

इं का वणन १-९ हवन, वजयदाता, अ , धनशाली, आ ान, सोम रखना, आ त, वप नाशक, सेवनीय १-९

१९.

इं का वणन १-९ अ वासी, गमन, ेरणा, सहायक, एतश १-५ कु स, शु ण, अशुष, कुयव, पीयु, गृ समद ऋ ष, द णा ६-९

२०.

इं का वणन १-९ द यमान, ालु, र क, य , अ भलाषापूरक, गाएं लेना, नगर वनाश, दास, म तक काटना, सेना व लौहनगरी का नाश, द णा १-९

२१.

इं का वणन १-६ जल वजयी, तु त, शंसा, ेरक, गाएं ढूं ढ़ना, पु

२२.

इं का वणन १-४ तृ तदाता, पूण करना, भला वचारना,

२३.

१-६



१-४

बृह प त क तु त १-१९ गणप त, जनक, श ुनाशक, सेनाएं रोकना, पथ दशक, स ता, र क १-८ धन याचना, कामपूरक, पु यलाभ, श ुसेना नाशक ९-१३ परा म, पूजनीय, वरो धय को न स पने क संतान र ाथ ाथना १४-१९

२४.

ाथना, ऋण चुकाना, गाय का आना,

बृह प त का वणन १-१६ व

वामी, हंता, उ ारक, भेदन, धन क

ा त १-६

बाण फकना, मलाना, भोगना ७-१० र क, तु तयां, सुनना, वभाजन, अ यु २५.

व नयं क ११-१६

बृह प त का वणन १-५ द घायु, धन व तार, समथ,

ण प त, सुख ा त १-५

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२६.

बृह प त का वणन १-४ र ा याचना, धन ा त, उपकारी १-४

२७.

आ द यगण का वणन १-१७ घृत टपकाना, अ नदनीय, अ ह सत, तेज वी, जगत्धारक, तु त १-४ पाप का याग, सुगमपथ, सुख ा त, म हमा वधन ५-८ तेजधारक, व ण व आ द य क तु त ९-१२ वामी, यो त, मंगलकारी, पाश, धन याचना १३-१७

२८.

व ण क तु त १-११ ांतदश , ाथना, जल रचना, नद , पाप, नाश, हसक, काश १-७ श

२९.

संप , ऋण, याचना, चोर, भे ड़या ८-११

व ेदेव क तु त १-७ पाप, गु त थान, क याण, सुख, न मारना, बचाना, पु याचना १-७

३०.

इं , बृह प त, सोम आ द क तु त १-११ पानी, समु , वृ , असुर पु , श ुनाश, समृ

, ेरक, थकान न दे ने क

ाथना १-७

षंडामक का वध, धन याचना, उपासना ८-११ ३१.

व ेदेव का वणन १-७ र ा, घोड़े, उ म कम, पूषा व सूया के प त, ह

३२.

तु त, बला भलाषी १-७

ावा-पृ थवी आ द का वणन १-८ अ कामना, म ता, तु त, बुलाना, कम को बुनना, धन, राका दे वी, सनीवाली, सर वती, इं ाणी, व णानी १-८

३३.

क तु त १-१५ सुख, शतायु, उ म, हसा-बु तु त, कामना, सुख दे ने व

, ओष धयां, वामी, र क, उ ोध न करने क

ाथना १२-१५

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१-११

३४.

म द्गण क तु त १-१५ ा त, उ प , सोने के टोप वाले, प ंचना, आयुधधारक, अ व बल याचना १-७ अ दाता, श ुता, हंता, धन मांगना, अंधकार का नाश पाप ाता ८-१५

३५.

प धरना, होता,

अ न का वणन १-१५ अ ,उ म

प, नमाता, बाड़वा न, अपांनपात्, इड़ा, सर वती, भारती १-५

उ चैः वा अ , संसार क उ प



घर म रहना, वन प तय के उ पादक ७-८ न दयां, धन दे ना, भा य तु त, ाथना १२-१५ ३६.

ा त, उ म थान, पु -पौ

ा त हेतु

इं , व ा, अ न, व ण एवं म क तु त १-६ भेड़ के बाल, दशाप व , भरत के पु , दे वप नयां मधु, सोमपान, तु तयां १-६

३७.

ाचीन

अ न क तु त १-६ वणोदा, सोम प मधु, ने ा १-३ मृ यु नवारक, रथ, सोमपान हेतु ाथना ४-६

३८.

स वता का वणन १-११ दाता, हाथ फैलाना, स वता का याग, काश समेटना, श या का याग, घर अ भलाषा, काय ीण न होना, नवास, बुलाना १-९ र क, आ ान १०-११

३९.

अ नीकुमार क तु त १-८ बाधा, ाता, वेगवान्, ःख ाता, बुढ़ापा, सुखदाता १-६ तु तयां, तो रचना ७-८

४०.

सोम व पूषा क तु त १-६

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अमरता, सेवा, रथ, वरणीय एवं क तशाली ा ण-उ प , धन वामी १-६ ४१.

इं , वायु म , व ण आ द क तु त १-२१ नयतगुण, पुकार, दाता, सोमरस, हजार खंभ,े दानशील, पेय सोम, धन, नाना अचंचल, क याण, मेधावी, पुकार, स दाता, दान १-१५

प,

उ म सर वती, शुनहो , ह , ाथना, साधक, य यो य दे वता १६-२१ ४२.

क पजल प ी

पी इं का वणन १-३

े रत करना, मंगलकारी, चोर एवं पाप क बात १-३ ४३.

क पजल प ी

पी इं का वणन १-३

बोल, पु यकारी श द, सुम त क इ छा १-३

तृतीय मंडल सू १.

वषय

मं सं.

अ न क तु त १-२३ वाहक, स मधा, उ म बंधु, बढ़ाना, शु माता- पता-धरती, आकाश, काशमान ७-१२

, धारण करना १-६ करण, जल बहाना, लोकपोषण, शयन,

ज म, बढ़ना, तेज, तु त, य , अनु ह, होता, भू म याचना १३-२३ २.

अ न का वणन १-१५ सं कार, पूजन, तु त, हतकारक, य मंडप, अ न, अ ाथ जाना, ाता, चार ओर जाने वाले, जा वामी १-१० गरजना, वगारोहण, धन-अ याचना ११-१५

३.

अ न का वणन १-११ षत न करना, ेरणा, सुख चाहना १-३

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वेश, थापना, आना-जाना, उ प ४-११ ४.

ेरणा, नम कार,

शंसा, घेरना, पूण करना,

अ न का वणन १-११ म , य , कुशल, समीप जाना, माग बनाना, कृपा १-६ आ ान, सोमरस ८-९ ज मदाता, आ ान १०-११

५.

अ न का वणन १-११ ार खोलना, जागना, था पत, र क, उ पादक, नया बनाना, धारण करना, बुलाना १-९ अ न जलाना, पु -याचना १०-११

६.

अ न का वणन १-११ ु , पूजा, द तयां, तु त, फलदाता, आ ान, घोड़े, जलभाग जलाना, य यो य, च आ ान १-९ होता, भू म, पु व गाय क याचना १०-११

७.

अ न का वणन १-११ अ दाता, नद म वास, घो ड़यां, वहन, आ ापालन, सुख, य अलंकरण, वालाएं १-९

म जाना, र ा,

पापनाशाथ ाथना, गौ मांगना १०-११ ८.

यूप अथात् ब ल तंभ का वणन १-११ धन याचना, पाप, नापना, आना, बनाने वाला, गड् ढे म डालना, य -साधक १-८ अंत र , र ाथ ाथना, सौभा य ा त ९-११

९.

अ न का वणन १-९ वरण, शांत होना, ा त होना, अर णमंथन, हण, पूजन, १-९

१०.

अ न का वणन १-९

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जा वामी, य र क पु -पौ

ा त, स

होना १-४

तेजधारी, बढ़ाना, श ुजेता, पापशोधक, उ प ११.

५-९

अ न का वणन १-९ ाता, दे व त, अंधकारनाशक, अ गामी, अव य, घर पाना, धन याचना, वेश १-९

१२.

इं एवं अ न क तु त १-९ आ ान, सोमपान, वरण, अ दाता, अचना, नगर को कंपाना, उप थत रहना, धन म अ भ ता, ान १-९

१३.

अ न का वणन १-७ े , ावा-पृ थवी, सेवा, नयामक, चलन, र ा व धन याचना १-७

१४.

अ न का वणन १-७ ा ाथना, सचन, धारक,

१५.

दे ना, र ण व अ हेतु अ न के समीप जाना १-७

अ न क तु त १-७ वनाश, तु तयां, फल, श -ु नगर, धन, ह ाथना १-७

१६.

वहन, वजय व पु -पौ

अ न का वणन १-६ पापनाशक, श ुजेता, धनयु , र क, व म नवास, क तदाता १-६

१७.

अ न क तु त १-५ वीकाय, जातवेद, तीन अ , अमृत क ना भ, य पूणता हेतु ाथना १-५

१८.

अ न क तु त १-५ साधक, श ुनाशक, अ याचना १-५

१९.

अ न क तु त १-५ वरण, पा , म हमायु

१-३

तेजधारक, अ याचना ४-५ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हेतु

२०.

अ न का वणन १-५ अ धकारहीन उदरपूरक, अमर, वृ नाशक, आ ान १-५

२१.

अ न क तु त १-५ चब , बूंद टपकना, मेधावी, य पालक, आ ान, नवासदाता १-५

२२.

अ न का वणन १-५ सोम, व तारक, ेरक, अ , पु -पौ याचना १-५

२३.

अ न क तु त १-५ जरार हत, दे वा य, दे ववात, सुबु

, उंग लय से उ प

१-३

ष ती, आपया व सर वती ४-५ २४.

अ न क तु त १-५ अ जत, मरणहीन, जागृत, धन एवं संतान मांगना १-५

२५.

अ न क तु त १-५ ाता, अ दाता, जनक, आ ान, काशमान १-५

२६.

अ न का वणन १-९ तु त, आ ान, कु शक गो ी, कंपाना, गरजना, जलदाता, म त्, य म जाना १-६ ाण, रमणीय बनाना, पालक ७-९

२७.

अ न का वणन १-१५ दे व ा त, तु त, छु टकारा, मनचाहा फल, ह गभ १-९ ह , द त करना, तु त, दशनीय, ह वाहक,

२८.

वहन, अ भमुख, अ गामी, मेधावी, व लत करना १०-१५

अ न क तु त १-६ पुरोडाश, कमकुशल, पुरोडाश सेवनाथ ाथना १-६

२९.

अ न का वणन १-१६

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साधन, कट होना, थापना, सुखयु , अवरोधहीन, ह वाहक, अ याचना १-८ कामवषक, शोभा, नाराशंस, उ म वरण ९-१६ ३०.

थान, श द, सनातन, कु शकगो ीय,

इं क तु त १-२२ वरोध, आना, भयंकर, थत होना, मलाना, श सुगम बनाना, शूर १-११

याचना, धनदान, वृ वध, समतल,

दशाएं न त, उ म कम, गाय का मण १२-१४ श ुवध, रा स पर अ

फकने, अ

वामी बनाने क

ाथना १५-१८

इ छाएं बढ़ना, तु त, आ ान १९-२२ ३१.

इं का वणन १-२२ धेवता, क या का अ धकार, पु , इं से मलना १-४ गो ा त, सरमा नामक दे वशुनी, गाएं मलना, शु णवध, अमरता, नयु , न म , नमाण, श यां घो ड़यां, उ प , जल उ प , म त क सहायता ५-१७ वामी, नवीन, पापनाशक, बंद करना, आ ान १८-२२

३२.

सोम व इं क तु त १-१७ घोड़ के जबड़ म घास भरना १ दान, सुंदर ठोढ़ , गमनशील, जल छोड़ना २-६ न य त ण, लोकधारक, तेज वी, सोमपान ७-१० धरती दबाना, वृ

३३.

, आक षत करना, पुकारना, सामने जाना, आ ान ११-१७

इं का वणन १-१३ व ा म व न दय का संवाद, सतलज व जाना १-१३

३४.

ास नद , भरतवं शय का उनके पास

इं का वणन १-११ धरती व आकाश क तृ त, तु त १-२

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वध, यु ३५.

जीतना, पीसना, धन बांटना, वरणीय दान, पालन, दमन, आ ान ३-११

इं क तु त १-११ सोम दे ना, घोड़े जोड़ना, जौ, रथ म जोड़ना, हरी नामक घोड़े, सोमपानाथ ाथना, जौ, तु तयां १-८ सहायता, आ ान ९-११

३६.

इं क तु त १-११ संग त, सोमरस, ओज, गाएं, अंत र , लताएं नचोड़ना, बांटना, धन मांगना, आ ान १-११

३७.

इं क तु त १-११ रे णा, अनुकूल बनाना, शत तु, मानवाधारक, धन दे ने एवं असुर नाशाश पुकारना १-६ वृ हंता, जागरणशील, पांच जन, अ दे ने व य म आने क

३८.

ाथना ७-११

इं का वणन १-१० मरण, वग ा त, सुशो भत, इं सभा, जल नमाण, दे खना, समपण, मलन, कम को दे खना, पुकारना १-१०

३९.

इं का वणन १-९ तु तय का पतर के पास से आना १-२ य कम से संगत होना ३ पतर का नदक ४ सूय दशन, असुर, वरण, धन याचना, व नेता इं

४०.

५-९

इं क तु त १-९ सोमपान हेतु आ ान, आ ह, बढ़ना, आ ान १-९

४१.

इं क तु त १-९ आ ान, कुश बछाना, तु तयां, पुरोडाश, उ थ, श

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वामी १-५

ह व, सोमयु , रथ ६-९ ४२.

इं क तु त १-९ तृ त, सामने जाना, धन मांगना, सोमपानाथ आ ह, े रत करना १-९

४३.

इं क तु त १-८ घोड़े खोलने, समीप आने व तु तयां सुनने हेतु ाथना १-४ धन याचना, ह र नामक घोड़े, सोमा भलाषी, उ साही ५-८

४४.

इं क तु त १-५ इं का सोम, वृ

४५.

क ा, गाय को छु ड़ाने वाले १-५

इं क तु त १-५ य म रथ से आने क

ाथना १-२

सोम से मलना, पु याचना, तुत इं ४६.

३-५

इं क तु त १-५ स , पू य, अ ेय, र क, सोमधारक १-५

४७.

इं क तु त १-५ वामी, वृ हंता, सहायता व स करना, आ ान १-५

४८.

इं का वणन १-५ जलवषक, सोम पलाना, सोम दे खना, श ुजेता, आ ान १-५

४९.

इं का वणन १-५ पाप व फलदाता, श ुनाशक, हवनीय, अ के वभाजक १-५

५०.

इं का वणन १-५ आ ह, कु शकगो ीय ऋ ष, वनाशकारी १-५

५१.

इं का वणन १-१२

शंसनीय, नेता, तु त, नम कार, शासक, सखा १-६ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

शायात, वभू षत होना, म भाव ७-९ सोमपान का आ ह १०-१२ ५२.

इं का वणन १-८ सोमपान, पुरोडाश भ ण हेतु ाथना १-२ भ ण, सेवा, जौ, उ सा हत करना ३-८

५३.

इं का वणन १-२४ ह

खाने, य म रहने व कुश पर बैठने का आ ह १-३

प नीयु घर, योजन, क याणी, प नी, व ा म , प बदलना, स रता रोकना, सोमपान का आ ह, राजा सुदास, भरतवंशीय, व धारी, मंगद, अमृत प, अ , जमद न ४-१६ ढ़ रथ, बैल, ख दर, शीशम, रथ १७-२० उपाय, कु हाड़ी, सव , भरतवंशी ५४.

य, व स

२१-२४

व ेदेव का वणन १-२२ तो बोलना, अनुभव, नम कार, मह व जानना, वगमाग १-५ धरती व आकाश दे खना, जाग क, वभाजन, ःखी न होना, वाहन, जह्वा, य म आना, याचना ६-१२ ऋ , पाद व ेप, इं , अ नीकुमार, दे व व, व ण १३-१८ आकाश, म द्गण, तु त सुनने का आ ह १९-२० म ता, ह

५५.

का वाद २१-२२

उषा, अ न, इं एवं धरती-आकाश क तु त १-२२ बल, हसा न करने क

ाथना, काशक, अर ण, वृ

म रहना, सूय का सोना १-६

मूलकारण, ा णय का भागना, सूय के साथ चलना, भूवन करना, तु त ७-१२ भीगना, पु या मा, पापा मा १३-१६ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

ाता, जोड़ा धारण

गजन, वृ , ऋतुए,ं पांच अ जापालन, श ु

से संप

१७-१८ छ नना १९-२०

म त का आगे रहना, ओष ध २१-२२ ५६.

व ेदेव का वणन १-८ बाधक न बनना, ऋतुए,ं संव सर, जल १-४ इला, सर वती एवं भारती से य म आने क

ाथना ५

धन याचना, वा दे वी ६-७ तीन उ म थान ८ ५७.

व ेदेव का वणन १-६ ानी, मनचाही वषा, ओष धयां, द तयां १-४ ेरणा दे ना, उ म बु

५८.

५-६

अ नीकुमार क तु त १-९ ध दे ना, रथ, वृ

१-३

सूय का उदय होना, तो , जा वी गंगा, न यत ण अ नीकुमार, ह व अ , शु घर ४-९ ५९.

म अथात् सूय का वणन १-९ काम म लगाना, अनु ह, य के समीप रहना, से , नम कार के यो य १-५ म का अ , अंत र को हराना, ह व दे ना, अ दाता ६-९

६०.

ऋभुगण एवं इं क तु त १-७ कम जानना, दे व व, अमृत पद क

ा त, सीमा जानना असंभव, सुध वा १-५

कम न त, आ ान ६-७ ६१.

उषा का वणन १-७ तुत, सच बोलना, सूय का ान कराने वाली, सूय क प नी, तेज धारण करना १-५

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स ययु , काश फैलाना ६-७ ६२.

इं , व ण, बृह प त, पूषा व सोम क तु त १-१८ अ दाता, तु त सुनने, र ा करने हेतु ाथना १-३ ह

सेवनाथ ाथना, बल व मनचाहा फल मांगना, सामने आने क

ाथना ४-८

र क, तेज का यान, दान चाहना ९-११ सेवा करना, य म आना, पशु

को रोगर हत अ दे ने क याचना १२-१४

य म बैठने, मधुर रस दे ने क आ ह १५-१८

ाथना, सुशो भत बनने व सोमपान का

चतुथ मंडल सू १.

वषय

मं सं.

अ न एवं व ण क तु त १-२० ेरक, से , ाता, द तशाली, पूजनीय, आ ान १-७ वालाएं, उ रवेद , सचन, े , तु त, अं गरा का य फलदाता, उद्घाटन ८-१५ उषा, ऊपर प ंचना, गोधन, तु त, पूजनीय १६-२०

२.

अ न क तु त १-२० थापना, दशनीय, तु त, आ ान, ह

अ , र क दानी, स करना, सेवा १-९

होता, छांटना, मेधावी, धन मांगना १०-१३ अर ण मंथन, द त यु , गाएं नकालना, गोधन, संप , अ न धारण, वरे य १४-२० ३.

अ न क तु त १-१६ य

वामी, तय करना, तो , कारण पूछना, फलदाता, कहानी, स य प १-८ ध याचना, सव जाना, पहाड़ उखाड़ना, न दय का बहना, कु टलबु

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, उ त

बनाने व मं ४.

वीकार हेतु ाथना, तु तयां ९-१६

अ न क तु त १-१५ आगे बढ़ने, चनगा रय को फैलाने, अ न से बचाने, रा स , श ु व का शत होने का आ ह १-६

का नाश करने

फलदाता, तु त, सेवा, आ त य, गौतम, र क ७-१२ द घतमा, अ दे ने व अपयश से बचाने क ५.

ाथना १३-१५

अ न का वणन १-१५ वग थामना, नेता े , वराजमान, तीखे दांत, नरक, धन याचना १-६ थापना, र क, वै ानर, जह्वा, वालाएं ७-१५

६.

त ा, जातवेद, उषाएं, अतृ त लोग,

अ न क तु त १-११ होता, जा, द णा, प र मा १-४ क याणी मू त, का शत होना, अंगु लयां, आ ान, आवाज करना, धन याचना ५-११

७.

अ न का वणन १-११ था पत, हण, य शाला, क याणाथ लाना, तेज १-५ थापना, स करना, वग, त, जलाना, बलयु

८.

अ न का वणन १-८ बढ़ाना, ाता, धन दे ना, तकम, स करना,

९.



बनना, पापनाशक १-८

अ न क तु त १-८ आ ान, जाना, होता, उपव ा, ह

१०.

करना ६-११

ा १-४

वहन, तो सुनने का आ ह, र क ५-८

अ न क तु त १-८ उपकारक, नेता, तेज वी गमनक ा, श द करना, शो भत होना, पापर हत,

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पापनाशक, ोतमान १-८ ११.

अ न क तु त १-६ तेज, तुत, उ थ, अ , सेवा, बलपु

१२.

अ न क तु त १-६ जातवेद, धन ाथना १-६

१३.

१-६

ा त, वामी, पापर हत करने, सुख दे ने व आयु बढ़ाने क

अ न का वणन १-५ आगमन, सहारा, वहन, अंधकार का नाश, वगपालक १-५

१४.

अ न का वणन १-५ बढ़ना, सहारा, उषा का आना १-३ सोमरस, सूय ४-५

१५.

अ न, सोम एवं अ नीकुमार का वणन १-१० अ न लाना, ह , घेरना, सृजव १-४ तेज वी, समथ, कुमार, घोड़े लेना, कुमार के द घायु हेतु ाथना ५-१०

१६.

इं का वणन १-२१ सोम नचोड़ना, तु त, करण, अंधकार का नाश १-४ म हमा, बरसा, ेरणा ५-७ वद ण करना, कु स ऋ ष, शची, श ुनाशक, शु ण, कुयव को मारना ८-१२ मृगय का वध, ऋ ज ा, भयानक, समीप जाना, आ ान, र क बनने क ाथना १३-१७ हसार हत, धनपूण, तो क रचना, अ वृ

१७.

हेतु ाथना १८-२१

इं का वणन १-२१ बल वीकारना, यास मटाना, श ुजेता, उ प , तु त १-५

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जाधारक, र क, तु त, अ धारक, श ुनाशक, गाएं छ नना, धन बांटना ६-११ बल ा त, धनदाता, भगाना, झुकना १२-१६ सुखदाता, पूजन, श ुहंता, जाधारक, नई तु तयां १७-२१ १८.

इं का वणन १-१३ इं एवं वामदे व का वातालाप १-४ घेरना, मेघ भेदना, वृ वध, नगलना, सर काटना, अजेय इं

५-१०

वाता, कु े क आंत ११-१३ १९.

इं का वणन १-११ समथ, पानी रोकना, वृ वध, जल छ - भ करना १-४ जलभरना, तुव त व व य, गो दोहन, छु ड़ाना, व मीक, वणन, नई तु तयां ५-११

२०.

इं क तु त १-११ घरना, य म आने, उसे पूरा करने व सोमरस पीने क वशाल, आ त, शासक, बु

२१.

ाथना, शंसा करना १-५

बल, धन मांगना, तु तयां ६-११

इं का वणन १-११ आ ान, श ु हराना, बुलाना १-३ थूल व वशाल, लोक- तंभक, तु तयां ४-११

२२.

ोधी, पालक, गौर व गवय क

ा त, उ म कम,

इं का वणन १-११ ह

आ द वीकार करना, प णी नद , धरती व आकाश कंपाना १-३

श द करना, अ ह का नाश, अ धक ध दे ना, तु त ४-७ ेरणा, बल, गाय व अ हेतु ाथना ८-११ २३.

इं का वणन १-११ अ भलाषा, कृपा

, उपाय जानना, तु तयां, म ता, ग तशील १-६

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तेज आयुध, तु तय का वेश ७-८ गाय का वेश, ऋतदे व, तु तयां वीकार हेतु ाथना ९-११ २४.

इं का वणन १-११ बलशाली, धनदाता, र क, य , पुरोडाश १-५ म बनाना, बल धारण, सं ाम, कम मू य मलना, तु तयां ६-११

२५.

इं का वणन १-८ हतैषी, ाथना, सोमरस नचोड़ना, पुरोडाश १-६ हसा, म , अ हेतु पुकारना ७-८

२६.

इं का वणन १-७ उशना क व, संक प, दवोदास, मनु जाप त, सोम लाना १-५ येन प ी, श ुनाश ६-७

२७.

येन प ी का वणन १-५ ज म जानना, हराना, सोम छ नना, भु यु, सोमपानाथ आ ह १-५

२८.

इं एवं सोम क

ाथना १-५

ेरणा, प हया तोड़ना, सेनानाश, गुणहीन बनाना, गोदान १-५ २९.

इं व सोम क तु त १-५ आ ान, स रहना, डर भगाने क

३०.

ाथना, घोड़े जोड़ना, धन-पा बनना १-५

इं क तु त १-२४ स न होना, महान्, यु , प हया चुराना, यु नाश १-७

करना, एतश ऋ ष, दनुपु का

उषा का वध, टू ट गाड़ी, गाड़ी का गरना, थापना, नगर का नाश, शंबर, व च व सेवक का वध, परावृ , तुवश एवं य नामक राजा ८-१७ औव व च रथ का वध, कृपा करना, दवोदास को नगर दे ना, रा स का संहार, अजेय, श ु वदारक १८-२४ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

३१.

इं क तु त १-१५ बढ़ना, पूजनीय, र क, गोल च कर, मरण, प र मा, फलदाता, धनदाता १-८ असमथ रा स, यास, म ता, र ाथ ाथना, उपाय द तशाली, आकाश ९-१५

३२.

इं क तु त १-२४ श ुहंता, अभी दाता, श ुनाशक, तु त, मनोहर, गो वामी के म , गोधन का वामी, अप रवतनीय अ भलाषा, गौतम, नगर का नाश, दशन, व त १-१२ आ ान, अ , ह र नामक घोड़े लाने व पुरोडाश भ ण हेतु ाथना १३-१७ आक षत करना, सोना मांगना, १८-१९ धन याचना, घोड़ क

३३.

ऋभु

शंसा, गोदाता, घोड़ का सुशो भत होना २०-२४

का वणन १-११

घेरना, पु , त ण बनाना, अमर पद, बात मानना, अ भलाषा, सुख से रहना १-७ रथ बनाना, कम वीकारना, ह षत करना, म न बनाना ८-११ ३४.

ऋभु

क तु त १-११

वभु, दे व ेणी, पू य दे व, य म आने व सोमपान हेतु ाथना, स रहना, शंसक, धनदाता १-११ ३५.

ऋभु

क तु त १-९

सुध वा क संतान, चमके भाग होना, कृपा, सोम नचोड़ने का आ ह १-४ सोम वाले वभु, सोम नचोड़ना, वग म बैठना, दानयु ३६.

ऋभु

बनाना ५-९

क तु त १-९

आकाश म घूमना, कु टलताहीन रथ, युवा बनाना, गोचम से ढकना, शंसनीय १-५ संर ण, दशनीय, अ उपजाने व यश संपादन का आ ह ६-९ ३७.

ऋभु

क तु त १-८

य धारण, इ छा, सोमरस धारण, ठो ड़यां, पुकारना १-५ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

अ यु ३८.

बनना, बल, ध अ याचना ६-८

ावा-पृ थवी एवं द ध ा दे व क तु त १-१० सद यु, द ध ा, तेज चाल वाले, उपभोग, भागना, साथ चलना, सहनशील १-७ द ध ा को न रोक पाना, तु त, जा बढ़ाना ८-१०

३९.

द ध ा दे व का वणन १-६ तु त, कामवष , पापनाशक, तोता ाथना १-६

४०.

के क याण हेतु बुलाना, द घायु क

द ध ा दे व का वणन १-५ तु त, भरणकुशल, उड़ने वाले, शी चलना, सूय का नवास १-५

४१.

इं एवं व ण क तु त १-११ अमर होता, भाई बनाना, धन दे ने व बल योग क

ाथना १-४

तु त, श ुनाशाथ ाथना, ेम एवं म मांगना, तु तय का जाना ५-९ धन व वजय हेतु ाथना १०-११ ४२.

इं , व ण एवं सद यु का वणन १-१० दो कार के रा य, बल करना, धारक, बांटना १-४ पुकारना, डरना, श ु-वध, पु कु स, सद यु, व नाशक ५-१०

४३.

अ नीकुमार क तु त १-७ वंदनशील, क याणकारी, श

दशन, र ा १-४

रथ चलना, सूयपु ी, तु त ५-७ ४४.

अ नीकुमार क तु त १-७ रथ को पुकारना, शोभा ा त, शंसा, धन याचना १-४ वग से आना, साथ दे ना, आ त ५-७

४५.

अ नीकुमार का वणन १-७

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चमपा , अंधकार का नाश १-३ सुनहरे पंख वाले, तु त, तेज फैलाना, मण ४-७ ४६.

वायु एवं इं क तु त १-७ थम सोमपानक ा, लोक क याणकारी, सोमपान, आसन, नकट आना १-५ सोमपान हेतु ाथना ६-७

४७.

वायु एवं इं क तु त १-४ सोमरस लाना, इं -वायु, रथ पर चढ़ना, अ याचना १-४

४८.

वायु क तु त १-५ सोमपान हेतु आ ान, अ

वामी १-२

अनुगमन, तेज ग त वाले, जोड़ने क ४९.

ाथना ३-५

इं एवं बृह प त क तु त १-६ तु तयां, सोमपान, धन दे न,े सोमपान करने व नवास करने का आ ह १-६

५०.

बृह प त व इं क तु त १-११ दशाएं थर करना, श ु का कांपना, वग से आना, अंधकारनाशक, गाएं छु ड़ाना १-५ कामवष , श ु को हराना, फल से बढ़ना, याचना, दया भावना ६-११

५१.

उषा का वणन १-११ उगना, घेरना, उ सा हत करना, द त करना १-४ उषा, काश फैलाना ५-६ क याणकारी, शंसा का पा , वचरना ७-९ धन हेतु जगाना, यश व अ - वामी बनाने क

५२.

ाथना १०-११

उषा क तु त १-७ अंधकारनाशक, तुत, मां १-३

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जगाना, संसार भरना, अंधकार मटाने व अंत र ५३.

ा त करने क

स वता का वणन १-७ धन मांगना, कवच, काम म लगाना, तर क, याचना १-७

५४.

ाथना ४-७

ापक, क याण, पु , पौ व धन

स वता क तु त १-६ र दाता, सोम क उ प , पाप र करने क

ाथना १-३

नवास थान व धन याचना ४-६ ५५.

व ेदेव क तु त १-१० र ाथ ाथना, इ छापूरक तु त १-३ य -माग बताना, र ा हेतु ाथना तु त, र ा व धन याचना ४-१०

५६.

धरती-आकाश क तु त १-७ गरजना, य यो य, े रत करना, वामी बनाने क

ाथना १-४

ु त संप , य वहन करने व पास बैठने का आ ह ५-७ ५७.

खेती का वणन १-८ सहायता, मधुर जल, ओष धयां मांगना, अनुगमन, चाबुक, जल- नमाण १-५ हल से धन व धरती से फसल मांगना ६-८

५८.

अ न, सूय, जल, गाय एवं घृत का वणन १-११ मरणर हत, पालन, मानव म वेश, घृत उ प

१-४

जल का गरना, घृत का अ न पर गरना, आगे बढ़ना, मलना, मधुरतापूवक चलना, मधुरस ५-११

पंचम मंडल सू

वषय

मं सं.

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प नखारना,

१.

अ न का वणन १-१२ बढ़ना, मु होना कट करना, मन का जाना, उ प होना, बैठना, तु त, सुखकर, तेज को हराना १-९ ब ल, दे व को लाना, तु त १०-१२

२.

अ न का वणन १-१२ गुफा म रखना, उ प , तु त, युवा बनना, ाथना १-५ छपाना, शुनःशेप, त पालक, चमकना ६-९ उ प , तु तयां बनाना, धन पर अ धकार १०-१२

३.

अ न क तु त १-१२ अनुगमन, अयमा, गोपनीय उदक, दशनीय, श ु-नाश, नाशाथ ाथना १-७ त बनाना, पाप से अलग करने क

व लत करना, पापी के

ाथना ८-९

वीकारना, भागना, अपराध १०-१२ ४.

अ न क तु त १-११ तु त, ह वाहक, बंटवारा १-३ आ ान, श ुनाश, काशयु , बल के पु , र ाथ ाथना ४-९ बुलाना, अ , पु व अ य धन मलना १०-११

५.

य शाला का वणन १-११ हवन, नाराशंस, सुखदाता, तु त, साधन, य चलना, सुखकारी दे वयां,

६.

ा त होना, ह

नमाता १-६ ले जाने क

ाथना, स करना ७-११

अ न क तु त १-१० आ यदाता, नवासदाता, अ व पु दे ना, काशमान, जापालक, अ लाने क ाथना १-७ अ मांगना, मुख म चमस, पास जाना ८-१०

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७.

अ न का वणन १-१० म

प, स होना, ह

वीकारना १-३

वन प तयां जलाना, चढ़ना ४-५ जानना, छ - भ करना, तु तयां, घृतभोजी, पशु ा त ६-१० ८.

अ न क तु त १-७ वरे य, थान दे ना, ववेचक, समीप जाना १-४ वामी बनना, धारण करना, स चत ५-७

९.

अ न क तु त १-७ तु त, बुलाना, ज म दे ना, क ठनाई, लपट फैलाना, पाप से पार होने व समृ क ाथना १-७

१०.

अ न क तु त १-७ अबाधग त, बल थत, धन व क त क सव जाना, र ा व समृ

११.

हेतु ाथना ५-७

अ न का वणन १-६ र क, धुएं का थत होना, त, बढ़ाने क

१२.

ाथना, अर ण मंथन १-६

अ न क तु त १-६ कामनापूरक, द तशाली, भ

१३.

ा त १-४

वामी, सेवक, श -ु संहार, घर मलना १-६

अ न क तु त १-६ र ाथ पूजन, द तशाली, तु त, व तार करना, बल-धन मांगना १-६

१४.

अ न का वणन १-६ अमर, तु त, का शत होना,

१५.

ांतदश , वधन १-६

अ न का वणन १-५ तु त-रचना, दे व ा त, पापर हत बनाना, धारण करना १-५

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बनाने

१६.

अ न का वणन १-५ अ दे ना, धन ा त, आघात, हण, तु त १-५

१७.

अ न का वणन १-५ आ ान, यश वी,

१८.

ा त करना, रथ व धन ा त, धन याचना १-५

अ न का वणन १-५ कामना, तु त, आ ान, अ रखना, घोड़े दे ना १-५

१९.

अ न का वणन १-५ दे खना, र ा करना, श

२०.

बढ़ाना, तो सुनने एवं सामने आने क

अ न क तु त १-४ ाथना, वरण, र ाथ तु त १-४

२१.

अ न क तु त १-४ व लत करना, ुच से ा त, सेवा, सस ऋ ष १-४

२२.

अ न का वणन १-४ पू य, साधन, अलंकृत १-४

२३.

अ न क तु त १-४ बलशाली व श ुजेता पु मांगना, धन व काश हेतु ाथना १-४

२४.

अ न का वणन १-४ समीपवत बनने, धन दे न,े पुकार सुनने क

२५.

ाथना, पु याचना १-४

अ न क तु त १-९ र ाथ ाथना, शं सत, धनयाचना,



१-४

श ुजयी पु क कामना, तो , श द करना, वंदना ५-९ २६.

अ न क तु त १-९

द तशाली, लपट वाले, व लत करना, ाथना, बल मांगना १-४ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

ाथना १-५

य कम, बढ़ाना, वाहक ५-७ ह व प ंचाने व कुश पर बैठने क २७.

ाथना ८-९

अ न क तु त १-६ य ण, बैल का स होना, धन याचना १-६

२८.

अ न का वणन १-६ व वारा, र क, श ुनाशाथ तु त, य यु , वरण का आ ह १-६

२९.

इं एवं म त क तु त १-१५ तेज धारण, तु त, अ ह का वध, तं भत करना, एतश, पकाना, मांस भ ण, आ ान १-८ कु स, शु ण व द यु

का वध, प हया दे ना, प ु असुर, गाय छु ड़ाना ९-१२

धन वामी, नमाण, तो , सामान दे ना १३-१५ ३०.

इं एवं अ न क तु त १-१५ घर जाना, भयानक थान दे खना, पवत तोड़ना, गो ा त १-४ डरना, शंसा, नमु च-वध ५-७ बादल न करना, सुंद रयां घर म रखना, मलाना, व ु क गाएं, राजा ऋणंचय ८-१५ गाएं मलना, गाएं

३१.

इं क तु त १-१३ चलना, प नीयु

करना, यो य बनाना, जल धारण १-६

अ धकार करना, घर प ंचाना, अंधकार मटाना, घोड़े मलना, अव यु, ग तहीन करना ७-११ धन दे ने आना, तु त १२-१३ ३२.

इं का वणन १-१२ माग खोलना,



बनाना, उ प , मेघ-र क, कम जानना, वृ वध, न न

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बनाना १-७ धन छ नना, नीचा होना, क याणकारी, ेरक ९-१२ ३३.

इं क तु त १-१० तु त बोलना, जीत ाथना, रथ हांकना, नाम मटाना, बल बढ़ाना, शंसा, र ाथ ाथना १-७ रथ ख चने का अनुरोध ८ ढोने का आ ह, धन याचना ९-१०

३४.

इं का वणन १-९ तुत, पेट भरना, द तशाली बनना, भागना, वश म रखना १-६ धन व गाएं दे ना, अ

३५.

क तु त ७-९

इं क तु त १-८ अजेय, र ाथ ाथना, पुकारना, कामवष १-४ मण, आ ान, अ गंता, धन अपण ५-८

३६.

इं क तु त १-६ उ म ग त, आ त १-२ पुरावसु ऋ ष, धन बांटना ३-४ वृ कारी, राजा तुरथ ५-६

३७.

इं का वणन १-५ य न करना, तु त, म हषी लाना १-३ साथ चलना,

३८.

य बनना ४-५

इं क तु त १-५ महानता, अ दाता, समथ, इ छा, शत तु १-५

३९.

इं क तु त १-५

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वामी, अ हेतु आ ह १-२ स , तु त, अ ४०.

ऋ ष ३-५

इं व सूय क तु त १-९ श ुहंता, आनंददाता, सोमपान व स वातालाप १-७

होने का आ ह, अंधकार, माया भगाना,

माया वतं करना ८-९ ४१.

व ेदेव क तु त १-२० र ा करने, सेवा वीकारने, सुंदर तो एवं ह अ

बनाने क

ाथना १-३

४-५

बैठाने का आ ह, ह अनुकूल बनने क

दे ना, तु त ६-८ ाथना, तु त, र ा ाथना ९-११

दे व क तु त, आ तयां दे ना १२-१४ भू म क तु त, श ुनाशक, संतान व अ हेतु सेवा १५-१७ उप थत होने क ४२.

ाथना, य क

शंसा, र ाथ ाथना १८-२०

व ेदेव क तु त १-१८ ाथना, व ण, सोना मांगना, य यो य दे व से मलना १-४ व ा, ऋभु ा, वाज, कमकथन, सुखदाता ५-७ पु वान बनना, अ ती, नदक आ द को अंधकार म डालने क ाथना, ओष धवामी, राका, प दे ना, जल नमाता, का शत करते ए चलना ८-१४ धना भलाषी, बु

४३.

म न डालने व सुख भोगने क

ाथना, सौभा य याचना १५-१८

व ेदेव क तु त १-१७ आ ान, इ छा, सोम दे ना, मधुर रस टपकाना, सोमरस नचोड़ना १-५ ह

वहन क ाथना, पा रखना, य म लाना, तु तय को सुनने व अथ जानने क ाथना ६-११

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अ धारक, पोषण, अ भट, वीर पु याचना १२-१७ ४४.

व भ दे व का वणन १-१५ अंतरा मा, मायाहीन १-२ अजर, जल चुराना, शोभा पाना ३-५ थर करना, अ भलाषा, सुख मांगना, तु त, अ पू त, मद ा त, सदापृण, यजत आ द ऋ ष ६-१३ कामना, तो

४५.

ा त १४-१५

व भ दे व क तु त १-११ व

फकना, थरता, बरसना, बुलाना १-५

ार खुलना, पूजा, सरमा, प ंचना, झुकना, र त होने व पाप लांघने म समथ होने क ाथना ६-११ ४६.

व भ दे व का वणन १-८ भारवहन, ाथना, आ ान, सुख व धन याचना, अ द त, सुख मांगना, ह ाथना १-८

४७.

व भ दे व का वणन १-७ वग से आना, ग तशील होना, रथ का वेश १-३ ेरणा, तु य, कपड़े बुनना, नम कार ४-७

४८.

व भ दे व का वणन १-५ व तार करना, ढकना १-२ घूमना, धन दे ना, सुशो भत होना ३-५

४९.

व भ दे व का वणन १-५ म ता, शंसा का आ ह, लकड़ी खाना व तेज फैलाना १-३ तर कार न होना, स होने क

५०.

ाथना ४-५

व भ दे व का वणन १-५

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भ णक

याचना, तु तयां, य नेता १-३ यूप, तु त ४-५ ५१.

अ न, इं वायु एवं अ नीकुमार क तु त १-१५ सोमपान हेतु आ ह,

य होना, १-४

आ ान, यो य होना, दही मला सोमरस ५-७ म ता, आ ान ८-१० पाप से बचाने क

ाथना ११-१३

धन क वा मनी, क याण व बंधु म ५२.

से मलन कराने हेतु ाथना १४-१५

म द्गण का वणन १-१७ स होना, मणक ा, तु य, ह

दे ना, १-४

नेता, आयुध ५-६ म द्गण, प र म करना, घरना, य धारण हेतु ाथना ७-१० दशनीय, कूप नमाण, नमाता, आ ान ११-१४ दान ा त, पृ , ५३.

, गाएं दे ना १५-१७

म द्गण क तु त १-१६ पृ , वषाकारी १-२ तु त, मु दत होना, बरसना, आकाश जाना ३-७ आ ान, न दयां, शंसा ८-१० अनुगमन, ह वदाता, बीजदाता, जल, गाय आ द मांगना ११-१४ कृपापा , तु त हेतु आ ह १५-१६

५४.

म द्गण का वणन १-१५ तेज वी, जल गरना, बल संप , सवथा समथ १-४

पवत तोड़ना, धन याचना, संर ण ५-७ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

स चना, वषा करना माग पार, करना, सुनहरी पगड़ी ८-१२ अ य, राजा यावा , धन याचना १३-१५ ५५.

म त क तु त १-१० अ धारण, असी मत ान, अ तशय १-४ जलहीन न होना, बुंद कय वाली घो ड़यां, फैलना, पीछे चलना, पाप से बचाने हेतु ाथना ५-९

५६.

अ न एवं म त क तु त १-९ आ ान १-२ समूह का आना, श ुनाश, आ ान, घोड़े जोड़ने हेतु ाथना, दे र न करना ३-९

५७.

म त क तु त १-८ जल प ंचाना, आ ान, वन का कांपना, व तृत होना १-४ अमृत ा त, आयुध धारण करना, उ म संतान, धन व वषा हेतु ाथना ५-८

५८.

म त क तु त १-८ भासंप , द तशाली, आ ान, श ुनाशक, पु हेतु ाथना, गरजना, गभधारण, धन वामी १-८

५९.

म त क तु त १-८ तु त, दखाई दे ना, ाता, वृ , यु

करना, हतकारी १-६

पानी गराना, वषा हेतु ाथना ७-८ ६०.

अ न एवं म त क तु त १-८ तु त, बलसंप , श द करना, वग का कांपना १-३ शोभा धारण करना, न य युवा, आ ान, श ुनाश व सोमपानाथ ाथना ४-८

६१.

म द्गण क तु त एवं रानी शशीयसी का वणन १-१९ अकेले आना, लगाम दखना, कोड़े लगना, हतकारी, रानी शशीयसी, महानता १-६

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दान का वचार, समान, माग बताना, संप

दे ना, तु तयां, चमकना ७-१२

बाधाहीन ग त, स होना, वग, धन मांगना १३-१६ रथवी त, सूचना प ंचाने हेतु ाथना १७-१९ ६२.

म एवं म त् का वणन १-९ सूयमंडल, चमक ला बनाना, आकाश, न दय का बहना १-४ अ

वामी, पाप ाता, वणरथ, ५-७

लोहे क क ल, व र क ८-९ ६३.

म एवं व ण क तु त १-७ रथ पर बैठना, शासन करना, आ ान १-३ करना, घोड़े जोड़ना, मण, गरजना, य र ा ४-७

६४.

म एवं व ण क तु त १-७ आ ान, जाना, घर म सुख मलने क

ाथना १-३

धन ा त क आशा, आ ान ४-५ अ धारक, नकट आने क ६५.

ाथना ६-७

म एवं व ण क तु त १-६ तु त जानना, घूमना, र ाथ ाथना, उपाय बताना, र ाथ ाथना १-६

६६.

म , व ण एवं धरती क तु त १-६ श ुनाशक, श

६७.

, र ा हेतु तु त, जल बरसाना, रदश १-६

म एवं व ण क तु त १-५ हतकारक, क याणकारी, भ र क, माग दखलाना, शरण लेना १-५

६८.

म एवं व ण का वणन १-५ आ ान, शंसनीय, दानदाता, बढ़ना, रथ १-५

६९. म एवं व ण क तु त १-४ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

कमर क, जलधारक, तु त, भूलोकधारक १-४ ७०.

म एवं व ण क तु त १-४ सुम त, अ याचना, श ुसंहार करने व आ म नभर बनाने क

७१.

ाथना १-४

म एवं व ण क तु त १-३ आ ान, कम सफल बनाने व सोमपान का आ ह १-३

७२.

म एवं व ण क तु त १-३ आ ान, य कम म लगना, सोमपान का अनुरोध १-३

७३.

अ नीकुमार क तु त १-१० आ ान, बुलाना, लोक मण, अ मांगना, करण का बखरना, तु त, अ , भरण, ाथना, तु तयां १-१०

७४.

अ नीकुमार क तु त १-१० सेवा करना, सहायक क इ छा, वृ वषय, ह १-१०

७५.



अ नीकुमार क तु त १-९ मधु- व ा ाता, वण रथ, अ यु , तु त, ह आ ान, अव यु ऋ ष, नाशहीन रथ १-९

७६.

ाथना, युवा बनाना, आ ान, शरोधाय,

दे ना, यवन ऋ ष, व च

प वाले,

अ नीकुमार क तु त १-५ व लत होना, आ ान, र ाथ ाथना, घर, सौभा य मांगना १-५

७७.

अ नीकुमार क तु त १-५ य धारक, तृ त करना, मांगना १-५

७८.

गम माग पार करना, संतान का पालन, सौभा य

अ नीकुमार क तु त १-९ आ ान, गौरमृग, घरदाता, र ाथ ाथना, स तव क ाथना, जरायु, जीवधारी १-९

ऋ ष, बंद सं क, ग तशील होने

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७९.

उषा क तु त १-१० अ दे ने वाली, स य वा, अंधकार हरने क ाथना, मरण करना, तु त, अ मांगना, तु त, गाएं, धन याचना, ताप न दे ने का आ ह, हसा न करना १-१०

८०.

उषा का वणन १-६ महती, काश फैलाना, धन थायी करना, भली काश बखेरना १-६

८१.

कार चलना, उप थत होना,

स वता क तु त १-५ काय म लगना, काश फैलाना, सी मत, म बनना, यावा ऋ ष १-५

८२.

स वता क तु त १-९ ाथना, ऐ य, कामना, द र ता, अमंगल भगाने क सेवा, ेरणा १-९

८३.

ाथना, धन धारण हेतु ाथना,

पज य क तु त १-१० गभधारण, भागना, वषायु करना, गरजना-टपकना, झुकना, पालक, जल धारण हेतु ाथना, मु दत होना, तु तयां मलना १-१०

८४.

पृ थवी क तु त १-३ स करना, बादल को फकना, वन प तयां धारण करना १-३

८५.

व ण क तु त १-८ व तृत करना, सोमलता का व तार, धरती को गीला करना, बादल श थल करना, नापना, वरोधहीन तु त, अपराध न करने व य बनाने क ाथना १-८

८६.

इं व अ न का वणन १-६ तक काटना, तु त, व , शंसनीय, अ हेतु तु त, अ मांगना १-६

८७.

म द्गण का वणन १-९ एवयाम त्, थर होना, पुकार सुनना, बल व तेजयु , अपार म हमा, व तृत गृह, पाप भगाने व नदक को वश म करने क ाथना १-९

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ष म मंडल सू १.

वषय

मं सं.

अ न क तु त १-१३ ाथना, अनुगमन, अ -धन हेतु तु त, माता- पता, आनंददाता, तु त १-८ ांतदश , सेवा, अ व धन के लए ाथना, सौभा य व धन हेतु तु त ९-१३

२.

अ न क तु त १-११ अ मांगना, सेवा करना, आ ान व घर याचना १-५ द तयु , पालक, अर ण म वास, वालाएं, समृ

३.

व गृह हेतु तु त ६-११

अ न क तु त १-८ द घायु, शांत बनाना, वालाएं, ती ण, व च ग त, तेज वी, वेगशाली १-८

४.

अ न का वणन १-८ य पूण करने व अ हेतु तु त १-२ प व क ा, अ दाता, तु त, अंधकारनाशक ३-६ ग तशील, शतायु हेतु तु त ७-८

५.

अ न क तु त १-७ धनदाता, था पत, श ुनाशाथ तु त, अ ओर धन याचना १-७

६.

अ न क तु त १-७ होता, युवा, वालाएं, वनदाहक, श ुनाश हेतु ाथना, अ , धन, संतान याचना १-७

७.

अ न क तु त १-७ उ प , धन म वास, धन हेतु तु त, अमरपद दाता, सूय क पालक १-७

८.

अ न का वणन १-७

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थापना, उ च थल,

ा त, तर क, श तु त १-७ ९.

धारक, अचनीय वामी, अजर, पु , धन याचना, र ाथ

अ न का वणन १-७ अंधकारनाशक, ताना-बाना, नम कार १-७

१०.

ाता, होता, अमर,

धानक ा, उ सुक बु

,

अ न का वणन १-७ द तशाली, भट दे ना, समृ

एवं गोशाला दाता, अंधकारनाशक १-४

अ , धन, बल याचना, शतायु हेतु तु त ५-७ ११.

अ न क तु त १-६ य क ा, वाला, अं गरा, भर ाज, वेद म वास, धन ा त व श ु से र रखने हेतु ाथना १-६

१२.

अ न का वणन १-६ य वामी, ह याचना १-६

१३.

प ंचाने हेतु ाथना, ान कराने वाली, जातवेद, सुशो भत, संतान

अ न क तु त १-६ धन क उ प , धन मांगना, ानसंप , संप जीने क ाथना १-६

१४.

अ न क तु त १-६ श ु-धन क

१५.

पाना, अ मांगना, संतान के साथ

ा त, कुशल, य हीन, श ुनाशक, र क, द तसंप

१-६

अ न का वणन १-१९ जार क, तु य, भर ाज, एतश, पू य, ांतदश , पालक, सुख याचना, यजन, अ भलाषापूरक, य कता, गृह वामी, सव ापक, र ाथ ाथना १-१५ दे व मुख, मंथन, आ ान, गाहप य य

१६.

१६-१९

अ न क तु त १-४८ होता बनाना, ह , य

वधाता, यजन १-४

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सुख व हेतु मांगना ५-१२

ाथना भर ाज, तु त, दशनीय तेज, व ान्, तु त, बढ़ाना, धन

अ न मंथन, द यङ्

वलन, तु तयां १३-१६

अनु ह, र ाथ याचना, पालक, म हमा, व तार करना, श ुनाशक, दे व त, प व कमा, अ दाता १७-२८ जातवेद, वशेष

ा, र ा, याचना, तु त, श ुनाशाथ ाथना २९-३४

श ुनाश, अ , संतान ा त हेतु ाथना, शरण लेना, तेज स ग ३५-३९ अ न पकड़ना, ह , सुखकर, आ ान, द त संप , यजन यो य, ऋचाएं, तु त ४०-४८ १७.

इं क तु त १-१५ गाएं खोजना, श ुर क, अ हेतु ाथना, सवगुणी १-४ थापक, धा

बनाना, धरती को पूण बनाना ५-७

अ णी, वृ वध, व तु तयां, बल, अ १८.

बनाना, भसे पकाना, न दयां मु

करना ८-१२

ा त व सौ वष तक स रहने के लए ाथना १३-१५

इं क तु त १-१५ इ छापूरक, सोमपानक ा, पु दे ना, वासदाता, श ुनाशक १-४ बल असुर का वध, नगर का नाश ५ वंदनीय, चुमु र, प ,ु शंबर, शु ण व धु न का वध, माया-नाशक, म हमा ६-१२ कु स, आयु एवं दवोदास १३ धन ा त हेतु ाथना, तो के जनक १४-१५

१९.

इं क तु त १-१३ अपरा जत, यु

संचालन, आ ान, धन वामी, धन, पु व पौ हेतु ाथना १-१०

आ ान, धन से स ता मांगना ११-१३ २०.

इं क तु त १-१३

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धन वामी, वृ संहारक, सोम के राजा १-३ प ण क सेनाएं, शु ण, न म, नगर का नाश ४-७ सुखदाता, अपरा जत, नगर का नाश ८-१० उशना को बढ़ाना ११ य व तुवसु को सागर पार कराना १२ धु न व चुमु र को सुलाना १३ २१.

इं क तु त १-१२ शूर, बु

मान्, बलशाली,



कम १-४

अं गरा ारा तु त ५-१० व ान्, माग- नमाता ११-१२ २२.

इं का वणन १-११ स यभाषी, श ुहंता, धन याचना, असुरनाशक, श पाप से बचाने, रा स को जलाने व व संप

२३.

दाता, वृ नाशक १-६

धारण करने हेतु ाथना ७-९

मांगना, आ ान १०-११

इं का वणन १-१० वै दक तु तयां १ यजमान र क, नवास थान व पु दाता २-४ वेदमं

व तो

का उ चारण ५-६

सोमपान हेतु आ ह, स माग ेरक ७-१० २४.

इं का वणन १-१० तु त व अ

वामी, शूर, बु

मान्, वल ण कमक ा १-५

अ े छु क, भर ाजगो ीय ऋ ष ६ शरीर वृ , पवत का भी सुगम होना ७-८ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

अ , संतान, र ा याचना, सौ वष तक स रहने हेतु ाथना ९-१० २५.

इं क तु त १-९ अ

ा त, श ु से र ा हेतु तु त १-३

ववाद, सवजेता, हवनक ा को धन मलना ४-६ नेता, दे व से मला बल, नवास हेतु तु त ७-९ २६.

इं क तु त १-८ अ के लए तु त १-३ वृषभ, वेतस और राजा तु ज, तु वध, दवोदास, शंबर, दभी त, चुमु र ४-६ बल, सुख व धन मांगना ७-८

२७.

इं का वणन १-८ सोमपान, धन वामी, वर शख के पु चायमान १-८

२८.

का वध, य ावती नद , अ यवत ,

गाय एवं इं का वणन १-८ नाना रंग वाली गाएं, धन दे ना, गाय के साथ रहना वशसन सं कार, इं बनना, ब ल बनाने क ाथना १-६ साफ पानी पीने का आ ह, पु

२९.

हेतु ाथना ७-८

इं क तु त १-६ अनु ह, मानव हतकारी, धनदाता, ध-दही मला सोमरस, अनंत श ठोढ़ १-६

३०.

शाली, हरी

इं क तु त १-५ धनदाता, असुरनाशक, माग बनाना, सबसे बड़े राजा १-५

३१.

इं क तु त १-५ एकमा

३२.

वामी, जल बरसाना, कुयव का वध, नगरी-नाशक, र ाथ पुकारना १-५

इं का वणन १-५

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तु तयां, मु ३३.

करना, नगर नाशक, कामपूरक, द णायन सूय १-५

इं क तु त १-५ पु मांगना, अ

३४.

मलना, धन याचना, गो- वामी १-५

इं का वणन १-५ वचारधाराएं, स करना, सोमरस अ पत, सं ाम-र क १-५

३५.

इं क तु त १-५ य कम, धन याचना, गोदाता तो , गाय व अ मांगना ाथना १-५

३६.

इं का वणन १-५ हतकारक, बल पूजा, तु तय का मलना, धन मांगना, श ुधन जीतने के लए अनुरोध १-५

३७.

इं का वणन १-५ तु त, सोमरस का बहना, रथ म जुड़े घोड़े, धन, संतान व बलदाता १-५

३८.

इं का वणन १-५ सोमपान, ेरक तु तयां, मास, संव सर व दन, बल, धन, र ा हेतु सेवा १-५

३९.

इं क तु त १-५ सोमपान का आ ह, इं -प ण यु

१-२

शोभन ज म वाली, तेज से भरना, सेवक मांगना ३-५ ४०.

इं क तु त १-५ अ याचना, सोमपान, आ ान, सोमपान का आ ह, आ ान १-५

४१.

इं क तु त १-५ आ ान, श ुनाश क कामना, सोमरस, आ ान, र ाथ ाथना १-५

४२.

इं का वणन १-४ यु नेता, आ ान, अ भलाषापूरक १-४

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४३.

इं क तु त १-४ शंबर का वध, सोमपान आ ह १-४

४४.

इं क तु त १-२४ स ता दे ने क कामना १-३ श ुजेता, श ुधनहता, र क, ४-७ आ वभूत होने क कामना, धन मांगना, र ाथ ाथना, सोमरस दे ना, स होने क कामना, धन वामी, अ भलाषापूरक ८-२१ आयुध बेकार होना, अमृत मलना व ध धारण करना २२-२४

४५.

इं एवं बृह प त का वणन १-३३ तुवश व य राजा १ श ु

का धन जीतना २

अनंत र ासाधन, बु

दाता, र ा, समृ

हेतु ाथना ३-६

आ ान, हाथ म संप यां ७-८ य

वामी, अ व धन के लए आ ान ९-११

जीतने यो य बनना १२ धन जीतना १३-१६ सुख याचना, असुरसंहारक, आ ान १७-१९ एकमा

वामी, गोपालक, आ ान २०-२२

गाय स हत अ दे ने वाले, गाएं को कट करना, गाय-घोड़ा दे ने वाले बनने का अनुरोध २३-२६ नदक, गाय का बछड़ के पास जाना, बृब,ु गाएं दे ना, तु तपा , श ुनाशक, धन के लए ेरणा का अनुरोध २७-३३ ४६.

इं क तु त १-१४ आ ान, तु त, पालक १-३

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संतान, अ क

ा त व श ु क हार हेतु तु त ४-६

धन, बल व अ क

ा त व श ु को जीतने हेतु ाथना ७-९

आ मण से बचाने व श ु भगाने हेतु तु त १०-१२ घोड़ को आगे बढ़ाने हेतु तु त १३-१४ ४७.

सोमरस का वणन एवं इं क तु त १-३१ मधुर सोम, मदम करना १-५

होना, वाणी का तेज होना, जल, ढ़ करना, वग धारण

धन दे ने का आ ह, भरोसा, अ -धन के लए ाथना ६-९ बु

दे ने क

ाथना, आ ान, र क १०-१२

शोभन, मलाना, आगे-पीछे पैर रखना, सेवक को बुलाना, म

१३-१७

रथ, घोड़े, मागदशन हेतु तु त १८-२० शंबर व वच का वध, दान, पूजा, रथ, द

तोक, दवोदास २१-२३ रथ, ं भ २४-२९

ढ़ता क याचना, गाएं लाने क ४८.

ाथना ३०-३१

अ न का वणन १-२२ य, र क, अ भलाषापूरक, ह

अ के लए तु त १-४

कट होना, धन हेतु तु त, गृहप त, धन के नेता, पालन हेतु ाथना ५-१० बछड़ को अलगाना, आना, याचना ११-१५

धा

गाय, अ

व धन के लए म त से

श ु को भगाने, नदक का नाश करने हेतु ाथना, म ता व अनु ह के लए पूषा क तु त १६-१९ मागद शका वाणी २० बल धारण, वग व धरती क उ प ४९.

२१-२२

व भ दे व का वणन १-१५

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बलसंप

म , ेरणा १-२

सूय क दो क याएं—रात और दन ३ धन हेतु वायु क तु त ४ अ भलाषा पूण करने हेतु अ नीकुमार क तु त ५ दे व क तु त, सोने क स ग वाली गाएं ६-८ अ धारक ९-१० वृ

को स चने हेतु ाथना ११

तु त १२ तीन लोक को नापना, याचना १३-१४ अ व घर मांगना १५ ५०.

व भ दे व का वणन १-१५ आ ान, अ न ज , बल याचना १-३ आ ान, ा णय का कांपना ४-५ अ हेतु इं क तु त ६ हतकारी जल ७ धनदाता ८ पु -पौ से यु यु

करने हेतु आ ह ९

से बचाने के लए ाथना १०

धन ा त हेतु ाथना ११ अ बढ़ाने हेतु आ ह १२ र ा हेतु दे व क तु त १३-१५ ५१.

व भ दे व का वणन १-१६

सूय, म व व ण का तेज १ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

अ भलाषापूरक, तु त २-३ स जनपालक, सुख याचना ४-५ वृक व वृक ६ श ुनाश क

ाथना ७

पाप का र होना, झुकना ८-९ गुण के नाश हेतु व ण, म अ न क तु त १० मागदशक, र क बनने व भवन हेतु याचना ११-१२ श ु को र रखने व सुख दे ने के लए तु त १३ प ण को मारने के लए सोम से ाथना १४ सुख दे ने व माग सुर त बनाने के लए दे व क तु त १५ श ुनाश व धन ा त का माग १६ ५२.

व भ दे व का वणन १-१७ य को अयो य मानना १ वरो धय को जलाने हेतु ाथना २ नदा उ ारक ३ र ा के लए उषा, न दय , पवत एवं पतर से ाथना ४ सूय दशन हेतु अ न से ाथना ५ र ा हेतु पुकार ६ व ेदेव का आ ान ७ घृत म त ह



व ेदेव, ध वीकारने हेतु ाथना ९-१० ह

वीकारने का अनुरोध ११

य पूरा करने हेतु याचना १२ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

य के भो ा १३ सुखपूवक रहने क कामना १४ जीवन भर अ संतानयु

ा त हेतु ाथना १५

अ हेतु अ न और पज य से आ ह १६

तृ त होने के लए व ेदेव क तु त १७ ५३.

पूषा क तु त १-१० पूसा को सामने करना, मानव हतकारी, ेरणा, य पूरा करने के लए ाथना १-४ प णय को घायल करने व उ ह वश म करने क

ाथना ५-७

प णय के दय पर नशान बनाने हेतु आ ह, सुखकामना ८-९ सेवक दे ने वाला बनाने का अनुरोध १० ५४.

पूषा क तु त १-१० कृपा चाहना १-२ च

प आयुध, ह

ारा सेवा ३-४

घोड़े के र क व अ दाता ५-६ गाय क सुर ा, धन क याचना, अमर करने हेतु तु त ७-९ गाएं लौटाने हेतु आ ह १० ५५.

पूषा का वणन १-६ धन याचना, द तशाली १-३ उषा के ेमी, तु त ४-५ रथ म जुड़े बकरे ६

५६.

पूषा का वणन १-६ घृत म त जौ का स ू १

स जनपालक, वणरथ, धन के लए तु त २-४ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

गाय के अ भलाषी ५ पापर हत व धनयु ५७.

र ा ६

इं व पूषा क तु त १-६ आ ान १ सोमरस, जौ का स ू २ पूषा का वाहन बकरा व इं का वाहन घोड़ा ३ वषा म सहायक पूषा ४ कृपा का सहारा, क याण के लए आ ान ५-६

५८.

पूषा का वणन १-४ रात- दन भ

५९.

प वाले, आकाश म घूमना, सोने क नाव, अ

वामी १-४

इं एवं अ न क तु त १-१० काय का वणन, ज म क म हमा, आ ान, य वधक १-४ भां त-भां त से चलने वाले घोड़े ५ अचरण उषा ६ धनुष फैलाना ७ श ुसेना ८ पु कारी धन ९ सोमपान हेतु आ ान ९-१०

६०.

इं एवं अ न क तु त १-१५ सेवा, यु , वृ हंता व अ न का आ ान १-५ स जनपालक, सुखदाता, आ ान, तु त, जल बरसाना, घोड़े, आ ान ६-१५

६१.

सर वती का वणन १-१४

ऋण से छु टकारा, पवत भेदन, असुरनाशाथ ाथना, र ा याचना १-४ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

तु त, धन याचना, अपरा जत बल ४-८ सहायता मांगना ९ सात ब हन १० नदक से र ाथ ाथना ११ लोक म ६२.

ा त, धान सर वती, पीड़ा न दे ने क

ाथना के लए तु त १२-१४

अ नीकुमार क तु त १-११ श ु नवारक, म भू म के पार, संप बनाना, घोड़े जोड़ना, सुखदाता १-५ नकालना, रथ वामी, महान् श

६३.

ोध ६-८

फकना, रथ, गोशाला ९-११

अ नीकुमार क तु त १-११ आ त, सोमपानाथ, घृत वामी १-४ सूयपु ी, सूया क शोभा ५-६ तेज रथ, गाय, अ हेतु तु त ७-८ वणरथ ९ भर ाज, धन हेतु तु त १०-११

६४.

उषा क तु त १-६ क याणी, सुशो भत, अंधकारनाशक, धन हेतु तु त, धन ढोना, दाता १-६

६५.

उषा क तु त १-६ वगपु ी, रथ वाली, अ , धन व र न हेतु तु त १-४ गोसमूह ा त, धन हेतु तु त ५-६

६६.

म त का वणन १-११ सफेद जल, रथ, रथ १-७

पु , पापनाशक, अ भलाषापूरक मा यमा वाक्, सार थहीन

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पु , पौ व गोर ा, पृ थवी का कांपना अजेय, तु त ८-११ ६७.

म व व ण क तु त १-११ उ म नयंता, घर मांगना, वश म करने हेतु तु त, स ययु , जीतना, बल धारण, जल भरना १-७ मायाहीन, य हीन को न करने, अ य दे व के साथ न चलने व घर दे ने के लए ाथना ८-११

६८.

इं व व ण क तु त १-११ सोमरस बनाना, श ु हसक, र क, बढ़ना, धन व पु

ा त १-६

र त धन हेतु याचना व तु त ७-८ अजर व ण ९ सोमपान हेतु ाथना १०-११ ६९.

इं व व णु क तु त १-८ ह व दे ना १ तु तयां ा त होने, उनको सुनने, महान कम करने हेतु तु त २-५ आधार, नशीला सोम, सदा वजेता ६-८

७०.

ावापृ वी का वणन १-६ स , प व कम वाली, भुवन क नवास १-३ सुख याचना, जल टपकाना, संतान, बल व धन मांगना ४-६

७१.

स वता क तु त १-६ भुजाएं,

पद व चतु पद ाणी १-२

घर क र ा, अ , आनंद व धन हेतु तु त ३-६ ७२.

इं एवं सोम क तु त १-५ भूत नमाण, ाथना, वृ हंता, ध धारण, क याणकारी १-५

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७३.

बृह प त का वणन १-३ अं गरापु , नगर जलाना, श ुनाशक बृह प त का वणन १-३

७४.

सोम एवं

क तु त १-४

र नधारक, अ दे ने, पाप भगाने व र ा हेतु तु त १-४ ७५.

कवच, धनुष आ द यु

साम ी का वणन १-१९

र ाथ ाथना, जीतने क कामना, डोर का कान तक प ंचना, र ा याचना, तरकस, घोड़ को वश म करना, कुचलना, बढ़ाना १-८ आ य यो य, र ाथ ाथना ९-१० बाण, सुख याचना, चोट करना, र ा करना, नम कार, श ुनाश हेतु ाथना ११-१६ सुख याचना १७ कवच से ढकना १८ मं ही र ा कवच है १९

स तम मंडल सू १.

वषय

मं सं.

अ न क तु त १-२५ अर ण, पूजनीय, वालायु , संतानदाता कुशल, पु -पौ वाला धन मांगना, रा स को जलाना, स होना, आ ान १-९ तु त १० जायु

घर, र ाथ आ ह ११-१३

सेवा करना, र क प र मा १४-१६ धन वामी होने क कामना, ह , स ययु

१७-१९

अ दे न,े सहायक बनने, मृ यु से छु ड़ाने हेतु ाथना, धनी होना, पूण आयु वाला होने ******ebook converter DEMO Watermarks*******

व पालन हेतु तु त २०-२५ २.

अ न, य क ा

व व ा क तु त १-११

गम लपट, म हमा, पूजन, ब ह दे ना, ाचीना जु , घी से स चना, कामधेनु गाय १-६ धन मांगना, भारती, पु याचना, ज म जानना, आ ान ७-११ ३.

अ न क तु त १-१० शु क ा, काला माग, दे व के पास जाना, वेश करना, पूजन, काश फैलाना, र ा हेतु ाथना १-८ अर णय से उ प , र ाथ हेतु ९-१०

४.

अ न क तु त १-१० बु से चलने वाले, अ भ क, असह्य, वराजमान, तारक, संतानहीन न होने, धन वामी बनाने हेतु ाथना, थान पर प ंचना, धन हेतु आ ह १-१०

५.

वै ानर अ न क तु त १-९ बढ़ना, शोभा पाना, नगर जलाना, व तारक, जा वामी १-५ बल धारण, गरजना, क तदाता, सुख याचना ६-९

६.

वै ानर अ न का वणन १-७ वै ानर, राजा, हसक को भगाने हेतु ाथना, नाशक, उ पादक, कृपा चाहना, अंधकारनाशक १-७

७.

अ न क तु त १-७ य

८.

त, वनदाहक, युवा अ न, था पत, ह वाहक, स यभूत, तु त १-७

अ न का वणन १-७ ह व वामी, काले माग वाले, शोभनदाता अ त थ, स मन, रोग नवारक तो , र ा हेतु तु त १-७

९.

अ न का वणन १-६ जागने वाले, अंधकारनाशक

प म वेश, तु य, य करना, र ा याचना १-६

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१०.

अ न का वणन १-५ आ य, अ तशयदाता, रा

११.

अ न क तु त १-५ य

१२.

वामी १-५

व ापनक ा, आ ान, ह

डालना, ह वाहक बनाना, सुर ा हेतु तु त १-५

अ न क तु त १-३ समीप जाना, पाप से बचाने व र ा हेतु तु त १-३

१३.

अ न क तु त १-३ समपण, छु ड़ाना, र ा हेतु ाथना १-३

१४.

अ न क तु त १-३ स मधा, सेवा, र ाथ हेतु आ ह १-३

१५.

अ न क तु त १-१५ ह व डालना, गृहपालक, र ा हेतु ाथना, धन याचना, संतानयु , धन मांगना १-५ ह वाहक, क याणकारी, कामना, शु वाला वाले, धन हेतु ाथना, संतानयु धन याचना, अजर, लौह नगरी बनाने हेतु ाथना, पाप व श ु र ाथ अनुरोध ६-१५

१६.

अ न क तु त १-१२ आ ान, पालक, आ त, भोग, याचना १-५ र नदाता, गोदान, पूण प से बैठना, व ान्, सोमरस का दान व धन हेतु ाथना ६-१२

१७.

अ न क तु त १-७ कुश फैलाने, आ य लेने, स करने व संप याचना १-७

१८.

दे ने हेतु अनुरोध, ह वाहक, धन

इं एवं सुदास का वणन १-२५ धन ा त, शोभा पाना १-२ कृपा याचना, तो

पी बछड़ा, प णी नद , सुदास, तुवश, श ुनाशक ३-७

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क व का वध, खेत म जाना, मनु य का वध, ुत, कवष, वृ



, तृ सु ८-१३

सै नक का वध, तृ सु, सुदास, धन दे ना, वश म करना, भट १४-१९ दे वक व शंबर का वध, इं क कामना, राजा दे ववान के नाती व सुदास, सुशो भत घोड़े, यु याम ध का वध, घर क र ा हेतु क ाथना २०-२५ १९.

इं क तु त १-११ धन दे ना, कु स क र ा, श ुनाशक, दभी त वृ व नमु च, जोड़ना १-६ र ाथ तु त, धन वामी, दानी, उ मुख बनाना, अ , घर दे ने व र ा हेतु तु त ७-११

२०.

इं क तु त १-१० ओज वी, श ुजेता, सोमरस से से वत, संसार के वामी, धन मांगना १-७ व धारी, धन व र ा हेतु तु त ८-१०

२१.

इं क तु त १-१० बात बताना, कुश बछाना, कांपना, असुरघाती, उ साह दखाना १-५ वृ वध, हीन मानना, बुलाना, र क, र ाथ ाथना ६-१०

२२.

इं क तु त १-९ सोमरस तैयार, नशीला सोमरस, शंसा, तु त समझने हेतु ाथना, यशवाला नाम, सवन १-६ तो , श

२३.

व धन जानना, तो

नमाण ७-९

इं क तु त १-६ अ हेतु तु तयां, आयु न जानना, श ुसमूह के नाशक आ ान, पु व धनदाता, पूजन १-६

२४.

इं क तु त १-६ थान बनाना, मन हण करना, बुलाना १-३ श

२५.

शाली पु , धन र ा हेतु तु त ४-६

इं क तु त १-६

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धनसमूह, यश व र न हेतु तु त १-३ नयु , सुखकर तु तयां, र ाथ ाथना ४-६ २६.

इं का वणन १-५ मं समूह, आ ान, नग रय का नाश, र ासाधन, र ाथ तु त १-५

२७.

इं क तु त १-५ आ ान, आ त, वामी, धन व र ा याचना १-५

२८.

इं क तु त १-५ आ ान, असहनीय, य हीन क तु त १-५

२९.

हसा,

का धन मांगना, र ा के लए

इं क तु त १-५ धन मांगना आ ान, तु त, आ ान, र ा हेतु तु त १-५

३०.

इं क तु त १-५ श

३१.

शाली, आ ान, य म थत होना, शूर, र ा हेतु तु त १-५

इं क तु त १-१२ ह र नामक अ , शत तु, स यधन १-३ तु त, नदक के वश म न होने व श ुनाश हेतु ाथना, महान्, तु त मलने हेतु ाथना, णाम, ह नमाण, श ु क हार के लए तु तयां ४-१२

३२.

इं क तु त १-२७ आ ान, समपण, अनुगमन, आ ान, धन मांगना, १-६ घर हेतु ाथना, ह पूरा करना, बुरे आदमी का साथ न दे ना, गोशाला म जाना, र क बनने क ाथना, संर त यजमान ७-१२ आक षत करना, वग व भ व य म अ मलना, पाप से पार होने के लए ाथना, उ म धन के राजा, र ा न म धन दे ने व धन वामी बनाने का अनुरोध, धनी १३-१९

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ने म, धन का हसक के पास न जाना, सोम भरना, आ ान, धन याचना, सफलता हेतु ाथना २०-२७ ३३.

व स एवं उनके पु चोट , व स पु

का वणन १-१४

को वीकारना, सुदास, पतर, तृ सु को रा य दे ना १-५

व स , वरण, म हमा, घूमना, याग, धारण करना ६-११ व स , अग य, सोम धारण १२-१४ ३४.

व भ दे व क तु त १-२५ अ भलाषापूरक, तु त, उ प आ ह १-५

जानना, तु त, सोने के हाथ, य माग पर चलने का

य धारण करने का आ ह, उदय, य कम करना, उ वल कम करने का अनुरोध, व ण, रा के राजा, र ाथ तु त, पाप र करने व र ा हेतु याचना, म बनाने का आ ह ६-१५ तु त, हसक को न स पने क ाथना, श ु के मरने क कामना, धरती, व ा से धन याचना, र ा हेतु ाथना १६-२५ ३५.

गो, अ , ओष ध, पवत, नद , वृ आ द का वणन १-१५ शां त हेतु ाथना, नाराशंस, तु त सुनने का अनुरोध, र ा एवं पु हेतु दे व से ाथना १-१५

३६.

व भ दे व क तु त व न दय का वणन १-९ वषा का जल, नणायक, मेघ, आ ान, म ता चाहना, सधु, य व पु क र ा हेतु तु त, कम के र क, र ाथ तु त १-९

३७.

व भ दे व का वणन १-८ म त सोम, धन व र न हेतु ाथना, धन से पूण हाथ, य साधक, धनदाता १-५ आ याथ तु त, बलदाता, धन व र ा क याचना ६-८

३८.

स वता का वणन १-८ रमणीय, धनदाता, र ा याचना १-३

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तु त, वग व धरती के म , धन र न मांगना, रोग नवारणाथ तु त, वाजी दे वता से र ा हेतु तु त ४-८ ३९.

व भ दे व का वणन १-७ उषा, घो ड़य के वामी, रमण, य याचना १-७

४०.

का अनुरोध, आ ान, धन, अ

व र ा हेतु

व भ दे व क तु त १-७ सुख व धन हेतु तु त, बलवान बनाने हेतु ाथना, पापनाशाथ तु त, मह वदाता, जल व अ दे ने का आ ह, र ा हेतु ाथना १-७

४१.

अ न, इं , व अ नीकुमार आ द का वणन १-७ आ ान, धन याचना, गाय, घोड़े, धन व पु मांगना, तु त, धनी होने क कामना, आ ान, भग को लाने क याचना, र ा हेतु तु त १-७

४२.

व भ दे व क तु त १-६ न दयां, काले व लाल घोड़े, पूजा, धन दे ना, य याचना व र ाथ तु त १-६

४३.

व भ दे व क तु त १-५ अचना, श ु क सहायता न करने क ाथना, धन मांगना १-५

४४.

वीकार करने के लए क तु त, धन

ाथना, धन लाने और स होकर आने क

द ध ा दे व का वणन १-५ र ाथ आ ान, े रत करना, पीले घोड़े, मुख द ध ा, अनुगमनक ा १-५

४५.

स वता का वणन १-४ आ ान, भुजाएं, धन याचना १-४

४६.

क तु त १-४ आयुध वामी, रोगहीन करने व र ा के लए आ ान, पु -पौ र ाथ नवेदन १-४

४७.

जल क तु त १-४

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क ह या न करने व

तु त, सोमरस क र ा हेतु ाथना, हवन, धन मांगना व र ा हेतु ाथना १-४ ४८.

ऋभु

क तु त १-४

हतकारी रथ, वाज से र ाथ ाथना, श ुनाशक, धन व र ा हेतु ाथना १-४ ४९.

जल का वणन १-४ जल दे वता से र ा याचना १-४

५०.

म , अ न व व ण क तु त तथा वृ

का वणन १-४

सांप, द तशाली, शपद रोग नवारण के लए तु त १-४ ५१.

आ द य का वणन १-३ घर दे ने व र ाथ ाथना १-३

५२.

आ द य का वणन १-३ तु त, पु -पौ

५३.

क र ा हेतु ाथना, धन हेतु तु त १-३

ावा-पृ वी का वणन १-३ जननी, धन हेतु आ ान, र ा व धन हेतु याचना १-३

५४.

वा तो प त (गृहदे वता) का वणन १-३ धन, रोगर हत घर दे ने व र ाथ ाथना १-३

५५.

वा तो प त व इं क तु त १-८ रोगनाशक, ेत, पीले कु े, चोर, लुटेरे, सूअर वद ण करना, लोग का सोना, शांत व न ल घर १-६ सूय का उदय होना, सुलाने क कामना ७-८

५६.

म द्गण क तु त १-२५ महादे व के पु , ज म, पधा करना १-३ सवाग ेत, जा का पु वान होना, अलंकृत ४-६ म त क तु त ७-९

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तृ त, सजाना, शु

करना १०-१२

गहने, य भाग सेवन हेतु तु त, धन याचना, उ सव दशक, आ ान, शंसा १३-१८ र क, पु -पौ मांगना, धन का भागी बनाने हेतु नवेदन, श ु र ाथ ाथना, अ पाना, पु के श शाली होने व र ा के लए ाथना १९-२५ ५७.

म त क तु त १-७ उ , कामनापूरक, आभूषण धारण, कृपा, अ तु त १-७

५८.

ारा पु

होने एवं र ा हेतु

म त क तु त १-६ सवा धक बु

मान्, ज म, अ व धनवृ



र ा हेतु तु त १-६ ५९.

म त क तु त १-१२ भय से बचाने का अनुरोध, रोकना, सोमपान व सरी जगह न जाने के लए ाथना १-५ पुकारना, आ ान, ःखदाता का वध करने व ह व सेवन के लए ाथना, आ ान, मृ युबंधन से छु ड़ाने हेतु ाथना ६-१२

६०.

सूय, म , व ण, आ द य आ द क तु त १-१२ सूय क तु त, पाप और पु य दे खना, सूयरथ, पुरोडाश, पापनाशक, व ण और अयमा, आ द य, म व व ण १-६ धरातल होना, करने वाले कम न करने व थान दे ने के लए आ ह, सुखी बनाने हेतु तु त, नवास थान बनाना, ःखनाश हेतु तु त ७-१२

६१.

म एवं व ण क तु त १-७ उदय होना, तु त, प र मा, बु तु त १-७

६२.

बढ़ाने क याचना, स ची तु तयां, आ ान,

म व व ण क तु त १-६

सूय से ाथना, नरपराध बताने के लए तु त, धन दे ने व अ भलाषा पूरी करने हेतु ाथना, र ाथ ाथना, भू म को स चने, र ा व धन हेतु तु त १-६ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

६३.

सूय व व ण का वणन १-६ अंधकार का नाश, सूय को ख चना, उ दत होना, कम करना, माग, र ा व धन हेतु अनुरोध १-६

६४.

म व व ण क तु त १-५ जल वामी, अ , वृ , संतान व नवास हेतु तु त, र ाथ याचना १-५

६५.

म व व ण क तु त १-५ आ ान, श

६६.

शाली, ःख से पार पाने हेतु याचना, जल व अ मांगना, तु त १-५

आ द य, व ण, म , अयमा आ द का वणन १-१९ तो , धारण करना, र क, धन याचना, पापनाशाथ ाथना, वामी, तु त, श तु त, अ व जल याचना, श ुजेता, नवासदाता १-१०

,

ऋचा क रचना, धन याचना, धन के अ धकारी, मंडल, हरा घोड़ा, ग तशील, कामना, आ ान ११-१९ ६७.

अ नीकुमार क तु त १-१० रथ सामने लाने हेतु तु त, उदय, रथ से आने, व धन दे ने हेतु तु त, कम से धन दे ने क ाथना १-५ मनचाहा धन हेतु ाथना, आ ान, न दयां, गो व अ दाता, र न, उ त व र ा हेतु तु त ६-१०

६८.

अ नीकुमार क तु त १-९ ह भ ण हेतु आ ान १-४ धन याचना, यवन ऋ ष, भु यु, वृक ऋ ष, बूढ़ गाय, तु त ५-८ तोता को बढ़ाना ९

६९.

अ नीकुमार क तु त १-८ रथ, तु त, पा , पीड़ा दे ना, र क, आ ान, बुलाना भु यु, र न एवं र ा हेतु आ ान १-८

७०.

अ नीकुमार क तु त १-७

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आ ान, वषा, पवत क चोट , र न याचना, तु त, र ा हेतु ाथना १-७ ७१.

अ नीकुमार क तु त १-६ धन व र ा हेतु तु त, आ ान, रथ, यवन, तु त १-६

७२.

अ नीकुमार क तु त १-५ आ ान, म ता, जगाना, तेज धारण, आ ान १-५

७३.

अ नीकुमार क तु त १-५ आ ान, तु त वीकारने क याचना, र ा हेतु आ ान १-५

७४.

उषा का वणन १-६ र ा, सोमपान व जलदोहन हेतु आ ान १-४ यश एवं घर मांगना ५-६

७५.

उषा क तु त १-८ काश फैलाना, सौभा य मांगना, दशनीय, पहचानना, धनयु , र न दे ने वाली, गाय ारा कामना, अ से यु धन क याचना १-८

७६.

उषा क तु त १-७ दे व का ने , आगमन, तेज, मु दत होना, तेज से मलना अ दा ी १-७

७७.

उषा का वणन १-६ काश फैलाना, सुडौल, तेज वी धन एवं र ा हेतु तु त १-६

७८.

उषा का वणन १-५ करण फैलाना, पाप न करना, ज मदा ी, भात करने वाली, नेहयु ाथना १-५

७९.

उषा का वणन १-५ जमाना, अंधकारनाशक, धन धारण, वृषभ तो , धन याचना १-५

८०.

उषा का वणन १-३

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करने हेतु

जगाना, आगे चलना, र ाथ तु त १-३ ८१.

उषा क तु त १-६ शोभनने ी, अ याचना, सुख वहन,

८२.

य होने, धन, यश व नवास हेतु नवेदन १-६

इं व व ण क तु त १-१० गृह याचना, बल दे ना, आ ान, ा णय का नमाण, बाधक बल १-६ पाप व संताप मलना, मै ी, आ ान, धन व घर के लए तु त ७-१०

८३.

इं व व ण क तु त १-१० यजमान, लड़ना, फसल का नाश, भेद का वध र ा के लए तु त, तृ सु यु म न टक पाना, सुदास १-८

क र ा,

सुख, धन और घर हेतु तु त ९-१० ८४.

इं व व ण क तु त १-५ घी का चमचा (जु ), नवास थान व धन याचना, पु -पौ क र ा हेतु तु त १-५

८५.

इं व व ण क तु त १-५ यु म र ा व श ुनाश हेतु तु त १-५

८६.

ाथना, आ ान,

जा पालन व आ ान, र ाथ

व ण क तु त १-८ धरती वशाल बनाना, दे खने क इ छा, पाप पूछना, अजेय पाप मु व , ान संप करने व र ाथ ाथना १-८

८७.

हेतु ाथना

व ण का वणन १-७ जल दे ना, जगत् क आ मा, सहायक, इ क स नाम १-४ सूय को झूला जैसा बनाना, जल नमाता व सागर थर करने वाले, अपराधी पर भी अनु ह ५-७

८८.

व ण का वणन १-७ धन वामी, नचोड़ा गया सोमरस, नाव चलाना १-३

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नाव पर चढ़ाना, वशाल घर, घर व र ा क याचना ४-७ ८९.

व ण क तु त १-५ मट् ट का घर, सुख व दया हेतु, ाथना १-४ दे व के

९०.

त ोह ५

वायु एवं इं क तु त १-७ आ ान, धनपा , वायु धन के लए उ प , गोधन मलना १-४ धन, सुख आ द के लए ाथना ५-७

९१.

वायु एवं इं क तु त १-७ संगत करना, धन याचना, सेवा, करना १-३ सोमपान करने, पापमु

९२.

व र ा हेतु आ ान ४-७

वायु एवं इं क तु त १-५ सोमपान हेतु आ ान १-२ ऐ य हेतु ाथना, श ुनाशक, क याण हेतु ाथना ३-५

९३.

इं व अ न क तु त १-८ अ हेतु तु त १-२ पुकारना, धन हेतु तु त, श ुनाशाथ ाथना, अ याचना, र ाथ तु त ३-८

९४.

इं व अ न क तु त १-१२ तु त, य पूरा करने श ुनाश के लए तु त, र ाथ आ ान १-६ सुख, अ , धन के लए तु त, जनसेवा के लए आ ान, सेवा, अपह ा क संप के नाश हेतु ाथना ७-१२

९५.

सर वती नद का वणन १-६ बढ़ना, सागर तक जाने वाली, य यो य

ी, धनसंप

१-४

अ , धन व पालन हेतु तु त ५-६ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

९६.

सर वती नद व सर वान् दे व का वणन १-६ तु त, अ हेतु तु त, क याण याचना, प नी व पु क कामना से तु त, र ाथ हेतु, सर वान् क तु त १-६

९७.

इं , म , बृह प त आ द क तु त १-१० आ ान, धन याचना, ह , वरे य, अ मांगना १-५ काशयु घोड़े, अ दे ना, जल क रचना, य र ा, श ुसेना के संहार व पालन हेतु ाथना ६-१०

९८.

इं व बृह प त का वणन १-७ गौरमृग, सोमपान के लए आ ान, ज मते ही सोमपान, यु जीतने व वजय पाने क ाथना, सोमरस केवल इं के लए, हतकारक, धनदाता व पालक बृह प त क तु त १-७

९९.

इं एवं व णु क तु त १-७ वामन अवतार, म हमाशाली, ावा-पृ थवी को धारण करना, इं क नग रय का नाश १-५ अ वृ

१००.

व पालन हेतु तु त ६-७

व णु क तु त १-७ धन ा त, धन याचना, तीन चरण रखना, तु त, तेज वी पालन हेतु ाथना १-७

१०१.

ारा उ प , शंबर

प न छपाने हेतु ाथना,

बादल का वणन १-६ अ न क उ प , घर व सुख याचना, शरीर बदलना, जल बरसाना, फलवती ओष धय क कामना, शतायु हेतु ाथना १-६

१०२.

बादल का वणन १-३ गभधारण करने व अ हेतु तु त १-३

१०३.

मढक का वणन १-१० वषभर सोना, ‘अ खल’ श द करना १-३

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भूरे व हरे मढक, अनुकरण, एक नाम और भ प वाले, अ तरा य , बल म छपे मढक, गड् ढ से नकलना आयुवृ हेतु ाथना ४-१० १०४.

इं एवं सोम क तु त १-२५ रा स के वनाश हेतु तु त, आ ान, रा स के नाशाथ कामना, आयुध उ प ाथना, साधन १-५

हेतु

तु त भेजना, रा स का संहार करने व उ ह दे ने व पु हीन करने आ द हेतु ाथना ६-११ स य व अस य म वरोध, व बचाने हेतु ाथना १२-२५

तेज करना, र ाथ आना, रा स के नाशाथ व पाप से

अ म मंडल सू १.

वषय

मं सं.

इं क तु त १-३४ अ भलाषा, श ुनाशक, र ाथ तु त, वप यां पार करना, व धारक, १-६ गान, श ुनग रयां तोड़ना, शी गामी घोड़े, गाय क तु त, आ मण हेतु जाना ७-११ सुधारना, व धारी, वृ हंता, स करना, कामना, जल हना १२-१७ तु त सुनने हेतु ाथना, सोमरस दे ने का आ ह, भयानक, जेतापु दे ने क धनदाता, वशाल उदर १८-२३

ाथना,

सोमपान हेतु ाथना, टोप पहनना, पीछा करना, नवासदाता २४-२९ हारना, घोड़े जोड़ना, आसंग राजा, आगे नकलना, भोगसाधन ३०-३४ २.

इं का वणन १-४२ नभय, घट, वा द बनाना, अ यु , तु त १-५ सोम बनाने का आ ह, सोम खोजना, स करना ६-९ द तशाली, समझना, यु , धनी होना, उ थ जानना, श ु को न दे ने क

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ाथना १०-१५ तु त, व धारी, नशीला सोम, आ ान, असह्य, जानना १६-२१ र ासाधन यु , वीर, पशु याचना व सोमरस याचना, आ ान, सेवनीय म , आ ान, वृ करना २२-२९ श

धारण, वृ नाश, अनुकूल बनना, अ दे ना, ह

वहन, र क ३०-३६

स होना, पालक, दे व का, मेधा त थ ऋ ष, गोदान, तु त ३७-४२ ३.

इं क तु त एवं राजा पाक थामा का वणन १-२४ स रहने व सुखी करने क

ाथना, वामी, म हमागान, आ ान १-५

व तार करना, तु त, ओज बढ़ाना, भृग,ु क व, म हमा, धन याचना, पु , आ द, म हमा, धन वामी, पूजन, दशनीय ६-१७

शम

तु त, अबुद व मृग का हनन, काशन, शोभा पाना, लाल घोड़ा, भु यु, तु त १८-२४ ४.

इं , अ नीकुमार एवं पूषा क तु त १-२१ अनुपु , क वगो ीय ऋ ष, आ ान, श महान काय, ढकना १-८

धारण, धराशायी होना, वीरपु क

ा त,

सभा म जाना, धन वामी, इं का आना, सोमरस रखना, सुशो भत होना, ह र नामक घोड़े, पाप ाता, धन दे ना, कामना, व , साम ाता प , द तशाली, धन ा त १२-१९ मेधा त थ, स होना २०-२१ ५.

अ नीकुमार क तु त १-३९ काश फैलाना, रथ म जुड़ना, ाथना, तु त, घर जाना, ह दाता १-६ आ ान, पशु, अ , धन मांगना, सोमपान क धनवहन हेतु ाथना ७-१६

ाथना, धनी, तु तय क र ा व

बुलाना, तु त समूह समीपवत होने, सोमपान करने, अ व स रता को लाने क ाथना, भु यु, क व, धनस प , आवत, अ आ द, अं , अग य १७-२६ धन याचना, आ ान, रथ, आ ान, धन, बल, आ द लाने का आ ह शी गामी घोड़े, ******ebook converter DEMO Watermarks*******

प हया, अ मांगना २७-३६ कशु, कशु सा दाता व व ान् अ य नह ३७-३९ ६.

इं का वणन १-४८ बढ़ना, तु त, य भाई, णाम, सर काटना, मलाना १-८ अ व कृपा याचना, बलधारण, बढ़ना, अतुल, भेजना, व जल म वृ का हनन ९-१६

चलाना, अतुल श

,

वलीन करना, भृगुगो ीय ऋ ष, ध-घृत दे ना, गाय ारा गभधारण, बढ़ाना, आयोजन, गाय व पु दे ने क इ छा करने क ाथना, न ष, गोशाला, अजेय, तु त १७-२७ संगम, सागर, द त ा त, श वधन, बु बढ़ाने क अजर, आ ान, अनुगमन, शयणा दे श २८-३९ श द करना, एकमा मलना ४०-४८ ७.

ाथना, व तार, यो य बनना,

वामी, अ याचना, उ थ, वीकारना, आ ान, धन हण, वग

म द्गण क तु त १-३६ का शत होना, कांपना, दान, बखेरना, माग नयत, आ ान, आगमन, थत रहना, तो , सोमरस हना, आ ान, शोभन ान, नशा टपकाना १-१३ मतवाला होना, सुख मांगना, मेघ हना, ऊपर जाना, यान, अ वृ बल बढ़ाना, संयोग, उ साह धारण, र ा, टोप पहनना १४-२५

, कुश उखाड़ना,

कांपना, म त का आना, गमन काल, जाना, तु त य, आयुधयु , दयालु बनाना, थर रहना, अ दे ना, थत होना २६-३६ ८.

अ नीकुमार का वणन १-२३ दशनीय, ानी, आ ान, व स ऋ ष, आ ान, सूया, मधुर बोलना, वहन, संप , स य वभाव, वधन, धन व सुखाथ तु त १-१६ श ुभ क, बुलाना, रोगनाशक, क व, मेधा त थ, आ ान १७-२३

९.

अ नीकुमार क तु त १-२१

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सद यु, श ुनाशक,

जाना, धन याचना, अनु ान, जानना, पाक धारण, पास आना, तो जानना, आना, ले जाना, तु त, आ ान वजयी, र ासाधन, ह नमाण १-१४ धन याचना, दे वी, य म जाना, सोमलता नचोड़ना, ाथना १५-२१ १०.

अ नीकुमार क तु त १-६ बुलाना, य

११.

ाता, नकट आने क

ाथना १-६

अ न क तु त १-१० शंसनीय, य नेता, अलगाने क

ाथना, इ छा न करना, अमर १-५

बुलाना, कामना, मा लक ६-८ व च धन वाले, सौभा य याचना ९-१० १२.

इं क तु त एवं वणन १-३३ याचना, र ा, भेजना, जानने क धन मलना, क याण दे ना १-७

ाथना, अ भलाषाएं पूर करना, क याण करना,

बल बढ़ना, जलाना, तु त का समीप जाना, पुनीत करना, सीमा बांधना, मु दत करना, तो उ प , तु त, स होना, कामना ८-१९ बढ़ाना, धनदान, वामी बनाना, तु त, द त होना, नापना, बांधना, नय मत करना, तु त भेजना, धरती क ना भ य , पशु याचना २०-३३ १३.

इं क तु त १-३३ प व करना, बढ़ाना, बुलाना, आ तयां, धना भलाषा, तु त, फल दे ना, शंसा, पालक १-९ घर जाना, सुख मलना, े श शाली, आ ान, स होने व धन दे ने क ा रखना, बढ़ाना, क क, तु त १०-१९ तु त, सोमपान, याचना, आ ान, तुत, अ हणाथ ाथना २०-२८

याचना, दया ा त आ ान, ह

उ रवेद , यो य फल, शत तु, इ छापूरक, आ ान २९-३३ १४.

ाथना,

इं क तु त १-१५

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धन वामी, श शाली, पशुदान, इं का न कना, मेघ हना, धनजेता, अंत र बढ़ाना, मेघ का नाश १-७ बल असुर का नाश, ढ़ करना, तु तय का जाना, केशधारी घोड़े ८-१२ सर काटना, १५.

धा करना, वरोधीनाशक १३-१५

इं क तु त १-१३ तुत इं , जलधारक, वध, शंसा, य क ा १-५ पूववत् तु त, बल का बढ़ना, यश बढ़ाना ६-९ ज म लेना, अव य, र ाथ तु त, शंसा का आ ह १०-१३

१६.

इं क तु त १-१२ शंसनीय, ह ा , सेवा, आ ान, वामी बनाना, श ुजेता, बढ़ाना, तु य, आ त, धन व माग याचना १-१२

१७.

इं क तु त १-१५ सोमरस नचोड़ना, बुलाना, शोभन शर ाण, पूण करना, सोम, वशेष श ुनाशक, जगत् वामी, धनदाता १-११

ा,

आ ान, कुंडपाट् य य , सखा, भ ा १२-१५ १८.

अ द त का वणन एवं आ द य क तु त १-२२ सुख याचना, पालक, माग, सुख मांगना, ब त के य, रा स को अलगाने का ान, अ द त, तु य, सुख याचना, आरो य, सुख याचना, श ु को र रखने क ाथना, पा पय के भी ाता, पापी के न होने, व श ु को पाप ा त करने क ाथना १-१४ प रप व ाता, वरण, नाव, द घायु व सुख याचना १५-१९ घर मांगना, आयु बढ़ाने क

१९.

ाथना २०-२२

अ न का वणन एवं तु त १-३७ ह दे ना, नयंता, शोभनक ा, तु त, सेवा, द त होना, वामी, फलदाता, सेवनीय १-९

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ऊ वग त, दे व के पास जाना, नवासदाता, समृ काशमान होना, यान १०-१७

बनना, यश ा त,

कामना, तृ त, जेता, मनु ारा था पत, न य त ण, आ त, बलपु

ोध दबाना,

१८-२५

अपवाद, भ ा, सेवा क कामना, बु र क, म ता बढ़ना, वणशील, सद यु, समा हत, फल पाना, श ुजेता २६-३५ प नय का दान, धन, व २०.

आ द दे ना ३६-३७

म द्गण क तु त १-२६ कंपाना, अ भल षत, बल ाता,

प का गरना, श द करना १-५

ऊपर जाना, नेता, वीणा, उ मग त, सेचन समथ आयुध, वजय, एक नाम होना, दान, भ बनना, सुख फैलाना, जलक ा, सेवा, शंसा करना, यश वी, समान जा त, ६-२१ म ता, सखा, श ुशू य, रोग भगाने क २१.

ाथना २२-२६

इं क तु त १-१८ प धरना, वरण, सेनाप त, आ ान, तु त, व धारी, म ता जानना, धन, गाएं, घोड़े लाना, वृ क ा १-११ आ त, बांधवहीन, धन दे ना, बैठने का आ ह, अ य धन, सौभ र, धन दे ना १२-१८

२२.

अ नीकुमार क तु त १-१८ रथ बुलाना, तु त का आ ह, श ुजेता, प हए चमकाना, खेती, तृ त करना, सोमरस नचोड़ना १-८ धनवषक, इलाज क बली ९-१८

२३.

ाथना, आ ान, वरे य, तु त, बुलाना, र क, दशनीय,

अ न का वणन १-३० बाधाहीन, रथदाता, पू य, आ य, ह यु १-९

वालाएं, शोभन तु तयां,

होता, दशन, धन याचना, जापालक, ह व दे ना, त, अजर १०-२० ******ebook converter DEMO Watermarks*******

शंसा, तृ त,

ऋ ष, थापना, य यो य,

ा त, साथ जाना, सेवा, थूलयूप ऋ ष, तु त, तु य, गान, अ -धन मांगना, यश वी २१-३० २४.

इं क तु त १-३० व धारी, वृ हर, अ वामी, धन याचना, नबाध, धन हेतु ाथना, आ ान, आ त, पूजनीय, नचाने वाले १-१२ अ , धन दे ना, ऋ ष का पु , तु य नह , अलंघनीय, बुलाना, तु य, द तशाली, वीरता के कम, पूजनीय १३-२२ दसवां ाण, ान, कु स, धन याचना, पाप ाता, कनारे व का वास २३-३०

२५.

, प रजन, व , गोमती के

म , व ण, अ द त, अ नीकुमार आ द का वणन १-२४ र क, वामी, उ प , य काशन, धनदाता, अ दाता, सुशो भत, स ययु , ेरक, वेगवान्, र ाथ ाथना, शोभनदाता १-११ धनदाता, आ य, दपनाशक, ताचरण, काश फैलाना, म , पूण करना १२-१९ धन वामी, तु त, राजा व , अ

२६.

ा त २०-२४

अ नीकुमार, इं वायु आ द क तु त १-२५ आ ान, स य प, अ यु

धनी, समथ, अ भलाषापूरक जलपालक १-६

अजेय, बुलाना, प ण, नेता, धन दे ने, क याण करने व सोमपानाथ आ ान ७-१५ त, ेतयावरी नद , पोषक, नवास थान दाता, धन मांगना, शोभन ग त वाले, आ ान, अ , धन मांगना १६-२५ २७.

व भ दे व क तु त १-२२ थापना, नकट, तेज सारक, श ुनाशक, बैठने क र हत घर मांगना १-९

ाथना, बुलाना, तु त, बाधा

श ुनाशक, तु त, काम म लगना, आ ान, धनदाता, तु त, अ बढ़ना, र क, गमन सरल बनाने क ाथना १०-१८ घर याचना, धन धारण, धन मांगना १९-२२ २८. व भ दे व क तु त १-५ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

धन याचना, बुलाना, र ाथ ाथना १-३ अ य अ भलाषाएं, सात द तयां ४-५ २९.

व भ दे व का वणन १-१० गहने, थान पाना, कु हाड़ी, व , एकाक , मागर क, तीन कदम १-७ सूया के साथ रहना, थान बनाना, द तशाली बनाना ८-१०

३०.

व भ दे व क तु त १-४ सभी दे व महान्, तु त, रा स से बचाने, सुख, गाय व घोड़ा दे ने क

३१.

ाथना १-४

य का वणन १-१८ बार-बार बोलना, पाप से बचाना, रथ आना, अ पाना, सोमरस म गो ध, अ ा त, सेवा करना, सेवनीय आयु ा त, दान करना, सेवनीय १-११ पापर हत दान, र क, धन हेतु तु त, दे वकामी, जीतना, पु

३२.

ा त १२-१८

इं क तु त १-३० वणन का आ ह, सु वद, अनश न, प ु आ द का वध, महान्, श ुनाशक, ार खोलना, अ दाता, स तादाता, धन क अ धकता, गाय, घोड़ा सोना व अ मांगना, र ाथ आ ान १-१० अ दाता, दानशील, शोभन त, धन वामी, अ नयं त, दे वऋण न रहना, तो बनाने का आ ह, तु य, सोमपान हेतु ाथना, पास आने व धन दे ने क ाथना, जल धाराएं गराना, असुरवध ११-२६ श ुनाशक, य कम बताना, इं को लाने क

३३.

ाथना, ह र नामक घोड़े २७-३०

इं क तु त १-१९ सेवा, तु त, अ याचना, रथ, शोभनकम, अ भलाषापूरक, श ुनगर-नाशक, मणक ा, पुकार सुनना, स , सोने का हंटर, ह र नामक अ , धनी, वृ हंता, तोम य , स न होना, ी पर शासन असंभव १-१७ रथ,

३४.

ी होना १८-१९

इं क तु त १-१८

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शासक, सोमलता को कंपाना, आ ान, द त ह व वाले, व र क १-६ धनयु , तु य, पंख ढोना, वाहा बोलना, उ थ मं , आ ान, वग जाने, गाएं, घोड़े तथा मनचाही व तुएं दे ने क ाथना ७-१५ घोड़े लेना, तेज वी घोड़े, पारावत १६-१८ ३५.

इं क तु त १-२४ सोमपान, अ , तो वीकार करने का आ ह, सोमपान क ाथना, बल, धन व संतान क याचना, अं गरा, व णु आ द के साथ तो सुनने का आ ह, गाय -अ को जीतने व रा स के नाशाथ तु त १-१८ यावा , सोमपान हेतु आ ह, र ाथ बुलाना, र न याचना १९-२४

३६.

इं क तु त १-७ र क, स जनपालक, जनक, श ुजेता, घोड़े व गाय के जनक, अ गो ीय ऋ ष, यावा , सद यु १-७

३७.

इं क तु त १-७ वृ हंता, र ाथ व तु त सुनने हेतु ाथना, वामी होना, बल दे ने का कारण, सद यु र क १-७

३८.

इं व अ न क तु त १-१० ऋ वज्, अजेय, सोमरस तैयार होना, य नेता, ह वहन, तु त वीकारने व सोमपान क ाथना, श ुधन जेता, बुलाना, र ा हेतु ाथना १-१०

३९.

अ न का वणन १-१० तु त, श न ु ाशाथ ाथना, हवन, सुखकारी, ओर जल १-१०

४०.



, रह य जानना, मांधता त, चार

इं व अ न क तु त १-१२ हराना, य करना, यु

म रहना, धन धारण १-४

सागर ढकना, श ुनाशाथ ाथना, आ ान, धनभोग कामना, आ ान, न दय को खोलना, ेरक, जल जीतना ५-१० शु ण क संतान का वध, तु तयां बोलना ११-१२ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

४१.

व ण का वणन १-१० पशुर क, शंसा, नाभाक ऋ ष, आ लगन, संसार, धरती नमाता, का का थत होना, श ुनाशाथ ाथना १-७

पोषण,

माया का नाश, व ण का थान, ावा-पृ थवी के धारक ८-१० ४२.

व ण व अ नीकुमार क तु त १-६ स ाट् बनना, अमृतर क, नाव, सोमपान व श ुनाशाथ ाथना १-६

४३.

अ न क तु त १-३३ बु मान्, जातवेद, वनभ ण, अलग जाना, झंडा, काली धूल, शांत न होना, झुकाना १-८ वेश, ुच, सेवा, याचना, आ ान, सखा, ह दाता, अ

वामी ९-१६

तु तय का जाना, स करना, तु त, आ ान श ुनाशक तु त १७-२४ हतकारी, े षय के संहारक, मनु त व ा २५-३०

ारा

व लत, आ ान अ

दे ना,

याचना, अंधकारनाशक, धन याचना ३१-३३ ४४.

अ न क तु त १-३० य, कामना हेतु ाथना, थापना, करण का उठना, धनयु , ुच, तु त, से वत, े अ न, आ ान, व तुएं मांगना, श से उ प , मेधा वय के संग बढ़ना, आ ान, बैठना, धन मलना १-१५ कूबड़, े रत करना, धन वामी, स करना, कामना, मेधावी, म ता जानने का आ ह, आशीवाद स य होने हेतु ाथना, अनु ह म रहने क ाथना, तु तय का प ंचना १६-२५ न यत ण, य नेता, प व क ा, जागृत रहना, उमर बढ़ाने क

४५.

ाथना २६-३०

इं का वणन व तु त १-४२ कुश बछाना, स मधाएं, झुकाना, बाण उठाना, ढ़ करना, धान रथी, अ दाता बनने, रथ लाने व पास जाने क ाथना १-१०

उप वहीन, सुखसाधन दे ना, र क, व तुएं मांगना, धन लाने हेतु ाथना, पशु दे खना, ******ebook converter DEMO Watermarks*******

आ ान, पुकार सुनने, गाय दे ने के लए जागने क अजेय, सोमरस दे ना, धन बनाना २१-३०

ा त, क

सुख मांगना, स होना, शोभन स दे ना, धन लाने क ाथना ३१-४२ ४६.

ाथना, बलप त ११-२०

ऋ ष, अह्नवा य, तु त,

शंसा, माग

यां, शूर, पापनाशी, बात कहना, एवार, धन

इं , वायु एवं सोमरस क तु त १-३३ अ वामी, धनदाता, तु तगान, म द्गण, य पूरा होना, बढ़ना, धन मांगना, सेना, धन छ नना, आ ान, व तुएं दे ना, आ ान १-१२ आगे रहना, श ुजेता, अ , धन एवं पु ा द हेतु ाथना, श ुरोधी, गुणगान, गरना, बु नाशक, सहनशील १३-२० पृथु वा, वश, रथ ख चना, क त मलना, तु त, मलना, अ , न ष आ द, अ भेजना, गो- ा त २१-२९ बैल का आना, पृथु वा, गो व अ

४७.

ा त, युवती को लाना ३०-३३

म , व ण, आ द य एवं उषा क तु त १-१८ शोभन र ाएं, सुख व धन मांगना १-७ पाप र ाथ ाथना, माता अ द त, सेवनीय, शोभन माग पर ले जाने, शोभनपु दे न,े पाप से र रखने, क से बचाने हेतु ाथना व बुरे थान को र करने व बुरे सपन से बचाने क दे व से ाथना ८-१८

४८.

सोम क तु त १-१५ घूमना, धन वहन क ाथना, अमर सोम, आयु बढ़ाने, भचार से बचाने व धनी बनाने क ाथना, आयु बढ़ाने का आ ह, श ु का जाना, सुख याचना, सखा सोम १-१० आयु बढ़ना, दय म वेश, व तार करना, तु तयां बोलने व र ाथ ाथना ११-१५

४९.

अ न क तु त १-२० वरण, तु त, मननीय तो , यजमान, र क, प व , पूजक र ाथ श वामी, यजन १-१०

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ाथना,

शंसनीय धन मांगना, कं पत करना, धन मांगना, जलाना, तु त, आ ान, तु त, जापालक, पीड़ा से बचाने क ाथना ११-२० ५०.

इं क तु त एवं वणन १-१८ आ ान, सं कार, धनी, स यर क, शूर, वणदे ह, धन व पशु दे ने क

ाथना १-७

नगर भेदक, आनंद क ा त, धन वामी, म बनाना, मलाना, धन वामी, बुलाना, वृ हंता, र ाथ ाथना, मलना ८-१८ ५१.

इं क तु त १-१२ बढ़ाना, अ तीय, तु य, क याणकारी, फलदाता, म बनाना १-६ तुत, तु त, ान कराना, सुख, शंसा, अव य ७-१२

५२.

इं का वणन एवं तु त १-१२ आना, वग नमाता, तु त, सुखकर, श

यां १-६

तु त, जौ खाना, र ा भलाषी, तेज वी, आना ७-१२ ५३.

इं क तु त १-१२ धन मांगना,

त ं

नह , अ राजा, आ ान, भेदन, आ ान, १-६

न य युवक, वृ कारक, वृ हंता, सोमपान का आ ह, आ ान ७-१२ ५४.

इं क तु त १-१२ आ ान, वगदाता, आ ान, वहन हेतु ाथना, बुलाना १-७ सोमरस नचोड़ना, यश याचना, गोदाता, व तृत, अ

५५.

ा त ८-१२

इं का वणन एवं तु त १-१५ आ ान, धनदाता, वृ नाशक, कामनाएं पूरी करना, समपण, धन दे ना १-६ आ ान, पु षाथ, ताड़न, तु त, माग ाता, पलायन ७-१५

५६.

आ द य, व ण, म , अयमा व अ द त क तु त १-२१ र ा याचना, ाता, तु य धन, र ाथ ाथना आ ान, पु य, तु त, पु को न मारने क ाथना १-११

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स , र ा-इ छु क,

अ द त, र क, फंसना, शोभनदाता १२-१६ छोड़ना, अतुलनीय वेग, र ण व पा पय के नाश क ५७.

ाथना १७-२१

इं क तु त १-१९ बुलाना, ा त करना, व पकड़ना, बुलाना, आ ान, श नमाण, हषकारक १-११ धन याचना ाथना, पास आना, अ

शाली, व धारी, याचना,

ा त १२-१६

अ - हण, सुंदर लगाम वाले घोड़े व घो ड़यां, नदा वचन न बोलना १७-१९ ५८.

व ण एवं इं का वणन १-१८ स कार करना, आ ान, मलाना, गोपालक, हरे अ , ध दे ना, सखा आ द य, पूजा, श द करना, सोमरस ले जाने का आ ह १-१० तु त, न दय का गरना, मु , मेघभेदन, रथ पर बैठना ११-१५ रथ मलना, धन ा त,

५९.

यमेध ऋ ष १६-१८

इं का वणन १-१५ तु त, वभाव, तु य, तु त, सीमा बनाना असंभव, सेना जीतना, य पू य १-८ शूर, स होना, े रत करना, श

६०.

म आना,

शाली, झुकाना, बछड़े दे ना, धनी ९-१५

अ न का वणन १-१५ र ाथ ाथना, तेज वी होना, धन याचना, ह दाता, ेरणा, धन ा त १-६ जातवेद, धन वामी, धन मांगना, तु त ७-१५

६१.

शं सत, दो

प, तु त, धन व घर मांगना,

अ न का वणन १-१८ सेवा, पास बैठना, लेना, चढ़ना, कामना, रथ, जल का दोहन १-७ याचना, पूजा, मधु, स

करना, सोने के कान ८-१२

ध स चने का आ ह, मलना, पोषण, दोहन, सोमरस लेना, दवा, ह ******ebook converter DEMO Watermarks*******

१३-१८

६२.

अ नीकुमार क तु त १-१८ उ त बनने का आ ह, आ ान, अ , पास जाना, घर बनाना, उ णता से र ा क ाथना, स तव , पुनः सुलाना, आ ान १-१० अनुरोध, समान होना, घूमना, आ ान, र ाथ पास रहने क अंधकार का नाश, सं क जलाना ११-१८

६३.

ाथना, काश फैलाना,

अ न का वणन, अ न एवं जल क तु त १-१५ गुढ़वचन, तु त, शंसक, अ यु १-९

ुतवा व ऋ पु , अमर, तु त, अपण, सुखकर तु त,

पालक, गोपवन ऋ ष, तु त, शीश छू ना, भु यु, ुतवा १०-१५ ६४.

अ न क तु त १-१६ रथ जोड़ने का आ ह, वरणीय धन, स ययु , मेधावी, ग तशील, शोभन, प ण, प रचा रकाएं न छोड़ने का आ ह, बाधा न प ंचाने क ाथना १-९ नम कार, धन दे न,े श ुधन जीतने, बल व वेग बढ़ाने क

ाथना १०-१३

अ न का जाना, सेना र ा हेतु ाथना, पालक १४-१६ ६५.

अ न क तु त १-१२ आ ान, सर काटना, जल बनाना, वग जीतना, आ ान १-५ आ ान, व

६६.

को तेज करने व जबड़े कंपाने क

ाथना, वनाशक, तु त ६-१२

इं का वणन एवं तु त १-११ पूछना, माता शवसी, ऊणनाभ, अहीशुव आ द, ख चना, संहार, मं पान, मेघ को मारना, बादल छे दना, फलक १-७ वशाल पवत बनाना, जल दे ना, बाण ८-११

६७.

इं का वणन एवं तु त १-१० गाएं, घोड़े, तेल व गहने मांगना, सहायक, श

शाली, अजेय १-६

वृ हंता, शोभन-दान, समीप जाना, दरांत ७-१० ******ebook converter DEMO Watermarks*******

६८.

सोम क तु त १-९ पू य, लूले का चलना, र क, अलग करने क ेरणा, सुखदाता, सोम, हसक को मारने क

६९.

ाथना, कामनाएं पूरी होना १-५ ाथना ६-९

इं क तु त १-१० सुखदाता, सुख मांगना, धन याचना, श ुहंता, वजयाथ ाथना १-६ धन याचना, र क, एक ु ऋ ष ७-१०

७०.

इं क तु त १-९ तु य, जानना, शूर, द तशाली, कृपाथ, धन मांगना, श ुधषक, धन याचना १-७ धन व अ याचना ८-९

७१.

इं क तु त १-९ आ ान, स होने क

ाथना, बुलाना १-४

सोमरस नचोड़ना, सोमपान हेतु ाथना, चमू पा म सोमरस, वामी ५-९ ७२.

व भ दे व क तु त १-९ र ाथ ाथना, धनवधक, य नेता १-३ धन मांगना, ानी, आ ान, शोभनदाता ४-९

७३.

अ न क तु त १-९ तु त, र ाथ ाथना, वरे य व श ु

के अपमानक ा १-४

बलपु , घर-अ मांगना, गोलाभ, पूजन, बढ़ना ५-९ ७४.

अ नीकुमार क तु त १-९ आ ान, पुकार सुनने क

ाथना, कृ ण ऋ ष, आ ान १-४

घर, आ ान, कामपूरक, आने क ७५.

ाथना ५-९

अ नीकुमार क तु त १-५

व क, ऋ ष, वमना, व णायु, अ क ऋ ष, ऋजीश, श ुजेता १-५ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

७६.

अ नीकुमार क तु त १-६ आ ान, सोमपान हेतु आ ान, अ हेतु बुलाना १-६

७७.

इं का वणन व तु त १-६ बुलाना, गाएं व अ मांगना, रोकने म असमथ, श ुसंहार १-४ ुलोक से भी महान्, धन वामी ५-६

७८.

म त एवं इं क तु त १-७ सूय बनाना, म ता, वृ नाश, महान् अ , धरती ढ़ करना, हराना, धा सूय १-७

७९.

इं क तु त १-६ बुलाने यो य, धनदाता, तु त, संहारक, श

८०.

बनाना,

वामी, धन मांगना १-६

इं क तु त १-७ अपाला, सोमपान हेतु जाना, कामना, धनयाचना, खेत उपजाऊ बनाने व बाल उगाने क ाथना, भावान करना १-७

८१.

इं क तु त १-३३ धनदाता, आ त, अ दाता, सुद ऋ ष, बढ़ाना, हराना, श ु का धन दे ने व पास आने क ाथना १-१०

ा त, आ ान, श ुनाशक,

व धारी, स करना, इ छाएं रखना, बलपु , भयानक स बनाने क ाथना, बलदाता, दशनीय, तु त, बुलाना, व तार, इं से बढ़कर न होना, वेश ११-२३ पया त होना, ुतक , दानशील, धन मांगना, शूर, धनधारक, अ न बनने क ाथना, सबके इं , तु तय ारा सेवा २४-३३ ८२.

वामी, अ धकारी

इं का वणन व तु त १-३४ हतैषी, मेघ हनन, धन मांगना, स जनपालक, सामने जाना, आ ान, तेज वी, द तशाली, तुत, वरोध न होना, पूजा १-१२ ध धारण, बली, भागना, अजातश ,ु श शाली, कामनापूरक, सोमपान, रमण, धन मांगना, पास जाना, वसजन, ह र नामक घोड़े १३-२४

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कुशा बछाना, बल, र न, सुख, अ व मंगल, याचना, आ ान, शत तु, वृ हंता, ऋ ष ऋभु ा व ऋभु २५-३४ ८३.

म द्गण का वणन १-१२ सोमपान, त धारण, तु त, सोमपान, शंसा १-६ बु

८४.

मान्, द तशाली, व तृत करना, बुलाना, त ध करना, बुलाना ७-१२

इं क तु त १-९ तु तपा , च -पुरोडाश, आने व सोमपान हेतु ाथना, तर ी ऋ ष १-४ तु तवचन का नमाण, सेवा, दशाप व , आ ान, श ुघातक ५-९

८५.

इं का वणन १-२१ ग त बढ़ाना, पवत तोड़ना, नकट प ंचना, मानना, तु त, जीवो प , श ुजेता, बढ़ाना, तेज आयुध १-८ असुर को भगाने व धन हेतु ाथना, सेना का संहार, बुलाना, सहायता, आनंद दे ना, जल जीतना, श ुनाशक, र क, बुलाने यो य बनना ९-२१

८६.

इं क तु त १-१५ धन छ नना, प ण, भेजने क साथ बैठने क ाथना १-८ सवजेता, श

८७.

ाथना, वृ हंता, आ ान, श

वामी, र ा करने व

शाली बनाना, तु त, बलशाली, व धारी ९-१५

इं क तु त १-१२ मेधावी, तेज वी बनाना, म ता हेतु य न, वग वामी, श ुनग रय के नाशक, तो भेजना, बढ़ाना १-८ जोड़ना, बल व धन याचना ९-१२

८८.

इं क तु त १-८ सोमपान, नचोड़ना, धन उ प , पापहीन धन दे ना, हराना १-५ सेना का नाश, श ुजेता, बुलाना ६-८

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८९.

इं क तु त १-१२ श ुजेता, भाग रखना, नेम ऋ ष, बढ़ाना, रोना, कट करना, शरभ, व लाना, व ा त १-९ जल हना, वाणी क उ प , परा म दखाने क

९०.

मारना, सोम

ाथना १०-१२

म , व ण, अ नीकुमार एवं सूया क तु त १-१६ ह व बनाना, कम करना, दे व त, नशीला सोम, र ा याचना, शंसा करने का आ ह, थान दे खना, आ ान १-८ न त करना, ह ले जाना, शंसा उपदे शक, उषा का दखाई दे ना, थत होना, गोवध न करने का आ ह, द तशाली ९-१६

९१.

अ न का वणन व तु त १-२२ अ दे ना, द तशाली, अ तशय युवा, बुलाना, आ ान, सागरवासी, नकट आने व क को बढ़ाने का आ ह, आ ान, यश वी, व लत होना, तोता १-१२ सेवा करना, अ न म जल का होना, र ायु का चार ओर बैठना, धारण करना १३-१९

होना, आ ान, अ न क उ प , दे व

लक ड़यां धारण, काठ, बढ़ाना २०-२२ ९२.

अ न व म द्गण क तु त १-१४ तु तय का जाना, वग म रहना, कांपना, वीरपु पा मलना, दशनीय, दाता े , यशदाता १-९

मलना, श ु का अ न करना,

अ त य, धन न लाना, तुत, तु त, सोमपान हेतु ाथना १०-१४

नवम मंडल सू १.

वषय

मं सं.

सोम क तु त १-१० सोम नचोड़ना, बैठना, अ तशय दाता, बल व अ मांगना, सेवा करना, दशाप व दस उंग लयां, तीन जगह, रहना, शु , धन ा त १-१०

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२.

सोम क तु त १-१० वेशाथ ाथना, सवधारक, जल ढकना, जल का आना, शु होना, रोना व सुशो भत होना, याचना, मादक के गरने क ाथना, संतान व अ आ द के दाता १-१०

३.

सोम का वणन १-१० कलश क ओर जाना, अजेय, सजाना, इ छा, अ भलाषापूरक, जल म वेश १-६ वग जाना, पवमान, दशाप व , गरना ७-१०

४.

सोम क तु त १-१० सेवा का आ ह, सौभा य याचना, क याण व मंगल क कामना १-६

ाथना, सूय दे खने क

धन मांगना, बढ़ाना, सव जाना ७-१० ५.

सोम का वणन १-११ वराजमान होना, बढ़ना, सुशो भत होना, बल से जाना, चढ़ना, अ भलाषा, बुलाना १-७ आ ान, व ा, सं कार करने व दे व से सोम क ओर जाने क

६.

ाथना ८-११

सोम क तु त का वणन १-९ अ भलाषापूरक, घोड़े, अ आ ह १-६

व बल मांगना, अनुगमन, सेवा करना, मलाने का

तृ त, य क आ मा, श द भरना ७-९ ७.

सोम का वणन १-९ य माग, नहाना, श द करना १-३ तु तयां जानना, याचना ४-९

८.

ेरणा, तु तयां सुनना, दे व क

सोम का वणन १-९ बल बढ़ाना, थत होना, अ भल षत बनना, सेवा १-४

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ा त, मलना, अ

व धन

मलाना, ढकना, श ु ९.

का नाश करने, श

दे न,े संतान व अ हेतु ाथना ५-९

सोम क तु त १-९ मेधावी, आ ान, काशन, स करना १-४ उंग लयां धारण करना, न दयां दे खना, रा स को मारने, काश फैलाने, बु मनोरथ पूरा करने क ाथना ५-९

१०.

दे ने व

सोम का वणन १-९ आना, सोम उठाना, सं कृत होना, धारा म चलना, श द करना, ार खोलना, बैठना, हना, द तशाली १-९

११.

सोम क तु त १-९ जाने के इ छु क, ध मलाना, सुख मांगना, बलशाली, पावन बनाने का आ ह १-५ तुत करने का आ ह, संतु कारक, पा

१२.

म भरना, बल व धन मांगना ६-९

सोम का वणन १-९ नमाण, आ ान, वाणी, पू जत होना, वेश १-५ श द करना, य -वास, थान ा त, घर मांगना ६-९

१३.

सोम क तु त १-९ जाना, शोधक, टपकना, धारा गराने, धन व श

दे ने क

दशाप व , धारण करना, श -ु वध करने व बैठने क १४.

ाथना ६-९

सोम का वणन १-८ बहना, अलंकृत करना, मु दत, टपकना, मसलना १-५ तरछा चलना, पीठ पर चढ़ना, आ ान ६-८

१५.

ाथना १-५

सोम का वणन १-८ वग जाना, इ छा, सोम को दे ना, कंपाना, जाना १-५ लांघना, नचोड़ना, मसलना ६-८

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१६.

सोम क तु त व वणन १-८ चलना, मलाना, अजेय, प ंचना १-४ जाना, रहना, दशाप व

१७.

५-८

सोम का वणन व तु त १-८ जाना, गरना, दशाप व , बढ़ना १-४ काशन, तु त, शु

१८.

करना, पेय बनने क

ाथना ५-८

सोम क तु त १-७ सव म, मेधावी, ा त करना, धन दे ना १-४ हना, ढकना, श द करना ५-७

१९.

सोम का वणन १-७ धन, गोपालक, बैठना, सारवान् होने क कामना, रस हना १-५ व तुएं लाने व तेजनाशाथ ाथना ६-७

२०.

सोम क तु त १-७ हराना, अ दे ना, धन व रस मांगना, अनोखा, रगड़ना, दानदाता ५-७

२१.

सोम क तु त १-७ जाना, अ दे ना, टपकना, ले जाना धन मांगना, ेरणा १-७

२२.

सोम का वणन १-७ नीचे जाना, नकलना,

ा त करना, न थकना १-४

सोम ा त, श द करना ५-७ २३.

सोम का वणन एवं तु त १-७ तु तयां, जाना, धन, घर व अ वध १-७

२४.

मांगना,

ीण होना, बचाना, अ भलाषी, श -ु

सोम का वणन एवं तु त १-७

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मसलना, ा त करना, पास प ंचना, श ुजेता, पया त होना, श ु-वध, तृ तकारक १-७ २५.

सोम का वणन १-६ साधक, पकड़ा जाना, सव य जाना,

२६.

ांत

ा १-६

सोम का वणन १-६ मसलना, तु त, वग भेजना, बढ़ाना, ेरणा, बढ़ना १-६

२७.

सोम का वणन १-६ मेधावी, श

२८.

दाता, सव , श द करना, छोड़ना, इं

सोम का वणन १-६ चलना- गरना, शोभा पाना, कामपूरक, सव

२९.

ा, पापनाशक १-६

सोम क तु त १-६ बहना, शु

३०.

मलना १-६

करना, तु य, श ु भगाने व र ाथ आ ह, बल लाने क

सोम का वणन १-६ व न करना, द तशाली, वरो धय के बल रण हेतु नशीला सोम १-६

३१.

ाथना, टपकना, कूटना,

सोम क तु त १-६ जाना, बढ़ाने क ाथना, वायु से तृ त होना, अ दाता बनने क दे ना, कामना १-६

३२.

ाथना, ध-दही

सोम का वणन एवं तु त १-६ जाना, कुचलना, ाथना १-६

३३.

ाथना १-६

वेश, बैठने हेतु जाना,

शंसा, अ -धन व बु

सोम का वणन एवं तु त १-६ नीचे जाना, अमृतधारा, पास जाना, तु तयां, कामना पू त हेतु ाथना १-६

३४.

सोम का वणन १-६

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दे ने क

श थल बनाना, पास जाना, हना, शु ३५.

होना, हना, मलना १-६

सोम क तु त एवं वणन १-६ धन मांगना, कंपाना, धन, अ व थान दे ना, पालक १-६

३६.

सोम क तु त एवं वणन १-६ ग त करना, दे वा भलाषी, ेरणाथ ाथना, छनना, धन, पशु आ द मांगना १-६

३७.

सोम का वणन १-६ वेश, सव

३८.

ा, काशन, अजेय, महान् १-६

सोम का वणन १-६ जाना, कुचलना, शु

३९.

सोम क तु त एवं वणन १-६ बु

४०.

करना, बैठना, वेश, जाना १-६

मान्, बरसने क

ाथना, द त बनाना, टपकना १-६

सोम क तु त १-६ अलंकृत करना, बैठना, धन लाने क मांगना १-६

४१.

ाथना, द तशाली, धन, अ

सोम का वणन एवं तु त १-६ द तशाली, शंसा करना, श द सुनाई दे ना, पशु, बल, धन लाने, पूण करने व धारा पूण करने क ाथना १-६

४२.

ावा-पृ थवी को

सोम का वणन व तु त १-६ ढकना, गरना, नचोड़ना, स चना, जाना, धन व अ मांगना १-६

४३.

सोम का वणन व तु त १-६ मलाना, द तशाली बनाना, जाना, धन मांगना, श द करना, पु याचना १-६

४४.

व पु

सोम का वणन व तु त १-६ आना, व तार, जाना, सेवा करना, ेरणा, अ व बल जीतने क

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ाथना १-६

४५.

सोम का वणन व तु त १-६ ा, पेय होना, शु

४६.

करना, पास जाना, वणन १-६

सोम का वणन १-६ तैयार करना, वायु ा त, स करना, हाथ, माग दाता, प व करना १-६

४७.

सोम का वणन १-५ श द करना, ऋण चुकाना, धनदाता, कामना, श ुधन दे ना १-५

४८.

सोम क तु त व वणन १-५ धन याचना, शंसनीय, वग से लाना, य र क, मह व पाना १-५

४९.

सोम क तु त १-५ अ दे न,े टपकने, बरसने व दे व ारा श द सुनने क

५०.

ाथना, टपकना १-५

सोम क तु त १-५ वेग से चलना, नकलना, रखना, नशीले, मादक १-५

५१.

सोम का वणन १-५ दशाप व , अमृतवत्, हण करना, पास जाना, बु

५२.

मान् १-५

सोम क तु त १-५ द तशाली, दशाप व , बहने वाले, आ त, धनदाता १-५

५३.

सोम क तु त १-४ वेग का उठना, तु त, कम न सहा जाना, मादक सोम १-४

५४.

सोम का वणन १-४ हना, संसार दे खना, लोक के ऊपर रहना, इं ा भलाषी १-४

५५.

सोम क तु त १-४ संप यां दे न,े कुश पर बैठने व टपकने क

ाथना, श ुहंता १-४

५६. सोम का वणन व तु त १-४ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

अ दे ना, सौ धाराएं, मसलना, पाप से बचाने क ५७.

सोम क तु त १-४ अ दे ना, आना, बैठना, संप य को लाने क

५८.

सोम क

लेना, चलना १-४

सोम क तु त १-४ धनजेता, बहने व कुश पर बैठने क

६०.

ाथना, श ुजेता १-४

सोम क तु त १-४ तु त का आ ह, शु

६१.

ाथना १-४

ाथना १-४

पाप ाता, ग त करना, धन व व ५९.

ाथना १-४

करना, जाना, अ मांगना १-४

सोम क तु त १-३० गरने क ाथना, शंबर, य , तुवश, अ मांगना, म ता करने, सुखी बनाने व धन लाने क ाथना, मलना, टपकने क ाथना १-९ ु ोक म अ व धन ा त, गरने क ाथना, पास जाना, बढ़ाने क ल दे ने क ाथना, वै ानर का ज म, जाना, दशनीय, रा सहंता १०-१९

ाथना, सुख

सं ाम म भाग लेना, म त, र ा करना, अमहीयु, धारा म गरना, संतानयु मांगना, धनदाता, टपकने क ाथना २०-२८ वध करने क कामना, नदा से बचाने क ६२.

यश

ाथना २९-३०

सोम क तु त एवं वणन १-३० ले जाना, पापनाशक, सुखदाता, बैठना, अ वा द बनाना, सजाना, धाराएं बनाना, टपकने व ध, घी बरसाने क ाथना, वशेष ा, धन दे ना १-११ धन मांगना, बहना, टपकना, य म जाना, बैठने जाना, रथ जोतना, श नडर बैठना, हना, दे व य, धारा बनाना १२-२२ मलना, अ दे न,े फल दे ने व बरसने क आ ह, बैठना २३-३०

६३.

ाथना, आ ा पालन, जाना, शु

सोम क तु त एवं वणन १-३०

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शाली, करने का

धन मांगना, मादक, गरना, धावा बोलना, रे क, थान ा त, हतकारी जल, घोड़े जोड़ना, एतश, स चने क ाथना, श ु, अ य धन, अ , बल मांगना १-१२ तेज वी, गरना, टपकना, मादक, मसलना, धन मांगना, स चने का आ ह, मसलना, ेरणा, द तशाली, शंसनीय धन, श ुनाशक, रा स के नाश क ाथना, सोम बनाना, नमाण, श ु , रा स का वध करने, े बल व धन याचना १३-३० ६४.

सोम क तु त १-३० कम धारण, अ भलाषापूरक, हन हनाना, पशु व संतान मांगना, नमाण, छनना, धन मांगना, धारा का बनना, धन याचना, श द करना, बढ़ाना, बैठना १-११ दे वा भलाषी, गाय के समीप आने, अ , धन दे ने व इं के थान पर जाने क ाथना १२-१५ बनना, जाना, घर-र ाथ ाथना, जलवास, य छोड़ना, नरक म डू बना, टपकने क ाथना, मसलना, अयमा आ द, सोमपान, प व सोम १६-२५ वाणी दे ने व ोणकलश म जाने क

६५.

ाथना, मलना, चलना २६-३०

सोम क तु त १-३० द तशाली, धन दे ने व वषा भेजने क ाथना, बुलाना, शोभन-आयुध, भरना, ऋ ष, अवरोधक, वरण, धन दे ना, धारक, सव ा, ओज वी १-१४ हना, शं सत, धन-बल मांगना, जाना, बहना, धन व पु मांगना, शु मसलना १५-३०

६६.

होना,

सोम एवं अ न क तु त १-३० ाथना, राजा बनना, सुशो भत होना, आ ान, व तार, शासन मानना, धन दे ना, शंसा, नचोड़ना, दौड़ना, मसलने क इ छा, जाना, आना, म ता चाहना १-१४ वेश हेतु ाथना, श ुधन जीतना, दानी, वरण करना, जीवनर क, याचना, गाएं मांगना, सूय के समान दे खना, समीप जाना, तेज क उ प , गरना, ा त करना, टपकना, सुख मांगना १५-३०

६७.

सोम क तु त एवं वणन १-३२ धाराएं चाहना, य धारक, श द करना, आ ान, धन मलना, धन मांगना, इं ा त, प व होना, ेरणा, या ा म र ा करने व ना रयां दे ने क ाथना, र नदाता,

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ोणकलश, जाना १-१५ मादक सोम, अ मलना, वायु बनाना, याण, ोणकलश म आने, भय भगाने, पापहीन करने, प व करने व पाप से छु ड़ाने क ाथना १६-२७ व डालने क ाथना, नकट जाना, श ुनाशाथ ाथना, अ भ ण, ध व सोम को हना २८-३२ ६८.

सोम का वणन १-१० टपकाना, धन दे ना, बल ा त, र ा करना, जलगभ, मसलना, अ दे ना १-७ ेरणा, शो भत होना, ावा-पृ थवी को पुकारना ८-१०

६९.

सोम का वणन १-१० अपण, मुख म प ंचना, चमकना, वयं को ढकना, तेज था पत, छनना १-६ प ंचना, अं गरा ऋ ष, ेरणा, सुखदाता ७-१०

७०.

सोम का वणन १-१० बढ़ना, ढकना, तु तयां मलना, वाक् म रहना, बाधा प ंचाना, सव जाना १-६ शु

७१.

करना, ऊंची जगह जाना, माग बताना, श ु संहाराथ ाथना ७-१०

सोम का वणन १-९ सूय थर करना, श ुनाशक, शु जाना १-६

होना, स चना, पास जाना, व णम जगह

सुशो भत होना, गाएं मांगना, ान कराना ७-९ ७२.

सोम का वणन व इं क तु त १-९ स करना, हना, उपे ा, ल य करना, गरना, आना १-५ उ रवेद , सुख हेतु जाना, धनदाता, आ ान ६-९

७३.

सोम का वणन १-९ मलना, बढ़ाना, बैठना, वृ यु

करना, भगाना, उ प

तु त, पीड़ा दे ना, जलवास ७-९ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

१-६

७४.

सोम का वणन एवं तु त १-९ रोना, धारक, माग व तृत होना, अमृत उ प , श द करना १-५ अमृत भरना, उ

७५.

वल करना, लांघना, पु

ा त, दौड़ना ६-९

सोम का वणन १-५ टपकना, अजेय, सुशो भत होना, गरना, ेरणा हेतु ाथना १-५

७६.

सोम का वणन एवं तु त १-५ टपकना, आयुध, अ दाता, सोम का कम, वेश १-५

७७.

सोम का वणन १-५ जाना, मलना, दशनीय, गभधारण करना, इधर-उधर जाना १-५

७८.

सोम का वणन एवं तु त १-५ जाना, थत होना, बढ़ाना, प व करना, शु

७९.

होना, १-५

सोम का वणन एवं तु त १-५ ह रतवण, मद टपकाने वाले, श ुनाशक, रस नकालना, सोम १-५

८०.

सोम क तु त एवं वणन १-५ चमकना, शंसा, बढ़ाना, हना, जाना १-५

८१.

सोम का वणन १-५ उ म होना,

८२.

ा त करना, धनी सोम, आ ान १-५

सोम का वणन एवं तु त १-५ दशनीय, पूजनीय, मेघपु , सुखदाता, जल का सोम से मलना १-५

८३.

सोम का वणन व तु त १-५ व तृत, सोम करण का थर होना, पु करना, जकड़ना, अ जीतना १-५

८४.

सोम का वणन १-५

वशेष ा, ा त होना, स करना, जाना १-५ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

८५.

सोम का वणन व तु त १-१२ रोगनाशाथ ाथना, द , तु त, रस टपकाना, सेवा यो य, वा द , मसलना १-७ धन जीतने क

८६.

ाथना, थत होना, नचोड़ना, शंसा,

प दे खना ८-१२

सोम क तु त एवं वणन १-४८ ापक, पास जाना, शु होना, से वत, गरना, नचुड़ना हरा सोम, दे व थान जाना, धारक, श द करना, इं वधक वषाकारक १-११ यु , दशाप व , बहना, यु म जाना, क न दे ना, आनाजाना, संतानदाता, अ भलाषापूरक, जल उ प , लोकक ा, आरोहण १२-२२ वेश, तु त, रे णा, सुगम बनाना, दशाप व पर जाना, मसलना, तेजधारी, साधन, अपण, रोना, व तार, जाना, य माग, यु म जाना, वशेष ा, जनक, जल उ ारक लोक म जाने वाले, ाता, ग तक ा २३-३९ तु तयां, ेरणा, म य भाग, जाना, बढ़ना, तु त, श द करना, कामना, मलाना, शंसनीय ४०-४८

८७.

सोम व इं क तु त व सोम का वणन १-९ साफ करना, रा सनाशक, ध ा त, थत रहना, शु गाएं ा त, सोम का अ १-९

८८.

, अ -धन याचना, दौड़ना,

सोम क तु त १-८ आ ान, जीतना, मनोवेगवान्, कमकता, ेरणा १-५ जाना, य पा , पू य ६-८

८९.

सोम का वणन व तु त १-७ बहना, हना, पालक, बली बनाना, सेवा करना, धारक, श ुनाशक १-७

९०.

सोम का वणन व तु त १-६ अ , धन-र न दे ना, श ुजेता, श द करना, पापनाशक १-६

९१.

सोम का वणन व तु त १-६ नमाण, जाना, कामपूरक, नग रयां न

करने, माग बनाने क

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ाथना, पु

मांगना १-६ ९२.

सोम का वणन व तु त १-६ दे वसेवा, जलधारक, अनुगमन, शु

९३.

सोम का वणन व तु त १-५ शु

९४.

, र ा, जाना १-६

होना, वरे य, ढकना, धन व संतान याचना १-५

सोम का वणन व तु त १-५ नचोड़ना, बांटना, धन दे ना, आयुदाता, पशु याचना १-५

९५.

सोम का वणन एवं तु त १-५ श द करना, ेरणा, वेश, श ु नवारक, सौभा य याचना १-५

९६.

सोम का वणन व तु त १-२४ आगे जाना, नचोड़ना, पेय, र ाकामना, शु

होना, पार जाना १-६

ेरणा, मदकारक, रमणीय, माग बताना, य कम, अ दे ना, य वामी सोम, अ अ भलाषी, लांघना, शु होना, फलवाहक, शं सत, जल ेरक ७-१९ बैठना, चमू पा , वेश, शं सत सोम, जाना २०-२४ ९७.

सोम का वणन व तु त १-५८ रे क, आ छादक, यश वी, वा द , जाना, ह रतवण, वृषगण ऋ ष, हारक, काश करना, रा सनाशक, छनना, ढकना, श द करना, शु , गाय क कामना, द तशाली १-१६ अ यु , श द करना, अजेय, ोणकलश, संतान मांगना, धनदाता, जलधारक, द तशाली, भयंकर, धाराएं, लहर का नमाण, छनना, चमकना, धाराएं गराना, पास जाना, पूछना, क याणकारी, पश, अंधकारनाशक १७-३८ बढ़ने वाले, जलधारक, ओज दे ना, प व होना, सरल ग त वाले, धनवषक, शु , गरना, प व होना, रथ वामी, तुत सोम, वण व रथ याचना, जमद न ऋ ष, जाना ३९-५२ धन दे ना, श ुनाशक, श ुजेता, दौड़ना, सव ाता, मसलना, सहायक ५३-५८

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९८.

सोम का वणन १-१२ अ दाता, गरना, छनना, दान दे ना, नवासदाता, नहलाना पास जाना, धन दे ना १-८ तेजपूण, नचोड़ा जाना, भगाना, ानी ९-१२

९९.

सोम का वणन १-८ फैलाना, भेजना, सोमपान, तु त, ाथना, थत होना, नहाना, ले जाना १-८

१००.

सोम क तु त १-९ पास जाना, द तशाली, धन बढ़ाना, दौड़ना,

ांतदश , अ दाता १-६

पवमान, रा सघाती, धारक ७-९ १०१.

सोम का वणन व तु त १-१६ भ य, जाना, नचोड़ना, छनना, टपकना, ेरक, पोषक, द त, शंसनीय रस, ाता, मेधावी १-१० श द करना, उपभो य, मलना, ढकना, छनना ११-१६

१०२.

सोम का वणन एवं तु त १-८ ा त करना, तु त, तो बोलना, सोम क

शंसा, सेवन, क व १-६

मलना, ेरणा हेतु ाथना ७-८ १०३.

सोम का वणन १-६ य वधाता, हरा सोम, तु त, बैठना, धनदाता, दौड़ना १-६

१०४.

सोम का वणन एवं तु त १-६ सजाना, दे वर क, साधन, १-३ मलाना, मद वामी, म ता हेतु ाथना ४-६

१०५.

सोम का वणन एवं तु त १-६ तु त का आ ह, मलाना, मधुरता दे ना १-३ ध मलाना, अ

वामी, माया से बचाने क

ाथना ४-६

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१०६.

सोम का वणन एवं तु त १-१४ शी उ प , टपकना, धनुषधारी, जागने वाले, वशेष बढ़ना १-८

ा, वा द , गरने क

ाथना,

सव , श द करना, बढ़ाना, तैयार करना, धन दे ना, दे वा भलाषी ९-१४ १०७.

सोम का वणन व तु त १-२६ ह व, मलाना, टपकना, बैठना, हना, जागरणशील, जाना, छनना, वेश, सजाना, जाना १-१२ मसलना, सव ाता, बहना, नय मत, छनना, जाना, स रहना, जाना, धन दे ना, जाना, समु धारक, े रत करना, जाना १३-२६

१०८.

सोम क तु त व वणन १-१६ बु दाता, सव ा, श द करना, मादक, फैलाना, अ वत्, तु य, बढ़ना, अ शोभन बल वाले १-१०

वामी,

दोहन, धारक, अ , पशु व घर लाने वाले, अ भमुख करना, संयत, वगधारक ११-१६ १०९.

सोम क तु त व वणन १-२२ वा द , रसपान का आ ह, पालक, द तशाली, श संय मत, धन याचना, वेगशाली, शु करना १-११

शाली, शोभन धारा

वाले,

जलपु , शु होना, पोषक, सोमपान, बहना, मसलना, संय मत, तैयार करना, मलाना, जलवासी, ेरक १२-२२ ११०.

सोम क तु त व वणन १-१२ सहनशील, तु त, वेगशाली, अमर, पार जाना, तु त, बु अ धकारी बनना, श

१११.

यु , अ दाता, भगाना ९-१२

सोम क तु त व वणन १-३ रा स का नाश, गोधन ा त, तु तयां सुनना १-३

११२.

सोम का वणन व तु त १-४

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धारण, तु त १-८

व वध कम, बाण बनाना, भ काम करना, कामना १-४ ११३.

सोम क तु त १-११ शयणावत तालाब, ऋजीक दे श, सोम लाना, रस गराना, धारा बहना, रस गराने, यर हत लोक ले जाने व अमर बनाने क ाथना १-११

११४.

सोम क तु त १-४ भा यशाली, क यप ऋ ष, सात ऋ वज्, श ु से र ाथ ाथना १-४

दशम मंडल सू १.

वषय

मं सं.

अ न क तु त १-७ पूण करना, म थत,

२.

त ऋ ष, सेवा, य

ापक, ना भ, व तारक १-७

अ न क तु त व वणन १-७ े होता, मेधावी, ाता, धनी, य क ा, ापक, उ प

३.

अ न का वणन व तु त १-७ भयानक, चमकना, जाना,

४.



होना,

ा त करना, ेतवण, आ ान १-७

अ न क तु त १-७ सुखद, घूमना, धारण, नवास, स करना, मथना, बु

५.

१-७

मान् १-७

अ न का वणन १-७ धनधारक, र ा करना, बढ़ाना, सेवा १-४ शं सत, जलवास, उ प

६.

५-७

अ न का वणन व तु त १-७ बढ़ना, अजेय, ग तशील, तेज चलना, तु त, संप

७.

थान, अनुगमन १-७

अ न का वणन व तु त १-७

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द गुणयु , धनदाता, आराधना, र क, उ प ८.

अनु ान, पूजनीय १-७

अ न क तु त व इं का वणन १-९ श द करना, स होना, रमण करना, पहले आना, य जलनेता,

९.

त, यु , वध, सर काटना ६-९

जल क तु त १-९ सुखाधार, सुखकर रस, स होना, द जलवास, पु

१०.

काशक, र क १-५

जल, नवासदाता १-५

हेतु ाथना, पाप र करने व तेज वी बनाने का आ ह ६-९

यम और यमी का संवाद १-१४ नवेदन, दे खने क बात कहना, या य, अस य से बचना, जाप त, जानना, इ छा, गु तचर, बंधु, आ ह १-१० मू छत होकर बोलना, पाप, कमजोर बतलाना, सुझाव ११-१४

११.

अ न का वणन एवं तु त १-९ गराना, गंधवप नी, उदय, लाना, जाना, शंका १-६ सेवा, र नदाता, रथ ७-९

१२.

अ न का वणन एवं तु त १-९ ाण, जाना, धारक, तु त १-४ प रचरण, सूय, काश पाना, पापनाशक, रथ ५-९

१३.

ह वधारक गा ड़य का वणन १-५ प नीशाला, लादना, उपकरण, य करना, तु तयां १-५

१४.

पतृलोक, पतर व यम का वणन १-१६ पुरोडाश, माग ाता, ऋ व, अं गरा, बुलाना, यो य, स होना,

यमान १-८

थान दे ना, चतकबरे कु ,े गृहर क, यम त, त बनाने वाला, आयु याचना, नम कार, क क ९-१६ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

१५.

पतृलोक का वणन, अ न व पतर क तु त १-१४ पतर, नम कार, न यता, र ा व धन याचना, पतर बुलाना १-८ ह हणाथ आना, ह होना ९-१४

१६.

भ क, पतर अ न वा , तु त, वधा, जानना, स

अ न क तु त व ेत का वणन १-१४ न जलाने क ाथना, पतर, ाण, क याणकारी, ऊपर जाना, नरोग हेतु ाथना, तैयार, स होना १-८ आग हटाना, वेश, साम ी, थापना,

१७.

व लत करना, ब, वन प तयां ९-१४

सर यू, पूषा व सूय आ द का वणन १-१४ ववाह, ज म, र क, पूषा, दशाएं जानना, घूमना, बुलाना, स होना १-८ आ ान, धन मांगना, जल, नकलना, हवन, गरना, तु तवचन ९-१४

१८.

मृ यु, मृतक, धरती व जाप त आ द क तु त १-१४ न मारने क ाथना, पतृयान, पतृमेध, प थर, ऋतु, व ा, सधवा, पा ण हण, धनुष लेकर कहना १-१० उपचार, द णादाता, धान दे न,े सहारा दे ने क

१९.

ाथना, खूंट , संकुसुक ऋ ष ११-१४

गो व इं क तु त १-८ धन मांगना, गाय को वश म करने, पास रखने व गोशाला हेतु ाथना, पहचानना, चराने जाना, गाय स हत लौटने व गाएं लाने का अनुरोध १-६ सेवा, गाएं लाने क

२०.

ाथना ७-८

अ न क तु त व वणन १-१० तु त, अजेय, फल दे ना,

ा त करना, आना, जाना, इ छा १-७

बढ़ाना, चमक ला, ऋ ष वमद ८-१० २१.

अ न क तु त १-८ वरण, शोभा बढ़ाना, सेवा, अमर, ाता १-५

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धनलाभ, थापना, २२.



६-८

इं क तु त १-१५ स , श ुजेता, शं सत, आना, उशना, रा सनाशक, र ाथ ाथना, घेरना १-१० शु ण वंश का नाश, सुख व भोग याचना, बढ़ना, धनी बनाने क

२३.

ाथना ११-१५

इं का वणन १-७ कमकुशल, वृ वध, ख चना, भगोना, बलवान बनाना, वमदवंशी, जानना १-७

२४.

इं व अ नीकुमार क तु त १-६ अ धक धनी, कमपालक, ेरक, वमद, शंसा, द तशाली १-६

२५.

सोम क तु त १-११ क याणकारी, महान्, प रणाम, जाना, संतु , व तुएं लाना, अजेय १-७ शोभन कम, श ुहंता, क ीवान्, द घतमा, परावृज ८-११

२६.

पूषा का वणन व तु त १-९ दशनीय, तु तयां, स चना, तु त, हतैषी १-५ व

२७.

बुनना, म , ख चना, अ बढ़ाने व पुकार सुनने क

ाथना ६-९

इं व उनके पु वसुक ऋ ष का संवाद १-२४ फल व सोमरस दे ना, वणन, जीतना, कांपना, हार, दशनहीना क या, प त चुनना १-१२ सोखना, भ ण, ज म, ेरणा, घूमना, जाप त, वधा,

ा त, हना, चाहना, बनाना, ा त करना १३-२०

गरना, कांपना, मेघ का छे दन, आ व कार २१-२४ २८.

इं व उनके पु वसुक का संवाद १-१२ इं का न आना, पेट भरना, मांस पकाना, श ुनाशक, तु त, श ुहीन, शूर समझना, सोखना, पवत फोड़ना १-९ सोमलता लाना, ‘दान वामी’ नाम रखना १०-१२

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२९.

इं एवं अ नीकुमार क तु त १-८ हतैषी,

शोक ऋ ष, श

शाली, तु त, दाता १-५

माता, बढ़ना, घेरना ६-८ ३०.

जल क तु त व वणन १-१५ मन, दशाप व , जाने का आ ह, बना का तरंग १-८

के जलना, मु दत, प रचय, छु ड़ाना,

ऊपर जाना, बढ़ना, सोम धारण, आना, थत हेना ९-१५ ३१.

व भ दे व का वणन १-११ तु य, धना भलाषा, सुख पाना, जाप त १-४ भरना, पोषक, अजर, काश, अर ण, क व ५-११

३२.

इं , उनके घोड़ व यजमान का वणन १-९ वाद लेना, घोड़े, बुलाना, गाय ी, आना १-५ य र क, पूछना, न य युवा, धन दे ना ६-९

३३.

कवष व कु

वण राजा का वणन १-९

कवष व कु

वण, सौत, तोता, धन मांगना, हरे घोड़े,

ांत, तोता १-७

मानव- वामी, वयोग ८-९ ३४.

जुआ व जुआरी का वणन १-१४ त ते, प नी ारा छोड़ना, आदर नह , प नी को छू ना, प ंचना, जुआघर जाना, हारजीत, घाती पाशे, अवश पाशे, झुकना, दाहक पाशे १-९ कज चढ़ना, बदहाली, आग के पास सोना, नम कार, जुआ छोड़ने का आ ह, सुख याचना १०-१४

३५.

व भ दे व का वणन व तु त १-१४ वरण करना, सुख व धन मांगना, अंधकारनाशक, तु त, जानना १-८ जाना, होता, बुलाना, मनपसंद घर, अ कामना, कामना पूरक ९-१४

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३६.

व भ दे व का वणन व तु त १-१४ आ ान, र ा याचना, अ य यो त, म त का सुख, शं सत बृह प त, र ा याचना, आ ान, द तयु , सोमपान का आ ह, य यो य दे व १-१० अ तीय दे व, र ा याचना, स य वभाव, धन व आयु क याचना ११-१४

३७.

व भ दे व का वणन व तु त १-१२ नम कार, बहना, अनुगमन, चमकाना, य र ा करने, कृपा बनने क ाथना १-७ वशेष

३८.

, व ाम, धन याचना, पापहीन, सुख मांगना, नवास थान दाता ८-१२

इं क तु त १-५ सहनाद, वासदाता, यु

३९.

रखने व चरंजीवी

क कामना, धन ा त, ेरक १-५

अ नीकुमार क तु त १-१४ नाम लेना, मधुर वचन, वर खोजना, यवन, वै , आ ान १-६ ववाह, क ल ऋ ष, रेभ ऋ ष, राजा पे , शंसनीय, रथ, व तका च ड़या, रथ सजाना ७-१४

४०.

अ नीकुमार क तु त १-१४ य नेता, अनुकूल बनाना, तु तयां, अ दाता, घोषा, कु स, भु यु, वश, अ , उशना, कृश, शंय,ु व मती १-८ युवती बनना, समेटना, युवा प त, उदक वामी, कामना, दशनीय ९-१४

४१.

अ नीकुमार क तु त १-३ रथ, घर जाना, आ ान १-३

४२.

इं क तु त एवं वणन १-११ तु त का आ ह, जारतु य, धन वामी, म धनसंप बनाना १-९

बनाना, उप व रोकना, अ धकार,

भूख मटाना, धन मांगना १०-११ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

४३.

इं क तु त एवं वणन १-११ कृ ण ऋ ष, अ भलाषा, बढ़ाना, पास जाना, सूय ढूं ढ़ना, हराना, जाना १-७ ेरणा, स जनपालक, बु

४४.

, र ाथ ाथना ८-११

इं क तु त १-११ ीण करना, पालक, व धारी, साम य, तु त, वग जाना, नरक होना १-८

ा त, ु

तु त, क चना, आ त, धन मांगना ९-११ ४५.

अ न क तु त व वणन १-१२ उप , पुआ,

४६.

प जानना,

वलन, चाटना, शोभाधारी, मेघभेदन, ेरणा, चमकना १-८

य होना, ार खोलना, तु त ९-१२

अ न एवं य होता, तु तयां,

का वणन १-१० त ऋ ष, य नेता, कम ा त, बैठना १-६

ग तशील, तु तयां, व ा, भृगु, यश ा त ७-१० ४७.

इं क तु त १-८ गो वामी, र ायु , महान्, श ुहंता, घरा रहना, धन, बु

४८.

इं

व घर क याचना १-८

ारा अपना वणन १-११

अ दे ना, द यङ् , दधी च, व , जीतना, वामी, झुकाना, न करना १-७ गुंगु जनपद, असुर वध, आयुध धारण, अजेय व अ ाथ बनाना ८-११ ४९.

इं का आ मवणन १-११ अनु ान, ‘इं ’ नाम रखना, उशना, कु स, शु ण, आय, द यु, वे सु नामक दे श, तु , व दभ, रांथय, असुर वेश, षड् गृ भ असुर, नववा व, बृह थ, श ुनाश, तुवश, य १-८ माग दे ना, सुखद बनाना, ह र नामक अ

५०.

९-११

इं का वणन व तु त १-७

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बल, पूजन, श र ाश ५१.

दाता, श ुजेता १-४

जानना, य धारक, मनोमाग ५-७

अ न व दे व का संवाद १-९ वेश, व वध शरीर, पहचानना, आना, तेजपुंजधारी, तीन भाई १-६ अजर आयु, उ प , ह भाग ७-९

५२.

अ न का दे व के

त कथन १-६

होता, अ वयु, नयु

१-३

पांच माग, सेवा, बैठाना ४-६ ५३.

अ न का वणन १-११ आना, बैठना, क याण करना, पंचजन, य पा , माग, आठ रथ १-७ अ म वती नद , सोमपा , कुठार, अमर व, जीतना ८-११

५४.

इं क तु त १-६ क त, वृ वधा द, उ प अजेय, दाता, तो

५५.

१-३

४-६

इं क तु त १-८ द त करना, स होना, सात त व १-३ म ता, साम य, लाल प ी, सहायक, बढ़ाना ४-८

५६.

बृह

थ ऋ ष का अपने मृत पु वाजी से कथन १-७

सूय, यो त धारण, अनुगमन १-३ वेश, प र मा, चर थायी, बृह ५७.

थ ४-७

इं क तु त व मन का वणन १-६ यजमान, आह्वनीय, बुलाना १-३

सुबंधु, इं यां लौटाने का आ ह, सोमदे व ४-६ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

५८.

मृत सुबंधु के ाता आ द उसके मन के

त कहते ह १-१२

वव वान् पु , लौटाना, धरती, लौटाना १-१२ ५९.

पाप दे वता नऋ त, असुनी त व इं आ द क तु त १-१० आयु पाना, नऋ त, श ु रोकना, वृ ाव था, बढ़ाना, र ाथ ाथना १-६ ाण दे ने व हसा र ाथ ाथना, ओष धयां, उशीनर क प नी ७-१०

६०.

असमा त राजा का वणन व इं ा द क तु त १-१२ असमा त, जेता, पराभव, पंचजन, धारण १-८

थत करना, अग य, प ण, जीवनदाता, मन

अ वनाशी, संबंधु का मन, बहना, तपना, हाथ ९-१२ ६१.

व वध दे व क तु तयां व वणन १-२७ नाभाने द , श ुनाशक, च पकाना, आ ान, सचन, अ भगमन, वा तो प त, अं गरागो ीय ऋ ष, उ प , फल, म ता, ढूं ढ़ना, शु ण १-१३ जातवेदा, द तशाली, शं सत, कांपना, शंयु ऋ ष, तु त, स य प, सुखवधक, तु त, नरपालक, य होना, अ दाता, सेवा, धारा, अ मांगना १४-२७

६२.

अं गरागो ीय ऋ षय क तु त १-११ अमरता, प ण, थापना,

तेज, गंभीर कम वाले, धन दे ना, उ ार १-७

साव ण मनु, द णा, य , तुवसु, अ मांगना ८-११ ६३.

व भ दे व का वणन १-१७ यया त, य यो य, ध बहाना, उ त दे श, सेवा, सजाना, होता, सव , पापमोचक, ुलोक, आ ान १-११ सुख मांगना, ले जाना, बढ़ाना, रथ, क याणाथ ाथना, धरती, गय ऋ ष १२-१७

६४.

व भ दे व का वणन १-१७ तु य, कामनाएं, पोषक, बढ़ना, रथ, धन लाना, य , आ ान, व ा, ऋभु ा, वाज, सुंदर म द्गण, आना, अ द त १-१३

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र ा, अ भलाषी, गय ऋ ष, भुता १४-१७ ६५.

व भ दे व का वणन १-१५ पूण करना, बढ़ाना, मै ी, तु त, याचना, तु त, नकालना, याचना, काय, व णा व १-१२

ा त, आ ान, धन

सर वती, तु तयां, अ याचना १३-१५ ६६.

व भ दे व का वणन १-१५ आ ान, तैयारी, अ युदय, बुलाना, मकान मांगना, इ छापूरक, पूजन, जलरचना, पूण करना १-९ वगधारक, तु त व तो सुनने क

६७.

ाथना, सेवा, धन मांगना वंदना १०-१५

बृह प त का वणन १-१२ अया य ऋ ष, सरल मन, तु त, गाएं नकालना, गरजना, लाना, तो वामी, सहयोगी १-८ बढ़ाना, तु त, स तादाता, नद

६८.

वा हत करना ९-१२

बृह प त का वणन १-१२ तु त, काश प ंचाना, गाय नकालना, प ण, बल रा स, वध, भेदन १-७ गाएं दे खना, उषा ा त, असमथता, काश धारण, नम कार ८-१२

६९.

अ न क तु त व वणन १-१२ व य ऋ ष, द त होना, सु म ऋ ष, र ाथ आ छा दत, सु म वंशी, म हमा १-९

ाथना, श ुजेता, हतकारी,

श ुवध, संहार, तु य १०-१२ ७०.

अ न, य शाला, ऋ वज्, होता आ द क तु त १-११ उ रवेद , तु य, रथ, स च , अ ध त, दे वगण, य पा , ह दे वभाग, रशना, वाहा ९-११

७१.

भाषा का वणन १-११

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सेवन १-८

७२.

सर वती, भाषा, छं द, वसजन, माया

पणी धेनु, यागना, भाव, वचार १-८

हल चलाना, पाप र होना, ाय

९-११

दे व क उ प

का वणन १-९

तो , उ प , भू म, अ द त व बंधु दे व का ज म, धूल उड़ना १-६ सूय, थर, अ द त का जाना ७-९ ७३.

इं एवं म त क तु त व वणन १-११ शंसा, वषा जल, धारण करना, म ता, माया का नाश, श ुसंहार १-६ नमु च, श

७४.

मान्, च , ज म, बु

याचना ७-११

म त का वणन १-६ धनदान, काश करना, र नदाता तु त, शरण, वृ नाशक १-६

७५.

न दय के जल का वणन १-९ सधु, माग बनाना, गरजना, सहायक नद , गोमती, तु ामा, सुसत आ द न दयां, दशनीय, सधु, बहना, ढका रहना, रथ १-९

७६.

सोमरस नचोड़ने म सहायक प थर क तु त १-८ उषा, धनदाता, मनु, धन मांगना, सुध वा, सोम नचोड़ना, मुखशु

७७.

, द

धाम १-८

म त का वणन व तु त १-८ जनक, आ मणशील, श ुघाती, अ दाता, येन प ी, प थक, धन, सोमपान, आना १-८

७८.

म त का वणन व तु त १-८ गृह वामी, सुशो भत, दानी, द पयु , सामगान, द तशाली, प थक, र नदान १-८

७९.

अ न का वणन १-७ भ ण, नम कार, जलाना, ानी, वालाएं, ह रतवण, र सी १-७

८०.

अ न का वणन १-७

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वीर स वनी, ेरणा, ज थ, ८१.

सृ

प धरना, घरना, गंधववचन, तु त रचना १-७

म का वणन १-७

आ छादन, व कमा, नमाण, भुवन, परम धाम, वगफलदाता, सुखो पादक १-७ ८२.

सृ

म का वणन १-७

भाग, स त ष, भुवन, धन ८३.

ांड, तु तयां १-७

ोध क तु त १-७ उ पादक, म यु, श

८४.

य, ई र,

शाली, सहनशील आ ान, बंध,ु होम १-७

ोध क तु त १-७ नेता, धन मांगना, उ बल, श ुजेता, तो , तेजधारक, अ याचना १-७

८५.

सोम क तु त एवं वणन १-४७ रोकना, न के नकट, पीसना, सुर त, वषर क, व रथमाग १-११

गाथा, कोष, अ गामी,

गाड़ी, दहेज, समथन, रथच , प हया, नम कार, ऋतु नमाण, चरजीवन दे ना, अमृत थान, तु त, पूजन १२-२२ अयमा दे व, थापना, सौभा य, पूषा, समृ बनने का आ ह, वेश, ीहीन, रोग, श ,ु र ाथ ाथना, आशीवाद, वधूव , सूया, गृह थ धम, क याणी बनाने क ाथना, संतानर हत प त २३-३८ शतायु क कामना, तीसरा प त, धन व पु मलना, पु व नाती, क याणकारक बनने क कामना, वीरजननी, वधू व महारानी बनने का आशीवाद, दय को मलाने हेतु ाथना ३९-४७ ८६.

इं एवं इं ाणी का संवाद १-२३ वृषाक प, सोमरस, अ दाता, कु ा, आदर पाना १-१०

कम उ म इं ,

य वचन, वीरप नी, सखा,

बुढ़ापा, समीप जाना, ह व, बैल पकाना, द धमंथन, समथ-असमथ, गाड़ी, दास व आय ११-१९ री, आ ान, पु जनना २०-२३ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

८७.

अ न क तु त १-२५ हवन, मांसभ ी, द त अ न, बाण झुकाना, मांसाहारी, जातवेद, ऋ यां, तेज, अनुकूल, तीन म तक, जलने क ाथना, द यङ् अथवा ऋ ष १-१२ ोध, शोकमन, झूठा, ध चुराना, मानवदशक, असार अंश, द सखा १३-२१

आयुध, करण,

मेधावी धषक, वध ाथना, शंसा, नाश का आ ह २२-२५ ८८.

अ न व सूय क तु त एवं वणन १-१९ बढ़ाना, स होना, व तार, संसार, तेज चलना, अंगर क, चतन, तृ त करना, वभाजन १-१० थापना, उ प , तपना, दो माग, ठहरना, ववाद, पधा नह , पास बैठना ११-१९

८९.

इं क तु त व वणन १-१८ हराना, घुमाना, म , तु तयां, समानता नह , तोड़ना, लोप, व , आ ान, न दयां, वध हेतु आ ह १-१२ अनुगमन, छे दन, यो त वाली रात, आ ान, तु त, बुलाना १३-१८

९०.

वराट् पु ष के

प म ई र का वणन १-१६

हजार शीष, अमृत, ांड, ऊपर उठना, व तार, वेदो प , ऋतु बनाना, पशु उ प , संक प, ा ण, वण क उ प १-१२ चं मा व सूय आ द क उ प , प र धयां, उपासक १३-१६ ९१.

अ न का वणन व तु तयां १-१५ वहार, आ य, धन बढ़ाना, वमल, उ मु , ज म, दहन, वरण, त १-११ वृ

९२.

, पश, तु त, उ म यश १२-१५

नाना दे व का वणन व तु तयां १-१५ सोना, चूमना, अमरता, नम कार, स चना, नम कार, य जानना, पूजन, बु

पु , सहायक, डरना १-८

मान्, अ , अ द त, वषा ९-१५

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, ने ा,

९३.

व भ दे व का वणन १-१५ र ायाचना, प रचया, धन, ह व सामगान १-८ तु त, अ याचना, स

९४.

वामी, समान धनी, बचना, अ

वामी,

, तो पाठ, पृथवान्, गो याचना ९-१५

सोमरस नचोड़ने म सहायक प थर का वणन १-१४ तु त का आ ह, ह भ ण, सोमपान, अचल रहना, धारण, सोमरस टपकाना, हण, अंश, श दखाना १-९ य सेवन, श

९५.

शाली, पूण करना, श द करना १०-१४

पु रवा व उवशी का संवाद १-१८ मन, ा य, सहनाद, रमणसुख, शयनक , सुजू ण, संपक बनाना, द घायु, पु प म होना १-११

े ण आ द, बढ़ाना, भागना,

ससुराल, अ ानी, द नता, मै ी, वचरना, वासदाता, आनंद ा त १२-१८ ९६.

इं एवं उनके घोड़ का वणन १-१३ शंसा, बुलाना, धनी, द त, सुंदर, तु य, थत होना १-७ हरी दाढ़ , सोमपान, अ दे ना, पूण करना, साधन, सवन ८-१३

९७.

ओष धय क तु त व वणन १-२३ उ प , सौ कम वाली, जयशील, घोड़ा, गाय आ द दे ना, अ धका रणी, रोगनाशक, तु त, इ कृ त, रोगनाश, आ मा १-११ चोर, बाज, वायु, वचन व रोग से बचाने क मांगना, जीव १२-२० श

९८.

ाथना, पाश, कथन, शां त व श

हेतु ाथना, वातालाप २१-२३

नाना दे व का वणन व तु त १-१२ राजा शंतनु, तु त, नद ष, दे वा प, वषा, तो , श

ा त, जलाना, द णा १-९

शूर, माग ान, वषा याचना १०-१२ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

९९.

इं का वणन व तु त १-१२ धन दे ना, सामगीत सुनना, हराना, बहाना, छ नना, वध, नाश, भेदन, लोहमय पीठ १-८ शु ण, उशना, अर

का वध, ऋ ज ा, व

ऋ ष ९-१२

१००. व भ दे व क तु तयां १-१२ वरण, ध पीना, ऋजुकामी, सोम, धारण, से , वासदाता, पाप नाशाथ ाथना, पालक १-९ ओष ध, र क, व यु ऋ ष १०-१२ १०१. व भ

वषय का वणन १-१२

आ ान, नख बनाने, बैल जोड़ने व बरतन बनाने का आ ह १-८ ध, बरतन, प हए, बुलाना ९-१२ १०२. इं का वणन व तु त १-१२ धन कामना, मुदगलानी, ् दास, आय, हार, मुदगल, ् अनुगमन, बांधना, उ ार १-८ घण, वजयी, अ याचना, धनदाता ९-१२ १०३. इं का वणन एवं तु त १-१३ जीतना, यु क ा, श ुनाशक, बुलाना, उ म वीर, जयशील, य दे वसेना १-८ जलवषक, रथ, वजय याचना, अ वा, क याणाथ ाथना ९-१३ १०४. इं का वणन एवं तु त १-११ सोमपानाथ अनुरोध, भट दे ना, उ शजवंशी, र ा, दान, धनयु

१-७

बढ़ाना, वृ वध, तु त, बुलाना ८-११ १०५. इं का वणन एवं तु त १-११ ना लयां, बुलाना, थकना, बटोरना, भोजन मांगना, ऋभु, हरी दाढ़ १-७ तु तहीन, उ ार, मधु लेना, र ा ८-११ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

वामी,

१०६. अ नीकुमार क तु त १-११ बढ़ाना, आना, दे वपूजा, आ ान, थत, हंता, रथ ा त १-७ धनर क, सुनना, ध भरने हेतु ाथना, भूतांश ऋ ष ८-११ १०७. द णा का वणन १-११ माग, अमरता, दे वपूजा, अ धकारी, मु खया, सामगायक १-६ र ासाधन,

था, वधू, घर, र ा ७-११

१०८. सरमा कु कुरी व प णय का संवाद १-११ अ भलाषा, न ध, ती, रोक न पाना, आयुध, पदद लत १-७ सुर त, अया य व नवगु ऋ ष, भाग दे ना, संबंध, स या त पवत ८-११ १०९. बृह प त ारा प नी याग का वणन १-७ संतान, लाना, त, प ंचाना १-४ ा त,

प नी, पापहीन बनाना ५-७

११०. अ न, होता, यूप क तु त व वणन १-११ कायकुशल, भोजन, वाला, ाथनीय, फैलाना, शरीर दशाना, द त वाली, काश, बुलाना १-८ व ा दे व, श मता, भ णाथ आ ह ९-११ १११. इं क तु त व वणन १-१० बुलाना,

ा त, सनातन, बल संचार, धारण १-५

माया का नाश, शोभा ा त, र जाना, बहाना, जल वामी ६-१० ११२. इं क तु त १-१० वीरता, आ ान, े

प, बुलाना, तु त, पा

ा त १-६

बुलाना, शंसा, कुशल, धन मांगना ७-१० ११३. इं क तु त १-१० ******ebook converter DEMO Watermarks*******

र ा याचना, वृ वध, म हमा, वृ , व ,

ोध १-६

वीरता, भ ण, दभी त, धन याचना ७-१० ११४. व वध वषय का वणन १-१० ा त करना, त, भाग ा त, वेश, बारह पा , रथ १-६ वभू तयां, वाणी, पुरो हत, म नवारण ७-१० ११५. अ न का वणन एवं तु त १-९ त, ह

भ ण, तु त, अजर, आ य, होनहार १-६

श ुनाश, बलपु , वषट् कार ७-९ ११६. इं क तु त १-९ वृ

याचना, उ रवेद , श -ु संहार, वृ

शरीर,

वश

दाता १-५

, अ भलाषाएं, धनदाता ६-९

११७. दान का वणन १-९ मृ यु, भखारी, खोजना, दाता, जाना १-५ पापी, दानी, धन मांगना, दान ६-९ ११८. अ न क तु त १-९ पव ११९. इं

त, ुच, घृत सचन, शं सत, अमर, द तधारक, अ तीय तेज, तु त १-९ ारा अपना वणन १-१३

सोमपान, कंपाना, ऊपर उठाना, तु तयां, थान बनाना, पंचजन, हराना, धरती रखना १-९ जलाना, वग, महान्, सुशो भत १०-१३ १२०. इं का वणन १-९ वागत, डराना, नाती, स होना, ेरणा १-५ व सनीय, कम, जीतना, श

६-९

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१२१.

जाप त का वणन १-१० पुरोडाश, सेवा, पूजा, भुजाएं, आ द य, जाप त, र क १-७ एकमा दे व, आनंदवधक, हवन ८-१०

१२२. अ न क तु त १-८ होता, क

, धन याचना, बलदाता, भृगुवंशी ऋ ष १-५

आचरण, त, तु त ६-८ १२३. राजा वेन का वणन व तु त १-८ अचना, अनुचर, श द, जल वामी १-४ क , भ ा, चमकना, जल नमाण ५-८ १२४. दे व के

त अ न का कथन १-९

नयामक, अर ण, जाना, र ा, रा

१-५

, नकलना, वृ , शंसा ६-९ १२५. वाणी दे वी ारा परमा मा का वणन १-८ घूमना, धन दे ना, आ व , बात बताना, से वत १-५ ा त, व तृत होना, वशाल ६-८ १२६. व भ दे व का वणन १-८ बचाना, र ा व सुख याचना १-४ आ ान, श ु र ाथ ाथना व आयु याचना ५-८ १२७. रा

का वणन १-८

शोभा ा त, बाधा, हा न, शयन, बाज, चोर, अंधकार, तो भट १-८ १२८. व भ दे व का वणन १-९ अ य , अ भलाषा, संतान, आशीवाद, मनोरथ, छह दे वयां, बु याचना, सव १-९ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

, तु त, सुख

१२९.

लय क दशा का वणन १-७ अभाव, ा, लयदशा, वचारना, कामना, कारण खोजना, नकृ अ , दे वगण, बोध न होना १-७

१३०.

जाप त ारा सृ व

का व तार १-७

ाण, साममं , य , क पना, य पूण करना, अनुसरण १-७

१३१. इं एवं अ नीकुमार का वणन १-७ सुख, भोजन, म ता, सहायता, श ,ु बल व कृपा याचना १-७ १३२. म व व ण क तु त १-७ बढ़ाना, म ता, ह , भ , शरीर र ा व धन याचना, नृमेध १-७ १३३. इं क तु त १-७ डो रयां, तु त, दानशीलता, बाधक, श ु, नाशाथ व ध हेतु याचना १-७ १३४. इं क तु त १-७ उ प , माता, अ मांगना, र ासाधन, बु

, ानी, य पूण करना १-७

१३५. न चकेता एवं यम का संवाद १-७ इ छा, अनुराग, रथ, उपदे श, शत, बांसुरी १-७ १३६. अ न, सूय एवं वायु का वणन १-७ सूय, ग त, शरीर,

य म मु न १-४

सागर म नवास, आनंददाता, वाणी ५-७ १३७. व भ

वषय का वणन १-७

र ावश

याचना, दे व त, श

यु , ाणी, ओष ध, छू ना १-७

१३८. इं क तु त १-६ कु स, द तशाली, प ,ु धन छ नना, गाड़ी चलाना, रथच १३९. स वता, व ावसु व सोम का वणन १-६ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

१-६

र क, काशक, स यधमा, ऊपर आना, बु

, बल मांगना १-६

१४०. अ न क तु त १-६ अ व बल दे ना, खेलना, बलपु , य छू ना, धन याचना १-६ १४१. व भ दे व क तु त १-६ जा वामी, सर वती, आ ान, बुलाना, ेरणा १-६ १४२. अ न क तु त व वणन १-८ ःखी, चलना, धरती, सफाई, चढ़ना, वासदाता, आधार, सागर १-८ १४३. अ नीकुमार क तु त व वणन १-६ अ , क ीवान्, मु , सुंदर, तु तयां, नौका, गोधन १-६ १४४. इं क तु त व वणन १-६ सोमरस, ऋभु, वंश, सुपण, आयु याचना, र ा करना १-६ १४५. सौत क पीड़ा का वणन १-६ ेम, ओष ध, धान, र भेजना, श

हीन, मन १-६

१४६. वशाल वन का वणन १-६ नभय, यश, गा ड़यां, श द, फल, तु त १-६ १४७. इं क तु त १-५ कांपना, शंसा, पूजा, अ याचना १-५ १४८. इं क तु त १-५ तु त, जीतना, अपण, तो , तु त १-५ १४९. स वता का वणन १-५ बांधना, व तार पाना, ग ड़, प नी, सावधान १-५ १५०. अ न क तु त व वणन १-५ आ ान, बुलाना, य त, अ न, सुख मांगना, अ , भर ाज, क व आ द १-५ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

१५१.

ा क तु त व वणन १-५ जानना, मनचाहा फल, न य, सेवा, बुलाना १-५

१५२. इं क तु त १-५ श ुभ क, अभयक ा, अ य श ,ु अंधकार, आयुध १-५ १५३. इं क तु त १-५ शोभनधन, अ भलाषा, टकाना, धारण, अ धकार १-५ १५४. मृत

का वणन व यम क तु त १-५

घृत, तप करना, द णा, उ म कम, सूयर क १-५ १५५. द र ता क नदा १-५ श र ब , द र ता, तैरना, सोना, अ दे ना १-५ १५६. अ न क तु त १-५ धन जीतना, र ासाधन, धन मांगना, काशक, ाता १-५ १५७. इं एवं अ य दे व का वणन १-५ सुख याचना, जार ण, र क, अमरता, वषा दे खना १-५ १५८. सूय क तु त १-५ र ा व ने याचना, दे खना १-५ १५९. शची का आ मवणन १-६ वश म करना, हराना, क त, श ुहीन, तेज, अ धकार १-६ १६०. इं क तु त व वणन १-५ सोमरस, तु तयां, धनदाता, धनी, आ ान १-५ १६१. इं

ारा रोगी को सां वना १-५

य मा नवारणाथ लौटना १-५

ाथना, नऋ त, पार ले जाना, रोगनाश, शतायु याचना,

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१६२. गभ क र ा हेतु सां वना १-६ रा सहंता, तु त मं , भगाना, जांघ फैलाना, संतान नाशक को भगाना १-६ १६३. य मा के नाश हेतु सां वना १-६ य मा नकालना, रोग भगाना, बाहर करना, सभी भाग से नकालना, जोड़ १-६ १६४. बुरे व

के नाश हेतु सां वना १-५

नऋ त, मनोरथ, ने , पाप, चेता, पापहीन १-५ १६५. व भ

ा णय का वणन १-५

त, र ले जाने व पाप से बचाने क

ाथना, क याण, नम कार, अ

१६६. इं से श ुनाश के लए ाथना १-५ जेता, अ ह सत, बांधना, छ नना, बोलना १-५ १६७. इं क तु त १-४ वगजय, शरण, सोमपान, तु त १-४ १६८. वायु क म हमा का वणन १-४ धूल उड़ाना, भुवन वामी, जल म , पूजन १-४ १६९. गाय के मह व का वणन १-४ र ाथ ाथना, गाय क उ प , शरीर दे ना, बछड़े १-४ १७०. सूय का वणन व तु त १-४ जा र ा, तेज, व तार, भरना १-४ १७१. इं क तु त १-४ यट् ऋ ष, घर जाना, अ वबु न, ले जाना १-४ १७२. उषा क तु त व वणन १-४ गाय का चलना, य क समा त, पूजा, अंधकार नाश १-४ १७३. राजा क तु त एवं रा या भषेक का वणन १-६ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

१-५

अ धकार, रा , आशीवाद, अ वचल, ुव

प, भ

१-६

१७४. राजा क तु त १-५ रा य ा त, े षी व दानर हत, आ य, य , वामी १-५ १७५. सोमरस नचोड़ने म सहायक प थर क तु त १-४ कम, ओष धतु य, योग, यजमान १-४ १७६. ऋभुगण एवं अ न का वणन १-४ धपान, द

तो , ह वाहक, आयुवृ

१-४

१७७. माया का वणन १-३ जीवा मा पी प ी, र क वाणी, सूय १-३ १७८. ग ड़ का वणन १-३ बुलाना, ावा-पृ थवी, व तार १-३ १७९. इं क तु त व वणन १-३ भाग, उपासना, दानी १-३ १८०. इं क तु त १-३ धन मांगना, आना, तेजस हत ज म १-३ १८१. व भ

वषय का वणन १-३

पृथु, सु थ, सुर त, साममं लाना, ा त १-३ १८२. बृह प त एवं अ न से र ा हेतु ाथना १-३ श ुनाशाथ ाथना, बु

, अमंगल नाश हेतु ाथना १-३

१८३. यजमान, यजमानप नी व उसके गभ क र ा हेतु ाथना १-३ पु व गभाधान क कामना, ज म दे ना १-३ १८४. गभ क सुर ा हेतु ाथना १-३ भाग, गभधारण हेतु ाथना, आ ान १-३ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

१८५. आ द य व व ण से जीवन र ा हेतु ाथना १-३ र ाथ ाथना, दबाना असंभव, यो त दे ना १-३ १८६. जीवन को अमृतमय बनाने क व ण से ाथना १-३ द घायु हेतु ाथना, य का आ ह, अमृत याचना १-३ १८७. अ न से श ु

से बचाने क

ाथना १-५

तु त, आना, र ा याचना, एक-एक कर दे खना, र ाथ ाथना १-५ १८८. अ न से ाथना १-३ ानी, तु त, र ा क

ाथना १-३

१८९. सूय क म हमा का वणन १-३ जाना, १९०. सृ

ा त करना, शोभा पाना १-३ मक उप

का वणन १-३

तप से य , स य, रात- दन क उ प , सागर, सवं सर, सूय, चं मा, ुलोक, पृ थवी व अंत र क सृ १-३ १९१. अ न से क याण एवं धन क

ाथना १-४

धन याचना, मलकर भोगने का आ ह, अ भमं त करना, संग ठत रहने का आ ह १-४

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थम मंडल सू —१ ॐ अ नमीळे पुरो हतं य

दे वता—अ न य दे वमृ वजम्. होतारं र नधातमम्.. (१)

म अ न क तु त करता ं. वे य के पुरो हत, दाना द गुण से यु , य म दे व को बुलाने वाले एवं य के फल पी र न को धारण करने वाले ह. (१) अ नः पूव भऋ ष भरी

ो नूतनै त. स दे वाँ एह व त.. (२)

ाचीन ऋ षय ने अ न क तु त क थी. वतमान ऋ ष भी उनक तु त करते ह. वे अ न इस य म दे व को बुलाव. (२) अ नना र यम वत् पोषमेव दवे दवे. यशसं वीरव मम्.. (३) अ न क कृपा से यजमान को धन मलता है. उ ह क कृपा से वह धन दन दन बढ़ता है. उस धन से यजमान यश ा त करता है एवं अनेक वीर पु ष को अपने यहां रखता है. (३) अ ने यं य म वरं व तः प रभूर स. स इ े वेषु ग छ त.. (४) हे अ न! जस य क तुम चार ओर से र ा करते हो, उस म रा स आ द हसा नह कर सकते. वही य दे वता को तृ त दे ने वग जाता है. (४) अ नह ता क व तुः स य

व तमः. दे वो दे वे भरा गमत्.. (५)

हे अ न दे व! तुम सरे दे व के साथ इस य म आओ. तुम य के होता, बु स यशील एवं परमक त वाले हो. (५)

संप ,

यद दाशुषे वम ने भ ं क र य स. तवे त् स यम रः.. (६) हे अ न! तुम य म ह व दे ने वाले यजमान का जो क याण करते हो, वह वा तव म तु हारी ही स ता का साधन बनता है. (६) उप वा ने दवे दवे दोषाव त धया वयम्. नमो भर त एम स.. (७) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हे अ न! हम स चे दय से तु ह रात- दन नम कार करते ह और समीप आते ह. (७)

त दन तु हारे

राज तम वराणां गोपामृत य द द वम्. वधमानं वे दमे.. (८) हे अ न! तुम काशवान्, य क रचना करने वाले और कमफल के य शाला म बढ़ने वाले हो. (८)

ोतक हो. तुम

स नः पतेव सूनवेऽ ने सूपायनो भव. सच वा नः व तये.. (९) हे अ न! जस कार पु पता को सरलता से पा लेता है, उसी कार हम भी तु ह सहज ही ा त कर सक. तुम हमारा क याण करने के लए हमारे समीप नवास करो. (९)

सू —२

दे वता—वायु आ द

वायवा या ह दशतेमे सोमा अरंकृताः. तेषां पा ह ुधी हवम्.. (१) हे दशनीय वायु! आओ, यह सोमरस तैयार है, इसे पओ. हम सोमपान के लए तु ह बुला रहे ह. तुम हमारी यह पुकार सुनो. (१) वाय उ थे भजर ते वाम छा ज रतारः. सुतसोमा अह वदः.. (२) शु

हे वायु! अ न ोम आ द य के ाता ऋ वज् तथा यजमान आ द हम सं कार ारा सोमरस के साथ तु हारी तु त करते ह. (२) वायो तव पृ चती धेना जगा त दाशुषे. उ ची सोमपीतये.. (३)

हे वायु! तुम सोमरस क शंसा करते ए उसे पीने क जो बात कहते हो, वह ब त से यजमान के पास तक जाती है. (३) इ वायू इमे सुता उप यो भरा गतम्. इ दवो वामुश त ह.. (४) हे इं और वायु! तुम दोन हम दे ने के लए अ लेकर आओ. सोमरस तैयार है और तुम दोन क अ भलाषा कर रहा है. (४) वाय व

चेतथः सुतानां वा जनीवसू. तावा यातमुप वत्.. (५)

हे वायु और इं ! तुम दोन यह जान लो क सोमरस तैयार है. तुम दोन अ यु म रहने वाले हो. तुम दोन शी ही य के समीप आओ. (५) वाय व

सु वत आ यातमुप न कृतम्. म व१ था धया नरा.. (६)

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हे वायु और इं ! सोमरस दे ने वाले यजमान ने जो सोमरस तैयार कया है, तुम दोन उसके समीप आओ. हे दोन दे वो! तु हारे आने से यह य कम शी पूरा हो जाएगा. (६) म ं वे पूतद ं व णं च रशादसम्. धयं घृताच साध ता.. (७) म प व बल वाले म तथा हसक का नाश करने वाले व ण का य करता ं. ये दोन धरती पर जल लाने का काम करते ह. (७) ऋतेन म ाव णावृतावृधावृत पृशा.

म आ ान

तुं बृह तमाशाथे.. (८)

हे म और व ण! तुम दोन य के वधक और य का पश करने वाले हो. तुम लोग हम य का फल दे ने के लए इस वशाल य को ा त कए ए हो. (८) कवी नो म ाव णा तु वजाता उ

या. द ं दधाते अपसम्.. (९)

म और व ण बु मान् लोग का क याण करने वाले और अनेक लोग के आ य ह. ये हमारे बल और कम क र ा कर. (९)

दे वता—अ नीकुमार

सू —३

अ ना य वरी रषो व पाणी शुभ पती. पु भुजा चन यतम्.. (१) हे अ नीकुमारो! तु हारी भुजाएं व तीण एवं ह व हण करने के लए चंचल ह. तुम शुभ कम के पालक हो. तुम दोन य का अ हण करो. (१) अ ना पु दं ससा नरा शवीरया धया. ध या वनतं गरः.. (२) बु

हे अ नीकुमारो! तुम अनेक कम वाले, नेता और बु से हमारी तु त सुनो. (२) द ा युवाकवः सुता नास या वृ ब हषः. आ यातं

मान् हो. तुम दोन आदरपूण

वतनी.. (३)

हे श ु वनाशक, स यभाषी और श ु को लाने वाले अ नीकुमारो! सोमरस तैयार करके बछे ए कुश पर रख दया गया है. तुम इस य म आओ. (३) इ ा या ह च भानो सुता इमे वायवः. अ वी भ तना पूतासः.. (४) हे व च काश वाले इं ! ऋ षय क उंग लय ारा नचोड़ा गया, न य शु सोमरस तु हारी इ छा कर रहा है. तुम इस य म आओ. (४) इ ा या ह धये षतो व जूतः सुतावतः. उप

ा ण वाघतः.. (५)

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यह

हे इं ! तुम हमारी भ से आक षत होकर इस य म आओ. ा ण तु हारा आ ान कर रहे ह. तुम सोमरस लए ए वाघत नामक पुरो हत क ाथना सुनने के लए आओ. (५) इ ा या ह तूतुजान उप यु

ा ण ह रवः. सुते द ध व न नः.. (६)

हे अ के वामी इं ! तुम हमारी ाथना सुनने के लए शी आओ और सोमरस से इस य म हमारा अ वीकार करो. (६) ओमास षणीधृतो व े दे वास आ गत. दा ांसो दाशुषः सुतम्.. (७)

हे व ेदेवगण! तुम मनु य के र क एवं पालन करने वाले हो. ह दाता यजमान ने सोमरस तैयार कर लया है, तुम इसे हण करने के लए आओ. तुम लोग को य का फल दे ने वाले हो. (७) व े दे वासो अ तुरः सुतमा ग त तूणयः. उ ा इव वसरा ण.. (८) हे वृ करने वाले व ेदेवगण! जस कार सूय क करण बना आल य के दन म आती ह, उसी कार तुम तैयार सोमरस को पीने के लए ज द आओ. (८) व े दे वासो अ ध ए हमायासो अ हः. मेधं जुष त व यः.. (९) व ेदेवगण नाशर हत, व तृत बु

वाले तथा वैर से हीन ह. वे इस य म पधार. (९)

पावका नः सर वती वाजे भवा जनीवती. य ं व ु धयावसुः.. (१०) दे वी सर वती प व करने वाली तथा अ एवं धन दे ने वाली ह. वे धन साथ लेकर हमारे इस य म आएं. (१०) चोद य ी सूनृतानां चेत ती सुमतीनाम्. य ं दधे सर वती.. (११) सर वती स य बोलने क ेरणा दे ने वाली ह तथा उ म बु ह. वे हमारा यह य वीकार कर चुक ह. (११) महो अणः सर वती

वाले लोग को श ा दे ती

चेतय त केतुना. धयो व ा व राज त.. (१२)

सर वती नद ने वा हत होकर वशाल जलरा श उ प क है. साथ ही य करने वाले लोग म उ ह ने ान भी जगाया है. (१२)

सू —४ सु पकृ नुमूतये सु घा मव गो हे. जु म स

दे वता—इं व व.. (१)

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जस कार वाला ध हने के लए गाय को बुलाता है, उसी कार हम भी अपनी र ा के लए सुंदर कम करने वाले इं को त दन बुलाते ह. (१) उप नः सवना ग ह सोम य सोमपाः पब. गोदा इ े वतो मदः.. (२) हे सोमरस पीने वाले इं ! तुम सोमरस पीने के लए हमारे षवण य के पास आओ. तुम धन के वामी हो. तु हारी स ता गाय दे ने का कारण बनती है. (२) अथा ते अ तमानां व ाम सुमतीनाम्. मा नो अ त य आ ग ह.. (३) हे इं ! हम सोमपान करने के प ात् तु हारे अ यंत समीपवत एवं शोभन-बु वाले लोग के बीच रहकर तु ह जान. तुम भी हम छोड़कर सर को दशन मत दे ना. तुम हमारे समीप आओ. (३) परे ह व म तृत म ं पृ छा वप तम्. य ते स ख य आ वरम्.. (४) हे यजमान! बु मान् एवं हसार हत इं के पास जाकर मुझ बु म पूछो. वे तु हारे म को उ म धन दे ते ह. (४) उत ुव तु नो नदो नर यत दारत. दधाना इ

मान् होता के वषय

इ वः.. (५)

सदा इं क सेवा करने वाले हमारे पुरो हत इं क तु त कर. इं क नदा करने वाले लोग इस दे श के अ त र अ य दे श से भी नकल जाव. (५) उत नः सुभगाँ अ रव चेयुद म कृ यः. यामे द

य शम ण.. (६)

हे श ुनाशक इं ! तु हारी कृपा से श ु और म दोन हम सुंदर धन वाला कहते ह. हम इं क कृपा से ा त सुख से जीवन बताव. (६) एमाशुमाशवे भर य

यं नृमादनम्. पतय म दयत् सखम्.. (७)

यह सोमरस तुरंत नशा करने वाला एवं य क शोभा है. यह मनु य को म त करने वाला, कायसाधक और आनंददाता इं का म है. य म ा त इं को यह सोमरस दो. (७) अ य पी वा शत तो घनो वृ ाणामभवः. ावो वाजेषु वा जनम्.. (८) हे सौ य करने वाले इं ! इसी सोमरस को पीकर तुमने वृ आ द श ु कया था और यु े म अपने यो ा क र ा क थी. (८) तं वा वाजेषु वा जनं वाजयामः शत तो. धनाना म

सातये.. (९)

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का नाश

हे सौ य करने वाले इं ! तुम यु तु ह य म ह व दे ते ह. (९)

म बल दशन करने वाले हो. हम धन पाने के लए

यो रायो३व नमहा सुपारः सु वतः सखा. त मा इ ाय गायत.. (१०) हे ऋ वज्! जो इं धन का र क, गुणसंप , सुंदर काय को पूण करने वाला तथा यजमान का म है, उसी को स करने के लए तु त करो. (१०)

दे वता—इं

सू —५ आ वेता न षीदते म भ

गायत. सखायः तोमवाहसः.. (१)

हे तु त करने वाले म ो! शी आओ और यहां बैठो. तुम लोग इं क तु त करो. (१) पु तमं पु णामीशानं वायाणाम्. इ ं सोमे सचा सुते.. (२) सोमरस तैयार हो जाने पर सब लोग एक हो जाओ और श ु एवं े धन के वामी इं क तु त करो. (२)

का नाश करने वाले

स घा नो योग आ भुवत् स राये स पुर याम्. गमद् वाजे भरा स नः.. (३) वह ही इं हमारे अभाव को पूरा कर, हम धन द, अनेक कार क बु और भां त-भां त के अ लेकर हमारे पास आव. (३)

दान कर

य य सं थे न वृ वते हरी सम सु श वः. त मा इ ाय गायत.. (४) यु म जस इं के घोड़ स हत रथ को दे खकर श ु भाग जाते ह, उ ह इं क तु त करो. (४) सुतपा ने सुता इमे शुचयो य त वीतये. सोमासो द या शरः.. (५) यह प व और वशु आप प ंच जाता है. (५)

सोमरस य म सोमपान करने वाले के समीप पीने हेतु अपने

वं सुत य पीतये स ो वृ ो अजायथाः. इ

यै

ाय सु तो.. (६)

हे सुंदर कम करने वाले इं ! तुम सभी दे व म बड़े होने के कारण सोमपान करने के लए सबसे अ धक उ सा हत रहते हो. (६) आ वा वश वाशवः सोमास इ

गवणः. शं ते स तु चेतसे.. (७)

हे तु तय के ल य इं ! तीन सवन नामक य म ा त सोमरस तु ह मले. यह सोम ******ebook converter DEMO Watermarks*******

उ च ान क

ा त म तु हारा सहायक एवं क याणकारी ा त हो. (७)

वां तोमा अवीवृधन् वामु था शत तो. वां वध तु नो गरः.. (८) हे सौ य करने वाले इं ! ऋ वेद के मं एवं सोम-संबंधी मं हमारी तु तयां भी तु हारी त ा बढ़ाव. (८)

ने तु हारी शंसा क है.

अ तो तः सने दमं वाज म ः सह णम्. य मन् व ा न प या.. (९) र ा म सदा त पर रहने वाले इं इस हजार सं या वाले सोम इसी म सम त श यां रहती ह. (९) मा नो मता अ भ हन् तनूना म

पी अ को हण कर.

गवणः. ईशानो यवया वधम्.. (१०)

हे तु त करने के यो य इं ! तुम श शाली हो. तुम ऐसी कृपा करना क हमारे श ु हमारे शरीर पर चोट न कर सक. तुम उ ह हमारा वध करने से रोकना. (१०)

दे वता—इं एवं म द्गण

सू —६ यु



नम षं चर तं प र त थुषः. रोच ते रोचना द व.. (१)

जो इं तेज वी सूय के प म, अ हसक अ न के प म तथा सव ग तशील वायु के प म थत ह, सब लोक म नवास करने वाले ाणी उ ह इं से संबंध रखते ह. उ ह इं क मू त आकाश म न के प म चमकती है. (१) यु

य य का या हरी वप सा रथे. शोणा धृ णू नृवाहसा.. (२)

सार थ उन इं के रथ म ह र नाम के सुंदर, रथ के दोन ओर जोड़ने यो य, लाल रंग के और श शाली दो घोड़ को जोड़ते ह. वे घोड़े इं एवं उनके सार थ को ढोने म समथ ह. (२) केतुं कृ व केतवे पेशो मया अपेशसे. समुष

रजायथाः.. (३)

हे मनु यो! यह आ य दे खो क यह इं रात को बेहोश ा णय को ातः होश म लाते ए और रात म अंधकार के कारण पहीन पदाथ को ातः प दान करते ए सूय प म करण बखेरते ह. (३) आदह वधामनु पुनगभ वमे ररे. दधाना नाम य यम्.. (४) इसके प ात् म द्गण ने य के यो य नाम धारण करके अपने अनुसार बादल म जल पी गभ को े रत कया है. (४) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

तवष के नयम के

वीळु चदा ज नु भगुहा च द



भः. अ व द उ या अनु.. (५)

हे इं ! तुमने म द्गण के साथ मलकर गुफा म छपाई ई गाय को खोजकर वहां से नकाला. वे म द्गण ढ़ थान को भी भेदन करने एवं एक थान क व तु को सरी जगह म ले जाने म समथ ह. (५) दे वय तो यथा म तम छा वद सुं गरः. महामनूषत ुतम्.. (६) तु त करने वाले लोग वयं दे वभाव ा त करने क इ छा से धन के वामी, श शाली एवं व यात म द्गण को ल य करके उसी कार तु त कर रहे ह, जस कार वे इं क तु त करते ह. (६) इ े ण सं ह

से स

मानो अ ब युषा. म

समानवचसा.. (७)

हे म द्गण! भयर हत इं के साथ तु हारी ब त घ न ता दे खी जाती है. तुम दोन न य स और समान तेज वाले हो. (७) अनव ैर भ ु भमखः सह वदच त. गणै र

य का यैः.. (८)

यह य दोषर हत, दे वलोक म नवास करने वाले तथा फल दे ने के कारण कामना करने यो य म द्गण के साथ होने के कारण इं को बलवान् समझकर पूजा-अचना करता है. (८) अतः प र म ा ग ह दवो वा रोचनाद ध. सम म ृ

ते गरः.. (९)

हे चार ओर ापक म द्गण! तुम ुलोक, आकाश या द त सूय मंडल से इस य म आओ. पुरो हत-समूह इस य म तु हारी भली कार तु त कर रहा है. (९) इतो वा सा तमीमहे दवो वा पा थवाद ध. इ ं महो वा रजसः.. (१०) हम इं दे व क ाथना इसी लए करते ह क वे पृ वीलोक, आकाश या वायुलोक से हम धन दान करते ह. (१०)

दे वता—इं

सू —७ इ

मद् गा थनो बृह द मक भर कणः. इ ं वाणीरनूषत.. (१)

सामवेद का गान करने वाल ने सामगान के ऋचा ारा और यजुवद का पाठ करने वाल ने मं इ

इ य ः सचा स म

ारा, ऋ वेद का पाठ करने वाल ने ारा इं क तु त क है. (१)

आ वचोयुजा. इ ो व ी हर ययः.. (२)

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व धारण करने वाले एवं सवाभरणभू षत इं अपने आ ाकारी दोन घोड़ को अ यंत शी रथ म जोतकर सबके साथ मल जाते ह. (२) इ ो द घाय च स आ सूय रोहयद् द व. व गो भर मैरयत्.. (३) इं ने मनु य को नरंतर दे खने के लए सूय को आकाश म था पत कया है. सूय अपनी करण ारा पवत आ द सम त संसार को का शत कर रहे ह. (३) इ

वाजेषु नोऽव सह

धनेषु च. उ उ ा भ

त भः.. (४)

हे श ु ारा न हारने वाले इं ! अपनी अमोघ र ण श के ारा ऐसे महायु हमारी र ा करो जो हजार गज , अ आ द का लाभ दे ने वाले ह . (४) इ ं वयं महाधन इ मभ हवामहे. युजं वृ ेषु व



णम्.. (५)

इं हमारी सहायता करने वाले तथा धन-लाभ का वरोध करने वाले हमारे श ु के लए व धारी ह. हम व प अथवा वपुल धन पाने के लए हम इं का आ ान करते ह. (५) स नो वृष मुं च ं स ादाव पा वृ ध. अ म यम त कुतः.. (६) हे इं ! तुम हमारे लए इ छत फल दे ने वाले तथा वृ दान करने वाले हो. तुम हमारे लाभ के लए उस मेघ का मदन करो. तुमने कभी भी हमारी ाथना अ वीकार नह क है. (६) तु

ेतु

े य उ रे तोमा इ

यव

णः. न व धे अ य सु ु तम्.. (७)

भ - भ फल दे ने वाले दे वता के लए जन उ म तु तय का योग कया जाता है, वे सब व धारण करने वाले इं के लए ह. इं के अनु प तु त को म नह जानता. (७) वृषा यूथेव वंसगः कृ ी रय य जसा. ईशानो अ त कुतः.. (८) जस कार तेज चाल वाला बैल धेनु समूह को अपने बल से अनुगृहीत करता है, उसी कार इ छा को पूरा करने वाले इं मनु य को श शाली बनाते ह. इं समथ ह एवं कसी क ाथना को ठु कराते नह ह. (८) य एक षणीनां वसूना मर य त. इ ः प च इं सम त मानव , संप य और पंचकरने वाले ह. (९)

तीनाम्.. (९)

तय पर नवास करने वाले वण पर शासन

इ ं वो व त प र हवामहे जने यः. अ माकम तु केवलः.. (१०) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हे ऋ वजो! और यजमानो! हम सव े इं का आ ान तु हारे क याण के न म करते ह. इं केवल हमारे ह. (१०)

दे वता—इं

सू —८ ए

सान स र य स ज वानं सदासहम्. व ष मूतये भर.. (१)

हे इं ! हमारी र ा के लए ऐसा धन दो जो हमारे भोग के यो य, श ु करने म सहायक तथा श ु क हार का कारण बने. (१)

को वजय

न येन मु ह यया न वृ ा णधामहै. वोतासो यवता.. (२) उस धन से एक कए गए यो ा के मु के क चोट से हम श ु को रोक दगे. तु हारे ारा सुर त होकर हम घोड़ क सहायता से श ु को र भगाएंगे. (२) इ

वोतास आ वयं व ं घना दद म ह. जयेम सं यु ध पृधः.. (३)

हे इं ! तु हारे ारा सुर त होकर हम अ यंत ढ़ व करने वाले श ु को परा जत करगे. (३) वयं शूरे भर तृ भ र

को धारण करके अपने से े ष

वया युजा वयम्. सास ाम पृत यतः.. (४)

हे इं ! हम तु हारी सहायता पाकर अपने श धारी सै नक को लेकर श ु सेना को जीत सकगे. (४) महाँ इ ः पर नु म ह वम तु व

णे. ौन

थना शवः.. (५)

इं दे व शरीर से ब ल एवं गुण से यु होने के कारण महान् ह. व धारी इं को पूव मह व ा त हो. इं क सेना आकाश के समान व तृत हो. (५) समोहे वा य आशत नर तोक य स नतौ. व ासो वा धयायवः.. (६) जो वीर पु ष यु े म जाने वाले ह, पु पाने क इ छा रखते ह अथवा जो बु ान क अ भलाषा रखते ह, वे सब इं क कृपा से स ा त कर. (६)

मान्

यः कु ः सोमपातमः समु इव प वते. उव रापो न काकुदः.. (७) इं का जो उदर सोमरस पीने के लए सदा त पर रहता है, वह समु के समान व तृत है. जस कार जीभ का पानी कभी नह सूखता, उसी कार इं के उदर म थत सोमरस भी कभी नह सूखता. (७) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

एवा

य सूनृता वर शी गोमती मही. प वा शाखा न दाशुषे.. (८)

इं के मुख से नकली ई वाणी स य, व वध वशेषता से यु , महती एवं गौएं दे ने वाली है. य म ह दे ने वाले यजमान के लए तो इं क वाणी पके ए फल से लद डाली के समान है. (८) एवा ह ते वभूतय ऊतय इ

मावते. स

त् स त दाशुषे.. (९)

हे इं ! तु हारी वभू तयां ह दान करने वाले हमारे समान यजमान क र ा करने वाली एवं शी फल दे ने वाली ह. (९) एवा

य का या तोम उ थं च शं या. इ ाय सोमपीतये.. (१०)

सोमपान करने वाले इं के लए सामवेद एवं ऋ वेद के मं सोमपान संबंधी मं क इ छा करते ह. (१०)

अ भल षत ह. इं

दे वता—इं

सू —९

इ े ह म य धसो व े भः सोमपव भः. महाँ अ भ रोजसा.. (१) हे इं ! इस य म आकर सोमरस पी सम त भो य पदाथ से स बनो. इसके प ात् तुम परम श शाली बनकर श ु पर वजय ा त करो. (१) एमेनं सृजता सुते म द म ाय म दने. च

व ा न च ये.. (२)

य द आनंद दे ने वाला एवं काय संपादन क ेरणा करने वाला सोमरस तैयार हो तो उसे स एवं संपूण काय स करने वाले को भट करो. (२) म वा सु श म द भः तोमे भ व चषणे. सचैषु सवने वा.. (३) हे सुंदर ना सका एवं ठोड़ी वाले तथा सम त यजमान ारा पू य इं ! तुम आनंद बढ़ाने वाली तु तय से स होकर इस सवन नामक य म पधारो. (३) असृ म

ते गरः

त वामुदहासत. अजोषा वृषभं प तम्.. (४)

हे इं ! मने तु हारी तु तयां क ह. वे तु हारे समीप वग म प ंच गई ह. तुमने उन तु तय को वीकार कर लया है. तुम मनचाही वषा करने वाले एवं यजमान के र क हो. (४) सं चोदय च मवा ाध इ

वरे यम्. अस द े वभु भु.. (५)

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हे इं ! े एवं व वध कार का धन हमारे पास भेजो. हमारे भोग के लए पया त एवं अ धक धन तु हारे ही पास है. (५) अ मा सु त चोदये

राये रभ वतः. तु व ु न यश वतः.. (६)

हे अ धक संप वाले इं ! धन क स हम उ ोगशील एवं क त वाले ह . (६) सं गोम द

के लए हम य

वाजवद मे पृथु वो बृहत्. व ायुध

पी कम क

ेरणा दो.

तम्.. (७)

हे इं ! हम गाय एवं अ के साथ-साथ अ धक मा ा म धन दो. यह धन इतना व तृत हो क सम त आयु भर खच होने पर भी समा त न हो. (७) अ मे धे ह वो बृहद् ु नं सह सातमम्. इ

ता र थनी रषः.. (८)

हे इं ! हम वशाल यश, अनेक रथ म भरा आ अ एवं ऐसा धन दो, जससे हम हजार क सं या म दान कर सक. (८) वसो र ं वसुप त गी भगृण त ऋ मयम्. होम ग तारमूतये.. (९) अपने धन क र ा करने के लए हम तु तय ारा इं को बुलाते ह. इं धन के र क, ऋचा से ेम करने वाले एवं य थान म गमन करने वाले ह. (९) सुतेसुते योकसे बृहद् बृहत एद रः. इ ाय शूषमच त.. (१०) सब यजमान येक य म इं के महान् परा म क नवास करने वाले एवं श संप ह. (१०)

सू —१०

शंसा करते ह. इं य म सदा

दे वता—इं

गाय त वा गाय णो ऽच यकम कणः. ाण वा शत त उ ं श मव ये मरे.. (१) हे शत तु इं ! उद्गाता तु हारी तु त करते ह. पूजाथक मं बोलने वाले होता पूजा के यो य इं क अचना करते ह. जस कार बांस के ऊपर नाचने वाले कलाकार बांस को ऊपर उठाते ह, उसी कार तु त करने वाले ा ण तु हारी उ त करते ह. (१) य सानोः सानुमा हद् भूय प क वम्. त द ो अथ चेत त यूथेन वृ णरेज त.. (२) जब यजमान सोमलता खोजने के लए एक पवत से सरे पवत पर जाता है और ******ebook converter DEMO Watermarks*******

सोमयाग प अनेक कम आरंभ करता है, तब इं उसका योजन जानते ह तथा यजमान क इ छानुसार वषा करने के लए म द्गण के साथ य थान म आने क तैयारी करते ह. (२) यु वा ह के शना हरी वृषणा क य ा. अथा न इ सोमपा गरामुप ु त चर.. (३) हे सोमपानक ा इं ! अपने केशर वाले, युवा एवं पु शरीर वाले घोड़ को रथ म जोड़ो. इसके प ात् हमारी तु तयां सुनने के लए समीप आओ. (३) ए ह तोमाँ अ भ वरा भ गृणी ा व. च नो वसो सचे य ं च वधय.. (४) हे सव ापक इं ! इस य म आओ. उद्गाता ारा क ई तु त क शंसा करो, अ वयु क तु तय का समथन करो और अपने श द से सबको आनंद दो. इसके प ात् हमारे अ के साथ-साथ इस य को भी बढ़ाओ. (४) उ थ म ाय शं यं वधनं पु न षधे. श ो यथा सुतेषु णो रारणत् स येषु च.. (५) अग णत श ु को रोकने वाले इं के लए गाए गए गीत वृ पाते रह. इन गीत के कारण श शाली इं हमारे पु एवं म के म य महान् श द कर. (५) त मत् स ख व ईमहे तं राये तं सुवीय. स श उत नः शक द ो वसु दयमानः.. (६) हम लोग मै ी, धन और श पाने के लए इं के समीप जाते ह. बलशाली इं हम धन दान करके हमारी र ा करते ह. (६) सु ववृतं सु नरज म वादात म शः. गवामप जं वृ ध कृणु व राधो अ वः.. (७) हे इं ! तु हारे ारा दया आ अ सव फैला आ और सु वधापूवक मलने वाला है. हे व धारण करने वाले इं ! ध, घी आ द रस के लाभ के लए गोशाला का ार खोलो और हम धन दान करो. (७) न ह वा रोदसी उभे ऋघायमाण म वतः. जेषः ववतीरपः सं गा अ म यं धूनु ह.. (८) हे इं ! जस समय तुम श ु का वध करते हो, उस समय धरती और आकाश दोन म ******ebook converter DEMO Watermarks*******

तु हारी म हमा नह समाती. तुम आकाश से जल क वषा करो और हमारे लए गाएं दो. (८) आ ु कण ुधी हवं नू च ध व मे गरः. इ तोम ममं मम कृ वा युज द तरम्.. (९) हे इं ! तु हारे दोन कान चार ओर क बात सुनने वाले ह, इस लए हमारी पुकार ज द सुनो. हमारी तु तय को अपने मन म थान दो. जस कार म क बात मरण रहती ह, उसी कार हमारी ये तु तयां भी अपने पास रखो. (९) व ा ह वा वृष तमं वाजेषु हवन ुतम्. वृष तम य मह ऊ त सह सातमाम्.. (१०) हे इं ! हम तु ह जानते ह क तुम मनचाही वषा करते हो तथा यु थल म हमारी ाथना सुनते हो. तुम सम त कामना को पूण करने वाले हो. हम हजार कार के धन दे ने वाली तु हारी र ा का आ ान करते ह. (१०) आ तू न इ कौ शक म दसानः सुतं पब. न मायुः सू तर कृधी सह सामृ षम्.. (११) हे इं ! तुम हमारे पास शी आओ. हे कु शक ऋ ष के पु ! स होकर सोमपान करो, दे वता ारा शंसनीय य कम करने के लए हमारा जीवन बढ़ाओ एवं मुझ ऋ ष को हजार धन वाला बनाओ. (११) प र वा गवणो गर इमा भव तु व तः. वृ ायुमनु वृ यो जु ा भव तु जु यः.. (१२) हे हमारी तु तय के वषय इं ! हमारी ये तु तयां सब ओर से तु हारे पास प च ं . चर आयु वाले तु हारा अनुगमन करके ये तु तयां वृ ा त कर. ये तु तयां तु ह संतु करके हमारे लए स ता दान कर. (१२)

सू —११

दे वता—इं

इ ं व ा अवीवृध समु चसं गरः. रथीतमं रथीनां वाजानां स प त प तम्.. (१) सागर के समान व तृत रथ के वा मय म े , अ य के वामी एवं सबके पालक इं को हमारी तु तय ने बढ़ाया था. (१) स ये त इ वा जनो मा भेम शवस पते. वाम भ णोनुमो जेतारमपरा जतम्.. (२) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हे बल के वामी इं ! तु हारी म ता पाकर हम श अपरा जत वजेता हो. हम तु ह नम कार करते ह. (२)

शाली एवं नभय बन. तुम

पूव र य रातयो न व द य यूतयः. यद वाज य गोमतः तोतृ यो मंहते मघम्.. (३) श

इं ारा कए गए पुराकालीन दान स ह. य द वे तु तक ा पूण अ दान कर तो सब ा णय क र ा हो सकती है. (३)

को गाययु

एवं

पुरां भ युवा क वर मतौजा अजायत. इ ो व य कमणो धता व ी पु ु तः.. (४) इं ने पुरभेदनकारी, युवा, अ मत तेज वी, सम त य अनेक य ारा तुत प म ज म लया. (४)

के धारणक ा, व धारक एवं

वं वल य गोमतोऽपावर वो बलम्. वां दे वा अ ब युष तु यमानास आ वषुः.. (५) हे व धारी इं ! तुमने गाय का अपहरण करने वाले बल असुर क गुफा का ार खोल दया था. बलासुर ारा सताए ए दे व ने उस समय नडर होकर तु ह घेर लया था. (५) तवाहं शूर रा त भः यायं स धुमावदन्. उपा त त गवणो व े त य कारवः.. (६) हे शूर इं ! नचोड़े ए सोमरस के गुण का वणन करता आ म तु हारे धनदान से भा वत होकर वापस आया ं. हे तु तपा इं ! य क ा तु हारे समीप उप थत होने एवं तु हारी कायकुशलता को जानते थे. (६) माया भ र मा यनं वं शु णमवा तरः. व े त य मे धरा तेषां वां यु र.. (७) हे इं ! तुमने छल ारा मायावी शु ण का नाश कया. इस बात को जो मेधावी लोग जानते ह, तुम उनक र ा करो. (७) इ मीशानमोजसा भ तोमा अनूषत. सह ं य य रातय उत वा स त भूयसीः.. (८) श ारा व के वामी बनने वाले क तु त ा थय ने क है. इं के धन दे ने के ढं ग हजार अथवा हजार से भी अ धक ह. (८) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

सू —१२

दे वता—अ न

अ नं तं वृणीमहे होतारं व वेदसम्. अ य य

य सु तुम्.. (१)

दे व के त एवं आ ान करने वाले, सम त संप य के अ धकारी एवं इस य को सुंदरतापूवक पूण कराने वाले अ न का हम वरण करते ह. (१) अ नम नं हवीम भः सदा हव त व प तम्. ह वाहं पु मं

यम्.. (२)

हम जापालक ा, सदा ह वहन करने वाले एवं व ारा सदा बुलाते ह. (२) अ ने दे वाँ इहा वह ज ानो वृ ब हषे. अ स होता न ई

के

य अ न को आवाहक

ः.. (३)

हे का से उ प अ न! य म कुश बछाने वाले यजमान के न म दे व को बुलाओ, य क तुम हमारे तु य एवं होता हो. (३) ताँ उशतो व बोधय यद ने या स

यम्. दे वैरा स स ब ह ष.. (४)

हे अ न! तुम दे व का तकम करते हो, इस लए ह को बुलाओ एवं उनके साथ बछे ए कुश पर बैठो. (४) घृताहवन द दवः

त म रषतो दह. अ ने वं र

क अ भलाषा करने वाले दे व

वनः.. (५)

हे घी ारा बुलाए गए तेज वी अ न! रा स के सहयोगी बने ए हमारे श ु जला दो. (५)

को

अ नना नः स म यते क वगृहप तयुवा. ह वाड् जु ा यः.. (६) ांतदश , गृहर क, युवा, ह वाहक एवं जु मुख दे वता अ न अ न से ही होते ह. (६)

व लत

क वम नमुप तु ह स यधमाणम वरे. दे वममीवचातनम्.. (७) हे तोताओ! ांतदश , स यशील, श ुनाशक एवं द गुणसंप आकर य म उसक तु त करो. (७)

अ न के सामने

य वाम ने ह व प त तं दे व सपय त. त य म ा वता भव.. (८) हे अ न! य क तुम ह के र क बनो. (८)

के वामी एवं दे व के त हो, इस लए अपने सेवक यजमान

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यो अ नं दे ववीतये ह व माँ आ ववास त. त मै पावक मृळय.. (९) हे पावक! जो ह दे ने वाले तु हारी शरण म आकर इस इ छा से तु हारी सेवा करते ह क उनका ह दे व को मल सके, तुम उनक र ा करो. (९) स नः पावक द दवोऽ ने दे वाँ इहा वह. उप य ं ह व नः.. (१०) हे द त अ न! दे व को यहां य समीप ले जाओ. (१०)

थल म लाओ एवं हमारा य

और ह व दे व के

स नः तवान आ भर गाय ेण नवीयसा. र य वीरवती मषम्.. (११) हे अ न! नव न मत गाय ी छं द क तु त ारा स होकर हम धन एवं संतानयु अ दो. (११) अ ने शु े ण शो चषा व ा भदव त भः. इमं तोमं जुष व नः.. (१२) हे अ न! तुम कां तयु वीकार करो. (१२)

एवं दे व त के

पम



हो. तुम हमारे इस तो को

दे वता—अ न आ द

सू —१३

सुस म ो न आ वह दे वाँ अ ने ह व मते. होतः पावक य

च.. (१)

हे भली कार व लत अ न! हमारे यजमान के क याण के लए दे व को लाओ. हे दे व को बुलाने वाले पावक! हमारा य पूरा करो. (१) मधुम तं तनूनपाद् य ं दे वेषु नः कवे. अ ा कृणु ह वीतये.. (२) हे ांतदश एवं शरीरर क अ न! हमारे मधुयु समीप ले जाओ. (२) नराशंस मह म इस य बुलाता ं. (३)

यम मन् य उप म

य को उपभोग के न म दे व के

ये. मधु ज ं ह व कृतम्.. (३)

य, मधु ज , ह -संपादक एवं मनु य

ारा

शं सत अ न को

अ ने सुखतमे रथे दे वाँ ई ळत आ वह. अ स होता मनु हतः.. (४) हे मानव ारा शं सत अ न! अपने परम सुखद रथ पर दे व को यहां ले आओ. तुम मानव हतकारी एवं दे व को बुलाने वाले हो. (४) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

तृणीत ब हरानुषग् घृतपृ ं मनी षणः. य ामृत य च णम्.. (५) हे मनी षयो! घी से चकने कुश को एक- सरे से मलाकर बछाओ. उस पर अमृत रखा जाएगा. (५) व य तामृतावृधो ारो दे वीरस तः. अ ा नूनं च य वे.. (६) य पूरा करने के लए आज न य ही तेज वी एवं जनर हत ार खोले जाव. वे बंद न रह. (६) न ोषासा सुपेशसा मन् य उप

ये. इदं नो ब हरासदे .. (७)

म बछे ए कुश पर बैठने के लए सुंदर रात और उषा को इस य म बुलाता ं. (७) ता सु ज ा उप

ये होतारा दै ा कवी. य ं नो य ता ममम्.. (८)

म अ न और सूय को बुलाता ं. वे सुंदर ज ा वाले, वाले ह. वे हमारा य पूरा कर. (८)

ांतदश और दे व को बुलाने

इळा सर वती मही त ो दे वीमयोभुवः. ब हः सीद व धः.. (९) (९)

सुख दे ने वाली एवं वनाशर हत इला, सर वती तथा मही नामक दे वयां कुश पर बैठ. इह व ारम यं व

(१०)

पमुप

म सवा णी तथा अनेक

ये. अ माकम तु केवलः.. (१०)

पधारी व ा को इस य म बुलाता ं. वे केवल हमारे ही ह .

अव सृजा वन पते दे व दे वे यो ह वः.

दातुर तु चेतनम्.. (११)

हे वन प तदे व! दे व के लए ह व भट करो. इससे यजमान साम से संप बन. (११) वाहा य ं कृणोतने ाय य वनो गृहे. त दे वाँ उप

ये.. (१२)

हे ऋ वजो! तुम यजमान के घर म वाहा श द बोलते ए इं के न म उस म हम दे व को बुलाते ह. (१२)

सू —१४

दे वता—अ न

ऐ भर ने वो गरो व े भः सोमपीतये. दे वे भया ह य

च.. (१)

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हवन करो.

हे अ न! इन सम त दे व के साथ सोमरस पीने, हमारी सेवा तथा तु त हण करने के लए पधारो एवं हमारा य पूरा करो. (१) आ वा क वा अ षत गृण त व ते धयः. दे वे भर न आ ग ह.. (२) हे व ान् अ न! क व क संतान तु ह बुलाती है एवं तु हारे कम क तुम दे व के साथ आओ. (२)

शंसा करती है.

इ वायू बृह प त म ा नं पूषणं भगम्. आ द यान् मा तं गणम्.. (३) हे तोताओ! इं , वायु, बृह प त, म , अ न, पूषा, भग, आ द य एवं म द्गण का आ ान करो. (३) वो

य त इ दवो म सरा माद य णवः.

सा म व मूषदः.. (४)

हे दे वो! तृ तकारक, स तादायक, मादक एवं ब

प सोमरस पा

म रखा है. (४)

ईळते वामव यवः क वासो वृ ब हषः. ह व म तो अरङ् कृतः.. (५) हे अ न! अलंकृत क ववंशी ह यु क याचना करते ह. (५)

होकर एवं कुश बछाकर तु ह बुलाते ह एवं र ा

घृतपृ ा मनोयुजो ये वा वह त व यः. आ दे वा सोमपीतये.. (६) हे अ न! तु हारी इ छा मा से रथ म जुड़ जाने वाले जो तेज वी घोड़े तु ह ढोते ह, उ ह से दे व को सोम पीने के लए यहां लाओ. (६) तान् यज ाँ ऋतावृधो ऽ ने प नीवत कृ ध. म वः सु ज

पायय.. (७)

हे अ न! उन पूजनीय एवं य वधक दे व को प नी वाला करो. हे सु ज ! उ ह सोम पलाओ. (७) ये यज ा य ई

ा ते ते पब तु ज या. मधोर ने वषट् कृ त.. (८)

हे अ न! पूजनीय एवं तु तपा दे व वषट् कार का उ चारण होते समय तु हारी जीभ से सोमरस पएं. (८) आक सूय य रोचनाद् व ान् दे वाँ उषबुधः. व ो होतेह व त.. (९) मेधावी एवं दे व के आ ान करने वाले अ न ातःकाल जागने वाले दे व को का शत सूय-मंडल से यहां य म लाव. (९) व े भः सो यं म व न इ े ण वायुना. पबा म य धाम भः.. (१०) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

(१०)

हे अ न! तुम सम त दे व , इं , वायु एवं म के तेज के साथ मधुर सोम का पान करो. वं होता मनु हतोऽ ने य ेषु सीद स. सेमं नो अ वरं यज.. (११) हे होता एवं मानव हतकारी अ न! तुम हमारे य म बैठो एवं उसको पूण करो. (११) यु वा

षी रथे ह रतो दे व रो हतः. ता भदवाँ इहा वह.. (१२)

हे अ न दे व! रो हत नामक ग तशील घोड़ को अपने रथ म जोड़ो एवं उनके ारा दे व को यहां लाओ. (१२)

दे वता—ऋतु आ द

सू —१५ इ

सोमं पब ऋतुना वा वश व दवः. म सरास तदोकसः.. (१)

हे इं ! तुम ऋतु के साथ सोमरस पओ. तृ तकारक एवं आ ययो य सोम तु हारे शरीर म व हो. (१) म तः पबत ऋतुना पो ाद् य ं पुनीतन. यूयं ह ा सुदानवः.. (२) हे म द्गण! पो नामक ऋ वक् ारा दया आ सोमरस ऋतु के साथ पओ. तुम शोभन दानशील हो. तुम मेरे य को प व करो. (२) अ भ य ं गृणी ह नो नावो ने ः पब ऋतुना. वं ह र नधा अ स.. (३) हे प नीयु र नदाता हो. (३)

व ा! हमारे य



अ ने दे वाँ इहा वह सादया यो नषु

शंसा करो एवं ऋत के साथ सोम पओ. तुम षु. प र भूष पब ऋतुना.. (४)

हे अ न! दे व को यहां य म बुलाओ एवं यो न नामक तीन थान म बैठाओ, उ ह वभू षत करो एवं ऋतु के साथ सोमरस पओ. (४) ा णा द

राधसः पबा सोममृतूँरनु. तवे

स यम तृतम्.. (५)

हे इं ! तुम ऋतु के प ात् ा णा छं सी पुरो हत के पा से सोमपान करो. तु हारी म ता टू टने वाली नह है. (५) युवं द ं धृत त म ाव ण ळभम्. ऋतुना य माशाथे.. (६) हे तधारणक ा म और व ण! ऋतु के साथ य म आओ. हमारा य वृ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

ात

एवं श ु

क बाधा से र हत है. (६) वणोदा

वणसो ावह तासो अ वरे. य ेषु दे वमीळते.. (७)

पुरो हत धन क अ भलाषा से भां त-भां त के य वे सोमलता कूटने के प थर हाथ म लए ह. (७)

म धन द अ न क तु त करते ह.

वणोदा ददातु नो वसू न या न शृ वरे. दे वेषु ता वनामहे.. (८) वणोदा अ न हम सभी सुनी संप यां दान कर. हम उ ह दे वय म लगाव. (८) वणोदाः पपीष त जुहोत

च त त. ने ा तु भ र यत.. (९)

हे ऋ वजो! धनदाता अ न ऋतु के साथ व ा के पा से सोमरस पीना चाहते ह. तुम य करने के प ात् अपने थान पर चले जाओ. (९) यत् वा तुरीयमृतु भ वणोदो यजामहे. अध मा नो द दभव.. (१०) हे धनदाता अ न! म ऋतु हमारे लए धनदाता बनो. (१०) अ ना पबतं मधु द

के साथ चौथी बार तु हारे उ े य से य कर रहा ं. तुम

नी शु च ता. ऋतुना य वाहसा.. (११)

हे प व कम करने वाले अ नीकुमारो! काशमान अ न के साथ सोमरस का पान करो. तुम ऋतु के साथ य पूरा करते हो. (११) गाहप येन स य ऋतुना य नीर स. दे वान् दे वयते यज.. (१२) हे अ न! तुम ऋतु के साथ-साथ गाहप य य को भी र त करते हो. तुम दे वसेवक यजमान के क याण के लए दे व क पूजा करो. (१२)

दे वता—इं

सू —१६ आ वा वह तु हरयो वृषणं सोमपीतये. इ

वा सूरच सः.. (१)

हे कामवषक इं ! सूय के समान तेज वी तु हारे ह र नामक घोड़े सोमपान के लए तु ह यहां लाव. (१) इमा धाना घृत नुवो हरी इहोप व तः. इ ं सुखतमे रथे.. (२) ह र नामक घोड़े सुख दे ने वाले रथ म यहां घी से यु

धा य के पास इं को लाव. (२)

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इ ं ातहवामह इ ं य य वरे. इ ं सोम य पीतये.. (३) म

येक य म ातःकाल सोमपान के लए इं को बुलाता ं. (३)

उप नः सुतमा ग ह ह र भ र

के श भः. सुते ह वा हवामहे.. (४)

हे इं ! अपने लंबे बाल वाले घोड़ क सहायता से हमारे सोमरस के समीप आओ. सोमरस नचुड़ जाने पर हम तु ह बुलाते ह. (४) सेमं नः तोममा ग पेदं सवनं सुतम्. गौरो न तृ षतः पब.. (५) हे इं ! हमारे उस तो को सुनकर य के समीप आओ. सोमरस तैयार है. उसे ऐसे पओ, जैसे यासा हरण पानी पीता है. (५) इमे सोमास इ दवः सुतासो अ ध ब ह ष. ताँ इ (६)

सहसे पब.. (६)

हे इं ! यह पतला सोमरस बछे ए कुश पर रखा है. इसे श अयं ते तोमो अ यो

बढ़ाने के लए पओ.

द पृग तु शंतमः. अथा सोमं सुतं पब.. (७)

हे इं ! यह े तो तु हारे लए दय पश एवं सुखदायक बने. उसके बाद तुम नचोड़े ए सोम को पओ. (७) व म सवनं सुत म ो मदाय ग छ त. वृ हा सोमपीतये.. (८) वृ नाशक इं स ता ा त के न म सोमरस पीने के लए ऐसे सभी य ह, जहां सोमरस तैयार हो. (८)

म जाते

सेमं नः काममा पृण गो भर ैः शत तो. तवाम वा वा यः.. (९) हे शत तु! गाएं और अ दे कर हमारी सभी अ भलाषाएं पूरी करो. हम भली कार यान करते ए तु हारी तु त करते ह. (९)

सू —१७

दे वता—इं एवं व ण

इ ाव णयोरहं स ाजोरव आ वृणे. ता नो मृळात ई शे.. (१) म भली कार काशमान इं और व ण से अपनी र ा क याचना करता ं. वे दोन मुझ ाथ क र ा करगे. (१) ग तारा ह थोऽवसे हवं व य मावतः. धतारा चषणीनाम्.. (२) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हे मनु य के वामी इं ! मुझ पुरो हत क र ा के लए मेरी पुकार सुनो. (२) अनुकामं तपयेथा म ाव ण राय आ. ता वां ने द मीमहे.. (३) हे इं और व ण! हमारी अ भलाषा के अनुसार धन दे कर हम तृ त करो. हम तु हारा सामी य चाहते ह. (३) युवाकु ह शचीनां युवाकु सुमतीनाम्. भूयाम वाजदा नाम्.. (४) हम बल और सुबु

क इ छा से तु ह चाहते ह. हम े अ दाता ह . (४)

इ ः सह दा नां व णः शं यानाम्. सह

धनदाता

तुभव यु यः.. (५)

म इं एवं तु त हणक ा

म व ण े ह. (५)

तयो रदवसा वयं सनेम न च धीम ह. या त रेचनम्.. (६) इं और व ण क र ा से हम धन ा त करके उसका उपयोग कर. हमारे पास पया त धन हो. (६) इ ाव ण वामहं वे च ाय राधसे. अ मा सु ज युष कृतम्.. (७) हे इं और व ण! व च धन को पाने के लए म तु ह बुलाता ं. तुम हम भली-भां त वजय दलाओ. (७) इ ाव ण नू नु वां सषास तीषु धी वा. अ म यं शम य छतम्.. (८) (८)

हे इं और व ण! हमारा मन तु हारी उ म सेवा का अ भलाषी है. तुम हम सुख दो. वाम ोतु सु ु त र ाव ण यां वे. यामृधाथे सध तु तम्.. (९)

हे इं और व ण! जस तु त से हम तु ह बुलाते ह और जस शोभन तु त को तुम वीकार करते हो, हमारी वही सुंदर तु त तु ह ा त हो. (९)

सू —१८ सोमानं वरणं कृणु ह

दे वता—

ण पतआद

ण पते. क ीव तं य औ शजः.. (१)

हे ण प त! तुमने जस कार उ शज के पु क ीवान् को स कार सोमरस दे ने वाले यजमान को भी दे वता म स करो. (१) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

कया था, उसी

यो रेवान् यो अमीवहा वसु वत् पु वधनः. स नः सष ु य तुरः.. (२) जो ण प त धन के वामी, रोग नवारण करने वाले, संप दाता, पु वधक एवं शी फल दे ने वाले ह, वे हम पर कृपा कर. (२) मा नः शंसो अर षो धू तः णङ् म य य. र ा णो

ण पते.. (३)

उप व करने वाले एवं े षपूण नदा के श द बोलने वाले श ु हमसे ण प त! उनसे हमारी र ा करो. (३) स घा वीरो न र य त य म ो

र रह. हे

ण प तः. सोमो हनो त म यम्.. (४)

इं , व ण और सोम जस यजमान क उ त करते ह, उस वीर पु ष का वनाश नह होता. (४) वं तं

ण पते सोम इ

म यम्. द णा पा वंहसः.. (५)

हे ण प त! तुम, सोम, इं एवं द णा नामक दे वी उस यजमान क पाप से र ा करो. (५) सदस प तम तं

यम

य का यम्. स न मेधामया सषम्.. (६)

आ यजनक कम करने वाले, इं के य, परम सुंदर एवं धन दाता सदस प त (अ न) नामक दे व के सामने हम बु क याचना करने आए ह. (६) य मा ते न स य त य ो वप त न. स धीनां योग म व त.. (७) जन सदस प त (अ न) क स ता के बना व ान् यजमान का य भी पूण नह होता, वह ही हमारे मन को इस य म लगाव. (७) आ नो त ह व कृ त ा चं कृणो य वरम्. हो ा दे वेषु ग छ त.. (८) इसके बाद वही सदस प त (अ न) ह वसंपादन करने वाले यजमान क उ त करते ह एवं य को न व नतापूवक समा त करते ह. उ ह क कृपा से हमारी तु तयां दे व के पास जाएं. (८) नराशंसं सुधृ ममप यं स थ तमम्. दवो न स मखसम्.. (९) तापी, अ यंत चुका ं. (९)

सू —१९



एवं ुलोक के समान तेज वी नराशंस (अ न) दे वता को म दे ख

दे वता—अ न एवं म द्गण

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त यं चा म वरं गोपीथाय

यसे. म

र न आ ग ह.. (१)

हे अ न! तुम इस सुंदर य म सोमपान करने के लए बुलाए जा रहे हो, इस लए तुम म द्गण के साथ आओ. (१) न ह दे वो न म य मह तव

तुं परः. म

र न आ ग ह.. (२)

हे महान् अ न दे व! तु हारा य और उसे करने वाले मनु य सव े ह. उनसे बढ़कर कोई नह है. तुम म द्गण के साथ आओ. (२) ये महो रजसो व व े दे वासो अ हः. म

र न आ ग ह.. (३)

हे अ न! जो म द्गण तेज वी एवं े षर हत ह, जो अ धक मा ा म जल क वषा करना जानते ह, तुम उनके साथ आओ. (३) य उ ा अकमानृचुरनाधृ ास ओजसा. म

र न आ ग ह.. (४)

हे अ न! जो म द्गण उ एवं इतने बलशाली ह क कोई उनका तर कार नह कर सकता. उ ह ने जल क वषा क है. तुम उनके साथ आओ. (४) ये शु ा घोरवपसः सु

ासो रशादसः. म

र न आ ग ह.. (५)

जो शोभासंप होने के साथ-साथ उ पधारी भी ह, जो शोभन धन संप श ुनाशक ह. हे अ न दे व! तुम उन म द्गण के साथ आओ. (५) ये नाक या ध रोचने द व दे वास आसते. म

एवं

र न आ ग ह.. (६)

हे अ न दे व! जो म द्गण आकाश के ऊपर वतमान काशपूण वग म शोभायमान ह, तुम उनके साथ आओ. (६) य ईङ् खय त पवतान् तरः समु मणवम्. म

र न आ ग ह.. (७)

हे अ न! जो म द्गण उ मेघ को चलाते ह और सागर क जलरा श को तरं गत करते ह, तुम उनके साथ आओ. (७) आ ये त व त र म भ तरः समु मोजसा. म

र न आ ग ह.. (८)

हे अ न दे व! जो म द्गण सूय करण के साथ-साथ सारे आकाश म फैले ए ह और जो अपनी श से सागर के जल को चंचल बनाते ह, तुम उनके साथ आओ. (८) अ भ वा पूवपीतये सृजा म सो यं मधु. म

र न आ ग ह.. (९)

हे अ न! सोमरस से न मत मधु सबसे पहले म तु ह पीने के लए दे रहा ं. तुम ******ebook converter DEMO Watermarks*******

म द्गण के साथ आओ. (९)

दे वता—ऋभुगण

सू —२०

अयं दे वाय ज मने तोमो व े भरासया. अका र र नधातमः.. (१) जन ऋभु ने ज म धारण कया था, उ ह को ल य करके बु पया त धन दे ने वाला यह तो अपने मुख से उ चारण कया. (१)

मान् ऋ वज ने

य इ ाय वचोयुजा तत ुमनसा हरी. शमी भय माशत.. (२) जन ऋभु ने इं को स करने के लए अपने मन से ऐसे घोड़े बनाए ह, जो आ ा पाते ही रथ म जुत जाते ह. वे ही शमी वृ से न मत चमस आ द लेकर इस य म आव. (२) त

ास या यां प र मानं सुखं रथम्. त

धेनुं सब घाम्.. (३)

ऋभु ने दोन अ नीकुमार के लए रथ बनाया, जसक ग त सव समान थी तथा उ ह ने ध दे ने वाली एक गाय उ प क . (३) युवाना पतरा पुनः स यम ा ऋजूयवः. ऋभवो व

त.. (४)

छलर हत और सवकायसाधक ऋभु के मं सदा सफलता ा त करते ह. उ ह ने अपने माता- पता को दोबारा युवा बना दया था. (४) सं वो मदासो अ मते े ण च म वता. आ द ये भ राज भः.. (५) हे ऋभुगण! म द्गण स हत इं और काशमान सूय के साथ तु ह सोमरस दया जा रहा है. (५) उत यं चमसं नवं व ु दव य न कृतम्. अकत चतुरः पुनः.. (६) व ा ारा न मत, सोमधारण म समथ चमस नाम का नया का पा हो गया था. ऋभु ने उसके चार टु कड़े कर दए. (६) ते नो र ना न ध न

बलकुल तैयार

रा सा ता न सु वते. एकमेकं सुश त भः.. (७)

हे ऋभुगण! तुम हमारी सुंदर तु तय को सुनकर सोमरस नचोड़ने वाले हमारे यजमान को एक-एक करके वण, म ण, मु ा—तीन र न दान करो. तुम दशपौ णमासा द सात कम के तीन वग को पूरा करो. (७) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

अधारय त व योऽभज त सुकृ यया. भागं दे वेषु य यम्.. (८) य के लए उपयोगी चमस आ द का नमाण करने के कारण ऋभुगण मरणधमा होने पर भी अमर बन गए ह. वे अपने स कम के कारण दे व के म य बैठकर य का भाग ा त करते ह. (८)

दे वता—इं एवं अ न

सू —२१ इहे ा नी उप

ये तयो र तोममु म स. ता सोमं सोमपातमा.. (१)

म इस य म इं और अ न को बुलाता ं एवं इ ह दोन क तु त करने क इ छा रखता ं. सोमपान करने के अ यंत इ छु क वे दोन सोमरस पएं. (१) ता य ेषु

शंसते ा नी शु भता नरः. ता गाय ेषु गायत.. (२)

हे मनु यो! इस य म उ ह इं और अ न क शंसा करो एवं उ ह अनेक कार से सुशो भत करो. गाय ी छं द का सहारा लेकर उ ह दोन क तु तयां गाओ. (२) ता म य श तय इ ा नी ता हवामहे. सोमपा सोमपीतये.. (३) हम म दे व क शंसा के लए इं और अ न को इस य म बुला रहे ह. वे दोन सोमरस पीने वाले ह. हम उ ह दोन को सोमरस पीने के लए बुला रहे ह. (३) उ ा स ता हवामह उपेदं सवनं सुतम्. इ ा नी एह ग छताम्.. (४) हम श न ु ाशन म ू र उ ह दोन को इस सोमरसपूण य म बुला रहे ह. वे इं और अ न इस य म आव. (४) ता महा ता सद पती इ ा नी र उ जतम्. अ जाः स व णः.. (५) वे गुणसंप एवं सभापालक इं और अ न रा स जा त क ू रता समा त कर द. नरभ ण करने वाले रा स उन दोन के भाव से संतानहीन हो जाव. (५) तेन स येन जागृतम ध चेतुने पदे . इ ा नी शम य छतम्.. (६) हे इं और अ न! जो वगलोक हमारे कमफल को का शत करने वाला है, वह से तुम इस य के न म जाओ और हम सुख दान करो. (६)

सू —२२

दे वता—अ नीकुमार आ द

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ातयुजा व बोधया नावेह ग छताम्. अ य सोम य पीतये.. (१) हे अ वयु! ातःसवन नामक य से संबं धत अ नीकुमार को जगाओ. वे सोमपान करने के लए इस य म आव. (१) या सुरथा रथीतमोभा दे वा द व पृशा. अ ना ता हवामहे.. (२) हम अ नीकुमार को य म बुलाते ह. उनका रथ सुंदर है और वे र थय म अ यंत े ह. (२) या वां कशा मधुम य ना सूनृतावती. तया य ं म म तम्.. (३) हे अ नीकुमारो! तु हारे चाबुक से घोड़ के पसीने क गंध आती है और वह श द के साथ चोट करता है. ऐसे चाबुक से घोड़ को हांकते ए तुम य म शी आकर इसे सोमरस से स च दो. (३) न ह वाम त रके य ा रथेन ग छथः. अ ना सो मनो गृहम्.. (४) हे अ नीकुमारो! तुम अपने रथ म बैठकर सोमरस पीने के लए यजमान के जस घर क दशा म जा रहे हो, वह घर र नह है. (४) हर यपा णमूतये स वतारमुप

ये. स चे ा दे वता पदम्.. (५)

सूय के हाथ म वण है. म उ ह र ा के लए बुलाता ं. वे सूय दे व यजमान को ा त होने वाला पद बता दगे. (५) अपां नपातमवसे स वतारमुप तु ह. त य ता यु म स.. (६) सूय जल को सुखा दे ता है. अपनी र ा के लए उस सूय क तु त करो. हम सूय के लए य करना चाहते ह. (६) वभ ारं हवामहे वसो

य राधसः. स वतारं नृच सम्.. (७)

सूय धन म नवास करते ह. वे सुवण, रजता द प धन यजमान म उ चत बांटते ह. हम मनु य को काश दे ने वाले सूय का आ ान करते ह. (७)

प से

सखाय आ न षीदत स वता तो यो नु नः. दाता राधां स शु भ त.. (८) हे म ो! चार ओर ठ क से बैठ जाओ. हम शी ही सूय क तु त करनी है. धन दे ने वाले सूय सुशो भत हो रहे ह. (८) अ ने प नी रहा वह दे वानामुशती प. व ारं सोमपीतये.. (९) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हे अ न दे व! दे व क कामना करने वाली प नय को इस य सोमपान करने के लए व ा को यहां ले आओ. (९) आ ना अ न इहावसे हो ां य व भारतीम्. व

म ले आओ. तुम

धषणां वह.. (१०)

हे अ न! हमारी र ा के लए दे वप नय को यहां ले आओ. हे अ यंत युवा अ न! हम ऐसी वाणी दो, जससे हम दे व को बुला सक एवं न ापूवक स य भाषण कर सक. (१०) अ भ नो दे वीरवसा महः शमणा नृप नीः. अ छ प ाः सच ताम्.. (११) मनु य का पालन करने वाली एवं शी गा मनी दे वयां र ा एवं परम सुख दे ने के लए हम पर स ह . (११) इहे ाणीमुप

ये व णान व तये. अ नाय सोमपीतये.. (१२)

हम अपने क याण के लए एवं सोमपान करने के लए इं प नी, व णप नी एवं अ नप नी को बुलाते ह. (१२) मही ौः पृ थवी च न इमं य ं म म ताम्. पपृतां नो भरीम भः.. (१३) वशाल बनाव. (१३)

ुलोक और पृ वी इस य

को रस से स च द और पोषण करके हम पूण

तयो रद्घृतव पयो व ा रह त धी त भः. ग धव य ुवे पदे .. (१४) बु मान् लोग अपने कम के ारा आकाश और पृ वी के बीच म घी क तरह जल पीते ह. वह अंत र गंधव का न त नवास थान है. (१४) योना पृ थ व भवानृ रा नवेशनी. य छा नः शम स थः.. (१५) (१५)

हे पृ वी! तुम व तृत, कंटकर हत और नवास के यो य बनो. तुम हम पया त शरण दो. अतो दे वा अव तु नो यतो व णु वच मे. पृ थ ाः स त धाम भः.. (१६)

व णु ने अपने गाय ी आ द सात छं द से जस पृ वी पर कई कदम डाले थे, उसी पृ वी से दे वता हमारी र ा कर. (१६) इदं व णु व च मे ेधा न दधे पदम्. समूळ्हम य पांसुरे.. (१७) व णु ने इस जगत् क प र मा क . उ ह ने तीन कार से कदम रखे. उनके धू ल धूस रत चरण म सारा जगत् छप गया. (१७) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

ी ण पदा व च मे व णुग पा अदा यः. अतो धमा ण धारयन्.. (१८) व णु जगत् क र ा करने वाले ह. कोई उन पर हार नह कर सकता. उ ह ने संपूण धम को धारण करते ए तीन डग म जगत् क प र मा क . (१८) व णोः कमा ण प यत यतो ता न प पशे. इ

य यु यः सखा.. (१९)

व णु क कृपा से उनके भरोसे यजमान अपने त पूरे करते ह. व णु के काय को दे खो. वे इं के उपयु सखा ह. (१९) त

णोः परमं पदं सदा प य त सूरयः. दवीव च ुराततम्.. (२०)

आकाश के चार ओर फैली ई आंख जस कार दे खती ह, उसी कार व ान् भी व णु के वग नामक परमपद पर रखते ह. (२०) त

ासो वप यवो जागृवांसः स म धते. व णोय परमं पदम्.. (२१)

बु

मान्, वशेष प से तु त करने वाले एवं जाग क लोग व णु के उस परम पद से अपने दय को का शत करते ह. (२१)

सू —२३ ती ाः सोमास आ ग ाशीव तः सुता इमे. वायो ता

दे वता—वायु आ द थता पब.. (१)

हे वायु! यह तीखा और संतोष दे ने वाला सोमरस तैयार है. तुम आओ और लाए ए सोमरस का पान करो. (१) उभा दे वा द व पृशे वायू हवामहे. अ य सोम य पीतये.. (२) म आकाश म रहने वाले इं और वायु दोन दे व को यह सोमरस पीने के लए बुलाता .ं (२) इ वायू मनोजुवा व ा हव त ऊतये. सह ा ा धय पती.. (३) वायु मन के समान ग तशील एवं इं हजार आंख वाले ह. बु र ा के लए बुलाते ह. (३)

मान् लोग इ ह अपनी

म ं वयं हवामहे व णं सोमपीतये. ज ाना पूतद सा.. (४) म और व ण य म कट होने वाले एवं शु बलसंप ह. हम उ ह सोमरस पीने के लए बुलाते ह. (४) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

ऋतेन यावृतावृधावृत य यो तष पती. ता म ाव णा वे.. (५) म और व ण स य के ारा य कम क वृ पालनक ा ह. म इन दोन का आ ान करता ं. (५) व णः ा वता भुव म ो व ा भ

करते ह. और वा त वक काश के

त भः. करतां नः सुराधसः.. (६)

व ण और म सभी कार से हमारी र ा करते ह. वे हम पया त संप

द. (६)

म व तं हवामह इ मा सोमपीतये. सजूगणेन तृ पतु.. (७) हम सोमरस पीने के लए म द्गण के साथ इं का आ ान करते ह. वे इं म द्गण के साथ तृ त ह . (७) इ

ये ा म द्गणा दे वासः पूषरातयः. व े मम ुता हवम्.. (८)

हे म द्गणो! तुम लोग म इं सबसे महान् ह. पूषा नाम के दे व तु हारे दाता ह. आप सब हमारा आ ान सुन. (८) हत वृ ं सुदानव इ े ण सहसा युजा. मा नो ःशंस ईशत.. (९) हे शोभन एवं दानशील म द्गणो! बलवान् एवं यो य इं क सहायता से तुम श ु का वनाश करो. वह श ु हमारा वामी न हो जाए. (९) व ा दे वा हवामहे म तः सोमपीतये. उ ा ह पृ मातरः.. (१०) हम सोमरस पीने के लए संपूण म त्दे व को बुलाते ह. वे पृ संतान ह और उनके बल को श ु सहन नह कर सकता. (१०)

अथात् पृ वी क

जयता मव त यतुम तामे त धृ णुया. य छु भं याथना नरः.. (११) वजयी लोग जस कार हषनाद करते ह, उसी कार हे शोभन य म द्गणो! आप भी दप के साथ गजन करते हो. (११) ह कारा

म आने वाले

ुत पयतो जाता अव तु नः. म तो मृळय तु नः.. (१२)

चमकने वाली व ुत से उ प म द्गण हमारी र ा कर और हमारे सुख बढ़ाव. (१२) आ पूष च ब हषमाघृणे ध णं दवः. आजा न ं यथा पशुम्.. (१३) हे काशवान् एवं ग तशील सूय! लोग जस कार खोए ए पशु को जंगल से ढूं ढ़ लाते ह, उसी कार य धारण करने वाले एवं व च कुश से यु सोमरस को तुम आकाश से खोज लाओ. (१३) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

पूषा राजानमाघृ णरपगूळ्हं गुहा हतम्. अ व द च ब हषम्.. (१४) काशवान् सूय ने गुफा म छपाकर रखा आ, व च कुश से यु सोमरस ा त कया. (१४) उतो स म



एवं तेजसंप

भः षड् यु ाँ अनुसे षधत्. गो भयवं न चकृषत्.. (१५)

जस कार कसान बैल के ारा बार-बार खेत जोतता है, उसी कार सूय मेरे लए म से छः ऋतुएं लाए थे. ये ऋतुएं सोमरस से यु थ . (१५) अ बयो य य व भजामयो अ वरीयताम्. पृ चतीमधुना पयः.. (१६) जल हम य क इ छा करने वाल के लए माता के समान ह. वे हमारे हतकारी बंधु ह. वे जल य माग से जा रहे ह. वे ध को मीठा बनाते ह. (१६) अमूया उप सूय या भवा सूयः सह. ता नो ह व व वरम्.. (१७) जो संपूण जल सूय के समीप वतमान ह अथवा सूय जन जल के समीप रहते ह, वे सब जल हमारे य का हत कर. (१७) अपो दे वी प

ये य गावः पब त नः. स धु यः क व ह वः.. (१८)

हमारी गाएं जस जल को पीती ह, उसी का हम आ ान कर रहे ह. जो जल नद के प म बह रहा है, उसे ह व दे ना हमारा क है. (१८) अ व१ तरमृतम सु भेषजमपामुत श तये. दे वा भवत वा जनः.. (१९) जल के भीतर अमृत और ओष धयां वतमान ह, हे ऋ वजो! उ साहपूवक उस जल क शंसा करो. (१९) अ सु मे सोमो अ वीद त व ा न भेषजा. अ नं च व श भुवमाप व भेषजीः.. (२०) सोम ने मुझसे कहा है क जल म ओष धयां ह, संसार को सुख दान करने वाली अ न है और सभी कार क जड़ीबू टयां ह. (२०) आपः पृणीत भेषजं व थं त वे३मम. योक् च सूय शे.. (२१) हे जल! मेरे शरीर के लए रोग न करने वाली ओष धयां पूण करो. जससे म ब त समय तक सूय के दशन कर सकूं. (२१) इदमापः

वहत य कं च

रतं म य.

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य ाहम भ

ोह य ा शेप उतानृतम्.. (२२)

मेरे भीतर जो कुछ बुराइयां ह, मने सर के साथ जो ोह कया है, सर को जो वचन कहे ह या जो अस य भाषण कया है, हे जल! उन सबको धो डालो. (२२) आपो अ ा वचा रषं रसेन समग म ह. पय वान न आ ग ह तं मा सं सृज वचसा.. (२३) म आज नान के लए जल म वेश करता ं. म आज जल के रस से मल गया ं. हे जल म नवास करने वाली अ न! आओ और मुझे अपने तेज से भर दो. (२३) सं मा ने वचसा सृज सं जया समायुषा. व ुम अ य दे वा इ ो व ा सह ऋ ष भः.. (२४) हे अ न! मुझे तेज, संतान और आयु दो, जससे दे वगण, इं और ऋ ष-समूह मेरे य को जान सक. (२४)

सू —२४

दे वता—अ न आ द

क य नूनं कतम यामृतानां मनामहे चा दे व य नाम. को नो म ा अ दतये पुनदा पतरं च शेयं मातरं च.. (१) म दे वता म से कस ेणी के कस दे वता का सुंदर नाम पुका ं ? कौन दे वता मुझ मरने वाले को वशाल धरती पर रहने दे गा? जससे म अपने माता- पता को दे ख सकूं? (१) अ नेवयं थम यामृतानां मनामहे चा दे व य नाम. स नो म ा अ दतये पुनदा पतरं च शेयं मातरं च.. (२) म दे वता म सबसे पहले अ न का नाम पुकारता ं. वे मुझे इस वशाल धरती पर रहने दगे, जससे म अपने माता- पता को दे ख सकूं. (२) अ भ वा दे व स वतरीशानं वायाणाम्. सदाव भागमीमहे.. (३) हे सदा र ा करने वाले सूय दे व! तुम उ म धन के वामी हो, इस लए म तुमसे उपभोग करने यो य धन मांगता ं. (३) य

त इ था भगः शशमानः पुरा नदः. अ े षो ह तयोदधे.. (४)

हे सूय! तुम अपने दोन हाथ म उपभोग के यो य धन को धारण करते हो. वह सबके ारा शं सत है. उससे कोई े ष नह रखता. (४) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

भगभ

य ते वयमुदशेम तवावसा. मूधानं राय आरभे.. (५)

हे सूय दे व! तुम धन के वामी हो. य द तुम र ा करो तो हम धन क उ त करने म लग जाव. (५) न ह ते ं न सहो न म युं वय नामी पतय त आपुः. नेमा आपो अ न मषं चर तीन ये वात य मन य वम्.. (६) हे व ण दे व! आकाश म उड़ने वाले प य म भी तु हारे समान श और परा म नह है. इ ह तु हारे बराबर ोध भी नह मला है. सवदा चलने वाली वायु और बहने वाला जल तु हारी ग त से आगे नह बढ़ सकता. (६) अबु ने राजा व णो वन यो य तूपं ददते पूतद ः. नीचीनाः थु प र बु न एषाम मे अ त न हताः केतवः युः.. (७) शु बल के वामी व ण मूलर हत आकाश म ठहर कर उ म तेज के समूह को ऊपर ही ऊपर धारण करते ह. उस तेजसमूह क करण का मुख नीचे और जड़ ऊपर ह. उ ह के कारण हमम ाण थत रहते ह. (७) उ ं ह राजा व ण कार सूयाय प थाम वेतवा उ. अपदे पादा तधातवे ऽक तापव ा दया वध त्.. (८) राजा व ण ने सूय के उदय से अ त तक चलने के लए माग का व तार कया है. उसने आकाश म बना पैर वाले सूय के चलने के लए माग बनाया है. वे मेरे दय का भेदन करने वाले श ु का नाश कर. (८) शतं ते राज भषजः सह मुव गभीरा सुम त े अ तु. बाध व रे नऋ त पराचैः कृतं चदे नः मुमु य मत्.. (९) हे राजा व ण! आपक ओष धयां सैकड़ -हजार ह. आपक उ म बु व तृत और गंभीर हो. तुम हमारा अ न करने वाले पाप को हमसे र रखो. हमने जो पाप कए ह, उ ह न कर दो. (९) अमी य ऋ ा न हतास उ चा न ं द े कुह च वेयुः. अद धा न व ण य ता न वचाकश च मा न मे त.. (१०) ऊंचे आकाश म जो स त ष नामक तारे थत ह, वे रात म दखाई दे ते ह, पर दन म कहां चले जाते ह? व ण दे व के काय म कोई बाधा नह डाल सकता. व ण क आ ा से ही रात म चं मा का शत होता है. (१०) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

त वा या म णा व दमान तदा शा ते यजमानो ह व भः. अहेळमानो व णेह बो यु शंस मा न आयुः मोषीः.. (११) हे व ण! यजमान ह के ारा तुमसे जस आयु क याचना करते ह, म श शाली तो के ारा तु हारी तु त करके उसी परम आयु क याचना करता ं. तुम इस वषय म लापरवाही न करके ठ क से यान दो. अग णत लोग तु हारी ाथना करते ह. तुम मुझसे मेरी आयु मत छ नो. (११) त द ं त वा म मा तदयं केतो द आ व च े. शुनःशेपो यम द्गृभीतः सो अ मात् राजा व णो मुमो ु .. (१२) क

को जानने वाले लोग ने रात म और दन म मुझसे यही कहा है. मेरे दय से उप ान भी यही सलाह दे ता है. शुनःशेप ने सूय से बंधकर जनको पुकारा था, वे ही राजा व ण हम बंधन से मु कर. (१२) शुनःशेपो द्गृभीत वा द यं पदे षु ब ः. अवैनं राजा व णः ससृ या दाँ अद धो व मुमो ु पाशान्.. (१३) लकड़ी के तीन यूप से बंधे ए शुनःशेप ने अ द त के पु व ण का आ ान कया था, इस लए व ान् एवं दयालु राजा व ण ने शुनःशेप को बंधन से छु ड़ा दया था. (१३) अव ते हेळो व ण नमो भरव य े भरीमहे ह व भः. य म यमसुर चेता राज ेनां स श थः कृता न.. (१४) हे व ण! हम नम कार करके एवं य म ह व दान करके तु हारे ोध को समा त करते ह. हे अ न का नाश करने वाले बु मान् व ण! हमारे क याण के लए इस य म नवास करो और हमारे पाप को कम करो. (१४) उ मं व ण पाशम मदवाधमं व म यमं थाय. अथा वयमा द य ते तवानागसो अ दतये याम.. (१५) हे व ण! मेरे सर म बंधे ए फंदे को ऊपर से और पैर म बंधे ए फंदे को नीचे से खोल दो तथा कमर म बंधे ए फंदे को बीच म ढ ला कर दो. हे अ द तपु व ण! हम तु हारे य म सतत संल न रहकर पापमु हो जाएंगे. (१५)

दे वता—व ण

सू —२५ य च

ते वशो यथा

दे व व ण तम्. मनीम स

व व.. (१)

हे व ण दे व! संसार के व ान् तु हारे त का अनु ान करने म जस कार भूल करते ******ebook converter DEMO Watermarks*******

ह, उसी कार हमसे भी

त दन माद होता रहता है. (१)

मा नो वधाय ह नवे जहीळान य रीरधः. मा णान य म यवे.. (२) हे व ण! जो तु हारा अनादर करता है, तुम उसके लए घातक बन जाते हो. तुम हमारा वध मत करना. तुम हमारे ऊपर ोध मत करना. (२) व मृळ काय ते मनो रथीर ं न स दतम्. गी भव ण सीम ह.. (३) हे व ण दे व! जस कार रथ का मा लक थके ए घोड़े को व थ करता है, उसी कार हम भी तु तय ारा तु हारा मन स करते ह. (३) परा ह मे वम यवः पत त व यइ ये. वयो न वसती प.. (४) जस कार च ड़यां अपने घ सल क ओर तेजी से उड़ती ह, उसी कार हमारी ोधर हत वचारधाराएं जीवन ा त करने के लए दौड़ रही ह. (४) कदा

यं नरमा व णं करामहे. मृळ कायो च सम्.. (५)

हम श शाली नेता ले आवगे. (५)

तथा अग णत लोग पर

त द समानमाशाते वेन ता न

रखने वाले व ण को इस य म

यु छतः. धृत ताय दाशुषे.. (६)

म और व ण ह दे ने वाले यजमान पर स होकर हमारे ारा दया साधारण ह व वीकार कर लेते ह. वे कभी भी उसका याग नह करते. (६)



वेदा यो वीनां पदम त र ेण पतताम्. वेद नावः समु यः.. (७) व ण आकाश म उड़ने वाले प य और सागर म चलने वाली नौका जानते ह. (७)

का माग

वेद मासो धृत तो ादश जावतः. वेदा य उपजायते.. (८) व ण उ म हमा को धारण करके समय-समय पर उ प होने वाले बारह महीन को जानते ह और तेरहव मास को भी जानते ह. (८) वेद वात य वत नमुरोऋ व य बृहतः. वेदा ये अ यासते.. (९) व ण व तार से संप , दशनीय और अ धक गुण वाली वायु का माग जानते ह. वे आकाश म नवास करने वाले दे व से भी प र चत ह. (९) न षसाद धृत तो व णः प या३ वा. सा ा याय सु तुः.. (१०) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

त धारण करने वाले एवं उ म कम करने वाले व ण दै वी जा के लए आकर बैठे थे. (१०)

पर सा ा य करने

अतो व ा य ता च क वाँ अ भ प य त. कृता न या च क वा.. (११) बु मान् मनु य व ण क अनुकंपा से वतमान काल और भ व यत् काल क सारी आ यजनक घटना को दे ख लेते ह. (११) स नो व ाहा सु तुरा द यः सुपथा करत्.

ण आयूं ष ता रषत्.. (१२)

शोभन बु वाले वे ही अ द तपु व ण हम सदा उ म माग पर चलने वाला बनाव एवं हमारी आयु को बढ़ाव. (१२) ब द् ा प हर ययं व णो व त न णजम्. प र पशो न षे दरे.. (१३) व ण सोने का कवच धारण करके अपने ब ल शरीर को ढकते ह. उसके चार ओर सुनहरी करण फैलती ह. (१३) न यं द स त द सवो न ह्वाणो जनानाम्. न दे वम भमातयः.. (१४) हसा करने वाले लोग भयभीत होकर व ण क श ुता छोड़ दे ते ह. मनु य को पीड़ा प ंचाने वाले लोग उ ह पीड़ा नह प ंचाते. पाप करने वाले लोग उनके त पाप का आचरण याग दे ते ह. (१४) उत यो मानुषे वा यश

े असा या. अ माकमुदरे वा.. (१५)

व ण ने मनु य क उदरपू त के लए पया त अ हमारी उदरपू त करते ह. (१५) परा मे य त धीतयो गावो न ग ूतीरनु. इ छ ती

पैदा कया है. वे वशेष

प से

च सम्.. (१६)

ब त से लोग ने व ण के दशन कए ह. जस कार गाएं गोशाला क ओर जाती ह, उसी कार कभी पीछे न लौटने वाली मेरी वचारधारा व ण क ओर अ सर होती है. (१६) सं नु वोचावहै पुनयतो मे म वाभृतम्. होतेव दसे

यम्.. (१७)

हे व ण! मधुर रस वाला मेरा ह तैयार है. तुम होता के समान उस ह करो. इसके प ात् हम लोग आपस म बात करगे. (१७) दश नु व दशनं दश रथम ध

का भ ण

म. एता जुषत मे गरः.. (१८)

सब लोग जन व ण के दशन करते ह, उ ह मने दे खा है. मने कई बार धरती पर चलता ******ebook converter DEMO Watermarks*******

आ उनका रथ दे खा है. व ण ने मेरी ाथना वीकार क है. (१८) इमं मे व ण ुधी हवम ा च मृळय. वामव युरा चके.. (१९) हे व ण दे व! आज मेरी पुकार सुनो. आज मुझे सुख दान करो. म अपनी र ा क इ छा से तु ह बुला रहा ं. (१९) वं व

य मे धर दव

म राज स. स याम न

त ु ध.. (२०)

हे बु मान् व ण! आकाश, धरती एवं सम त संसार म तु हारा काश फैला आ है. तुम हमारी ाथना सुनकर हमारी र ा करने का वचन दो. (२०) उ

मं मुमु ध नो व पाशं म यमं चृत. अवाधमा न जीवसे.. (२१)

हमारे सर वाले फंदे को ऊपर से और कमर के फंद को बीच से खोल दो, जससे हम जीवन धारण कर सक. (२१)

सू —२६

दे वता—अ न

व स वा ह मये य व ा यूजा पते. सेमं नो अ वरं यज.. (१) हे अ न दे व! तुम य के यो य एवं अ और हमारे इस य को पूरा करो. (१)

के पालक हो. तुम अपना तेज धारण करो

न नो होता वरे यः सदा य व म म भः. अ ने द व मता वचः.. (२) हे अ न! तुम सदा युवा, कमनीय एवं तेज वी हो. हम य ानपूण वा य से तु हारी तु त कर रहे ह. तुम यहां बैठो. (२)

संप

करने वाले एवं

आ ह मा सूनवे पता पयज यापये. सखा स ये वरे यः.. (३) हे े अ न! जस कार पता पु को, भाई भाई को और म व तुएं दे ता है, उसी कार तुम भी मुझे इ छत व तुएं दो. (३)

म को अभी

आ नो बह रशादसो व णो म ो अयमा. सीद तु मनुषो यथा.. (४) हे अ न दे व! श ु का नाश करने वाले म , व ण और अयमा जस कार मनु के य म आए थे, उसी कार तुम भी हमारे य म बछे ए कुश पर बैठो. (४) पू

होतर य नो म द व स य य च. इमा उ षु ुधी गरः.. (५)

हे पूवज एवं य संप क ा अ न! हमारे इस य और हमारी म ता से तुम स हो ******ebook converter DEMO Watermarks*******

जाओ. हमारे इन तु त-वचन को सुनो. (५) य च

श ता तना दे व दे वं यजामहे. वे इद्धूयते ह वः.. (६)

य प न य एवं व तृत ह ारा हम भ - भ दे वता व ण! वह भी तु ह ही ा त होता है. (६) यो नो अ तु व प तह ता म ो वरे यः. जापालक, य संपादक, स और अ न के सहयोग से उनके य बन. (७)

का पूजन करते ह, पर हे

याः व नयो वयम्.. (७)

े अ न हमारे लए

य ह . हम भी शोभन

व नयो ह वाय दे वासो द धरे च नः. व नयो मनामहे.. (८) शोभन अ न से यु एवं तेज वी ऋ वज ने हमारे उ म इस लए हम शोभन अ न के समीप प ंचकर याचना करते ह. (८)

को धारण कया है,

अथा न उभयेषाममृत म यानाम्. मथः स तु श तयः.. (९) हे अ न! तुम अमर हो और हम मनु य मरणधमा ह. हम लोग एक- सरे क कर. (९)

शंसा

व े भर ने अ न भ रमं य मदं वचः. चनो धाः सहसो यहो.. (१०) हे बल के पु अ न! तुम सब अ नय के साथ आकर हमारा यह य तु तयां वीकार करके हम अ दो. (१०)

सू —२७

और हमारी

दे वता—अ न

अ ं न वा वारव तं व द या अ नं नमो भः. स ाज तम वराणाम्.. (१) हे अ न दे व! तुम य के स ाट् एवं पूंछ वाले घोड़े के समान हो. हम तु तय के ारा तु हारी वंदना करते ह. (१) स घा नः सूनुः शवसा पृथु गामा सुशेवः. मीढ् वाँ अ माकं बभूयात्.. (२) अ न श के पु और शी गमन करने वाले ह, वे हमारे ऊपर स होकर हम सुख द और हमारी अ भलाषा क वषा कर. (२) स नो रा चासा च न म यादघायोः. पा ह सद म

ायुः.. (३)

हे अ न! तुम सव गमन करने म समथ हो. तुम हमारा अ न करने वाले पापाचारी ******ebook converter DEMO Watermarks*******

मनु य से र एवं समीप दे श म हमारी र ा करो. (३) इममू षु वम माकं स न गाय ं न ांसम्. अ ने दे वेषु

वोचः.. (४)

हे अ न! इस य म उप थत ह व और नवीनतम गाय ी छं द म र चत तो के वषय म दे व को बताना. (४) आ नो भज परमे वा वाजेषु म यमेषु. श ा व वो अ तम य.. (५) हे अ न! हम द लोक तथा अंत र लोक का अ सब ओर से ा त कराओ. तुम हम भूलोक संबंधी धन भी दान करो. (५) वभ ा स च भानो स धो मा उपाक आ. स ो दाशुषे र स.. (६) हे वल ण काश वाले अ न दे व! जस कार सधु क लहर जल को सभी पवत , ना लय आ द म भर दे ती ह, उसी कार तुम भी लोग म धन का वभाग करने वाले हो. दे ने वाले यजमान को तुम कम का फल शी दो. (६) यम ने पृ सु म यमवा वाजेषु यं जुनाः. स य ता श ती रषः.. (७) यु

हे अ न दे व! यु े म तुम जस मनु य क र ा करते हो और तु हारी ेरणा से जो े म जाता है, वह न य ही अ ा त करता रहेगा. (७) न कर य सह य पयता कय य चत्. वाजो अ त वा यः.. (८)

हे अ न दे व! तुम श ु का दमन करने वाले हो. तु हारे भ यजमान पर कोई आ मण नह कर सकता, य क उसके पास वशेष कार क श है. (८) स वाजं व चष णरव

र तु. त ता व े भर तु स नता.. (९)

सारे मनु य अ न क पूजा करते ह. उसने घोड़ क सहायता से हम यु दलाई है. वह बु मान् ऋ वज को य कम का फल दे ने वाला हो. (९) जराबोध त

वड् ढ वशे वशे य याय. तोमं

म सफलता

ाय शीकम्.. (१०)

हे अ न दे व! हम ाथना के ारा तु ह जगाते ह. तुम भ भ यजमान पर कृपा करके य का अनु ान पूण करने के लए य म आओ. तुम ू र हो. यजमान सुंदर तो से तु हारी तु त करते ह. (१०) स नो महाँ अ नमानो धूमकेतुः पु

ः. धये वाजाय ह वतु.. (११)

अ न दे व सीमार हत धूमकेतु वाले तथा महान् ह. उनक ******ebook converter DEMO Watermarks*******

यो त वशाल है. वह हमारे

य और अ के लए स ह . (११) स रेवाँ इव व प तद ः केतुः शृणोतु नः. उ थैर नबृह ानुः.. (१२) अ न जापालक, दे वता के होता, त के समान दे वता तु त सुनने वाले ह. उसी कार अ न हमारी तु त सुन. (१२)

का ापन करने वाले एवं

नमो महद् यो नमो अभके यो नमो युव यो नम आ शने यः. यजाम दे वा य द श कवाम मा यायसः शंसमा वृ दे वाः.. (१३) बड़े, बालक, युवा एवं वृ सभी दे वता को हम नम कार करते ह. य द संभव होगा तो हम दे वता क पूजा करगे. हम कह व श गुणसंप दे व क तु त करना न छोड़ द. (१३)

सू —२८

दे वता—इं आ द

य ावा पृथुबु न ऊ व भव त सोतवे. उलूखलसुतानामवे ज गुलः.. (१) हे इं ! जस य म सोमरस नचोड़ने के लए भारी जड़ वाला प थर उठाया जाता है और ओखली क सहायता से सोमरस तैयार कया जाता है, वहां सोमरस अपना जानकर पओ. (१) य ा वव जघना धषव या कृता. उलूखलसुतानामवे ज गुलः.. (२) हे इं ! जस य म सोमलता को नचोड़ने के लए दोन फलक जांघ के समान फैल गए ह, उसी य म ओखली ारा तैयार कया आ सोमरस अपना जानकर पओ. (२) य नायप यवमुप यवं च श ते. उलूखलसुतानामवे ज गुलः.. (३) हे इं ! जस य म यजमान क प नयां भीतर घुसती और बाहर नकलती रहती ह, उसी य म ओखली ारा तैयार कया आ सोमरस अपना जानकर पओ. (३) य म थां वब नते र मी य मतवा इव. उलूखलसुतानामवे ज गुलः.. (४) हे इं ! जस य म सोमलता मंथन करने का दं ड घोड़े क लगाम के समान बांधा जाता है, उसी य म ओखली ारा तैयार कया आ सोमरस अपना जानकर पओ. (४) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

य च वं गृहेगृह उलूखलक यु यसे. इह ुम मं वद जयता मव भः.. (५) हे ऊखल! य प घर-घर म तु हारा योग कया जाता है, पर इस य कार व न करते हो, जस कार वजयी लोग ं भी बजाते ह. (५)

म तुम उसी

उत म ते वन पते वातो व वा य मत्. अथो इ ाय पातवे सुनु सोममुलूखल.. (६) हे ऊखल प का ! तु हारे ही सामने होकर हवा चलती है, इस लए हे ऊखल! इं दे वता के पान के लए सोमरस तैयार करो. (६) आयजी वाजसातमा ता १ चा वजभृतः. हरी इवा धां स ब सता.. (७) हे ऊखल और मूसल! तुम दोन सभी कार य के साधन एवं भूत अ दे ने वाले हो. जस कार इं के दोन घोड़े अपना खा चना आ द चबाते समय व न करते ह, उसी कार तुम भी तुमुल व न के साथ पर पर हार करते हो. (७) ता नो अ वन पती ऋ वावृ वे भः सोतृ भः. इ ाय मधुम सुतम्.. (८) हे ऊखल और मूसल प दोन का ो! तुम दोन दे खने म परम सुंदर हो. शोभन अ भनव मं के सहयोग से तुम दोन इं के लए मधुर सोमरस तैयार करो. (८) उ छ ं च वोभर सोमं प व आ सृज. न धे ह गोर ध व च.. (९) सोमरस नचोड़ने वाले फलक से बचे ए सोम को उठाकर प व कुश के ऊपर रखो. इसके बाद उसे गोचम से बनाए ए पा म रखो. (९)

सू —२९

दे वता—इं

य च स य सोमपा अनाश ता इव म स. आ तू न इ शंसय गो व ेषु शु षु सह ेषु तुवीमघ.. (१) हे इं ! तुम सोमपानक ा एवं स यवाद हो. हम कोई स नह ह. हे अनंत धनशाली इं ! हम सुंदर और अग णत गाय और अ ारा उ म धनवान् बनाओ. (१) श वाजानां पते शचीव तव दं सना. आ तू न इ शंसय गो व ेषु शु षु सह ेषु तुवीमघ.. (२) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हे श शाली, सुंदर ठोड़ी वाले एवं अ के पालक इं ! हम पर सदा तु हारा अनु ह रहे. हे अनंत धनशाली इं ! हम सुंदर और अग णत गाय तथा अ ारा उ म धनवान् बनाओ. (२) न वापया मथू शा स तामबु यमाने. आ तू न इ शंसय गो व ेषु शु षु सह ेषु तुवीमघ.. (३) तुम पर पर मलकर दे खने वाली यम तय को भली-भां त सुला दो. वे सदा बेहोश रह, कभी न जाग. हे अनंत धनशाली इं ! हम सुंदर और अग णत गाय तथा अ ारा उ म धनवान् बनाओ. (३) सस तु या अरातयो बोध तु शूर रातयः. आ तू न इ शंसय गो व ेषु शु षु सह ेषु तुवीमघ.. (४) हे शूर! हमारे श ु असावधान रह और हमारे म सावधान रह. अनंत धनशाली इं ! हम सुंदर और अग णत गाय तथा अ ारा उ म धनवान् बनाओ. (४) स म गदभं मृण नुव तं पापयामुया. आ तू न इ शंसय गो व ेषु शु षु सह ेषु तुवीमघ.. (५) हे इं ! यह गधे के प वाला हमारा बैरी नदा पी वचन से आपक बदनामी कर रहा है. इसे मार डालो. हे अनंत धनशाली इं ! हम सुंदर और अग णत गाय तथा अ ारा उ म धनवान् बनाओ. (५) पता त कु डृ णा या रं वातो वनाद ध. आ तू न इ शंसय गो व ेषु शु षु सह ेषु तुवीमघ.. (६) हमारे तकूल वायु कु टल ग त से चलती ई वन से र चली जाए. हे अनंत धनशाली इं ! हम सुंदर और अग णत गाय तथा अ ारा धनवान् बनाओ. (६) सव प र ोशं ज ह ज भया कृकदा म्. आ तू न इ शंसय गो व ेषु शु षु सह ेषु तुवीमघ.. (७) तुम हमारे त ोध करने वाल का नाश करो, हमारी हसा करने वाल को मार डालो. हे अनंत धनशाली इं ! हम सुंदर और अग णत गाय तथा अ ारा उ म धनवान् बनाओ. (७)

सू —३०

दे वता—इं

आवइ ं व यथा वाजय तः शत तुम्. मं ह ं स च इ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

भः.. (१)

हे यजमानो एवं ऋ वजो! जस कार कुएं को जल से भर दे ते ह, उसी कार हम अ क इ छा से हजार य करने वाले एवं महान् इं को सोमरस से स च दे ते ह. (१) शतं वा यः शुचीनां सह ं वा समा शराम्. ए

न नं न रीयते.. (२)

जस कार पानी अपने आप नीचे क ओर बहता है, उसी कार इं सैकड़ सं या वाले वशु सोमरस एवं हजार सं या वाले आशीर म त सोमरस के समीप आते ह. (२) सं य मदाय शु मण एना

योदरे. समु ो न

चो दधे.. (३)

पहले बताया आ सोमरस बलशाली इं को स करने के लए एक त आ है. इसके ारा इं का सागर के समान व तृत उदर भर जाता है. (३) अयमु ते समत स कपोत इव गभ धम्. वच त च ओहसे.. (४) हे इं ! जस कार कबूतर गभ धारण करने क इ छु क कबूतरी को ा त करता है, उसी कार तुम अपने इस सोमरस को हण करो. इसी सोमरस के कारण हमारी ाथनाएं भी वीकार करो. (४) तो ं राधानां पते गवाहो वीर य य ते. वभू तर तु सुनृता.. (५) हे धन के र क एवं उ म वचन ारा तु त कए गए वीर इं ! हम तु हारी तु त करते ह. यह तु त तु हारी वभू त से संप एवं स य हो. (५) ऊ व त ा न ऊतये म वाजे शत तो. सम येषु वावहै.. (६) हे सौ य करने वाले इं ! इस सं ाम म हमारी र ा करने के लए त पर रहो. सरे काय के वषय म हम और तुम मलकर बातचीत करगे. (६) योगेयोगे तव तरं वाजेवाजे हवामहे. सखाय इ मूतये.. (७) हम येक य के आरंभ म एवं अपने य म व न डालने वाले व भ सं ाम म परम श शाली इं को अपनी र ा के लए उसी कार बुलाते ह, जस कार कोई अपने म को बुलाता है. (७) आ घा गम द व सह णी भ

त भः. वाजे भ प नो हवम्.. (८)

इं य द हमारी पुकार सुनगे तो यह न य है क वे हजार पालनश साथ हमारे नकट आवगे. (८) अनु

न यौकसो वे तु व त नरम्. यं ते पूव पता वे.. (९)

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य एवं अ

के

इं ब त से यजमान के पास जाते ह. म उनके ाचीन नवास थान वग से उ ह बुलाता ं. इससे पूव मेरे पता भी उ ह बुला चुके ह. (९) तं वा वयं व वारा शा महे पु

त. सखे वसो ज रतृ यः.. (१०)

हे सबके य इं ! अग णत लोग तु ह अपने य म बुलाते ह. तु ह सब म के समान ेम करते ह. तुम सबको वग म थान दे ते हो. म ाथना करता ं क तुम तु त करने वाल पर कृपा करो. (१०) अ माकं श णीनां सोमपाः सोमपा वाम्. सखे व

सखीनाम्.. (११)

हे सोमरस पीने वाले इं ! तुम सबके म और व धारी हो. हम तु हारे म और सोमपान करने वाले ह. तुम हमारी लंबी नाक वाली गाय क वृ करो. (११) तथा तद तु सोमपाः सखे व

तथा कृणु. यथा त उ मसी ये.. (१२)

हे इं ! तुम सोमरस पीने वाले, सबके म और व धारी हो. तुम इस कार के काय करो क हम अपनी अ भल षत व तुएं पाने के लए तु ह ेम कर. (१२) रेवतीनः सधमाद इ े स तु तु ववाजाः. ुम तो या भमदे म.. (१३) श

जब इं हमारे ऊपर स हो जाएंगे तो हमारी गाएं अ धक ध दे ने वाली एवं संप बनगी. उन गाय से भोजन ा त करके हम स ह गे. (१३) आ घ वावा मना तः तोतृ यो धृ ण वयानः. ऋणोर ं न च योः.. (१४)

हे साहसी इं ! तु हारी कृपा से हम तु हारे ही समान कोई दे वता अनायास मल जाएगा. हम उसक तु त करगे, उससे मांगगे, तो वह अव य ही हम मनचाही संप दे गा. जस कार घोड़े रथ के दोन प हय के अर को घुमाते ह, उसी कार वे धन को हमारी ओर े रत करगे. (१४) आ य वः शत तवा कामं ज रतॄणाम्. ऋणोर ं न शची भः.. (१५) हे सौ य करने वाले इं ! जस कार गाड़ी के आगे बढ़ने से प हय के अरे अपने आप घूमते ह, उसी कार हम तु त करने वाल को इ छानुसार धन दो. (१५) श द ः पो ुथ जगाय नानद ः शा स धना न. स नो हर यरथं दं सनावा स नः स नता सनये स नोऽदात्.. (१६) घास खा लेने के प ात् इं के घोड़े श द करते ए हन हनाते ह और जोरजोर से सांस लेते ह. इं ने उ ह क सहायता से सदा श ु क संप को जीता है. इं कमपरायण एवं ******ebook converter DEMO Watermarks*******

दाता ह. उ ह ने हम सोने का रथ दया है. (१६) आ नाव ाव येषा यातं शवीरया. गोम

ा हर यवत्.. (१७)

हे अ नीकुमारो! तुम ब त से घोड़ ारा ढोया आ अ लेकर आओ. हे श ुनाशक! हमारा घर ब त सी गाय और सोने से भरा हो. (१७) समानयोजनो ह वां रथो द ावम यः. समु े अ नेयते.. (१८) हे श ुनाशक अ नीकुमारो! तुम दोन के लए एक ही अ वनाशी रथ तैयार कया गया है. वह रथ समु और आकाश म भी चल सकता है. (१८) य१ य य मूध न च ं रथ य येमथुः. प र ाम यद यते.. (१९) हे अ नीकुमारो! तुमने श ु का वनाश करने के लए अपने रथ का एक प हया थर पवत के ऊपर जमाया है और सरा आकाश म चार ओर घूम रहा है. (१९) क त उषः कध ये भुजे मत अम य. कं न से वभाव र.. (२०) हे अमर उषा! तु ह तु त ब त यारी लगती है. कोई भी मनु य तु हारा उपभोग करने म समथ नह है. हे वशेष भावशा लनी! तुम कस पु ष को ा त होगी? (२०) वयं ह ते अम म ाऽ तादा पराकात्. अ े न च े अ ष.. (२१) हे व तृत एवं रंग बरंगे काश वाली उषा! हम तु ह न र से समझ सकते ह और न पास से. (२१) वं ये भरा ग ह वाजे भ हत दवः. अ मे र य न धारय.. (२२) हे आकाश क पु ी उषा! तुम

सू —३१





के साथ आओ और हम धन दो. (२२)

दे वता—अ न

वम ने थमो अ रा ऋ षदवो दे वानामभवः शवः सखा. तव ते कवयो व नापसोऽजाय त म तो ाज यः.. (१) हे अ न! तुम अं गरा गो वाले ऋ षय के आ द ऋ ष थे. तुम वयं दे व थे एवं अ य दे व के क याणकारक म थे. तु हारे कम के कारण ही म द्गण ने ज म लया जो अपना कम जानते ह और जनके श चमक ले ह. (१) वम ने थमो अ र तमः क वदवानां प र भूष स तम्. ******ebook converter DEMO Watermarks*******

वभु व

मै भुवनाय मे धरो

माता शयुः क तधा चदायवे.. (२)

हे अ न! तुम अं गरा गो वाले ऋ षय म थम एवं सव े हो. तुम बु मान् हो और दे व के य को सुशो भत करते हो. तुम सारे संसार पर अनु ह के लए अनेक प से ा त हो. तुम मेधावी एवं दो लक ड़य से उ प हो. मनु य का क याण करने के लए तुम भ भ प म सब जगह रहते हो. (२) वम ने थमो मात र न आ वभव सु तूया वव वते. अरेजेतां रोदसी होतृवूयऽस नोभारमयजो महो वसो.. (३) हे अ न! तुम वायु क अपे ा मुख हो और यजमान के नकट सुंदर य को पूण करने क इ छा से कट हो जाओ. तु हारी साम य दे खकर धरती और आकाश कांप उठते ह. तुमने े होता के प म य का काय वीकार कया है. तु हारे य म नवास के कारण पू य दे वता के य पूण ए ह. (३) वम ने मनवे ामवाशयः पु रवसे सुकृते सुकृ रः. ा ेण य प ोमु यसे पया वा पूवमनय ापरं पुनः.. (४) हे अ न! तुमने मनु पर अनु ह करके यह बताया था क कन कम से वग मलता है. तुमने अपने सेवक पु रवा को शोभन फल दया. दोन का तु हारे माता- पता ह. उनके घषण से तुम उ प होते हो. ऋ वज् तु ह पहले वेद के पूव भाग म ले जाते ह, बाद म प म भाग म. (४) वम ने वृषभः पु वधन उ त ुचे भव स वा यः. य आ त प र वेदा वषट् कृ तमेकायुर े वश आ ववास स.. (५) हे अ न! तुम अ भलाषा को पूण करने वाले हो एवं यजमान को धन आ द से पु करते हो. हे एकमा अ दाता! जो यजमान य पा उठाते ए तु हारा यश गाता है एवं वषट् कार श द के साथ तु ह आ त दे ता है, तुम उसे पहले काश दे ते हो, उसके बाद सारे संसार को. (५) वम ने वृ जनवत न नरं स म पप ष वदथे वचषणे. यः शूरसाता प रत ये धने द े भ समृता हं स भूयसः.. (६) हे व श ानसंप अ न! तुम सदाचारहीन मनु य को ऐसे काम म लगाते हो, जससे उसका उ ार हो सके. जब व तृत यु चार ओर भली-भां त आरंभ हो जाता है तो तु हारी कृपा से थोड़ी सं या वाले एवं वीरताशू य लोग बड़े-बड़े वीर का वध कर डालते ह. (६) वं तम ने अमृत व उ मे मत दधा स वसे दवे दवे. य तातृषाण उभयाय ज मने मयः कृणो ष य आ च सूरये.. (७) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हे अ न! जो मनु य तु हारी सेवा करता है, उसके लए तुम अ दान करने हेतु उ म और थायी पद पर त त कर दे ते हो. जो यजमान मनु य एवं पशु को ा त करने के लए अ यंत उ सुक है, उस बु मान् यजमान को तुम सुख और अ दो. (७) वं नो अ ने सनये धनानां यशसं का ं कृणु ह तवानः. ऋ याम कमापसा नवेन दे वै ावापृ थवी ावतं नः.. (८) हे अ न! हम तु हारी तु त करते ह. तुम हम धन एवं यश दे ने वाला तथा य कम करने वाला पु दान करो. तु हारे ारा दए गए नवीन पु से हम परा म म उ त करगे. हे धरती और आकाश! तुम अ य दे व के साथ मलकर हमारी ठ क से र ा करो. (८) वं नो अ ने प ो प थ आ दे वो दे वे वनव जागृ व. तनूकृ ो ध म त कारवे वं क याण वसु व मो पषे.. (९) हे दोषर हत अ न! तुम सब दे व क अपे ा जाग क हो. तुम अपने माता- पता धरती-आकाश के पास रहकर अनु ह के प म हम पु दो एवं य क ा यजमान के त स च रहो. हे क याणकारक! तुम यजमान के लए सभी कार क संप दान करो. (९) वम ने म त वं पता स न वं वय कृ व जामयो वयम्. सं वा रायः श तनः सं सह णः सुवीरं य त तपामदा य.. (१०) हे अ न! तुम हम पर अनु ह बु रखते हो. तुम हमारे पालक हो. तुम हम द घ जीवन दे ते हो. हम तु हारे बंधु ह. कोई तु हारी हसा नह कर सकता, य क तुम शोभन पु ष से यु एवं य के पालन करनेवाले हो. तु ह सैकड़ एवं हजार कार क संप यां भली कार ा त ह. (१०) वाम ने थममायुमायवे दे वा अकृ व ष य व प तम्. इळामकृ व मनुष य शासन पतुय पु ो ममक य जायते.. (११) हे अ न! तु ह दे व ने ाचीन काल म मनु य पधारी न ष व मानव शरीर वाला सेनाप त बनाया था. जस समय तुमने मेरे पता अं गरा ऋ ष के पु के प म ज म लया था, उसी समय दे व ने इला को मनु क धम पदे शक बनाया. (११) वं नो अ ने तव दे व पायु भमघोनो र त व व . ाता तोक य तनये गवाम य नमेषं र माण तव ते.. (१२) हे वंदनीय अ न! तुम अपनी र णश ारा हम धनवान एवं हमारे पु के शरीर क र ा करो. हमारे पौ तु हारे य म सदा लगे रहते ह. तुम उनक गाय क र ा करो. (१२) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

वम ने य यवे पायुर तरोऽ नष ाय चतुर इ यसे. यो रातह ोऽवृकाय धायसे क रे म ं मनसा वनो ष तम्.. (१३) हे अ न! तुम यजमान क र ा करते हो. तुम रा स क बाधा से य को मु करने के लए य के समीप रहकर चार ओर का शत होते हो. तुम हसा नह करते, अ पतु पोषण करते हो. जो तु तगानक ा तु ह दे ता है, तुम उसक तु त को मन से चाहते हो. (१३) वम न उ शंसाय वाघते पाह य े णः परमं वनो ष तत्. आ य च म त यसे पता पाकं शा स दशो व

रः.. (१४)

हे अ न दे व! तुम ऐसी कामना करो क तु हारी तु त करने वाला ऋ वज् मनचाहा, अनंत धन ा त करे. व ान् लोग कहते ह क तुम बल यजमान का पालन करने के लए स च पता के समान हो. तुम अ यंत ानवान् हो. तुम अबोध बालक के समान यजमान को ान दो और दशा का बोध कराओ. (१४) वम ने यतद णं नरं वमव यूतं प र पा स व तः. वा ा यो वसतौ योनकृ जीवयाजं यजते सोपमा दवः.. (१५) हे अ न! जस यजमान ने ऋ वज को द णा द है, उसक तुम चार ओर से उसी कार र ा करो, जस कार सला आ कवच शरीर क र ा करता है. जो यजमान अ त थय को वा द अ खलाकर सुखी करता है एवं अपने घर म ा णय से य करवाता है, वह वग के समान सुखकारी होता है. (१५) इमाम ने शर ण मीमृषो न इमम वानं यमगाम रात्. आ पः पता म तः सो यानां भृ मर यृ षकृ म यानाम्.. (१६) हे अ न! हमने जो तु हारे य का लोप कया, उस भूल को मा करो. हम तु हारी अ नहो पी सेवा को छोड़कर जो रवत माग म चले आए ह, इस भूल को भी मा करो. तुम सोमयाग करने वाले मनु य को सरलता से ा त हो जाते हो. तुम उनके पता के समान, परम मननशील एवं य पूरा करने वाले हो. तुम उ ह य प से दशन दो. (१६) मनु वद ने अ र वद रो यया तव सदने पूवव छु चे. अ छ या ा वहा दै ं जनमा सादय ब ह ष य च यम्.. (१७) हे प व अ न! तुम ह व हण करने के लए भ - भ थान पर जाते हो. तुम जस कार मनु, अं गरा, यया त आ द पूव पु ष के य म जाते थे, उसी कार हमारे य म भी सामने क ओर से आओ, दे व को अपने साथ लाकर कुश पर बैठाओ और उ ह य दो. (१७) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

एतेना ने णा वावृध व श वा य े चकृमा वदा वा. उत णे य भ व यो अ मा सं नः सृज सुम या वाजव या.. (१८) हे अ न! तुम हमारी इस तु त से वृ ा त करो. हमने अपनी श और बु के अनुसार तु हारी तु त क है. इस तु त के कारण तुम हम भूत संप दो तथा अ के साथ-साथ शोभन बु भी दान करो. (१८)

सू —३२

दे वता—इं

इ य नु वीया ण वोचं या न चकार थमा न व ी. अह हम वप ततद व णा अ भन पवतानाम्.. (१) म व धारी इं के पूवकृत परा म का वणन करता ं. उसने मेघ का वध कया. इसके प ात् जल को धरती पर गराया. इसके बाद बहती ई पहाड़ी न दय का माग बदल दया. (१) अह ह पवते श याणं व ा मै व ं वय तत . वा ा इव धेनवः य दमाना अ ः समु मव ज मुरापः.. (२) इं ने पवत पर आ य लेने वाले मेघ का वध कया. व ा ने इं के लए भली कार फका जाने वाला व बनाया. इसके बाद जल क वेगवती धाराएं उसी कार समु क ओर गई थ , जस कार रंभाती ई गाएं बछड़ वाले घर क ओर जाती ह. (२) वृषायमाणोऽवृणीत सोमं क के व पब सुत य. आ सायकं मघवाद व मह ेनं थमजामहीनाम्.. (३) इं ने बैल के समान तेजी से सोम हण कया. यो त ोम, गोमेध और आयु इन व वध य म चुआया आ सोमरस इं ने पया. धन के वामी इं ने व पी बाण हण करके सव थम उ प मेघ का वध कया था. (३) य द ाह थमजामहीनामा मा यनाम मनाः ोत मायाः. आ सूय जनय ामुषासं ताद ना श ुं न कला व व से.. (४) हे इं ! जब तुमने थम उ प मेघ का वध कया था, तभी मायाधा रय क माया भी समा त कर द थी. इसके प ात् तुमने सूय, आकाश एवं उषा को का शत कया था. इसके बाद तु हारा कोई श ु दखाई नह दया. (४) अह वृ ं वृ तरं ंस म ो व ेण महता वधेन. क धांसीव कु लशेना ववृ णाऽ हः शयत उपपृ पृ थ ाः.. (५) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

इं ने संसार म अंधकार फैलाने वाले श ु को महा वनाशकारी व ारा हाथ काटकर मारा था. जस कार कु हाड़ी से काट ई शाखा गर पड़ती है, उसी कार वृ धरती पर सोया आ था. (५) अयो े व मद आ ह जु े महावीरं तु वबाधमृजीषम्. नातारीद य समृ त वधानां सं जानाः प पष इ श ुः.. (६) अहंकारी वृ ने यह समझकर इं को ललकारा क मेरे समान कोई यो ा है ही नह . इं महान् परा मी, ब त का वंस करने वाले एवं श ु वजयी ह. वृ इं के वनाश से बच नह सका. इं के श ु वृ ने गरते समय न दय के कनारे भी न कर दए. (६) अपादह तो अपृत य द मा य व म ध सानौ जघान. वृ णो व ः तमानं बुभूष पु ा वृ ो अशयद् तः.. (७) बना हाथपैर वाले वृ ने इं को यु म ललकारा. इं ने पहाड़ क चोट के समान वृ के पु कंधे म व मारा. जस कार श शाली पु ष क समानता करने वाले बलहीन का य न थ जाता है, वही दशा वृ क ई. वह कई जगह घायल होकर धरती पर गर पड़ा. (७) नदं न भ ममुया शयानं मनो हाणा अ त य यापः. या द् वृ ो म हना पय त ासाम हः प सुतः शीबभूव.. (८) सुंदर जल धरती पर पड़े ए वृ को लांघकर उसी कार आगे जा रहा है, जस कार स रता टू टे ए कनार को पार करके बहती है. वह जी वत अव था म अपनी श से जस जल को रोके ए था, इस समय वह उसी जल के नीचे सो गया है. (८) नीचावया अभवद् वृ पु े ो अ या अव वधजभार. उ रा सूरधरः पु आसीद्दानुः शये सहव सा न धेनुः.. (९) वृ क माता वृ को इं के हार से बचाने के लए तरछ होकर उसके शरीर पर गर पड़ी. इं ने वृ क माता के नीचे के भाग पर व मारा. उस समय माता ऊपर और पु नीचे था. जस कार गाय अपने बछड़े के साथ सो जाती है, उसी कार वृ क माता दनु सदा के लए सो गई. (९) अ त तीनाम नवेशनानां का ानां म ये न हतं शरीरम्. वृ य न यं व चर यापो द घ तम आशय द श ुः.. (१०) एक थान पर न कने वाले जल म डू बकर वृ का शरीर नाममा को भी दखाई नह दे रहा है. इं से बैर करने वाला वृ चर न ा म लीन है और जल उसके ऊपर होकर बह रहा है. (१०) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

दासप नीर हगोपा अ त ा आपः प णनेव गावः. अपां बलम प हतं यदासीद् वृ ं जघ वाँ अप त वार.. (११) जस कार प ण नामक असुर ने गाय को गुफा म बंद कर दया था, उसी कार वृ ारा र त उसक जल पी प नयां भी न थ . जल बहने का माग भी का आ था. इं ने वृ को मारकर वह ार खोला. (११) अ ो वारो अभव त द सृके य वा यह दे व एकः. अजयो गा अजयः शूर सोममवासृजः सतवे स त स धून्.. (१२) हे इं ! सभी आयुध के हार म अ तीय वृ ने जब तु हारे व के ऊपर हार कया था, उस समय तुम घोड़े क पूंछ के समान घूम कर उसे बचा गए थे. हे शूर! तुमने प ण ारा पवत गुफा म छपाई ई गाय को जीता तथा सोम को भी जीत लया. तुमने सात न दय का वाह बाधाहीन कर दया. (१२) ना मै व ु त यतुः सषेध न यां महम करद्धा न च. इ य ुयध ु ाते अ ह ोतापरी यो मघवा व ज ये.. (१३) जस समय इं और वृ पर पर यु कर रहे थे, उस समय वृ ने माया से जस बजली, मेघगजन, जलवषा और अश न का योग कया था, वे इं को नह रोक सके. इसके साथ ही इं ने वृ क अ य माया को भी जीत लया. (१३) अहेयातारं कमप य इ द य े ज नुषो भीरग छत्. नव च य व त च व तीः येनो न भीतो अतरो रजां स.. (१४) हे इं ! वृ को मारते समय तु हारे मन म कोई भी भय नह आ. उस समय तुमने सहायक प म कसी भी वृ हंता को नह दे खा था. तुम नडर बाज प ी के समान शी ता से न यानवे न दय को पार कर गए थे. (१४) इ ो यातोऽव सत य राजा शम य च शृ णो व बा ः. से राजा य त चषणीनामरा ने मः प र ता बभूव.. (१५) वृ को मारकर व धारी इं थावर, जंगम, स ग र हत और स ग वाले पशु के वामी बने. इं मनु य के भी राजा बने. जस कार प हए के अरे ने म म थत रहते ह, उसी कार इं ने सबको धारण कया. (१५)

सू —३३ एतायामोप ग

दे वता—इं त इ म माकं सु म त वावृधा त.

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अनामृणः कु वदाद य रायो गवां केतं परमावजते नः.. (१) हम प ण असुर ारा रोक हसार हत ह एवं हमारी उ म बु हम उ म ान दे ते ह. (१)

ई गाय को पाने क इ छा से इं के पास चल. इं को बढ़ाते ह. इसके बाद वे इस गो प धन के वषय म

उपेदहं धनदाम तीतं जु ां न येनो वस त पता म. इ ं नम य ुपमे भरकयः तोतृ यो ह ो अ त यामन्.. (२) जस कार बाज अपने घ सले क ओर तेजी से जाता है, उसी कार म उ म तु तय ारा पूजन करके धनदाता एवं अपराजेय इं क ओर दौड़ता ं. श ु के साथ यु छड़ने पर तोतागण इं का आ ान करते ह. (२) न सवसेन इषुध रस समय गा अज त य य व . चो कूयमाण इ भू र वामं मा प णभूर मद ध वृ .. (३) सम त सेना से यु इं पीठ पर तरकस लगाए ए ह. सबके वामी इं जसे चाहते ह, उसी क गाय प ण से छु ड़ाकर उसके पास भेज दे ते ह. हे उ म बु संप इं ! हम पया त मा ा म गो प धन दे कर ापारी के समान हमसे उसका मू य मत मांगना. (३) वधी ह द युं ध ननं घनेनँ एक र ुपशाके भ र . धनोर ध वषुण े ाय य वानः सनका े तमीयुः.. (४) हे इं ! श शाली म द्गण तु हारे साथ थे, फर भी तुमने अकेले ही चोर एवं धनवान् वृ को कठोर व ारा मारा. य वरोधी उसके अनुचर तु ह मारने के वचार से गए, पर उ ह तु हार धनुष से मृ यु मली. (४) परा च छ षा ववृजु त इ ाय वानो य व भः पधमानाः. य वो ह रवः थात नर ताँ अधमो रोद योः.. (५) हे इं ! जो लोग वयं य नह करते ह अथवा य करने वाल का वरोध करते ह, वे पीछे क ओर मुंह करके भाग गए ह. हे इं ! तुम ह र नामक घोड़ के वामी, यु म पीठ न दखाने वाले तथा उ हो. य न करने वाल को तुमने वग, आकाश और धरती से भगा दया है. (५) अयुयु स नव य सेनामयातय त तयो नव वाः. वृषायुधो न व यो नर ाः व र ा चतय त आयन्.. (६) वृ के अनुचर ने दोषर हत इं क सेना के साथ यु करना चाहा था. उ म च र वाले मनु य ने इं को यु के लए े रत कया. जस कार शूर के साथ यु छे ड़ने वाले ******ebook converter DEMO Watermarks*******

नपुंसक भाग जाते ह, उसी कार वे इं के ारा अपमा नत होकर अपनी नबलता का वचार करते ए सरल माग से र भाग गए. (६) वमेता ुदतो ज त ायोधयो रजस इ पारे. अवादहो दव आ द युमु चा सु वतः तुवतः शंसमावः.. (७) हे इं ! वृ के कुछ अनुचर तु हारी हंसी उड़ा रहे थे और कुछ तु हारे भय से रो रहे थे. तुमने उन सभी से आकाश म यु कया एवं द यु वृ को वग से लाकर भली-भां त सप रवार न कर दया. इस कार तुमने सोमरस तैयार करने वाल एवं तु तक ा क र ा क . (७) च ाणासः परीणहं पृ थ ा हर येन म णना शु भमानाः. न ह वानास त त त इ ं प र पशो अदधा सूयण.. (८) उन वृ ानुचर ने धरती को सब ओर से ा त कर लया था. वे वण एवं म णय से सुशो भत थे. वे इं को नह जीत सके. य म व न डालने वाले उनको इं ने सूय क सहायता से भगा दया. (८) प र य द रोदसी उभे अबुभोजीम हना व तः सीम्. अम यमानाँ अ भ म यमानै न भरधमो द यु म .. (९) हे इं ! तुमने अपनी म हमा से धरती और आकाश को ा त करके उनका भली कार भोग कया है. जो यजमान मं का उ चारण समझकर केवल पाठ करते थे, मं उ ह अपना समझकर उनक र ा करते थे. ऐसे मं ारा तुमने उस चोर वृ को नकाल दया. (९) न ये दवः पृ थ ा अ तमापुन माया भधनदां पयभूवन्. युजं व ं वृषभ इ ो न य तषा तमसो गा अ त्.. (१०) जब आकाश से धरती पर जल नह बरसा और धन दे ने वाली भू म मानवोपकारक फसल से यु नह थी, तब वषाकारक इं ने अपने हाथ म व उठाया और चमकते ए व क सहायता से अंधकार फैलाने वाले मेघ से नीचे गरने वाला जल पूरी तरह हा. (१०) अनु वधाम र ापो अ यावधत म य आ ना ानाम्. स ीचीनेन मनसा त म ओ ज ेन ह मनाह भ ून्.. (११) इं के वधा मं के अनुसार पानी बरसने लगा. तब वृ उन न दय के बीच म प ंचकर बढ़ने लगा, जनम नाव चल सकती थी. इं ने श शाली एवं ाणसंहारक व ारा उस थर मन वाले वृ को कुछ ही दन म मार डाला. (११) या व य दली बश य

हा व शृ णम भन छु ण म ः.

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याव रो मघव यावदोजो व ेण श ुमवधीः पृत युम्.. (१२) इं ने धरती पर छपी ई वृ क सेना को पूरी तरह वेध दया था एवं संसार को ःखी करने वाले एवं स ग के समान आयुध वाले वृ को अनेक कार से मारा था. हे इं ! तु हारे पास जतना वेग और बल है, उसके ारा तुमने यु ा भलाषी वृ को व क सहायता से काट डाला. (१२) अ भ स मो अ जगाद य श ु व त मेन वृषभेणा पुरोऽभेत्. सं व ेणासृज म ः वां म तम तर छाशदानः.. (१३) इं का काय स करने वाला व श ु पर गरा था. इं ने ती ण एवं े व पी आयुध से वृ के नगर को तोड़ डाला था. इसके प ात् इं ने अपना व वृ पर चलाया और उसे मारते ए भली-भां त अपना उ साह बढ़ाया. (१३) आवः कु स म य म चाक ावो यु य तं वृषभं दश ुम्. शफ युतो रेणुन त ामु छ् वै ेयो नृषा ाय त थौ.. (१४) हे इं ! तुम कु स ऋ ष क तु त को पंसद करते थे. तुमने उनक र ा क . तुमने यु रत एवं े गुण वाले दश ु ऋ ष क भी र ा क . तु हारे घोड़ क टाप से उठ ई धूल आकाश तक फैल गई थी. ै ेय ऋ ष श ु के भय से पानी म छप गए थे. मनु य म े पद पाने क इ छा से वे तु हारी कृपा के कारण ही बाहर नकले. (१४) आवः शमं वृषभं तु यासु े जेषे मघव छ् व यं ाम्. योक् चद त थवांसो अ छ ूयतामधरा वेदनाकः.. (१५) हे इं ! तुमने शांत च , े गुण वाले एवं जलम न ै ेय को े ा त के उ े य से बचाया था. जो लोग हमारे साथ ब त दन से यु कर रहे ह एवं हमसे श ुता रखते ह, तुम उ ह वेदना और क दो. (१५)

सू —३४

दे वता—अ नीकुमार

ो अ ा भवतं नवेदसा वभुवा याम उत रा तर ना. युवो ह य ं ह येव वाससोऽ यायंसे या भवतं मनी ष भः.. (१) हे बु मान् अ नीकुमारो! तुम हमारे लए आज तीन बार आओ. तु हारे रथ और दान ापक ह. जस कार र मय वाला सूय शीतल रा से संबं धत है, उसी कार तुम दोन का भी नय मत संबंध है. तुम कृपा करके व ान के वश म हो जाओ. (१) यः पवयो मधुवाहने रथे सोम य वेनामनु व इ

ः.

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यः क भासः क भतास आरभे

न ं याथ

व ना दवा.. (२)

सम त दे वता चं मा और उसक सुंदरी प नी वेना के ववाह म जा रहे थे, तब उ ह पता लगा क मधुर भो य-पदाथ को ढोने वाले रथ म तीन प हए ह. उस रथ के ऊपर सहारा लेने के लए खंभे ह. हे अ नीकुमारो! इस कार के रथ ारा तुम दन म तीन बार आओ और रात म भी तीन बार आओ. (२) समाने अह रव गोहना र य ं मधुना म म तम्. वाजवती रषो अ ना युवं दोषा अ म यमुषस प वतम्.. (३) हे अ नीकुमारो! तुम दन म तीन बार आकर य कम क ु टयां र करो. आज य का मधुर रस से तीन बार स चो. रात और दन म तीन-तीन बार बलकारक अ से हमारा पोषण करो. (३) व तयातं रनु ते जने ना ं वहतम ना युवं

ः सु ा े ध े ेव श तम्. ः पृ ो अ मे अ रेव प वतम्.. (४)

हे अ नीकुमारो! हमारे नवास थान म तीन बार आओ. हमारे अनुकूल काय करने वाले मनु य के पास तीन बार आओ. जो लोग तु हारे ारा र णीय ह, उनके पास तीन बार आओ. हम तीन कार से श ा दो. हम तीन बार स ताकारक फल दो. जस कार मेघ जल दे ते ह, उसी कार तुम हम तीन बार जल दो. (४) न र य वहतम ना युवं दवताता तावतं धयः. ः सौभग वं त वां स न ं वां सूरे हता ह थम्.. (५) हे अ नीकुमारो! हम तीन बार धन दान करो. हमारे दे व संबंधी य म तीन बार आओ. तीन बार हमारी बु क र ा करो. तीन बार हमारे सौभा य क र ा करो. हम तीन बार अ दो. तु हारे तीन प हए वाले रथ पर सूय क पु यां सवार ह. (५) न अ ना द ा न भेषजा ः पा थवा न द मद् यः. ओमानं शंयोममकाय सूनवे धातु शम वहतं शुभ पती.. (६) हे अ नीकुमारो! वगलोक क ओष ध हम तीन बार दो. पृ वी पर उ प ओष ध हम तीन बार दो. आकाश से हम तीन बार ओष ध दो. हे बृह प त के पोषको! हम वात, प , कफ—इन तीन धातु से संबं धत सुख दो. (६) न अ ना यजता दवे दवे प र धातु पृ थवीमशायतम्. त ो नास या र या परावत आ मेव वातः वसरा ण ग छतम्.. (७) हे अ नीकुमारो! तुम

त दन य म बुलाने यो य हो. तुम तीन बार धरती पर आकर

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वेद पर तीन परत के प म बछ ई कुशा पर शयन करो. शरीर म जस ाणवायु आती है, उसी कार तुम तीन य थान म आओ. (७)

कार

र ना स धु भः स तमातृ भ य आहावा ेधा ह व कृतम्. त ः पृ थवी प र वा दवो नाकं र ेथे ु भर ु भ हतम्.. (८) हे अ नीकुमारो! सधु आ द सात न दय के जल से तीन सोमा भषेक ए ह. जल के आधार तीन कलश और तीन सवन से संबं धत तीन कार क ह व तैयार है. तुमने पृ वी आ द तीन लोक से ऊपर जाकर दवसरा यु आकाश म सूय क र ा क थी. (८) व१ ी च ा वृतो रथ य व१ यो व धुरो ये सनीळाः. कदा योगो वा जनो रासभ य येन य ं नास योपयाथः.. (९) हे नास यो! तु हारे तीन कोने वाले रथ के तीन प हए कहां ह? रथ के ऊपर जो बैठने का थान है, उसके तीन बंधनाधार प डंडे कहां ह? तु हारे रथ म बलवान् गधे न जाने कब जोड़े गए? उ ह के ारा तुम हमारे य म आते हो. (९) आ नास या ग छतं यते ह वम वः पबतं मधुपे भरास भः. युवो ह पूव स वतोषसो रथमृताय च ं घृतव त म य त.. (१०) हे नास यो! इस य म आओ. म तु ह ह व दे ता ं. तुम मधुर पदाथ का पान करने वाले अपने मुख से मधुर ह व पओ. तु हारे व च और धुरी म घी लगे ए रथ को हमारे य म आने के लए उषा ने पहले ही ेरणा द थी. (१०) आ नास या भरेकादशै रह दे वे भयातं मधुपेयम ना. ायु ता र ं नी रपां स मृ तं सेधतं े षो भवतं सचाभुवा.. (११) हे नास य अ नीकुमारो! ततीस दे वता के साथ मधुर सोमरस पीने के लए इस य म आओ, हम द घायु करो, हमारे पाप का नाश करो, हमारे श ु को रोको और हमारे साथ रहो. (११) आ नो अ ना वृता रथेनावा चं र य वहतं सुवीरम्. शृ व ता वामवसे जोहवी म वृधे च नो भवतं वाजसातौ.. (१२) हे अ नीकुमारो! तीन लोक म चलने वाले अपने रथ ारा हमारे पास पु , सेवक आ द स हत धन लाओ. तुम हमारी तु त सुनो. हम अपनी र ा के लए तु ह बुलाते ह. हमारी उ त करो और सं ाम म हम श दो. (१२)

सू —३५

दे वता—स वता

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या य नं थमं व तये या म म ाव णा वहावसे. या म रा जगतो नवेशन या म दे वं स वतारमूतये.. (१) म अपनी र ा के लए सबसे पहले अ न को बुलाता ं. म अपनी र ा के लए म और व ण को यहां बुलाता ं. म संसार के सभी ा णय को व ाम दे ने वाली रात को बुलाता ं. म अपनी र ा के लए स वता को बुलाता ं. (१) आ कृ णेन रजसा वतमानो नवेशय मृतं म य च. हर ययेन स वता रथेना दे वो या त भुवना न प यन्.. (२) स वता का रथ सोने का है. वे अंधकार से भरे आकाश म बार-बार मण करते ए दे व और मानव को अपने-अपने कम म लगाते ए सभी लोक क या ा करते ह. (२) या त दे वः वता या यु ता या त शु ा यां यजतो ह र याम्. आ दे वो या त स वता परावतोऽप व ा रता बाधमानः.. (३) स वता दे व ातःकाल से म या तक उ त माग से और म या से सं या तक अवनत माग से चलते ह. य के यो य सूय दे व सफेद घोड़ क सहायता से चलते ह. वे सम त पाप का नाश करते ए र दे श से य म आते ह. (३) अभीवृतं कृशनै व पं हर यश यं यजतो बृह तम्. आ था थं स वता च भानुः कृ णा रजां स त व ष दधानः.. (४) य के यो य एवं रंग- बरंगी करण वाले स वता अपने तेज से लोक म ा त अंधकार को न करने के लए वण मू तय से सुशो भत एवं सोने क क ल वाले वशाल रथ पर सवार ए. (४) व जना ावाः श तपादो अ य थं हर य उगं वह तः. श शः स वतुद योप थे व ा भुवना न त थुः.. (५) सूय के सफेद पैर वाले घोड़े सोने के जुए वाले रथ को ख चते ए मनु य को वशेष प से काश दे ते ह. मनु य एवं सारा संसार काश के लए सूय दे वता के समीप जाता है. (५) त ो ावः स वतु ा उप थाँ एका यम य भुवने वराषाट् . आ ण न र यममृता ध त थु रह वीतु य उ त चकेतत्.. (६) वग आ द तीन लोक ह. इनम वगलोक और भूलोक दो सूय के अ धकार म ह. एक आकाशलोक यमराज के घर जाने का माग है. जस कार आ ण नाम क क ल के ऊपर रथ टका रहता है, उसी कार चं मा आ द न सूय का सहारा लए ए ह. जो सूय के वषय ******ebook converter DEMO Watermarks*******

म जानते ह, वे बोल. (६) व सुपण अ त र ा य यद्गभीरवेपा असुरः सुनीथः. वे३दान सूयः क केत कतमां ां र मर या ततान.. (७) गंभीर कंपन वाली, सबको ाण दे ने वाली और सरलता से सब जगह प ंचने वाली सूय क करण आकाश आ द तीन लोक म फैली ई ह. यह कौन बता सकता है क इस समय सूय कहां है? सूय क करण कस वगलोक म व तृत ह? (७) अ ौ य ककुभः पृ थ ा ी ध व योजना स त स धून्. हर या ः स वता दे व आगा ध ना दाशुषे वाया ण.. (८) सूय ने पृ वी क आठ दशाएं, ा णय के तीन लोक और सात न दयां का शत क ह. सोने क आंख वाले सूय दे ने वाले यजमान को उ म धन दे ते ए यहां आव. (८) हर यपा णः स वता वचष ण भे ावापृ थवी अ तरीयते. अपामीवां बाधते वे त सूयम भ कृ णेन रजसा ामृणो त.. (९) हाथ म सोना लए ए एवं व वध पदाथ को दे खते ए सूय आकाश और धरती दोन लोक म जाते ह. वे रोग को र भगाते ह, उदय होते ह और अंधकार को न करने वाले काश को लेकर सारे आकाश को ा त करते ह. (९) हर यह तो असुरः सुनीथः सुमृळ कः ववाँ या ववाङ् . अपसेध सो यातुधानान था े वः तदोषं गृणानः.. (१०) हाथ म सोना लए ए, ाणदाता, अ छे नेता, सुख और धन दे ने वाले स वता य म सामने से आव. सूय दे व तरा तु त सुनकर यातुधान और रा स को य से नकालकर थत ए. (१०) ये ते प थाः स वतः पू ासोऽरेणवः सुकृता अ त र े. ते भन अ प थ भः सुगेभी र ा च नो अ ध च ू ह दे व.. (११) हे स वता! आकाश म तु हारा माग न त, धू लर हत एवं भली कार बनाया गया है. तुम उसी माग से आकर आज हमारी र ा करो. हे दे व! हमारी बात दे वता तक प ंचा दो. (११)

सू —३६

दे वता—अ न

वो य ं पु णां वशां दे वयतीनाम्. अ नं सू े भवचो भरीमहे यं सी मद य ईळते.. (१) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

दे व क कामना करने वाले हम ब सं यक जाजन पर अनु ह के न म सू पी वचन ारा महान् अ न क ाथना करते ह. अ य ऋ षगण भी इसी अ न क तु त करते ह. (१) जनासो अ नं द धरे सहोवृधं ह व म तो वधेम ते. स वं नो अ सुमना इहा वता भवा वाजेषु स य.. (२) य करने वाले लोग ने श वधक अ न को धारण कया था. हे अ न! हम लोग ह व लेकर तु हारी सेवा करते ह. तुम अ दान म त पर हो. आज इस य म हम पर परम स होकर हमारे र क बनो. (२) वा तं वृणीमहे होतारं व वेदसम्. मह ते सतो व चर यचयो द व पृश त भानवः.. (३) हे अ न! तुम य के होता एवं सव हो. हम तु ह दे व का त समझकर वरण करते ह. तुम महान् और न य हो. तु हारी चमक बढ़ती है. तु हारी करण आकाश को छू ती ह. (३) दे वास वा व णो म ो अयमा सं तं न म धते. व ं सो अ ने जय त वया धनं य ते ददाश म यः.. (४) हे अ न! व ण, म और अयमा—ये तीन दे व तु ह अपना ाचीन त समझकर भली कार चमकाते ह. जो यजमान तु ह ह व दे ता है, वह तु हारे ारा सभी कार क संप जीत लेता है. (४) म ो होता गृहप तर ने तो वशाम स. वे व ा संगता न ता ुवा या न दे वा अकृ वत.. (५) हे अ न! तुम दे व को बुलाने वाले, यजमान प जा के पालक एवं ह षत करने वाले हो. तुम दे वता के त हो. पृ वी आ द दे वता जो थर कम करते ह, वे तुम म मल जाते ह. (५) वे इद ने सुभगे य व व मा यते ह वः. स वं नो अ सुमना उतापरं य दे वा सुवीया.. (६) हे युवक अ न! तुझ परम सौभा यशाली को ल य करके सब ह दए जाते ह. तुम स मन होकर आज, कल और सवदा सुंदर एवं श शाली दे व का य करो. (६) तं घे म था नम वन उप वराजमासते. हो ा भर नं मनुषः स म धते त तवासो अ त

धः.. (७)

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यजमान नम कार करते ए अपने आप चमकने वाले उसी अ न को ह व दे कर उपासना करते ह. श ु को करारी हार दे ने के इ छु क लोग होता ारा अ न को व लत करते ह. (७) न तो वृ मतर ोदसी अप उ याय च रे. भुव क वे वृषा ु या तः दद ो ग व षु.. (८) हे अ न! तु हारी सहायता से दे व ने वृ को मारकर रहने के लए वग, पृ वी और आकाश को व तृत कया. जस कार सं ाम म हन हनाता आ घोड़ा गाएं ा त करता है, उसी कार भली कार बुलाए जाने पर तुम क व ऋ ष के लए इ छानुसार धन बरसाओ. (८) सं सीद व महाँ अ स शोच व दे ववीतमः. व धूमम ने अ षं मये य सृज श त दशतम्.. (९) हे अ न! तुम भली कार बैठो. तुम महान् हो. तुम दे वता क बल इ छा करते ए जलो. हे बु मान् एवं शंसनीय अ न! तुम इधर-उधर फैलने वाले धुएं को वशेष प से बनाओ. (९) यं वा दे वासो मनवे दधु रह य ज ं ह वाहन. यं क वो मे या त थधन पृतं यं वृषा यमुप तुतः.. (१०) हे ह वाहक अ न! सम त दे व ने मनु के लए इस य थल म तुझ परम पू य अ न को धारण कया था. क व ने पू य अ त थय के साथ धन ारा स करने वाले तुझ अ न को धारण कया था. वषा करने वाले इं एवं अ य तु तक ा ने भी तु ह धारण कया था. (१०) यम नं मे या त थः क व ईध ऋताद ध. त य ेषो द दयु त ममा ऋच तम नं वधयाम स.. (११) पू य अ त थय वाले क व ने जस अ न को सूय से लेकर व लत कया था, उसी अ न क फैलने वाली करण चमक रही ह. हमारी ये ऋचाएं तथा हम उसी अ न को बढ़ाते ह. (११) राय पू ध वधावोऽ त ह तेऽ ने दे वे वा यम्. वं वाज य ु य य राज स स नो मृळ महाँ अ स.. (१२) हे अ स हत अ न! हम धन दो. तु हारी दे व से म ता है, तुम एवं महान् हो. तुम हम सुखी बनाओ. (१२) ******ebook converter DEMO Watermarks*******



अ के वामी

ऊ व ऊ षु ण ऊतये त ा दे वो न स वता. ऊ व वाज य स नता यद भवाघ व यामहे.. (१३) तुम हमारी र ा के लए सूय के समान उ त बनो. ऊंचे उठकर तुम हम अ दे ने वाले बनोगे, य क यूप गाड़ने वाले एवं य पूण करने वाले ऋ वज ारा हम तु ह बुलाते ह. (१३) ऊ व नः पा ंहसो न केतुना व ं सम णं दह. कृधी न ऊ वा चरथाय जीवसे वदा दे वेषु नो वः.. (१४) तुम ऊंचे उठकर ान क सहायता से हम पाप से बचाओ एवं सम त रा स को जला दो. संसार म घूमने- फरने के लए हम उ त बनाओ तथा हम जी वत रखने के लए हमारा ह व पी धन दे व के पास ले जाओ. (१४) पा ह नो अ ने र सः पा ह धूतररा णः. पा ह रीषत उत वा जघांसतो बृह ानो य व

.. (१५)

हे वशाल करण वाले युवक अ न! हम बाधक रा स से बचाओ. धन दान न करने वाले धूत हसक पशु और मारने क इ छा रखने वाले श ु से हमारी र ा करो. (१५) घनेव व व व ज रा ण पुज भ यो अ म ुक्. यो म यः शशीते अ य ु भमा नः स रपुरीशत.. (१६) हे उ ण करण वाले अ न! हम लोग जस कार डंडे, प थर आ द से मट् ट का बतन फोड़ते ह, तुम उसी कार धन दान न करने वाले, हमसे े ष रखने वाले एवं हम डरानेधमकाने वाले तथा श हार करने वाले श ु का सब कार से संहार करो. (१६) अ नव ने सुवीयम नः क वाय सौभगम्. अ नः ाव म ोत मे या त थम नः साता उप तुतम्.. (१७) अ न से श दायक अ क याचना क जाती है. अ न ने क व को सौभा य दान कया, हमारे म क र ा क तथा पू य अ त थय वाले ऋ ष क र ा क . धन ा त के लए जस कसी ने अ न क तु त क , उसी को धन दे कर अ न ने र ा क . (१७) अ नना तुवशं य ं परावत उ ादे वं हवामहे. अ ननय ववा वं बृह थं तुव त द यवे सहः.. (१८) हम चोर का दमन करने वाले अ न को तुवया, य और उ ादे व ऋ षय के साथ र दे श से बुलाते ह. यह अ न वा व, बृह थ और तुव त नामक राज षय को इस य म बुलाव. (१८) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

न वाम ने मनुदधे यो तजनाय श ते. द दे थ क व ऋतजात उ तो यं नम य त कृ यः.. (१९) हे काश प अ न! मनु ने सम त जा तय के क याण के लए तु हारी थापना क थी. हे अ न दे व! तुमने य के न म उ प होकर ह से तृ त ा त क और क व को काश दया. मनु य तु ह नम कार करते ह. (१९) वेषासो अ नेरमव तो अचयो भीमासो न तीतये. र वनः सद म ातुमावतो व ं सम णं दह.. (२०) अ न क वालाएं चमक ली, श शाली और भयानक ह. इस लए उसे कोई न नह कर सकता. हे अ न दे व! रा स , यातुधान एवं हमारे व भ क श ु को जलाओ. (२०)

दे वता—म द्गण

सू —३७

ळं वः शध मा तमनवाणं रथेशुभम्. क वा अ भ

गायत.. (१)

हे क व गो ो प ऋ षयो! वहरणशील एवं श ुर हत म त को ल य करके तु त करो. वे अपने रथ पर सुशो भत होते ह. (१) ये पृषती भऋ

भः साकं वाशी भर

भः. अजाय त वभानवः.. (२)

ब यु ह र णयां म त का वाहन ह. उ ह ने इन वाहन के साथ काशवान् होकर घोर गजन, आयुधसमूह तथा अलंकार स हत जल हण कया. (२) इहेव शृ व एषां कशा ह तेषु य दान्. न याम च मृ

ते.. (३)

म त के हाथ म रहने वाले चाबुक का श द हम सुन रहे ह. चाबुक का वह श द यु हमारी श बढ़ाता है. (३) वः शधाय घृ वये वेषु ु नाय शु मणे. दे व ं

गायत.. (४)

हे ऋ वजो! तु हारे बल का समथन करने वाले, श ु दमनकारी, उ एवं श शाली म त क तु त ह व हण के उ े य से करो. (४) शंसा गो व यं



वलक तसंप

ळं य छध मा तम्. ज भे रस य वावृधे.. (५)

हे ऋ वजो! ध दे ने वाली गाय के बीच थत म द्गण के अ वनाशी, वहारशील एवं सहन करने यो य तेज क शंसा करो. वह तेज गाय का ध पीने के कारण बढ़ा है. (५) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

को वो व ष आ नरो दव

म धूतयः. य सीम तं न धूनुथ.. (६)

हे धरती और आकाश को कं पत करने वाले म द्गणो! तुमसे कौन बड़ा है? तुम जैसे पेड़ क चोट को कं पत कर दे ते हो, उसी कार सब दशा को कंपा दो. (६) न वो यामाय मानुषो द उ ाय म यवे. जहीत पवतो ग रः.. (७) हे म द्गणो! तु हारे चलने से घर गर पड़ेगा, इस भय से लोग ने घर म मजबूत खंभे गाड़े ह. तु हारी चाल उ एवं झकझोरने वाली है. तु हारी तेज चाल से चो टय वाले अनेक पवत हल जाते ह. (७) येषाम मेषु पृ थवी जुजुवा इव व प तः. भया यामेषु रेजते.. (८) हे म द्गणो! तु हारी चाल सभी पदाथ को र फक दे ती है. वृ एवं बल राजा श ु के भय से जस कार कांपता है, उसी कार तु हारे चलने से धरती कांपती है. (८) थरं ह जानमेषां वयो मातु नरेतवे. य सीमनु

ता शवः.. (९)

म त क उ प का थान आकाश थर रहता है. आकाश म त क माता के समान है. आकाश म होकर प ी नकल सकते ह. म त का बल धरती और आकाश को पृथक् करता है. (९) उ

ये सूनवो गरः का ा अ मे व नत. वा ा अ भ ु यातवे.. (१०)

श द के ज मदाता म द्गण चलते समय जल का व तार करते ह और रंभाती ई गाय को घुटने तक गहरे जल म वेश करने को े रत करते ह. (१०) यं च ा द घ पृथुं महो नपातममृ म्.

यावय त याम भः.. (११)

म द्गण अपनी तेज चाल से व तृत, मोटे , जल न बरसाने वाले, अपराजेय एवं बादल को भी कं पत कर दे ते ह. (११) म तो य



वो बलं जनाँ अचु यवीतन. गर रचु यवीतन.. (१२)

हे म तो! तुम श शाली हो, इस लए सम त ा णय को अपने-अपने काम म लगाते हो तथा मेघ को भी े रत करते हो. (१२) य

या त म तः सं ह ुवतेऽ व ा. शृणो त क दे षाम्.. (१३)

म द्गण जब चलते ह तो माग म सब ओर व न अव य करते ह. उस व न को चाहे जो सुन सकता है. (१३) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

यात शीभमाशु भः स त क वेषु वो वः. त ो षु मादया वै.. (१४) हे म द्गणो! अपने ती गामी वाहन के ारा य भू म म शी यजमान के ारा क गई सेवा से उनके त तृ त बनो. (१४)

आओ. बु

मान्

अ त ह मा मदाय वः म स मा वयमेषाम्. व ं चदायुज वसे.. (१५) हे म द्गणो! हमारे ारा दया आ ह व तु ह तृ त करने के लए है. हम पूण आयु जीने के लए तु हारे सेवक बने ह. (१५)

सू —३८ क

दे वता—म द्गण

नूनं कध यः पता पु ं न ह तयोः. द ध वे वृ ब हषः.. (१)

हे म द्गणो! ाथना चाहने वाले तुम लोग के लए कुश बछा दए गए ह. जस कार पता पु को हाथ पर धारण करता है, या तुम भी हम उसी कार धारण करोगे? (१) व नूनं क ो अथ ग ता दवो न पृ थ ाः. व वो गावो न र य त.. (२) हे म द्गणो! इस समय तुम कहां हो? तुम इस य म कब आओगे? तुम यहां आकाश से आओ, धरती से मत आना. जस कार गाएं रंभाती ह, उसी कार यजमान तु ह यहां बुलाते ह. (२) व वः सु ना न ां स म तः व सु वता. वो३ व ा न सौभगा.. (३) हे म द्गणो! तु हारी जा पशु पी नवीन धन, म ण, मु ा आ द और गज, अ आ द पी सौभा य धन कहां है? (३)

पी शोभन धन

य ूयं पृ मातरो मतासः यातन. तोता वो अमृतः यात्.. (४) हे पृ नामक धेनु के पु म द्गण! य प तुम मरणधमा हो, पर तु हारी तु त करने वाला अमर होगा. (४) मा वो मृगो न यवसे ज रता भूदजो यः. पथा यम य गा प.. (५) घास के बीच म मृग जस कार सेवार हत नह रहता, अ पतु घास खाता है, उसी कार तु हारी तु त करने वाले तु हारी सेवा से कभी शू य न ह . इस कार वे यमराज के माग पर नह जाएंगे. (५) मो षु णः परापरा नऋ त हणा वधीत्. पद

तृ णया सह.. (६)

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हे म द्गण! अ यंत श शाली पाप क दे वी नऋ त का कोई वनाश नह कर सकता. वह हमारा वध न करे और हमारी तृ णा के साथ ही समा त हो जाए. (६) स यं वेषा अमव तो ध व चदा

यासः. महं कृ व यवाताम्.. (७)

ारा पा लत, द तसंप एवं बलशाली म द्गण म थल म भी वायुर हत वषा करते ह, यह बात स य है. (७) वा ेव व ु ममा त व सं न माता सष

. यदे षां वृ रस ज.. (८)

ध भरे तन वाली रंभाती ई गाय के समान बजली गरजती है. गाय जस तरह बछड़े को चाटती है, उसी कार बजली म द्गण क सेवा करती है. इसी के फल व प म द्गण ने वषा क है. (८) दवा च मः कृ व त पज येनोदवाहेन. य पृ थव

ु द त.. (९)

म द्गण जल ढोने वाले बादल क सहायता से दन म भी अंधेरा कर दे ते ह. वे उसी समय धरती को स चते ह. (९) अध वना म तां व मा स पा थवम्. अरेज त

मानुषाः.. (१०)

म द्गण के गरजने क व न से धरती पर बने सभी घर एवं उन म रहने वाले मनु य कांपने लगते ह. (१०) म तो वीळु पा ण भ श

ा रोध वतीरनु. यातेम ख याम भः.. (११)

हे म द्गणो! जस कार व च कनार वाली नद बहती है, उसी कार तुम अपने शाली हाथ क सहायता से बना के ए चलते रहो. (११) थरा वः स तु नेमयो रथा अ ास एषाम्. सुसं कृता अभीशवः.. (१२)

हे म द्गणो! तु हारी ने म, रथ और घोड़े श घोड़ क लगाम पकड़. (१२) अ छा वदा तना गरा जरायै

शाली ह . तु हारी उंग लयां सावधानी से

ण प तम्. अ नं म ं न दशतम्.. (१३)

हे ऋ वजो! मं के पालक म द्गण, अ न एवं दशनीय म क ाथना के लए हमारे सामने ऐसे मं से तु त करो जो उन दे वता का व प बताने वाले ह . (१३) ममी ह

ोकमा ये पज य इव ततनः. गाय गाय मु यम्.. (१४)

हे ऋ वजो! अपने मुंह से तो

क रचना करो. जस कार बादल वषा का व तार

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करते ह, उसी कार तुम उस तो के शा स मत तो को पढ़ो. (१४)

ोक को बढ़ाओ, तुम गाय ी छं द

ारा न मत

व द व मा तं गणं वेषं पन युम कणम्. अ मे वृ ा अस ह.. (१५) हे ऋ वजो! काशयु , तु तयो य एवं सब लोग ारा अ चत म द्गण क तुम वंदना करो, जससे वे हमारे इस य म वृ को ा त ह . (१५)

सू —३९

दे वता—म द्गण

य द था परावतः शो चन मानम यथ. क य वा म तः क य वपसा कं याथ कं ह धूतयः.. (१) हे कंपनकारी म द्गणो! जस कार सूय आकाश से अपनी तेज रोशनी धरती पर फकता है, उसी कार जब तुम र आकाश से अपनी श धरती पर डालते हो तो तुम कस य म कस यजमान ारा आक षत कए जाते हो तथा कस यजमान के समीप जाते हो? (१) थरा वः स वायुधा पराणुदे वीळू उत त कभे. यु माकम तु त वषी पनीयसी मा म य य मा यनः.. (२) हे म द्गणो! तु हारे आयुध श ु वनाश के लए थर और श ु को रोकने के लए ढ़ ह . तु हारी श तु त करने यो य हो, हमारे त धोखा करने वाले श ु क श शंसनीय न हो. (२) परा ह य थरं हथ नरो वतयथा गु . व याथन व ननः पृ थ ा ाशाः पवतानाम्.. (३) हे नेताओ! जब तुम वृ ा द थर व तु को तोड़ते ए एवं प थर आ द भारी व तु को हलाते ए चलते हो, तब पृ वी पर खड़े वन के बीच से तथा पवत के बगल वाले माग से चलते हो. (३) न ह वः श ु व वदे अ ध व न भू यां रशादसः. यु माकम तु त व ष तना युजा ासो नू चदाधृषे.. (४) हे श ुनाशकारी! धरती और आकाश म तु हारा कोई श ु नह आ. हे सबक स म लत श श ु का दमन करने के लए व तृत हो. (४) वेपय त पवता व व च त वन पतीन्. ो आरत म तो मदा इव दे वासः सवया वशा.. (५) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

पु ो! तुम

म द्गण पवत को भली कार कं पत करते एवं वृ को एक- सरे से अलग करते ह. हे दे वो! जस कार मतवाले लोग वे छा से सब जगह जाते ह. उसी कार तुम भी जा के साथ सव जाते हो. (५) उपो रथेषु पृषतीरयु वं वह त रो हतः. आ वो यामाय पृ थवी चद ोदबीभय त मानुषाः.. (६) तुम बुंद कय वाले ह रण को अपने रथ म जोतते हो. लाल ह रण तु हारे रथ के जुए को ख चता है. तु हारे आने क व न धरती और आकाश ने सुनी है तथा मनु य भयभीत हो उठे ह. (६) आ वो म ू तनाय कं ा अवो वृणीमहे. ग ता नूनं नोऽवसा यथा पुरे था क वाय ब युषे.. (७) हे पु ो! हम पु - ा त के लए तु हारी र णश क शी ाथना करते ह. पहले कए गए य म हमारी र ा के लए तुम जस कार आए थे, उसी कार भयभीत एवं बु मान् यजमान क र ा के लए उनके समीप आओ. (७) यु मे षतो म तो म य षत आ यो नो अ व ईषते. व तं युयोत शवसा ोजसा व यु माका भ त भः.. (८) हे म द्गणो! तु हारी अथवा कसी अ य पु ष क ेरणा से जो भी श ु हमारे सामने आवे, तुम उसका बल और अ छ न लो और उससे अपनी र ा भी वापस कर लो. (८) असा म ह य यवः क वं दद चेतसः. असा म भम त आ न ऊ त भग ता वृ न व ुतः.. (९) हे म द्गणो! तुम पूण प से य पा एवं परम ानसंप हो. तुम यजमान को धारण करो. जस कार बजली वषा लेकर आती है, उसी कार तुम अपनी पूरी श से हमारी र ा करने को आओ. (९) असा योजो बभृथा सुदानवोऽसा म धूतयः शवः. ऋ ष षे म तः प रम यव इषुं न सृजत षम्.. (१०) हे शोभन दान करने वाले म तो! तुम अपनी सम त श धारण करो. हे कंपनक ाओ! ऋ षय से े ष करने वाले एवं ोधी श ु के त बाण के समान अपना ोध करो. (१०)

सू —४०

दे वता—

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ण पत

उ उप

ण पते दे वय त वेमहे. य तु म तः सुदानव इ ाशूभवा सचा.. (१)

हे ण प त! हम पर अनु ह करने के लए अपने नवास थान से उठो. दे वता क इ छा करने वाले हम तुमसे याचना करते ह. सुंदर दान करने वाले म द्गण तु हारे समीप जाव. हे इं ! तुम ण प त के सोमरस का सेवन करो. (१) वा म सहस पु म य उप ूते धने हते. सुवीय म त आ व ं दधीत यो व आचके.. (२) हे परम बल पालक! श ु के बीच फंसे ए धन को ा त करने के लए मनु य तु हारी ही तु त करते ह. हे म द्गणो! धन का इ छु क जो मनु य, ण प त स हत तु हारी तु त करता है, वह सुंदर अ एवं शोभन वीय संप धन ा त करता है. (२) ै ु त ण प तः दे ेतु सूनृता. अ छा वीरं नय पङ् राधसं दे वा य ं नय तु नः.. (३) श ु (३)

ण प त एवं य स य पा वा दे वी हम ा त ह . ण प त आ द दे व वीर को हमसे ब त र ले जाव एवं हम मानव हतकारी तथा पूण य म ले जाव. यो वाघते ददा त सूनरं वसु स ध े अ त वः. त मा इळां सुवीरामा यजामहे सु तू तमनेहसम्.. (४)

ऋ वज् को उ म धन दे ने वाला यजमान अ य अ ा त करता है. उस यजमान के न म हम सुवीरा इला से याचना करते ह. वह श ु का नाश करती है, पर उसे कोई नह मार सकता. (४) नूनं य म

ण प तम ं वद यु यम्. ो व णो म ो अयमा दे वा ओकां स च

रे.. (५)

ण प त होता के मुख म बैठकर न य ही प व मं बोलते ह. उस मं म इं , व ण, म और अयमा दे व नवास करते ह. (५) त म ोचेमा वदथेषु श भुवं म ं दे वा अनेहसम्. इमां च वाचं तहयथा नरो व े ामा वो अ वत्.. (६) हे ण प त भृ त दे वो! हम उसी इं तपादक प व मं को बोलते ह. हे नेताओ! य द आप हमारे वचन को चाहते ह तो सभी शोभन वचन आपको ा त ह गे. (६) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

को दे वय तम व जनं को वृ ब हषम्. दा ा प या भर थता तवाव यं दधे.. (७) दे व क अ भलाषा करने वाले एवं य के न म कुश तोड़ने वाले यजमान के समीप ण प त के अ त र कौन दे वता आ सकता है? ह दाता यजमान ऋ वज के साथ भां त-भां त क संप य से यु घर से नकलकर य थल क ओर थान कर चुके ह. (७) उप ं पृ चीत ह त राज भभये च सु त दधे. ना य वता न त ता महाधने नाभ अ त व णः.. (८) ण प त अपने शरीर म श का संचय कर. वे व ण आ द राजा के साथ श ु का नाश करते ह एवं भयानक यु म भी डटे रहते ह. व धारी ण प त को भूत घर ा त के लए होने वाले बड़े अथवा छोटे यु म े रत या उ साहहीन करने वाला सरा नह है. (८)

दे वता—व ण आ द

सू —४१ यं र

त चेतसो व णो म अयमा. नू च य द यते जनः.. (१)

उ म ान से संप व ण, म और अयमा दे वता जसक र ा करते ह, वह शी ही सब श ु को मार डालता है. (१) यं बा तेव प त पा त म य रषः. अ र ः सव एधते.. (२) व णा द दे व जस यजमान को अपने हाथ से धनसंप करते एवं हसक से बचाते ह, वह सबसे सुर त रहकर उ त करता है. (२) व गा व

षः पुरो न त राजान एषाम्. नय त

रता तरः.. (३)

व णा द राजा अपने यजमान के सामने थत श ु का ग तोड़कर श ु करते ह. इसके प ात् वे यजमान के पाप को भी न कर दे ते ह. (३)

का नाश

सुगः प था अनृ र आ द यास ऋतं यते. ना ावखादो अ त वः.. (४) हे आ द यो! तुम जस माग से य म जाते हो, वह सुगम और न कंटक है. इस य म ऐसा ह व नह , जससे तु ह घृणा हो. (४) यं य ं नयथा नर आ द या ऋजुना पथा.

वः स धीतये नशत्.. (५)

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हे नेता प आ द यो! तुम सरल माग से जस य म आते हो, उस म तु ह सोमरस का उपभोग मले. (५) स र नं म य वसु व ं तोकमुत मना. अ छा ग छ य तृतः.. (६) तु हारे ारा अनुगृहीत यजमान तु हारे सामने ही सभी रमणीय धन ा त करता है. कोई उसक हसा नह कर सकता, अ पतु वह अपने समान संतान भी ा त करता है. (६) कथा राधाम सखायः तोमं म याय णः. म ह सरो व ण य.. (७) हे ऋ वज् म ो! हम म , अयमा और व ण के मह व के अनु प तो कब ा त करगे? (७) मा वो न तं मा शप तं

त वोचे दे वय तम्. सु नै र आ ववासे.. (८)

हे म ा द दे वो! दे व क कामना करने वाले यजमान को मारने वाले एवं कटु वचन बोलने वाले मनु य के व म कुछ नह कहता. म तो तु ह धन से तृ त करता ं. (८) चतुर

दमाना भीयादा नधातोः. न

ाय पृहयेत्.. (९)

जुए के खेल म चार कौ ड़यां हाथ म रखने वाले से लोग तभी तक डरते ह, जब तक वह उ ह फक नह दे ता, उसी कार यजमान सरे क नदा नह करना चाहता, अ पतु उससे डरता है. (९)

दे वता—पूषा

सू —४२ सं पूष वन तर

ंहो वमुचो नपात्. स वा दे व

ण पुरः.. (१)

हे पूषा! हम माग के पार लगा दो. पाप व न का कारण है, तुम उसे न करो. हे जलवषक मेघ के पु ! हमारे आगे चलो. (१) यो नः पूष घो वृको ःशेव आ ददे श त. अप म तं पथो ज ह.. (२) हे पूषा! य द कोई आ मणकारी, धन अपहरण करने वाला एवं रा ता दखाता है तो उसे हमारे माग से हटा दो. (२)

श ु हम गलत

अप यं प रप थनं मुषीवाणं र तम्. रम ध ुतेरज.. (३) तुम हमारा रा ता रोकने वाले चोर एवं कु टल

को हमारे माग से र भगा दो. (३)

वं त य या वनोऽघशंस य क य चत्. पदा भ त तपु षम्.. (४) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हे दे व! हमारे सामने और पीठ पीछे दोन कार से हमारा धन हरण करने वाले अ न साधक चोर के परपीड़क शरीर को अपने पैर से कुचल दो. (४) आ त े द म तुमः पूष वो वृणीमहे. येन पतॄनचोदयः.. (५) हे ानसंप एवं श ुनाशक पूषा! तुमने जस र ाश से अं गरा आ द पूवज को े रत कया था, हम तु हारी उसी श क ाथना करते ह. (५) अधा नो व सौभग हर यवाशीम म. धना न सुषणा कृ ध.. (६) हे सवसंप शाली एवं सुवणमय आयुध वाले पूषा! हमारी भां त-भां त का धन दे ना. (६) अ त नः स तो नय सुगा नः सुपथा कृणु. पूष ह

ाथना के प ात् हम

तुं वदः.. (७)

हम बाधा प ंचाने के लए आए ए श ु से हम र ले जाओ. हमारा माग सुगम और शोभन बनाओ. हे पूषा! इस माग म हमारी र ा का उ रदा य व तु हारा है. (७) अ भ सूयवसं नय न नव वारो अ वने. पूष ह

तुं वदः.. (८)

तुम हम घास वाले सुंदर दे श म ले जाओ. हम माग म कोई नया क न हो. हे पूषा! इस माग म हमारी र ा के वषय म तु ह जानते हो. (८) श ध पू ध

यं स च शशी ह ा युदरम्. पूष ह

तुं वदः.. (९)

हे पूषा! हम पर अनु ह करके हमारे घर को धनधा य से भर दो, हम अ य इ छत व तुएं दे कर परम तेज वी बनाओ एवं उ म अ से हमारी उदरपू त करो. हे पूषा! इस माग म हमारी र ा का उपाय तु ह ही करना है. (९) न पूषणं मेथाम स सू ै र भ गृणीम स. वसू न द ममीमहे.. (१०) हम पूषा क नदा नह करते, अ पतु सू से धन क याचना करते ह. (१०)

सू —४३ क वाले

ाय चेतसे मीळ्

से उनक तु त करते ह. हम दशनीय पूषा

दे वता—

आद

माय त से. वोचेम श तमं दे .. (१)

कृ ान यु , मनोकामना पूण करने वाले, अ यंत महान् एवं दय म नवास करने को ल य करके हम कब सुखकर तो पढ़गे? (१)

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यथा नो अ द तः कर प े नृ यो यथा गवे. यथा तोकाय अ द त येन-केन कारेण हम, पशु संबंधी ओष ध दान कर. (२) यथा नो म ो व णो यथा म , व ण, कर. (३)

को, मनु य को, गाय को और हमारी संतान को

केत त. यथा व े सजोषसः.. (३)

और पर पर समान ी त रखने वाले अ य सब दे वता हमारे ऊपर कृपा

गाथप त मेधप त

ं जलाषभेषजम्. त छं योः सु नमीमहे.. (४)

तु तपालक, य र क एवं सुखकारी ओष धय से यु शंयु के समान सुख क याचना करते ह. (४) यः शु

यम्.. (२)

के समीप हम बृह प तपु

इव सूय हर य मव रोचते. े ो दे वानां वसुः.. (५)

जो सूय के समान द तमान् एवं सोने के समान चमक ले ह, वे दे वता एवं उनके नवास के कारण ह. (५)





शं नः कर यवते सुगं मेषाय मे ये. नृ यो ना र यो गवे.. (६) (६)

दे वगण, हमारे घोड़ , मेष, भेड़, पु ष, अ मे सोम

ी और गाय के लए सुलभ सुख दान कर.

यम ध न धे ह शत य नृणाम्. म ह व तु वनृ णम्.. (७)

हे सोमदे व! हम सौ मनु य के बराबर पया त धन तथा भूत बलयु दो. (७)

एवं महान् अ

मा नः सोम प रबाधो मारातयो जु र त. आ न इ दो वाजे भज.. (८) सोम के वरोधी एवं श ु हमारी हसा न कर. हे इं दे व! हम अ दो. (८) या ते जा अमृत य पर म धाम ृत य. मूधा नाभा सोम वेन आभूष तीः सोम वेदः.. (९) हे सोम! मरणर हत एवं उ म थान ा त करने वाले तुम सब दे व के शरोम ण बनकर अपनी जा क कामना करो. वह जा तु ह सुशो भत करती है, तुम उसका यान रखो. (९)

सू —४४

दे वता—अ न आ द

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अ ने वव व षस ं राधो अम य. आ दाशुषे जातवेदो वहा वम ा दे वाँ उषबुधः.. (१) हे मरणर हत, सवभूत ाता अ न! तुम ह व दे ने वाले यजमान के लए उषा दे वता के पास से लाकर टकने यो य एवं व भ कार का धन दो. उषाकाल म जागने वाले दे व को तुम आज यहां ले आना. (१) जु ो ह तो अ स ह वाहनोऽ ने रथीर वराणाम्. सजूर यामुषसा सुवीयम मे धे ह वो बृहत्.. (२) हे अ न! तुम दे वता ारा से वत त एवं ह वहन करने वाले हो. तुम य के रथ हो. तुम अ नीकुमार तथा उषा से मलकर हम शोभन एवं श संप पया त धन दो. (२) अ ा तं वृणीमहे वसुम नं पु यम्. धूमकेतुं भाऋजीकं ु षु य ानाम वर यम्.. (३) हम दे वता के त, नवास हेतु सबके य, धूम पी वजा से यु , स काश से सुशो भत तथा ातःकाल यजमान के य का सेवन करने वाले अ न को वरण करते ह. (३) े ं य व म त थ वा तं जु ं जनाय दाशुषे. दे वाँ अ छा यातवे जातवेदसम नमीळे ु षु.. (४) म उषाकाल म दे व समूह के अ भमुख जाने के लए े , अ तशय युवक, न य, चलने म स म, सबके ारा बुलाए गए, ह दाता के त स एवं सब ा णय को जानने वाले अ न क तु त करता ं. (४) त व या म वामहं व यामृत भोजन. अ ने ातारममृतं मये य य ज ं ह वाहन.. (५) (५)

हे मरणर हत, व र क, ह वाहन एवं य के यो य अ न! म तु हारी तु त क ं गा. सुशंसो बो ध गृणते य व मधु ज ः वा तः. क व य तर ायुज वसे नम या दै ं जनम्.. (६)

हे अ तशय युवक अ न! यजमान के लए तु त करने वाले तोता के तु ह तु त वषय हो. तु हारी ज ाएं सुख दे ने वाली ह. भली कार बुलाए जाने पर तुम हमारा अ भ ाय समझो एवं आयु बढ़ा कर क व को द घजीवी बनाओ. वह दे वभ है, तुम उसका स मान करो. (६) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

होतारं व वेदसं सं ह वा वश इ धते. स आ वह पु त चेतसोऽ ने दे वाँ इह वत्.. (७) तुझ होम न पादक एवं सव अ न को जाएं भली-भां त व लत करती ह. हे ब त ारा आ त अ न! तुम उ म ान संप दे व को इस य म शी लाओ. (७) स वतारमुषसम ना भगम नं ु षु पः. क वास वा सुतसोमास इ धते ह वाहं व वर.. (८) हे शोभन य से यु अ न! नशा समा त के प ात् भात होने पर स वता, उषा, अ नीकुमार, भग आ द को य म ले आओ. सोमरस नचोड़ने वाले मेधावी ऋ वज् तु ह चंड करते ह. (८) प त वराणाम ने तो वशाम स. उषबुध आ वह सोमपीतये दे वाँ अ

व शः.. (९)

हे अ न! तुम जा के य पालक एवं दे वता के त हो. ातःकाल जागकर सूय के दशन करने वाले दे व को सोमरस पीने के लए यहां लाओ. (९) अ ने पूवा अनूषसो वभावसो द दे थ व दशतः. अ स ामे व वता पुरो हतो ऽ स य ेषु मानुषः.. (१०) हे व श काशवान् एवं धन के वामी अ न! तुम सबके दशनीय हो. तुम अतीतकाल म उषा के प ात् का शत होते रहे हो. तुम गाय के र क, य क वेद के पूव दशा वाले भाग म अब भी थत एवं य क ा के हतसाधक हो. (१०) न वा य य साधनम ने होतारमृ वजम्. मनु व े व धीम ह चेतसं जीरं तमम यम्.. (११) हे अ न! तुम य के साधन, दे वता का आ ान करने वाले, ऋ वज्, उ म ानसंप , श ु क आयु न करने वाले, दे व त तथा मरणर हत हो. हम मनु के समान तु ह य म था पत करते ह. (११) य े वानां म महः पुरो हतोऽ तरो या स यम्. स धो रव व नतास ऊमयोऽ ने ाज ते अचयः.. (१२) हे म पूजक अ न! जब तुम य वेद के पूव भाग म था पत होकर दे वय म वतमान रहते ए उनका तकम करते हो, तब तु हारी लपट उसी कार चमकती ह, जस कार गरजते ए सागर क लहर चमकती ह. (१२) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

ु ध ु कण व भदवैर ने सयाव भः. आ सीद तु ब ह ष म ो अयमा ातयावाणो अ वरम्.. (१३) हे सुनने म समथ कान वाले अ न! हमारी तु त सुनो. म , अयमा तथा जो अ य दे वता ातःकाल दे वय म जाते ह, अपने साथ आने वाले अ य ह वाही दे व स हत तुम य के न म बछे ए कुश पर बैठो. (१३) शृ व तु तोमं म तः सुदानवोऽ न ज ा ऋतावृधः. पबतु सोमं व णो धृत तोऽ यामुषसा सजूः.. (१४) शोभन फलदाता, अ न पी ज ा वाले एवं य क वृ करने वाले म द्गण हमारा तो सुन. वे त धारण करने वाले व ण, अ नीकुमार एवं उषा के साथ सोमपान कर. (१४)

दे वता—अ न

सू —४५ वम ने वसूँ रह

ाँ आ द याँ उत. यजा व वरं जनं मनुजातं घृत ुषम्.. (१)

हे अ न! तुम इस अनु ान म वसु , और आ द य का यजन करो. तुम शोभन य करने वाले, जाप त मनु ारा उ पा दत एवं जल स चने वाल क भी अचना करो. (१) ु ीवानो ह दाशुषे दे वा अ ने वचेतसः. तान् रो हद गवण य ंशतमा वह.. (२) हे अ न! वशेष बु वाले दे वता ह दे ने वाले यजमान को फल दे ते ह. हे रो हत अ के वामी एवं तु तपा अ न! तुम ततीस दे व को यहां ले आओ. (२) यमेधवद व जातवेदो व पवत्. अ र वम ह त क व य ध ु ी हवम्.. (३) हे अनेक कम करने वाले एवं सव अ न! यमेधा, अ , व प और अं गरा नामक ऋ षय के समान क व क पुकार भी सुनो. (३) म हकेरव ऊतये यमेधा अ षत. राज तम वराणाम नं शु े ण शो चषा.. (४) ौढ़कमा एवं य य से सुशो भत ऋ षय ने अपनी र ा के लए य के म य शु काश ारा चमकने वाले अ न का आ ान कया था. (४) घृताहवन स येमा उ षु ुधी गरः. ******ebook converter DEMO Watermarks*******

या भः क व य सूनवो हव तेऽवसे वा.. (५) हे घृत ारा बुलाए गए एवं फल द अ न! क व के पु तु ह जन वचन से अपनी र ा के लए बुलाते थे, हमारे ारा यु यमान उ ह वचन को सुनो. (५) वां च व तम हव ते व ु ज तवः. शो च केशं पु या ने ह ाय वो हवे.. (६) हे व वध ह व प अ यु एवं यजमान के यकारक अ न! तु हारी चमक ली लपट तु हारे केश ह. यजमान तु ह ह -वहन करने के लए बुलाते ह. (६) न वा होतारमृ वजं द धरे वसु व मम्. ु कण स थ तमं व ा अ ने द व षु.. (७) हे अ न दे व! बु मान् लोग आ ान करने वाले, ऋतु म य संप करने वाले, व वध धन ा त कराने वाले, वण समथ कान से यु एवं अ यंत स तुमको य म धारण करते ह. (७) आ वा व ा अचु यवुः सुतसोमा अ भ यः. बृह ा ब तो ह वर ने मताय दाशुषे.. (८) हे अ न! सोमरस नचोड़ने वाले बु मान् ऋ वज् ह दाता यजमान के लए तु ह अ के समीप बुलाते ह. तुम महान् एवं तेज वी हो. (८) ातया णः सह कृत सोमपेयाय स य. इहा दै ं जनं ब हरा सादया वसो.. (९) हे का बल ारा म थत, फलदाता एवं नवास हेतु अ न! इस दे वय म आज ातःकाल आने वाले दे व एवं उनसे संबं धत अ य जन को सोमपान के लए कुश पर बुलाओ. (९) अवा चं दै ं जनम ने य व स त भः. अयं सोमः सुदानव तं पात तरो अ यम्.. (१०) हे अ न! अपने सामने उप थत दे व एवं उनसे संबं धत अ य जन के समान आ ान के ारा यजन करो. हे शोभन दान करने वाले दे वो! जो सोमरस तु हारे न म पछले दन नचोड़ा गया है, सामने उप थत उस सोमरस का पान करो. (१०)

सू —४६

दे वता—अ नीकुमार

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एषो उषा अपू ा

ु छत

या दवः. तुषे वाम ना बृहत्.. (१)

यह य उषा म य रा आ द पूव काल म वतमान नह थी. यह इसी समय आकाश से आकर अंधकार मटाती है. हे अ नीकुमारो! म तु हारी ब त तु त करता ं. (१) या द ा स धुमातरा मनोतरा रयीणाम्. धया दे वा वसु वदा.. (२) म दशनीय एवं समु पु अ नीकुमार क तु त करता ं. वे शोभन संप य करने पर हम नवास थान दान करते ह. (२)

दे ते ह और

व य ते वां ककुहासो जूणायाम ध व प. य ां रथो व भ पतात्.. (३) हे अ नीकुमारो! जस समय तु हारा रथ व वध शा ारा शं सत वग म घोड़ ारा ख चा जाता है, उसी समय हम तु हारी तु त करते ह. (३) ह वषा जारो अपां पप त पपु रनरा. पता कुट य चष णः.. (४) हे नेता प अ नीकुमारो! दयापूण वभाव, पालक, य कम के दशक एवं अपने ताप से जल को सुखाने वाले स वता हमारे ारा ह से दे व को स कर. (४) आदारो वां मतीनां नास या मतवचसा. पातं सोम य धृ णुया.. (५) (५)

हे तु त हण करने वाले नास यो! बु

ेरक एवं ती मदकारक सोमरस को पओ.

या नः पीपरद ना यो त मती तम तरः. ताम मे रासाथा मषम्.. (६) हे अ नीकुमारो! हम इस वीय आ द यो त से यु अंधकार को मटाकर तृ त दान करता है. (६) आ नो नावा मतीनां यातं पाराय ग तवे. यु

अ दो. वह अ द र ता

पी

ाथाम ना रथम्.. (७)

हे अ नीकुमारो! तु तय पी सागर के पार जाने के लए तुम नौका बनकर आओ एवं धरती पर आने के लए अपने रथ म घोड़े जोड़ो. (७) अ र ं वां दव पृथु तीथ स धूनां रथः. धया युयु

इ दवः.. (८)

हे अ नीकुमारो! सागर तट पर थत तु हारी नौका आकाश से भी वशाल है. धरती पर गमन करने के लए तु हारे पास रथ है. तु हारे य कम म सोमरस भी स म लत रहता है. (८) दव क वास इ दवो वसु स धूनां पदे . वं व

कुह ध सथः.. (९)

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हे क वपु ो! अ नीकुमार से यह पूछो क आकाश से सूय करण उ प होती ह एवं वृ के उ प थल उसी आकाश से हमारे वकास का कारण उषाकालीन काश भी कट होता है. हे अ नीकुमारो! इन दोन थान म से तुम अपना प कहां था पत करना चाहते हो? (९) अभू भा उ अंशवे हर यं

त सूयः.

य ज या सतः.. (१०)

सूय के काश से उषाकाल म र मयां उ प ई ह. उ दत आ सूय सोने के समान बन जाता है. आकाश म सूय के आ जाने के कारण अ न काले रंग क होकर अपनी लपट से का शत है. (१०) अभू पारमेतवे प था ऋत य साधुया. अद श व ु त दवः.. (११) रा के पार उदयाचल तक जाने के लए सूय का माग सुंदर बना आ है. आकाश को का शत करने वाले सूय क द त दखाई दे ती है. (११) त दद नोरवो ज रता

त भूष त. मदे सोम य प तोः.. (१२)

तोतागण स ता के लए सोमपान करने वाले अ नीकुमार र ा क बार-बार शंसा करते ह. (१२)

ारा क गई अपनी

वावसाना वव व त सोम य पी या गरा. मनु व छं भू आ गतम्.. (१३) हे सुखदाता अ नीकुमारो! तुम सोमपान और तु त समान प रचारक यजमान के घर म नवास करो. (१३) युवो षा अनु

वण करने के लए मनु के

यं प र मनो पाचरत्. ऋता वनथो अ ु भः.. (१४)

हे चार ओर गमनशील अ नीकुमारो! तु हारे आगमन क शोभा का अनुसरण करती ई उषा आवे. तुम दोन नशा म संपा दत य का ह व हण करो. (१४) उभा पबतम नोभा नः शम य छतम्. अ व या भ

त भः.. (१५)

हे अ नीकुमारो! तुम दोन सोमरस पओ. इसके प ात् तुम अपनी हम सुखदान करो. (१५)

सू —४७



दे वता—अ नीकुमार

अयं वां मधुम मः सुतः सोम ऋतावृधा. तम ना पबतं तरोअ यं ध ं र ना न दाशुषे.. (१) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

र ा ारा

हे य व नक ा अ नीकुमारो! आपके सामने रखा आ सोमरस अ यंत मधुर एवं कल ही नचोड़ा गया है. इसे पान करो एवं ह दाता यजमान को रमणीय धन दो. (१) व धुरेण वृता सुपेशसा रथेना यातम ना. क वासो वां कृ व य वरे तेषां सु शृणुतं हवम्.. (२) हे अ नीकुमारो! तुम अपने वध बंधन का वाले, तीन लोक म गमनशील एवं शोभन वण वाले रथ से यहां आओ तथा क वपु ारा तु हारे लए कए जा रहे तु त पाठ को आदरपूवक सुनो. (२) अ ना मधुम मं पातं सोममृतावृधा. अथा द ा वसु ब ता रथे दा ांसमुप ग छतम्.. (३) हे य व नक ा अ नीकुमारो! अ यंत मधुर सोमरस पओ. इसके प ात् तुम रथ म धन लेकर ह वदाता यजमान के समीप आओ. (३) षध थे ब ह ष व वेदसा म वा य ं म म तम्. क वासो वां सुतसोमा अ भ वो युवां हव ते अ ना.. (४) हे सव अ नीकुमारो! तीन परत के प म बछे ए कुश पर बैठकर मधुर रस से इस य को स करने क इ छा करो. द तसंप क व पु सोमरस नचोड़कर तु ह बुला रहे ह. (४) या भः क वम भ भः ावतं युवम ना. ता भः व१ माँ अवतं शुभ पती पातं सोममृतावृधा .. (५) हे शोभनकमपालक अ नीकुमारो! जस अभी र ण या से तुम दोन ने क व क र ा क थी, उसी के ारा हमारी भी र ा करो. हे य वधक दे वो! सोमपान करो. (५) सुदासे द ा वसु ब ता रथे पृ ो वहतम ना. र य समु ा त वा दव पय मे ध ं पु पृहम्.. (६) हे दशनीय अ नीकुमारो! तुम जस कार दानशील सुदास के लए रथ म धन एवं अ भरकर लाए थे, उसी कार हम आकाश से लाकर ब त ारा वांछनीय धन दो. (६) य ास या पराव त य ा थो अ ध तुवशे. अतो रथेन सुवृता न आ गतं साकं सूय य र म भः.. (७) हे नास यो! चाहे तुम र दे श म रहो, चाहे अ यंत समीप, पर सूय दय होने पर अपने शोभन रथ पर बैठकर सूय करण के साथ हमारे समीप आओ. (७) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

अवा चा वां स तयोऽ वर यो वह तु सवने प. इषं पृ च ता सुकृते सुदानव आ ब हः सीदतं नरा.. (८) हे अ नीकुमारो! य सेवी सात घोड़े हमारे ारा अनु त तीन सवनय म तु ह ले जाव. हे नेताओ! सुंदर दान करने वाले एवं शोभन कम करने वाले यजमान को अ दे ते ए तुम लोग कुश पर बैठो. (८) तेन नास या गतं रथेन सूय वचा. येन श हथुदाशुषे वसु म यः सोम य पीतये.. (९) हे नास यो! तुमने सूय करण तु य तेज वी जस रथ पर धन लाकर यजमान को सदा दया है, उसी रथ के ारा मधुर सोमरस पीने के लए आओ. (९) उ थे भरवागवसे पु वसू अक न यामहे. श क वानां सद स ये ह कं सोमं पपथुर ना.. (१०) हम भूत धन के वामी अ नीकुमार को उ थ एवं तो ारा अपने समीप बुलाते ह. हे अ नीकुमारो! तुमने क वपु के य य म सदा सोमपान कया है. (१०)

सू —४८

दे वता—उषा

सह वामेन न उषो ु छा हत दवः. सह ु नेन बृहता वभाव र राया दे व दा वती.. (१) हे वगपु ी उषा! हमारे धन के साथ भात करो. हे वभावरी! पया त अ के साथ भात करो. हे दे व! तुम दानशील होकर पशु पी धन के साथ भात करो. (१) अ ावतीग मती व सु वदो भू र यव त व तवे. उद रय त मा सूनृता उष ोद राधो मघोनाम्.. (२) हे अनेक अ स हत, अनेक गाय से यु एवं सम त संप दे ने वाली उषादे वी! जा को सुख दे ने के लए तु हारे पास अ यंत धन है. तुम मुझ स य भाषण क ा को बल एवं धनवान का धन दो. (२) उवासोषा उ छा च नु दे वी जीरा रथानाम्. ये अ या आचरणेषु द रे समु े न व यवः.. (३) रथ को ेरणा दे ने वाली उषादे वी ाचीन काल म भात करती थी और अब भी भात करती है. जस कार धन के इ छु क लोग समु म नाव चलाते ह, उसी कार उषा के आने पर रथ तैयार कए जाते ह. (३) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

उषो ये ते यामेषु यु ते मनो दानाय सूरयः. अ ाह त क व एषां क वतमो नाम गृणा त नृणाम्.. (४) हे उषा! तु हारा गमन आरंभ होते ही व ान् लोग धन आ द के दान म द च हो जाते ह. परम मेधावी क व ऋ ष इन दाने छु लोग के नाम उषाकाल म उ चारण करते ह. (४) आ घा योषेव सूनयुषा या त भु ती. जरय ती वृजनं प द यत उ पातय त प णः.. (५) उषा घर का काम करने वाली यो य गृ हणी के समान सबका पालन करती ई, गमनशली ा णय को बूढ़ा बनाती ई, पैर वाले ा णय को चलाती ई और उड़ाती ई आती है. (५) व या सृज त समनं १ थनः पदं न वे योदती. वयो न क े प तवांस आसते ु ौ वा जनीव त.. (६) तुम कमठ पु ष को काम म लगाती हो और भ ुक को घर छोड़ने पर ववश कर दे ती हो. तुम ओस बरसाने वाली हो एवं अ धक दे र नह ठहरती हो. हे अ संप ा उषा! तु हारे भातकाल म प ीगण अपने घ सल म नह रह पाते. (६) एषायु परावतः सूय योदयनाद ध. शतं रथे भः सुभगोषा इयं व या य भ मानुषान्.. (७) यह सौभा यशा लनी एवं रथ म घोड़े जोड़ने वाली उषा र सूय के उदय थान से सौ रथ ारा मनु य के समीप आती है. (७) व म या नानाम च से जग जयो त कृणो त सूनरी. अप े षो मघोनी हता दव उषा उ छदप धः.. (८) सम त ाणी इस उषा के काश को नम कार करते ह, य क यह सुंदर ने ी उषा काश दे ती है और यही धनवती वगपु ी े षय एवं शोषक को र भगाती है. (८) उष आ भा ह भानुना च े ण हत दवः. आवह ती भूय म यं सौभगं ु छ ती द व षु.. (९) हे वगपु ी उषा! तुम सबको स करने वाली यो त के साथ का शत होती ई हम त दन सौभा य दो एवं अंधकार को मटाओ. (९) व

य ह ाणनं जीवनं वे व य छ स सून र.

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सा नो रथेन बृहता वभाव र ु ध च ामघे हवम्.. (१०) हे सुने ी उषा! सम त ा णय क चे ाएं एवं जीवन तु ह म वतमान है, य क तु ह अंधकार को मटाती हो. हे वभावरी! वशाल रथ पर चढ़कर हमारे पास आओ. हे व च धनसंप ! हमारा आ ान सुनो. (१०) उषो वाजं ह वं व य ो मानुषे जने. तेना वह सुकृतो अ वराँ उप ये वा गृण त व यः.. (११) हे उषा! यजमान के पास जो व च अ है, उसे तुम वीकार करो. जो य क ा तु हारी तु त करते ह, उन यजमान को हसार हत य म ले आओ. (११) व ा दे वाँ आ वह सोमपीतयेऽ त र ा ष वम्. सा मासु धा गोमद ाव य१मुषो वाजं सुवीयम्.. (१२) हे उषा! तुम सोमपान के लए अंत र से सभी दे व को हमारे य थान म ले आओ. हे उषा! तुम हम अ एवं गाय से यु शंसनीय एवं श संप अ दो. (१२) य या श तो अचयः त भ ा अ त. सा नो र य व वारं सुपेशसमुषा ददातु सु यम्.. (१३) जस उषा का काश श ु का नाश करता आ क याण प म दखाई दे ता है, वह हम सबके ारा वरण करने यो य, सुंदर एवं सुखदायक अ दान करे. (१३) ये च वामृषयः पूव ऊतये जु रेऽवसे म ह. सा नः तोमाँ अ भ गृणी ह राधसोषः शु े ण शो चषा.. (१४) हे पूजनीय उषा! तु ह चरंतन स ऋ षय ने र ण एवं अ के लए बुलाया था. तुम धन एवं तेज से संप होकर हमारी तु त को वीकार करो. (१४) उषो यद भानुना व ारावृणवो दवः. नो य छतादवृकं पृथु छ दः दे व गोमती रषः.. (१५) हे उषा! तुमने आज भात के समय आकाश के दोन ार को खोल दया है, इस लए हम हसकर हत एवं व तृत घर के साथ-साथ गाय से यु धन दान करो. (१५) सं नो राया बृहता व पेशसा म म वा स मळा भरा. सं ु नेन व तुरोषो म ह सं वाजैवा जनीव त.. (१६) हे उषा! हम भूत एवं अनेक प धन एवं गाएं दान करो. हे पू य उषा! हम सब श ु का नाश करने वाला यश दो. हे अ साधन क या से संप उषा! हम धन दो. ******ebook converter DEMO Watermarks*******

(१६)

दे वता—उषा

सू —४९ उषो भ े भरा ग ह दव ोचनाद ध. वह व ण सव उप वा सो मनो गृहम्.. (१) हे उषा! काशमान आकाश से सुंदर माग सोमयु यजमान के य म ले जाए. (१)

ारा आओ. लाल रंग क गाय तु ह

सुपेशसं सुखं रथं यम य था उष वम्. तेना सु वसं जनं ावा हत दवः.. (२) हे उषा! तुम जस सुंदर एवं व तृत रथ पर बैठती हो, हे वगपु ी! उसी रथ से आज ह दाता यजमान के पास आओ. (२) वय े पत णो प चतु पदजु न. उषः ार ृतूँरनु दवो अ ते य प र.. (३) हे शु वण वाली उषा! तु हारा आगमन दे खकर दो पैर वाले मनु य, चार पैर वाले पशु एवं पंख वाले प ी अपने-अपने ापार म लग जाते ह. (३) ु छ ती ह र म भ व माभा स रोचनम्. तां वामुषवसूयवो गी भः क वा अ षत.. (४) हे उषा! तुम अंधकार का नाश करती ई अपने तेज से सारे जगत् को का शत करो. धन चाहने वाले क वपु ने तु त वचन से तु हारी शंसा क है. (४)

सू —५० उ

दे वता—सूय

यं जातवेदसं दे वं वह त केतवः. शे व ाय सूयम्.. (१)

सूय के घोड़े सब ा णय को जानने वाले ह, वे काशयु जाते ह क सारा संसार उ ह दे ख सके. (१) अप ये तायवो यथा न

सूय को इस लए ऊपर ले

ा य य ु भः. सूराय व च से.. (२)

सबको का शत करने वाले सूय का आगमन दे खकर न जाते ह, जस कार चोर भागते ह. (२) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

रा स हत इस कार भाग



म य केतवो व र मयो जनाँ अनु. ाज तो अ नयो यथा.. (३)

सूय क सूचना दे ने वाली करण चमकती ई आग के समान ह. वे एक-एक करके संपूण जगत् को दे खती ह. (३) तर ण व दशतो यो त कृद स सूय. व मा भा स रोजनम्.. (४) हे सूय! तुम वशाल माग पर चलने वाले सम त ा णय के दशनीय एवं काश के क ा हो. यह संपूण य जगत् तु हारे ारा का शत होकर चमकने लगता है. (४) यङ् दे वानां वशः

यङ् ङु दे ष मानुषान्.

यङ् व ं व शे.. (५)

हे सूय! तुम म त्दे व एवं मनु य के सामने उदय होते हो. तुम वगलोक को दे खने के लए उदय होओ. (५) येना पावक च सा भुर य तं जनाँ अनु. वं व ण प य स.. (६) हे सूय! तुम सबके शोधक एवं अ न नवारक हो. तुम जस कार काश के ारा ा णय का भरणपोषण करते ए इस जगत् को दे खते हो, हम उसी काश क तु त करते ह. (६) व ामे ष रज पृ वहा ममानो अ ु भः. प य

मा न सूय.. (७)

हे सूय! तुम उसी काश के ारा रा के साथ-साथ दन का भी उ पादन करते ए सम त ा णय को दे खते ए व तृत रजोलोक एवं अंत र म गमन करते हो. (७) स त वा ह रतो रथे वह त दे व सूय. शो च केशं वच ण.. (८) हे सूय! तुम द तमान् एवं सव काशक हो. करण ही तु हारे केश ह. ह रत नाम के सात घोड़े तु ह रथ म बठाकर ले चलते ह. (८) अयु

स त शु युवः सूरो रथ य न यः. ता भया त वयु

भः.. (९)

सबके ेरक सूय ने रथ को ख चने वाली सात घो ड़य को अपने रथ म जोड़ा है. रथ म जुड़ी ई उन घो ड़य के ारा ही सूय चलते ह. (९) उ यं तमस प र यो त प य त उ रम्. दे वं दे व ा सूयमग म यो त मम्.. (१०) रा काशयु

के अंधकार के ऊपर उठ यो त को दे खकर हम सम त दे व म अ धक सूय के समीप जाते ह. सूय ही सबसे उ म यो त वाले ह. (१०)

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म मह आरोह ु रां दवम्. ोगं मम सूय ह रमाणं च नाशय.. (११)

हे सूय! तुम सबके अनुकूल काश से यु हो. तुम आज उदय होकर एवं ऊंचे आकाश म चढ़कर मेरा दय-रोग एवं ह रमाण नामक शरीर रोग न करो. (११) शुकेषु मे ह रमाणं रोपणाकासु द म स. अथो हा र वेषु मे ह रमाणं न द म स.. (१२) म अपने ह रमाण नामक शारी रक रोग को तोता और मैना नामक प य पर था पत करता ं. म अपना ह रमाण रोग को ह द पर था पत करता ं. (१२) उदगादयमा द यो व ेन सहसा सह. ष तं म ं र धय मो अहं षते रधम्.. (१३) ये स मुख वतमान सूय मेरे अ न कारक रोग का वनाश करने के लए संपूण तेज के साथ उदय ए ह. म अपने अ न कारी रोग का वनाशक ा नह ं. (१३)

सू —५१

दे वता—इं

अ भ वं मेषं पु तमृ मय म ं गी भमदता व वो अणवम्. य य ावो न वचर त मानुषा भुजे मं ह म भ व मचत.. (१) हे तोताओ! यजमान ारा बुलाए गए, ऋ वज ारा तु त कए जाते ए, धन के आवास एवं बलवान् इं को अपने वचन ारा स करो. जो इं सूय करण के समान सबका हत करते ह, उ ह अ तशय बु एवं मेधावी इं क भोग ा त के लए अचना करो. (१) अभीमव व व भ मूतयोऽ त र ां त वषी भरावृतम्. इ ं द ास ऋभवो मद युतं शत तुं जवनी सूनृता हत्.. (२) सबका र ण एवं वधन करने वाले ऋभुगण नामक म त ने शोभन, आगमनशील, अपने तेज से आकाश को पूण करने वाले, अ त बली, श ु का गव न करने वाले एवं शत तु इं के स मुख आकर उनक सहायता क . (२) वं गो ामङ् गरो योऽवृणोरपोता ये शत रेषु गातु वत्. ससेन च मदायावहो व वाजाव वावसान य नतयन्.. (३) हे इं ! तुमने अ श द करने वाले एवं वषा के नरोधक मेघ को अपने व से हटाकर अं गरा ऋ षय के लए जल बरसाया था. जब असुर ने अ को पीड़ा प ंचाने के ******ebook converter DEMO Watermarks*******

लए शत ार नामक यं का योग कया था, तब तुमने उ ह माग बताया था. तुमने वमद ऋ ष के लए अ यु धन दान कया था, इसी कार तुमने सं ाम म वजय ा त के लए तु त करने वाले अनेक तोता को व चलाकर बचाया था. (३) वमपाम पधानाऽवृणोरपाधारयः पवते दानुम सु. वृ ं य द शवसावधीर हमा द सूय द ारोहयो शे.. (४) हे इं ! तुमने जल के अवरोधक मेघ को हटा दया है एवं वृ आ द असुर को परा जत करके उनका धन पवत पर छपा दया है. तुमने तीन लोक क हसा करने वाले वृ का वध कया एवं उसके तुरंत प ात् संसार को दे खने के लए सूय को आकाश म चढ़ा दया था. (४) वं माया भरप मा यनोऽधमः वधा भय अ ध शु तावजु त. वं प ोनृमणः ा जः पुरः ऋ ज ानं द युह ये वा वथ.. (५) हे इं ! जो असुर ह व य अ से सुशो भत अपने मुख म ही य ीय साम ी डाल लेते थे, तुमने उन माया वय को माया ारा परा जत कया था. हे यजमान पर अनु हबु रखने वाले इं ! तुमने प ु असुर के नवास थान व त कर दए थे. तुमने ह या करने के लए उ त द यु के हाथ म पड़े ऋ ज ान् क पूणतया र ा क थी. (५) वं कु सं शु णह ये वा वथार धयोऽ त थ वाय श बरम्. महा तं चदबुदं न मीः पदा सनादे व द युह याय ज षे.. (६) हे इं ! तुमने शु ण असुर के साथ भयानक सं ाम म कु स ऋ ष क र ा क थी तथा अ त थय का वागत करने वाले दवोदास को बचाने के लए शंबर असुर का वध कया था. तुमने अबुद नामक महान् असुर को पैर से कुचल डाला था. इस कार तु हारा ज म द युनाश के लए आ जान पड़ता है. (६) वे व ा ता वषी स य घता तव राधः सोमपीथाय हषते. तव व कते बा ो हतो वृ ा श ोरव व ा न वृ या.. (७) हे इं ! तुम म संपूण बल न हत है एवं सोमरस पीने के बाद तु हारा मन अ यंत स हो जाता है. हम यह जानते ह क तु हारे दोन हाथ म व रहता है. इस लए तुम श ु का सम त बल छ करो. (७) व जानी ाया ये च द यवो ब ह मते र धया शासद तान्. शाक भव यजमान य चो दता व े ा ते सधमादे षु चाकन.. (८) हे इं ! पहले तुम यह बात जानो क कौन आय है और कौन द यु? इसके प ात् तुम कुशयु य का वरोध करने वाल को न करके उ ह यजमान के वश म लाओ. तुम ******ebook converter DEMO Watermarks*******

श शाली हो, इस लए य करने वाल के सहायक बनो. म तोता भी तु ह स ता दे ने वाले य के तु हारे उन सम त कम क शंसा करना चाहता ं. (८) अनु ताय र धय प तानाभू भ र ः थय नाभुवः. वृ य च धतो ा मन तः तवानो व ो व जघान सं दहः.. (९) जो इं य वरो धय को य य यजमान के वश म ला दे ते ह तथा अपने अ भमुख तोता ारा तु तपरांगमुख का नाश करा दे ते ह, ब ु ऋ ष ने ऐसे बु शील एवं वग ापी इं क तु त करते ए य म एक त धन समूह ले लया था. (९) त उशना सहसा सहो व रोदसी म मना बाधते शवः. आ वा वात य नृमणो मनोयुज आ पूयमाणमवह भ वः.. (१०) हे इं ! जब शु ने अपने बल के सहयोग से तु हारी श को ती ण कर दया था, तब तु हारे उस वशु बल ने अपनी ती णता ारा धरती और आकाश को भयभीत बना दया था. हे यजमान के त अनु हबु रखने वाले इं ! बल से पूण तु हारी इ छा से रथ म जोड़े गए एवं वायु के समान वेगशाली घोड़े तु ह य अ के स मुख ले आव. (१०) म द य शने का े सचाँ इ ो वङ् कू वङ् कुतरा ध त त. उ ो य य नरपः ोतसासृज शु ण य ं हता ऐरय पुरः.. (११) हे इं ! जब सुंदर शु ाचाय ने तु हारी तु त क थी, तब तुम व ग त वाले दोन घोड़ को रथ म जोड़कर उस पर सवार थे. उ इं ने चलने वाले बादल से धारा प म जल बरसाया था एवं सबको सताने वाले शु ण असुर के व तृत नगर को न कर दया था. (११) आ मा रथं वृषपाणेषु त स शायात य भृता येषु म दसे. इ यथा सुतसोमेषु चाकनोऽनवाणं ोकमा रोहसे द व.. (१२) हे इं ! तुम सोमरस पीने के लए रथ पर बैठकर गमन करते हो. जस सोम से तुम स होते हो, वही सोम शायात राज ष ने तैयार कया है. तुम जस कार अ य य म नचोड़े ए सोमरस को पीते हो, उसी कार इस शायात के सोम क भी कामना करो. ऐसा करने से तुम वग म थर यश ा त करोगे. (१२) अददा अभा महते वच यवे क ीवते वृचया म सु वते. मेनाभवो वृषण य सु तो व े ा ते सवनेषु वा या.. (१३) हे इं ! तुमने य म सोम नचोड़ने वाले एवं तु हारी तु त करने के इ छु क वृ क ीवान् ऋ ष को वृचया नामक युवती दान क थी. हे शोभन कम करने वाले इं ! तुम वृषणा राजा के घर मेना नामक क या के प म उ प ए थे. सोमरस नचोड़ते समय तु हारी इन सब कथा का वणन होना चा हए. (१३) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

इ ो अ ा य सु यो नरेके प ेषु तोमो य न यूपः. अ युग ू रथयुवसूयु र इ ायः य त य ता.. (१४) शोभन कम वाले यजमान नधनता से सुर त होने के लए इं क सेवा करते ह. अं गरावंशी य के तो य ार पर गड़े लकड़ी के खंभ के समान न ल ह. धन दे ने वाले इं यजमान के लए अ , रथ एवं व वध संप य को दे ने क इ छा करते ह तथा सब कार के धन दे ने के लए थत ह. (१४) इदं नमो वृषभाय वराजे स यशु माय तवसेऽवा च. अ म वृजने सववीराः म सू र भ तव शम याम.. (१५) हे इं ! तुम वणनशील, अपने तेज के ारा का शत, वा त वक बलसंप एवं अ यंत महान् हो. हमने यह तु त वचन तु हारे लए ही योग कया है. हम इस यु म सम त वीर स हत वजय ा त करके तु हारे ारा दए ए सुंदर घर म व ान् ऋ वज के साथ नवास कर. (१५)

सू —५२

दे वता—इं

यं सु मेषं महया व वदं शतं य य सु वः साकमीरते. अ यं न वाजं हवन यदं रथमे ं ववृ यामवसे सुवृ भः.. (१) हे अ वयुगणो! उन बली इं क पूजा करो, जनक तु त सौ तोता एक साथ मलकर करते ह और जो वग ा त करा दे ते ह. इं का रथ तेज दौड़ते ए घोड़े के समान अ यंत वेगपूवक य क ओर चलता है. म अपनी तु तय के ारा इं से अनुरोध करता ं क वे उसी रथ पर चढ़कर मेरी र ा कर. (१) स पवतो न ध णे व युतः सह मू त त वषीषु वावृधे. इ ो यद्वृ मवधी द वृतमु ज णा स ज षाणो अ धसा.. (२) जस समय य ीय अ से स इं ने जल क वषा करते ए नद के वाह को रोकने वाले वृ का वध कया, उस समय वह धारा प म बहने वाले जल के बीच पवत के समान अचल रहा एवं उसने मनु य क हजार कार से र ा करके पया त श ा त क . (२) स ह रो रषु व ऊध न च बु नो मदवृ ो मनी ष भः. इ ं तम े वप यया धया मं ह रा त स ह प र धसः.. (३) म व ान् ऋ वज के साथ आ मणकारी श ु को जीतने वाले, जल के समान आकाश म ा त, सबक स ता के कारण, सोमपान से बु ा त, महान् एवं धनसंप इं को अपनी शोभन काय यो य बु से बुलाता ,ं य क वे इं अ को पूण करने वाले ******ebook converter DEMO Watermarks*******

ह. (३) आ यं पृण त द व स ब हषः समु ं न सु व१ वा अ भ यः. तं वृ ह ये अनु त थु तयः शु मा इ मवाता अ त सवः.. (४) जस कार समु क ओर दौड़ती इसक आ मीय स रताएं उसे पूण करती ह, उसी कार कुश पर रखा आ सोमरस वगलोक म अव थत इं को पूणता दान करता है. श ु का शोषण करने वाले, श ुर हत एवं शोभन शरीर म द्गण वृ वध के समय उ ह के सहायक के प म उनके पास खड़े थे. (४) अ भ ववृ मदे अ य यु यतो र वी रव वणे स ु तयः. इ ो य ी धृषमाणो अ धसा भन ल य प रध रव तः.. (५) जस कार वभाव के अनुसार जल नीचे क ओर बहता है, उसी कार इं के सहायक म द्गण सोमपान ारा स होकर इं के साथ यु करते ए वृ के वामी वृ के सामने गए. जस कार त नामक पु ष ने प र धय का भेदन कया था, उसी कार इं ने सोमरस से श शाली बनकर बल नामक असुर को वद ण कर दया था. (५) पर घृणा चर त त वषे शवोऽपो वृ वी रजसो बु नमाशयत्. वृ य य वणे गृ भ नो नजघ थ ह वो र त यतुम्.. (६) हे इं ! वृ नामक असुर जल को रोककर आकाश म सोया था. आकाश म वृ के व तार क कोई सीमा नह थी. तुमने अपने श द करते ए व के ारा उसी वृ क ठोड़ी को जस समय घायल कया था, उसी समय तु हारा श ु वजयी तेज व तृत हो गया एवं तु हारा बल सव का शत हो गया. (६) दं न ह वा यृष यूमयो ाणी तव या न वधना. व ा च े यु यं वावृधे शव तत व म भभू योजसम्.. (७) हे इं ! जस कार जल के वाह जलाशय म प ंच जाते ह, उसी कार तु हारी वृ करने वाले तो तु ह ा त हो जाते ह. व ा दे व ने ही तु हारे यो य तु हारा बल बढ़ाया है. उसी ने श ु को अ भभूत करने वाले तेज से संप तु हारे व को ती ण बनाया है. (७) जघ वां उ ह र भः संभृत त व वृ ं मनुषे गातुय पः. अय छथा बा ोव मायसमधारयो द ा सूय शे.. (८) हे य कम संपादक इं ! तुमने अपने भ जन के समीप आने के लए रथ म अ जोड़कर वृ असुर का नाश कया, के ए जल क वषा क , अपने दोन बा मव धारण कया एवं हम सबके दशन के न म सूय को आकाश म था पत कया. (८) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

बृह व ममव य१मकृ वत भयसा रोहणं दवः. य मानुष धना इ मूतयः वनृषाचो म तोऽमद नु.. (९) वृ असुर के भय से तोता ने बृहत्, स ताकारक तेज से यु , बलसंप एवं वग के सोपानभूत तो का गान कया था. उस समय वगलोक क र ा करने वाले म द्गण ने मनु य क र ा के लए वृ से यु करके एवं तोता का पालन करके इं को वृ वध के लए उ सा हत कया. (९) ौ द यामवाँ अहेः वनादयोयवी यसा व इ ते. वृ य य धान य रोदसी मदे सुत य शवसा भन छरः.. (१०) हे इं ! जब नचोड़े ए सोमरस को पीकर तुम अ यंत ह षत हो रहे थे, तब तु हारे व ने धरती और आकाश म बाधक बनने वाले वृ का सर वेग से काट दया था. उस समय बलवान् आकाश भी वृ के श द भय से कांपने लगा था. (१०) य द व पृ थवी दशभु जरहा न व ा ततन त कृ यः. अ ाह ते मघव व ुतं सहो ामनु शवसा बहणा भुवत्.. (११) हे इं ! य द पृ वी अपने वतमान आकार से दस गुनी बड़ी होती और उस पर रहने वाले मनु य सदा जी वत रहते, तब भी तु हारी वृ वधका रणी श सव स होती. तु हारे ारा वृ का वध आकाश के समान वशाल काय है. (११) वम य पारे रजसो ोमनः वभू योजा अवसे धृष मनः. चकृषे भू म तमानमोजसोऽपः वः प रभूरे या दवम्.. (१२) हे श ुनाशक इं ! तुमने इस ापक आकाश के ऊपर रहते ए अपनी श से हमारी र ा करने के न म भूलोक का नमाण कया है. तुम बल क अं तम सीमा हो. तुमने सुखपूवक गमन करने यो य आकाश एवं वग को ा त कर लया है. (१२) वं भुवः तमानं पृ थ ा ऋ ववीर य बृहतः प तभूः. व मा ा अ त र ं म ह वा स यम ा न कर य वावान्.. (१३) हे इं ! जस कार भूलोक का व तार अ च य है, उसी कार तु हारी भी मह ा जानी नह जा सकती. तुम दशनीय दे व वाले वग के पालनक ा हो. यह स य है क तुमने अपनी मह ा से धरती और आकाश के म यभाग को पू रत कर दया है, इस लए तु हारे समान सरा कोई नह है. (१३) न य य ावापृ थवी अनु चो न स धवो रजसो अ तमानशुः. नोत ववृ मदे अ य यु यत एको अ य चकृषे व मानुषक्.. (१४) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

जस इं के व तार को आकाश और पृ वी नह पा सके ह, आकाश के ऊपर होने वाला जल वाह जस इं के तेज का अंत नह जान सका, हे इं ! सम त ाणी समुदाय उसी तरह तु हारे अपने वश म है. (१४) आच म तः स म ाजौ व े दे वासो अमद नु वा. वृ य यद्भृ मता वधेन न व म यानं जघ थ.. (१५) हे इं ! इस यु म म द्गण ने तु हारी अचना क थी. जस समय तुमने तेज धार वाले व से वृ के मुख पर चोट क , उस समय सम त दे व सं ाम म तु ह आनंद ा त करता आ दे खकर स हो रहे थे. (१५)

सू —५३

दे वता—इं

यू३ षु वाचं महे भरामहे गर इ ाय सदने वव वतः. नू च र नं ससता मवा वद ु त वणोदे षु श यते.. (१) हम महान् इं के लए शोभन तु तय का योग करते ह, य क प रचया करने वाले यजमान के घर म इं क तु तयां क जाती ह. जस कार चोर सोए ए लोग क संप छ न लेते ह, उसी कार इं असुर के धन पर तुरंत अ धकार कर लेते ह. धन दे ने वाल के वषय म अनु चत तु त नह क जाती. (१) रो अ य र इ गोर स रो यव य वसुन इन प तः. श ानरः दवो अकामकशनः सखा स ख य त म ं गृणीम स.. (२) हे इं ! तुम अ , गो एवं जौ आ द धा य के दे ने वाले हो. तुम नवास हेतु धन के वामी एवं सबके पालक हो. तुम दान के नेता एवं ाचीन दे व हो. तुम ह व दे ने वाले यजमान क इ छा को अ भमत फल दे कर पूरा करते हो तथा उनके लए म के समान अ यंत य हो. हम इस कार के इं के लए तु त वचन का योग करते ह. (२) शचीव इ पुर कृद् ुम म तवे ददम भत े कते वसु. अतः संगृ या भभूत आ भर मा वायतो ज रतुः काममूनयीः.. (३) हे इं ! तुम ावान् वृ वधा द अनेक कम के क ा एवं अ तशय तेज वी हो. हम यह जानते ह क सव वतमान धन तु हारा है. हे श ुनाशक इं ! इस लए हम धन दो. जो तोता तु ह चाहते ह, उनक अ भलाषा को अपूण मत रहने दो. (३) ए भ ु भः सुमना ए भ र भ न धानो अम त गो भर ना. इ े ण द युं दरय त इ भयुत े षसः स मषा रभेम ह.. (४) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हे इं ! हमारे ारा दए ए पुरोडाशा द ह एवं सोमरस से स होकर हम गाय और घोड़ के साथ-साथ धन भी दो. इस कार हमारी द र ता मटाकर तुम शोभन मन बन जाओ. इं इस सोमरस के कारण संतु होकर हमारी सहायता करगे तो हम द यु का नाश करके एवं श ु से छु टकारा पाकर इं के ारा दए ए अ का उपभोग करगे. (४) स म राया स मषा रभेम ह सं वाजे भः पु ै र भ ु भः. सं दे ा म या वीरशु मया गोअ या ाव या रभेम ह.. (५) हे इं ! हम धन और अ के साथ-साथ ऐसा बल भी ा त कर, जो ब त का आ ादक एवं द तमान् हो. श ु वनाश म समथ तु हारी उ म बु हमारी सहायता करे. तु हारी बु तोता को गाय आ द मुख पशु एवं अ दान करे. (५) ते वा मदा अमद ता न वृ या ते सोमासो वृ ह येषु स पते. य कारवे दश वृ ा य त ब ह मते न सह ा ण बहयः.. (६) हे स जन के पालक इं ! जस समय तुमने वृ असुर का वध कया, उस समय तु हारे मादक म द्गण ने तु ह मु दत कया था. तुम वषा करने म समथ हो. जब तुमने श ु क बाधा को पार करके तु तक ा एवं ह दाता यजमान के दस हजार उप व को समा त कया था, उस समय च पुरोडाशा द ह एवं स सोमरस ने तु ह स कया था. (६) युधा युधमुप घेदे ष धृ णुया पुरा पुरं स मदं हं योजसा. न या य द स या पराव त नबहयो नमु च नाम मा यनम्.. (७) हे श ु वंसक इं ! तुम सदा यु शील रहते हो एवं अपने बल से श ु के एक नगर के बाद सरे का वनाश करते हो. हे इं ! तुमने व क सहायता से र दे श म वतमान, स , मायावी नमु च नामक असुर का वध कया था. (७) वं कर मुत पणयं वधी ते ज या त थ व य वतनी. वं शता वङ् गृद या भन पुरोऽनानुदः प रषूता ऋ ज ना.. (८) हे इं ! तुमने अ त थ व नामक राजा क सहायता करने के लए तेज एवं श ुनाशक आयुध से करंज एवं पणय नामक असुर का वध कया था. ऋ ज ान् नामक राजा ने वंगृद असुर के सौ नगर को चार ओर से घेर लया था. तुमने अकेले ही उन नगर का वनाश कर दया था. (८) वमेता नरा ो दशाब धुना सु वसोपज मुषः. ष सह ा नव त नव ुतो न च े ण र या पदावृणक्.. (९) असहाय सु वा नामक राजा के साथ यु करने के लए साठ हजार न यानवे ******ebook converter DEMO Watermarks*******

सहायक के स हत बीस जनपद शासक आए थे. हे च से उन अनेक को परा जत कया था. (९)



इं ! तुमने श ु

ारा अलं य

वमा वथ सु वसं तवो त भ तव ाम भ र तूवयाणम्. वम मै कु सम त थ वमायुं महे रा े यूने अर धनायः.. (१०) हे इं ! तुमने पालकश ारा सु वा एवं सूयवान् नामक राजा क र ा क थी. तुमने कु स, अ त थ व एवं आयु नामक राजा को महान् एवं त ण राजा सु वा के अधीन कया था. (१०) य उ ची दे वगोपाः सखाय ते शवतमा असाम. वां तोषाम वया सुवीरा ाघीय आयुः तरं दधानाः.. (११) हे इं ! य क समा त पर उप थत दे व ारा पा लत तु हारे म तु य य एवं अ तशय क याणपा हम तु हारी तु त करते ह. हम तु हारी दया से शोभन पु एवं उ म द घ जीवन को ा त कर. (११)

सू —५४

दे वता—इं

मा नो अ म मघव पृ वंह स न ह ते अ तः शवसः परीणशे. अ दयो न ो३ रो व ना कथा न ोणी भयसा समारत.. (१) हे धन के वामी इं ! इस पाप म एवं पाप के प रणाम प यु म हम मत फंसाओ, य क कोई भी तु हारी श का अ त मण नह कर सकता. अंत र म वतमान तुम महती व न करते ए नद के जल को श दायमान कर दे ते हो तो फर पृ वी भय से य न कांपे? (१) अचा श ाय शा कने शचीवते शृ व त म ं महय भ ु ह. यो धृ णुना शवसा रोदसी उभे वृषा वृष वा वृषभो यृ ते.. (२) हे अ वयुजन! श शाली एवं बु मान् इं क पूजा करो. वे सबक तु तयां सुनते ह, इस लए उनक तु त करो. जो इं अपने श ुनाशक बल से धरती और आकाश को सुशो भत करते ह, वे वषा करने म समथ ह एवं वषा के ारा हमारी इ छा को पूरा करते ह. (२) अचा दवे बृहते शू यं१ वचः व ं य य धृषतो धृष मनः. बृह वा असुरो बहणा कृतः पुरो ह र यां वृषभो रथो ह षः.. (३) इं का मन श ु वजय के

त ढ़ न यी है. हे तोताओ! उ ह द तशाली, महान्,

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भूत यश वी एवं श संप इं के त तु तवचन का उ चारण करो. वे इं श ुनाशक, अ ारा से वत, कामनाएं पूण करने वाले एवं वेगवान् ह. (३) वं दवो बृहतः सानु कोपयोऽव मना धृषता श बरं भनत्. य मा यनो दनो म दना धृष छतां गभ तमश न पृत य स.. (४) हे इं ! तुमने वशाल आकाश के ऊपर उठा आ दे श कं पत कर दया था एवं श ुनाशक श ारा शंबर असुर का वध कया था. तुमने ह षत एवं ग भ मन से तेज धार वाले तथा चमक ले व को मायावी असुर समूह क ओर चलाया था. (४) न यद्वृण सन य मूध न शु ण य चद् दनो रो व ना. ाचीनेन मनसा बहणावता यद ा च कृणवः क वा प र.. (५) हे इं ! तुम वायु के तथा जल सोखने वाले एवं फल को पकाने वाले सूय के ऊपर वाले दे श म जल बरसाते हो. हे ढ़ न य एवं श ु वनाशक दय वाले इं ! आज आपने परा म दखाया है, उससे प है क आपसे बढ़कर कोई नह है. (५) वमा वथ नय तुवशं य ं वं तुव त व यं शत तो. वं रथमेतशं कृ े धने वं पुरो नव त द भयो नव.. (६) हे शत तु! तुमने नय, तुवश, य एवं व य कुल म उ प तुव त नामक राजा क र ा क है. तुमने धन ा त के उ े य से ारंभ सं ाम म रथ एवं एतश ऋ षय क र ा क तथा शंबर असुर के न यानवे नगर का वंस कया है. (६) स घा राजा स प तः शूशुव जनो रातह ः त यः शास म व त. उ था वा यो अ भगृणा त राधसा दानुर मा उपरा प वते दवः.. (७) वे ही यजमान सुशो भत होकर स जन के पालन के साथ-साथ अपनी भी वृ करते ह, जो इं को ह दान करके उनक तु त करते ह. अ भमत फलदाता इं ऐसे ही लोग के लए आकाश से मेघ ारा वषा करते ह. (७) असमं ये त इ

मसमा मनीषा सोमपा अपसा स तु नेमे. द षो वधय त म ह ं थ वरं वृ यं च.. (८)

इं का बल एवं बु अतुलनीय है. हे इं ! जो सोमपायी यजमान अपने य कम ारा तु हारा महान् बल एवं थूल पौ ष बढ़ाते ह, उनक उ त हो. (८) तु येदेते ब ला अ धा मूषद मसा इ पानाः. ु ह तपया काममेषामथा मनो वसुदेयाय कृ व.. (९) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हे इं ! यह सोमरस प थर क सहायता से तैयार कया गया है एवं पा म रखा आ है. यह तु हारे पीने यो य है. तुम इसे पीकर अपनी अ भलाषा पूण करो एवं उसके प ात् हम धन दे ने के कम म अपना मन लगाओ. (९) अपाम त ण रं तमोऽ तवृ य जठरेषु पवतः. अभी म ो न ो व णा हता व ा अनु ाः वणेषु ज नते.. (१०) वृ क धारा को रोकने वाला अंधकार फैला आ था. तीन लोक का आवरण करने वाले वृ असुर के पेट म मेघ था. जो जल वृ ारा रोक लया गया था, उसे इं ने नीचे धरती क ओर बहाया. (१०) स शेवृधम ध धा ु नम मे म ह ं जनाषा ळ त म्. र ा च नो मघोनः पा ह सूरी ाये च नः वप या इषे धाः.. (११) हे इं ! तुम हम रोग क शां त के उपरांत बढ़ने वाला यश दो. हम महान् एवं श ु को हराने वाला बल दो, हम धनवान् बनाकर हमारी र ा करो, व ान का पालन करो एवं हम धन, सुंदर संतान तथा अ दो. (११)

सू —५५

दे वता—इं

दव द य व रमा व प थ इ ं न म ा पृ थवी चन त. भीम तु व मा चष ण य आतपः शशीते व ं तेजसे न वंसगः.. (१) इं का भाव आकाश क अपे ा अ धक व तृत है. पृ वी भी इं क मह ा क समानता नह कर सकती. श ु के लए भयंकर एवं बु मान् इं अपने भ जन के न म श ु को संताप दे ते ह. जैसे सांड़ यु के लए अपने स ग तेज करता है, उसी कार इं अपने व को तेज करने के लए रगड़ते ह. (१) सो अणवो न न ः समु यः त गृ णा त व ता वरीम भः. इ ः सोम य पीतये वृषायते सना स यु म ओजसा पन यते.. (२) आकाश म ा त इं र तक फैले ए जल को उसी कार हण कर लेते ह, जस कार सागर वशाल जलरा श को अपने म समेट लेता है. इं सोमरस पीने के लए बैल के समान दौड़ कर जाते ह एवं वे महान् यो ा चरकाल से अपने वृ वधा दकम क शंसा चाहते ह. (२) वं त म पवतं न भोजसे महो नृ ण य धमणा मर य स. वीयण दे वता त चे कते व मा उ ः कमणे पुरो हतः.. (३) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हे इं ! तुम अपने उपभोग के लए मेघ को भ नह करते एवं वशाल धन के धारक कुबेरा द पर अ धकार जमाते हो. हम लोग इं को उनक श के कारण भली कार जानते ह. वे इं अपने वृ वधा द प काय के ारा सभी दे व म आगे का थान ा त करते ह. (३) स इ ने नम यु भवच यते चा जनेषु ुवाण इ यम्. वृषा छ भव त हयतो वृषा ेमेण धेनां मघवा य द व त.. (४) तोता ऋ ष अर य म इं क तु त करते ह. इं अपने भ म अपने शौय को कट करते ए शोभा पाते ह. अभी वषा करने वाले इं ह दाता यजमान क र ा करते ह. जब यजमान य क इ छा से इं क तु त करता है, तभी वे उसे य म त पर कर दे ते ह. (४) स इ महा न स मथा न म मना कृणो त यु म ओजसा जने यः. अधा चन ध त वषीमत इ ाय व ं नघ न नते वधम्.. (५) यो ा इं अपने भ के क याण के लए सबको शु करने वाले वक य बल से महान् यु करते ह. इं जस समय हनन का साधन व मेघ पर फकते ह. उस समय सब लोग बलशाली कहकर तेज वी इं के त ा कट करते ह. (५) स ह व युः सदना न कृ मा मया वृधान ओजसा वनाशयन्. योत ष कृ व वृका ण य यवेऽव सु तुः सतवा अपः सृजत्.. (६) शोभन कम वाले इं यश क कामना करते ए असुर के सुंदर बने ए घर को अपनी श से न कर दे ते ह. वे धरती के समान व तृत हो जाते ह एवं सूय आ द यो त पड को आवरणर हत करके यजमान के न म बहने वाला जल बरसाते ह. (६) दानाय मनः सोमपाव तु तेऽवा चा हरी व दन ुदा कृ ध. य म ासः सारथयो य इ ते न वा केता आ द नुव त भूणयः.. (७) हे सोमपायी इं ! तु हारा मन दान म लगा रहे. हे तु त य इं ! तुम अपने ह र नामक घोड़ को हमारे य क ओर अ भमुख करो. हे इं ! तु हारे सार थ घोड़ को वश म करने म अ यंत कुशल ह. इस कारण आयुध धारण करने वाले तु हारे श ु तु ह नह हरा सकते. (७) अ तं वसु बभ ष ह तयोरषाळ् हं सह त व त ु ो दधे. आवृतासोऽवतासो न कतृ भ तनूषु ते तव इ भूरयः.. (८) हे स इं ! तुम अपने हाथ म यर हत धन एवं शरीर म अपराजेय बल धारण करते हो. जस कार पानी भरने वाले लोग कुएं को घेरे रहते ह, उसी कार वृ वधा द वीरतापूण कम तु हारे शरीर को घेरे ए ह. हे इं ! इसी लए तु हारे शरीर म अनेक कम व मान ह. (८) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

सू —५६

दे वता—इं

एष पूव रव त य च षोऽ यो न योषामुदयं त भुव णः. द ं महे पाययते हर ययं रथमावृ या ह रयोगमृ वसम्.. (१) जस कार घोड़ा ड़ा के न म घोड़ी क ओर दौड़कर जाता है, उसी कार पया त आहार करने वाले इं यजमान ारा ब त से पा म रखे ए सोमरस क ओर शी ता से जाते ह. वृ वधा द महान् काय म द वे इं अपना वण न मत, अ यु एवं तेज वी रथ रोककर सोमरस पीते ह. (१) तं गूतयो नेम षः परीणसः समु ं न संचरणे स न यवः. प त द य वदथ य नू सहो ग र न वेना अ ध रोह तेजसा.. (२) जस कार धन चाहने वाले व णक नाव म बैठकर आने-जाने के साधन समु को ा त कए रहते ह, उसी कार हाथ म ह लए ए तोता इं को चार ओर से घेरे रहते ह. हे तोताओ! ना रयां अपने मनपसंद फूल तोड़ने के लए जस कार पवत पर चढ़ जाती ह, उसी कार तुम भी तेज वी तो के सहारे वशाल य के र क एवं श शाली इं के समीप प ंच जाओ. (२) स तुव णमहाँ अरेणु प ये गरेभृ न ाजते तुजा शवः. येन शु णं मा यनमासो मदे आभूषु रामय दाम न.. (३) इं श ुनाशक और महान् ह. इं क दोषर हत एवं श ुनाशकारी श वीर पु ष ारा करने यो य सं ाम म पवत क चोट के समान वराजमान होती है. श ु वनाशक एवं लौहकवचधारी इं ने सोमपान के ारा मदो म होकर मायावी असुर शु ण को बे ड़यां डाल कर कारागृह म बंद कर दया था. (३) दे वी य द त वषी वावृधोतय इ ं सष युषसं न सूयः. यो धृ णुना शवसा बाधते तम इय त रेणुं बृहदह र व णः.. (४) हे तोता! जस कार सूय न य उषा का सेवन करते ह, उसी कार तेज वी बल तु हारी र ा के न म तु हारी तु तयां सुनकर वृ ा त करने वाले इं क सेवा करता है. वे इं , श ुनाशक श ारा अंधकार पी वृ असुर का नाश करते ह एवं श ु को लाकर भली कार न कर दे ते ह. (४) व य रो ध णम युतं रजोऽ त पो दव आतासु बहणा. वम ळ् हे य मद इ ह याह वृ ं नरपामौ जो अणवम्.. (५) हे श ुहंता इं ! जस समय तुमने वृ

असुर

ारा रोके

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ए सम त

ा णय के

जीवनाधार एवं वनाशर हत जल को आकाश से फैली ई दशा म बखेरा था, उस समय तुमने सोमपान से स होकर यु म वृ का वध कर दया था एवं जल से पूण मेघ को वषा करने के लए अधोमुख कर दया था. (५) वं दवो ध णं धष ओजसा पृ थ ा इ सदनेषु मा हनः. वं सुत य मदे अ रणा अपो व वृ य समया पा या जः.. (६) हे इं ! तुम वृ को ा त करके सम त व के जीवनाधार वषा के जल को अपने बल ारा आकाश से धरती के भाग म था पत कर दे ते हो. तुमने सोमपान से स होकर जल को मेघ से पृथक् कर दया है एवं वशाल पाषाण के ारा वृ को न कर दया है. (६)

सू —५७

दे वता—इं

मं ह ाय बृहते बृह ये स यशु माय तवसे म त भरे. अपा मव वणे य य धरं राधो व ायु शवसे अपावृतम्.. (१) म परम दानशील, गुण से महान्, भूत धनसंप , अमोघबल के वामी एवं वशाल आकार वाले इं को ल य करके अपनी हा दक तु त पूण करता ं. जस कार नीचे क ओर बहने वाले जल को कोई नह रोक सकता, उसी कार इं का बल धारण करने म भी कोई समथ नह होगा. तोता को बलशाली बनाने के लए इं सव ापक धन को का शत करते ह. (१) अध ते व मनु हास द य आपो न नेव सवना ह व मतः. य पवते न समशीत हयत इ य व ः थता हर ययः.. (२) हे इं ! यह सारा संसार तु हारे य म संल न था. ह दाता यजमान के ारा नचोड़ा आ सोमरस तु ह उसी कार ा त आ था, जस कार जल नीची जगह पर आ जाता है. इं का शोभन, वणमय एवं श ुनाशक व पवत पर कभी न त नह था. (२) अ मै भीमाय नमसा सम वर उषो न शु आ भरा पनीयसे. य य धाम वसे नामे यं यो तरका र ह रतो नायसे.. (३) हे शोभन उषा! तुम इस य म श ु के लए भयंकर व परम तु तपा इं के लए इस समय य का अ दो. जस कार सार थ घोड़े को इधर-उधर ले जाता है, उसी कार इं क सबको धारण करने वाली, स एवं पहचान कराने वाली यो त उ ह य ा ा त कराने के लए इधर-उधर ले जाती है. (३) इमे त इ ते वयं पु ु त ये वार य चराम स भूवसो. न ह वद यो गवणो गरः सघ ोणी रव त नो हय त चः.. (४) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हे भूत धनशाली एवं ब त से यजमान ारा तुत इं ! तु हारा आ य ा त करके हम य काय म वतमान ह. हम तु हारे ही भ ह. हे तु तपा इं ! तु हारे अ त र इन तु तय को कोई ा त नह करता. जस कार पृ वी अपने सम त ा णय को चाहती है, उसी कार तुम भी हमारे तु त वचन को ेम करो. (४) भू र त इ वीय१तव म य य तोतुमघव काममा पृण. अनु ते ौबृहती वीय मम इयं च ते पृ थवी नेम ओजसे.. (५) हे इं ! तु हारी साम य को कोई भी लांघ नह सकता. हम तु हारे ही भ ह. हे मघवा! तुम अपने इस तोता क इ छा को पूरा करो. वशाल आकाश ने तु हारे शौय को वीकार कया था एवं पृ वी तु हारे बल के सामने झुक गई थी. (५) वं त म पवतं महामु ं व ेण व पवशचक तथ. अवासृजो नवृताः सतवा अपः स ा व ं द धषे केवलं सहः.. (६) हे व धारी इं ! तुमने उस स एवं वशाल मेघ को अपने व ारा टु कड़ेटुकड़े कर दया था एवं उस मेघ ारा रोके गए जल को नीचे बहने के लए छोड़ दया था. केवल तुम ही व ापी बल धारण करते हो. (६)

सू —५८

दे वता—अ न

नू च सहोजा अमृतो न तु दते होता य तो अभव व वतः. व सा ध े भः प थभी रजो मम आ दे वताता ह वषा ववास त.. (१) अ तशय बल क सहायता से उ प एवं अमर अ न जलाने म समथ है. दे वता का आ ान करने वाले अ न जस समय यजमान का ह ले जाने के लए त बने थे, उस समय अ न ने उ चत माग से जाकर अंत र लोक बनाया था. अ न य म ह दान करके दे व क सेवा करते ह. (१) आ वम युवमानो अजर तृ व व य तसेषु त त. अ यो न पृ ं ु षत य रोचते दवो न सानु तनय च दत्.. (२) जरार हत अ न अपने तृणगु म आ द खा पदाथ को अपनी दाहकश के ारा अपने म मलाकर एवं भ ण करके शी ही ब त से काठ पर चढ़ गए. जलाने के लए इधर-उधर जाने वाली अ न क ऊंची वालाएं ग तशील अ के समान तथा आकाश थत उ त एवं गंभीर श दकारी मेघ के समान शोभा पाती ह. (२) ाणा े भवसु भः पुरो हतो होता नष ो र यषाळम यः. रथो न व वृ सान आयुषु ानुष वाया दे व ऋ व त.. (३) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

अ न ह का वहन करते ए तथा वसु के स मुख थान ा त कर चुके ह एवं दे व का आ ान करने के न म य म उप थत रहते ह. श ु का धन जीतने वाले, मरणर हत एवं द तमान् अ न यजमान ारा तुत होकर रथ क भां त चलते ए जा के पास प ंचते ह एवं बार-बार े धन दान करते ह. (३) व वातजूतो अतसेषु त ते वृथा जु भः सृ या तु व व णः. तृषु यद ने व ननो वृषायसे कृ णं त एम श म अजर.. (४) वायु ारा े रत अ न महान् श द करते ए अपनी जलती ई एवं ती वाला के ारा अनायास ही पेड़ को जला दे ते ह. हे अ न दे व! तुम जस समय वन के वृ को जलाने के लए सांड़ के समान उतावले होते हो, उस समय तु हारे गमन का माग काला पड़ जाता है. हे अ न! तुम द त वाला वाले एवं जरार हत हो. (४) तपुज भो वन आ वातचो दतो यूथे न सा ाँ अव वा त वंसगः. अभ ज तं पाजसा रजः थातु रथं भयते पत णः.. (५) वायु ारा े रत अ न शखा पी आयुध धारण कर लेता है तथा महान् तेज के कारण गीले वृ के रस पर आ मण करके सव ा त होता आ ा णय को उसी कार परा जत कर दे ता है, जस कार गाय के झुंड म सांड़ प ंच जाता है. सम त थावर एवं जंगम अ न से डरते ह. (५) दधु ् वा भृगवो मानुषे वा र य न चा ं सुहवं जने यः. होतारम ने अ त थ वरे यं म ं न शेवं द ाय ज मने.. (६) हे अ न! मनु य के बीच म भृगु ऋ ष ने द ज म ा त करने के लए तु ह उसी कार धारण कया था, जस कार लोग उ म धन को संभाल कर रखते ह. तुम लोग का आ ान सरलता से सुन लेते हो एवं दे व का आ ान करने वाले हो. तुम य थान म अ त थ के समान पूजनीय एवं म के समान सुख दे ने वाले हो. (६) होतारं स त जु ो३य ज ं यं वाघतो वृणते अ वरेषु. अ नं व ेषामर त वसूनां सपया म यसा या म र नम्.. (७) आ ान करने वाले सात ऋ वज् य म सव े यजनीय एवं दे व के आ ानक ा जस अ न का वरण करते ह, सम त संप यां दे ने वाले उसी अ न क सेवा म ह के ारा कर रहा ं तथा उस अ न से रमणीय धन क याचना कर रहा ं. (७) अ छ ा सूनो सहसो नो अ तोतृ यो म महः शम य छ. अ ने गृण तमंहस उ योज नपा पू भरायसी भः.. (८) हे अ न! तुम बल योग ारा अर ण से उ प एवं अनुकूल काश वाले हो. तुम हम ******ebook converter DEMO Watermarks*******

अनवरत सुख दान करो. हे अ पु अ न! लोहे के समान ढ़तर पालन साधन तोता क र ा करके उसे पाप से मु करो. (८)

ारा अपने

भवा व थं गृणते वभावो भवा मघव मघवद् यः शम. उ या ने अंहसो गृण तं ातम ू धयावसुजग यात्.. (९) हे व श काशवान् अ न! तुम तु त करने वाले यजमान के लए गृह के समान अ न नवारक बनो. हे धनवान् अ न! ह प धन से यु यजमान के लए तुम सुख प बनो. हे अ न! अपने तोता क पाप से र ा करो. हे बु प धन से संप अ न! आज ातःकाल शी पधारो. (९)

सू —५९

दे वता—अ न

वया इद ने अ नय ते अ ये वे व े अमृता मादय ते. वै ानर ना भर स तीनां थूणेव जनां उप म य थ.. (१) हे अ न! अ य अ नयां तु हारी शाखाएं होने के कारण सम त दे वगण तु हारे साथ ही स होते ह. हे वै ानर! तुम सब मनु य क ना भ म जठरा न प से थत हो. जस कार धरती म गड़े ए लकड़ी के थूने अपने ऊपर बांस को धारण करते ह, उसी कार तुम भी सब मानव को धारण करो. (१) मूधा दवो ना भर नः पृ थ ा अथाभवदरती रोद योः. तं वा दे वासोऽजनय त दे वं वै ानर यो त रदायाय.. (२) यह अ न आकाश का म तक, धरती क ना भ एवं धरती व आकाश के म यवत दे श के वामी थे. हे वै ानर! सभी दे व ने े मानव के क याण के लए तु ह यो त प एवं दाना दगुण संप उ प कया था. (२) आ सूय न र मयो व ु ासो वै ानरे द धरेऽ ना वसू न. या पवते वोषधी व सु या मानुषे व स त य राजा.. (३) जस कार न ल करण सूय म थत ह, उसी कार सभी कार के धन वै ानर अ न म नवास करते ह. इसी लए तुम पवतीय ओष धय , जल एवं मनु य म थत धन के वामी हो. (३) बृहती इव सूनवे रोदसी गरो होता मनु यो३न द ः. ववते स यशु माय पूव व ानराय नृतमाय य ः.. (४) धरती और आकाश अपने पु वै ानर के लए व तृत हो गए थे. जस कार बंद ******ebook converter DEMO Watermarks*******

अपने वामी क अनेक कार से तु त करता है, उसी कार चतुर होता सुंदर ग त वाले, वा त वक श संप एवं सबके कुशल नेता वै ानर के लए महान् एवं व वध तु तय का योग करता है. (४) दव े बृहतो जातवेदो वै ानर र रचे म ह वम्. राजा कृ ीनाम स मानुषीणां युधा दे वे यो व रव कथ.. (५) हे जातवेद! तु हारा मह व आकाश से भी बढ़कर है एवं तुम मानव जा हो. तुमने असुर ारा अप त धन यु के ारा छ नकर दे व को दया था. (५)

के राजा

नू म ह वं वृषभ य वोचं यं पूरवो वृ हणं सच ते. वै ानरो द युम नजघ वां अधूनो का ा अव श बरं भेत्.. (६) मनु य जलवषा के लए जस आवारक मेघ के हंता व ुत् प अ न क सेवा करते ह, म उसी जलवष वै ानर के मह व का उ चारण करता ं. उसने द यु को मारकर वषा का जल गराया एवं शंबर का नाश कया. (६) वै ानरो म ह ना व कृ भर ाजेषु यजतो वभावा. शातवनेये श तनी भर नः पु णीथे जरते सूनृतावान्.. (७) वै ानर अ न अपने मह व के कारण सम त मनु य के वामी एवं पु वधक अ वाले य म बुलाने यो य ह, शतव न के पु राजा पु णीथ अनेक य म काशसंप एवं यवाक् अ न क तु त करते ह. (७)

सू —६० व

दे वता—अ न

यशसं वदथ य केतुं सु ा ं तं स ो अथम्. ज मानं र य मव श तं रा त भरद्भृगवे मात र ा.. (१)

मात र ा ह वाहक, यश वी, य काशक, उ म र क, दे व के त, ह व लेकर दे व के समीप जाने वाले, अर ण पी दो का से उ प एवं धन के समान शं सत अ न को भृगुवं शय के म के प म समीप लाव. (१) अ य शासु भयासः सच ते ह व म त उ शजो ये च मताः. दव पूव यसा द होतापृ ो व प त व ु वेधाः.. (२) ह के इ छु क दे व और ह धारण करने वाले यजमान दोन ही शासक अ न क सेवा करते ह, य क पू य, वां छतफलदाता एवं जाप त अ न सूय दय से भी पहले यजमान के बीच था पत ए ह. (२) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

तं न सी द आ जायमानम म सुक तमधु ज म याः. यमृ वजो वृजने मानुषासः य व त आयवो जीजन त.. (३) दय म थत ाण से उ प एवं मादक वाला वाले अ न को हमारी नई तु तयां सामने से घेर ल. उ चत समय पर य करने वाले मनु य ने सं ाम के समय अ न को उ प कया. (३) उ श पावको वसुमानुषेषु वरे यो होताधा य व ु. दमूना गृहप तदम आँ अ नभुव यपती रयीणाम्.. (४) य थल म व यजमान के बीच सबके य, शु क ा, नवास दे ने वाले, वरण करने यो य अ न को था पत कया गया है. वे श ुदमन के लए ढ़ न यी, हमारे घर के पालनक ा एवं य भवन म धन के अ धप त ह . (४) तं वा वयं प तम ने रयीणां शंसामो म त भग तमासः. आशुं न वाज भरं मजय तः ातम ू धयावसुजग यात्.. (५) हे अ न! जस कार घोड़े पर चढ़ने का इ छु क सवार घोड़े क पीठ साफ करता है, उसी कार गौतम गो ो प हम धन के वामी, सबके र क, य संबंधी अ के भता तुझ अ न का माजन करते ए सुंदर तो ारा तु हारी सहायता करते ह. हे बु ारा धन ा त करने वाले अ न! कल ातःकाल शी आना. (५)

दे वता—इं

सू —६१

अ मा इ तवसे तुराय यो न ह म तोमं मा हनाय. ऋचीषमाया गव ओह म ाय ा ण राततमा.. (१) जस कार भूखे को अ दया जाता है, उसी कार म श संप , शी ता करने वाले, गुण म महान्, तु त के अनुकूल व वाले एवं अबाधग त इं को वरण करने यो य तु तयां एवं पूववत यजमान ारा अ धक मा ा म दया आ अ भट करता ं. (१) अ मा इ य इव यं स भरा यङ् गूषं बाधे सुवृ . इ ाय दा मनसा मनीषा नाय प ये धयो मजय त.. (२) म इं को अ के समान ह दान करता ं तथा श ु को परा जत करने म समथ तु त वचन का उ चारण करता ं. अ य तु तक ा भी उस ाचीन वामी इं के त अंतःकरण, बु और ान क सहायता से तु तयां करते ह. (२) अ मा इ

यमुपमं वषा भरा याङ् गूषमा येन.

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मं ह म छो

भमतीनां सुवृ

भः सू र वावृध यै.. (३)

म उ ह स , उपमान बने ए, अ यंत वरणीय, धन के दाता, व ान् इं क वृ न म समथ एवं व छ वचन वाली तु त बोलता आ महान् श द करता ं. (३)

के

अ मा इ तोमं सं हनो म रथं न त व े त सनाय. गर गवाहसे सुवृ ाय व म वं मे धराय.. (४) जस कार रथ बनाने वाला रथ के मा लक के पास रथ ले जाता है, उसी कार म भी तु त यो य इं को ल त करके शंसावचन े षत करता ं एवं बु संप इं के लए व ापक ह का वसजन करता ं. (४) अ मा इ स त मव व ये ायाक जु ा३सम े. वीरं दानौकसं व द यै पुरां गूत वसं दमाणम्.. (५) जस कार अ लाभ के लए जाने का इ छु क घोड़ को रथ म जोड़ता है, उसी कार म अ लाभ क अ भलाषा से तु त पी मं बोलता ं. म उ ह वीर, दानपा , उ म अ यु एवं असुरनगर के व वंसक ा इं क वंदना म लगा आ ं. (५) अ मा इ व ा त ं वप तमं वय१ रणाय. वृ य च द न े मम तुज ीशान तुजता कयेधाः.. (६) व ा ने यु के न म इन इं के लए शोभन कम वाला एवं श ु के त सरलता से फका जाने वाला व बनाया था. श ु क हसा करते ए ऐ य एवं बल से संप इं ने हनन करने वाले व से वृ के मम का भेदन कया था. (६) अ ये मातुः सवनेषु स ो महः पतुं प पवा चाव ा. मुषाय णुः पचतं सहीया व य राहं तरो अ म ता.. (७) इं ने जगत् नमाण करने वाले इस महान् य के तीन सवन म सोम प अ का तुरंत पान कया है एवं ह प अ का भ ण कया है. व ापक, असुर धन के अपहता, श ु वजयी एवं व चलाने वाले इं ने मेघ को पाकर वद ण कर दया. (७) अ मा इ ना े वप नी र ायाकम हह य ऊवुः. प र ावापृ थवी ज उव ना य ते म हमानं प र ः.. (८) जब इं ने वृ का वध कया था, तब गमनशील दे वप नय ने उनक तु त क थी. इं अपने तेज के ारा आकाश और पृ वी से बढ़ गए थे, पर आकाश और धरती इं क म हमा का अ त मण नह कर सके. (८) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

अ येदेव र रचे म ह वं दव पृ थ ाः पय त र ात्. वरा ळ ो दम आ व गूतः व ररम ो वव े रणाय.. (९) इं क म हमा आकाश, धरती और उनके म यवत लोक से भी बढ़कर है. इं अपने इस नवास थान म अपने तेज से सुशो भत, सभी काय करने म कुशल, श शाली श ु का नाश करने म समथ एवं यु करने म नपुण ह. इं अपने मेघ प श ु को यु के लए ललकारते ह. (९) अ येदेव शवसा शुष तं व वृ ेण वृ म ः. गा न ाणा अवनीरमु चद भ वो दावने सचेताः.. (१०) इं ने अपनी ही श से जल रोकने वाले वृ का उ छे द कर दया था. जस कार चोर ारा रोक ई गाएं इं ने छु ड़वा द थ , उसी कार वृ ारा रोका आ व का र क जल छु ड़वा दया था. इं ह दे ने वाले को इ छानुसार अ दे ते ह. (१०) अ ये वेषसा र त स धवः प र य ेण सीमय छत्. ईशानकृ ाशुषे दश य तुव तये गाधं तुव णः कः.. (११) इं ने व ारा न दय क सीमा न त कर द है, अतः इं के बल के कारण गंगा आ द स रताएं अपने-अपने थान पर सुशो भत ह. इं ने अपने को ऐ यवान् बनाकर ह दाता यजमान को फल दान करते ए तुव त ऋ ष के हेतु नवास यो य थल अ वलंब बना दया था. (११) अ मा इ भरा तूतुजानो वृ ाय व मीशानः कयेधाः. गोन पव व रदा तर े य णा यपां चर यै.. (१२) हे शी ताकारक, सबके वामी एवं अप र मत बलशाली इं ! तुम इस वृ के ऊपर व का हार करो. जस कार मांस के व े ता पशु के अंग को काटते ह, उसी कार तुम वृ के शरीर के जोड़ अपने व से तरछे प म काटो, इससे वषा होगी और धरती पर जल बहने लगेगा. (१२) अ ये ू ह पू ा ण तुर य कमा ण न उ थैः. युधे य द णान आयुधा यृघायमाणो न रणा त श ून्.. (१३) हे तोता! तु त के यो य एवं यु के लए शी ता करने वाले इं के पूव कम क शंसा करो. इं यु म श ुघात के न म आयुध को बार-बार फकते ए उनके सामने जाते ह. (१३) अ ये भया गरय ळ् हा ावा च भूमा जनुष तुजेते. उपो वेन य जोगुवान ओ णस ो भुव याय नोधाः.. (१४) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

इ ह इं के भय से पवत थर ह एवं इनके कट होने पर धरती और आकाश भय से कांपने लगते ह. नोधा नामक ऋ ष ने इ ह सुंदर एवं ःख वनाशक इं क र ा श क अपने सू ारा बार-बार शंसा करके अ वलंब श ा त क थी. (१४) अ मा इ यदनु दा येषामेको य ने भूरेरीशानः. ैतशं सूय प पृधानं सौव े सु वमाव द ः.. (१५) अकेले ही श ु वजय म समथ एवं अनेक कार के वामी इं ने तोता से जस कार क तु त क इ छा क थी, उ ह वही तु त दान क गई है. व के पु सूय के साथ यु करते समय सोमरस नचोड़ने वाले एतश ऋ ष को इं ने बचाया. (१५) एवा ते हा रयोजना सुवृ ा ण गोतमासो अ न्. ऐषु व पेशसं धयं धाः ातम ू धयावसुजग यात्.. (१६) हे इं ! तुम घोड़ समेत रथ के वामी हो. तु ह अपने य म बुलाने के लए गोतम गो वाले ऋ षय ने तु हारे त तु त पी मं कहे ह. तुम उनक अनेक कार से उ त करो. बु ारा धन ा त करने वाले इं ातःकाल शी आव. (१६)

सू —६२

दे वता—इं

म महे शवसानाय शूषमाङ् गूषं गवणसे अ र वत्. सुवृ भः तुवत ऋ मयायाचामाक नरे व ुताय.. (१) हम अं गरा ऋ ष के समान श ुनाशक एवं तु तपा इं को सुख दे नेवाली तु तय को भली कार जानते ह. शोभन तो ारा तु त करने वाले ऋ षय के अचनीय एवं सबके नेता प इं क हम तो ारा पूजा करते ह. (१) वो महे म ह नमो भर वमाङ् गू यं शवसानाय साम. येना नः पूव पतरः पद ा अच तो अ रसो गा अ व दन्.. (२) हे ऋ वजो! महान् एवं बलसंप इं के त उ म एवं ौढ़ तो का उ चारण करो. हमारे पूवज अं गरा गो ीय ऋ ष प ण नामक असुर ारा चुराई ई गौ के पद च दे खते ए गए एवं इं क सहायता से उनका उ ार कया. (२) इ या रसां चे ौ वद सरमा तनयाय धा सम्. बृह प त भनद वद ाः समु या भवावश त नरः.. (३) इं एवं अं गरा गो ीय ऋ षय ारा गाय को खोजने के लए भेजी गई सरमा नामक कु तया ने अपने ब च के लए अ ा त कया था. सरमा ारा बताए जाने पर इं ने असुर ******ebook converter DEMO Watermarks*******

को मारा एवं गाय को छु ड़ाया. उस समय गाय के साथ-साथ दे व ने स तासूचक श द कया था. (३) स सु ु भा स तुभा स त व ैः वरेणा वय ३नव वैः. सर यु भः फ लग म श वलं रवेण दरयो दश वैः.. (४) नौ अथवा दस महीन म य समा त करने वाले एवं उ म ग त के इ छु क अं गरागो ीय सात मेधावी ऋ षय ारा शोभन श द यु तो ारा तुत हे इं ! तु हारे श दमा से मेघ डरते ह. (४) गृणानो अ रो भद म व व षसा सूयण गो भर धः. व भू या अ थय इ सानु दवो रज उपरम तभायः.. (५) हे दशनीय इं ! तुमने अं गरागो ीय ऋ षय क तु त सुनकर उषा एवं सूय करण क सहायता से अंधकार का नाश कया था. हे इं ! तुमने धरती के उ त भाग को समतल तथा आकाश के मूल दे श को ढ़ कया था. (५) त य तमम य कम द म य चा तमम त दं सः. उप रे य परा अ प व म वणसो न १ त ः.. (६) इं ने धरती क मीठे जल वाली चार न दय को जलपूण कया है. वही दशनीय इं का अ तशय पू य एवं सुंदर कम है. (६) ता व व े सनजा सनीळे अया यः तवमाने भरकः भगो न मेने परमे ोम धारय ोदसी सुदंसाः.. (७) इं को यु ारा नह , तु त ारा वश म कया जा सकता है. उ ह ने संल न होकर रहने वाले आकाश और धरती को दो जगह कया है. शोभनकमा इं ने सुंदर आकाश म रोदसी को सूय के समान धारण कया है. (७) सना वं प र भूमा व पे पुनभुवा युवती वे भरेवैः. कृ णे भर ोषा श वपु भरा चरतो अ या या.. (८) त णी रा तथा उषा पर पर भ प वाली एवं त दन उ प होने वाली ह. वे आकाश और धरती पर आकर सदा वचरण करती ह. रात काले रंग क एवं उषा उ वल वण वाली ह. (८) सने म स यं वप यमानः सूनुदाधार शवसा सुदंसाः. आमासु च धषे प वम तः पयः कृ णासु श ो हणीषु.. (९) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

शोभनकम वाले, अ त बलसंप एवं सुंदरय से यु इं पहले से ही यजमान के त म ता का भाव रखते आए ह. हे इं ! तुमने भली कार युवती न होने वाली, काले और लाल रंग क गाय म ेत वण का ध धारण कराया है. (९) सना सनीळा अवनीरवाता ता र ते अमृताः सहो भः. पु सह ा जनयो न प नी व य त वसारो अ याणम्.. (१०) हमारी उंग लयां चरकाल से ग तशील रहकर एक साथ नवास करती , आल यहीन होकर अपनी ही श से इं संबंधी हजार य का अनु ान कर चुक ह. वे ही सेवासंल न उंग लयां पालन करने वाली ब हन के समान इं क प रचया करती ह. (१०) सनायुवो नमसा न ो अकवसूयवो मतयो द म द ः. प त न प नी शती श तं पृश त वा शवसाव मनीषाः.. (११) हे दशनीय इं ! लोग मं और णाम के ारा तु हारी तु त करते ह. अ नहो आ द सनातन कम एवं धन क इ छा करने वाले बु मान् लोग बड़े य न के बाद तु ह ा त करते ह. हे बलवान् इं ! जैसे प तकामा ना रयां प त को ा त करती ह, उसी कार बु मान क तु तयां तु हारे पास प ंचती ह. (११) सनादे व तव रायो गभ तौ न ीय ते नोप द य त द म. ुमाँ अ स तुमाँ इ धीरः श ा शचीव तव नः शची भः.. (१२) हे दशनीय इं ! तु हारे हाथ म चरकाल से जो संप है, वह कभी समा त नह होती और तोता को दे ने पर भी कम नह होती. हे इं ! तुम बु मान्, द तसंप तथा य कमयु हो. हे कमठ इं ! अपने कम ारा हम घर दो. (१२) सनायते गोतम इ न मत द् ह रयोजनाय. सुनीथाय नः शवसान नोधाः ातम ू धयावसुजग यात्.. (१३) हे इं ! तुम सबके आ द हो. हे बलवान्! तुम रथ म अपने घोड़े जोड़ते हो एवं शोभन नेता हो. गौतम ऋ ष के पु नोधा ने हमारे न म तु हारा यह नवीन तो बनाया है, इस लए कम के ारा धन ा त करने वाले इं इस तो से आक षत होकर ातःकाल ज द आव. (१३)

सू —६३

दे वता—इं

वं महां इ यो ह शु मै ावा ज ानः पृ थवी अमे धाः. य ते व ा गरय द वा भया ळ् हासः करणा नैजन्.. (१) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हे इं ! तुम गुण क मह ा म सबसे अ धक हो, य क तुमने असुरज य भय उ प होते ही जल हण कया एवं अपने श ुशोषक बल ारा धरती और आकाश को धारण कया. व म ा त सम त ाणी, पवत तथा अ य महान् एवं ढ़ पदाथ तु हारे भय से उसी कार कांपते ह, जस कार आकाश म सूय क करण कांपती ह. (१) आ य री इ व ता वेरा ते व ं ज रता बा ोधात्. येना वहयत तो अ म ा पुर इ णा स पु त पूव ः.. (२) हे इं ! जब तुम अपने व वध कम वाले घोड़ को रथ म जोड़ते हो, तभी तोता तु हारे हाथ म व दे ता है. हे अ न छत कम वाले इं ! तुम उसी व से श ु का व वंस करते हो. हे ब यजमान ारा आ त इं ! तुम उसी व ारा श ु के अनेक पुर का भेदन करते हो. (२) वं स य इ धृ णुरेता वमृभु ा नय वं षाट् . वं शु णं वृजने पृ आणौ यूने कु साय ुमते सचाहन्.. (३) हे इं ! तुम सव कृ एवं इन श ु को हराने वाले हो. तुम ऋभु के वामी, मानव के हतकारक एवं श ु को हराने वाले हो. वीर संहारक एवं श धान यु म तुमने तेज वी एवं युवक कु स के सहायक बनकर शु ण नामक असुर का वध कया. (३) वं ह य द चोद ः सखा वृ ं य वृषकम ु नाः. य शूर वृषमणः पराचै व द यूय ँ नावकृतो वृथाषाट् .. (४) हे वृ क ा एवं व यु इं ! जस समय तुमने कु स के धन को छ नने वाले श ु का वध कया था, हे श ु ेरक, कामवधक एवं सहज ही श ुनाशक इं ! उस समय तुमने यु े म द यु को र भगाकर उनका नाश कया था एवं कु स क सहायता करके उसे यश वी बनाया था. (४) वं ह य द ा रष य ळ् ह य च मतानामजु ौ. १ मदा का ा अवते वघनेव व छ् न थ म ान्.. (५) हे इं ! य प तुम कसी ढ़ को हा न प ंचाना नह चाहते हो, फर भी य द हम तोता को श ु घेर लेते ह तो तुम हमारे घोड़ के चलने के लए सभी दशा को मु कर दे ते हो. हे व धारी इं ! क ठन व से हमारे श ु को मारो. (५) वां ह य द ाणसातौ वम ळ् हे नर आजा हव ते. तव वधाव इयमा समय ऊ तवाजे वतसा या भूत.. (६) जस यु म वृ होने से लोग को लाभ और धन मलने क संभावना होती है, उस म वे सहायता के लए तु ह बुलाते ह. हे बलशाली! यु े म तुम हमारी र ा करो. यु भू म ******ebook converter DEMO Watermarks*******

म यो ा तुमसे र ा ा त करते ह. (६) वं ह य द स त यु य पुरो व पु कु साय ददः. ब हन य सुदासे वृथा वगहो राज व रवः पूरवे कः.. (७) हे व धारी इं ! पु कु स ऋ ष क सहायता के लए उसके श ु से यु करते ए तुमने सात नगर को वद ण कया था. उसी कार तुमने सुदास राजा का प लेकर अंहो नामक असुर का धन कुश के समान छ करने के प ात् उसी ह दाता सुदास को दे दया था. (७) वं यां न इ दे व च ा मषमापो न पीपयः प र मन्. यया शूर य म यं यं स मनमूज न व ध र यै.. (८) हे तेज वी इं ! तुम हमारे सं हणीय धन को व तृत धरती पर पानी के समान बढ़ाओ. हे वीर! जस कार तुमने जल को चार ओर फैलाया है, उसी कार हमारे ाणधारक अ का भी व तार करो. (८) अका र त इ गोतमे भ ा यो ा नमसा ह र याम्. सुपेशसं वाजमा भरा नः ातम ू धयावसुजग यात्.. (९) हे तेज वी इं ! गोतमवंशी ऋ षय ने अ यु तु हारे लए ह व दे ते ए नम कारपूण तु त क थी. तुम हम भां त-भां त के अ से यु बनाओ. (९)

सू —६४ वृ णे शधाय सुमखाय वेधसे नोधः सुवृ अपो न धीरो मनसा सुह यो गरः सम

दे वता—म द्गण भरा म द् यः. े वदथे वाभुवः.. (१)

हे नोधा! कामपूरक, शोभन य संप एवं पु प, फल आ द के नमाणक ा म द्गण के त सुंदर तु तय का उ चारण करो. म हाथ जोड़कर धीरतापूवक मन से उन तु तय का योग करता ,ं जनके ारा दे वसमूह उसी भां त य थल क ओर अ भमुख कया जा सकता है, जस भां त मेघ एक साथ ब त सी बूंद गराते ह. (१) ते ज रे दव ऋ वास उ णो य मया असुरा अरेपसः. पावकासः शुचयः सूया इव स वानो न सनो घोरवपसः.. (२) दशनीय, पौ षयु एवं प म द्गण अंत र से उ प ए ह. म द्गण श ुनाशक, पापर हत, सबको शु करने वाले, सूय करण के समान, गण के तु य बलशाली, वषा क बूंद को धारण करने वाले एवं घोर प ह. (२) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

युवानो ा अजरा अभो घनो वव रु गावः पवता इव. ळ् हा च ा भुवना न पा थवा यावय त द ा न म मना.. (३) युवक एवं जरार हत म द्गण दे वता को ह व न दे ने वाल का नाश करते ह. कोई उनक ग त रोक नह सकता, य क वे पवत के समान ढ़ अंग वाले ह एवं तोता क इ छा पूरी करते ह. वे धरती और आकाश क ढ़ व तु को भी अपने बल से कं पत कर दे ते ह. (३) च ैर भवपुषे फ्जते व ःसु माँ अ ध ये तरे शुभे. अंसे वेषां न ममृ ुऋ यः साकं ज रे वधया दवो नरः.. (४) म द्गण शोभा के लए अपने शरीर को भां त-भां त के आभूषण से वभू षत करते ह एवं सीने पर सुंदर हार पहनते ह. हाथ म आयुध धारण कए ए नेता प म द्गण आकाश से अपनी श के साथ उ प ए थे. (४) ईशानकृतो धुनयो रशादसो वाता व ुत त वषी भर त. ह यूध द ा न धूतयो भू म प व त पयसा प र यः.. (५) म त ने तु तक ा को संप शाली, मेघ आ द को कं पत एवं हसक को समा त करके अपनी श से वायु, बजली आ द को बनाया. इसके बाद चार दशा म जाने वाले एवं सबको कंपाने वाले म त ने आकाश के मेघ को ह कर नकले ए जल से धरती को स चा. (५) प व यपो म तः सुदानवः पयो घृतव दथे वाभुवः. अ यं न महे व नय त वा जनमु सं ह त तनय तम तम्.. (६) ऋ वज् जस कार घी से य भू म को स चते ह, वैसे ही शोभन ग त वाले म त् सारयु जल से सारी धरती को स चते ह, य क घुड़सवार जस कार घोड़े को सखाता है, उसी कार वे वेगशाली मेघ को वषा के न म अपने वश म कर लेते ह एवं झुके ए बादल को जलर हत बना दे ते ह. (६) म हषासो मा यन भानवो गरयो न वतवसो रघु यदः. मृगा इव ह तनः खादथा वना यदा णीषु त वषीरयु वम्.. (७) हे महान् मेधावी, तेज वी, पवत के समान श संप एवं शी ग तशाली म द्गण! तुमने लाल रंग वाली बड़वा को श दान क है, इस लए तुम सूंड़ वाले हाथी के समान वृ समूह को खाते हो. (७) सहा इव नानद त चेतसः पशाइव सु पशो व वेदसः. पो ज व तः पृषती भऋ भः स म सबाधः शवसा हम यवः.. (८) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

उ च ान संप म द्गण सह के समान गजन करते ह, वे सव ह रण के समान शोभन अंग वाले ह. श ुनाशक, तोता को स करने वाले एवं नाशकारी ोधयु बल से संप म द्गण श ु ारा सताए ए यजमान क र ा के न म अपने वाहन ह रण एवं आयुध स हत तुरंत आते ह. (८) रोदसी आ वदता गण यो नृषाचः शूराः शवसा हम यवः. आ व धुरे वम तन दशता व ु त थौ म तो रथेषु वः.. (९) हे म द्गण! तुम गण के प म थत, यजमान के हतसाधक एवं शौयसंप हो. तुम बलशा लय को जब वनाशकारी ोध आ जाता है तो धरती और आकाश को गजन से भर दे ते हो. जस कार नमल प एवं मेघ म थत बजली को सभी लोग दे खते ह, उसी कार सार थस हत रथ म बैठे ए तुम सभी को दखाई दे ते हो. (९) व वेदसो र य भः समोकसः सं म ास त वषी भ वर शनः. अ तार इषुं द धरे गभ योरनंतशु मा वृषखादयो नरः.. (१०) सव , संप शाली, श संप , महान्, श ुनाशक, सोमपायी एवं नेता म द्गण भुजा म आयुध धारण करते ह. (१०) हर यये भः प व भः पयोवृध उ ज न त आप यो३ न पवतान्. मखा अयासः वसृतो ुव यतो कृतो म तो ाज यः.. (११) जस कार माग म जाता आ रथ तनक को चूण करके उड़ा दे ता है, उसी कार वषा के जल का वषण करने वाले म द्गण अपने वण न मत रथ के प हय से मेघ को ऊपर उठा दे ते ह. वे दे व क य भू म म आने वाले, श ु क ओर अपने आप जाने वाले, न ल पवत आ द को चल बनाने वाले एवं चमक ले आयुध वाले ह. वे को वश म कए ह. (११) घृषुं पावकं व ननं वचष ण य सू नुं हवसा गृणीम स. रज तुरं तवसं मा तं गणमृजी षणं वृषणं स त ये.. (१२) हम श ुबलनाशक, सबके प व क ा, वषाकारक, सबके दे खने वाले एवं पु म द्गण क तु त तो ारा करते ह. हे यजमानो! तुम भी धन ा त के न म धूल उड़ाने वाले, बल संप ऋजीष नामक य म आ त तथा कामवषक म त के समीप जाओ. (१२) नू स मतः शवसा जनाँ अ त त थौ व ऊती म तो यमावत. अव वाजं भरते धना नृ भरापृ ं तुमा े त पु य त.. (१३) हे म द्गण! तु हारा आ य एवं र ा ा त करने वाला ******ebook converter DEMO Watermarks*******

सब मनु य से अ धक

बलवान् बन जाता है, वह घोड़ क सहायता से अ एवं अपने सेवक क सहायता से धनलाभ करता है. वह शोभन य का अनु ानक ा एवं जा, पु आ द से संप बनता है. (१३) चकृ यं म तः पृ सु रं ुम तं शु मं मघव सु ध न. धन पृतमु यं व चष ण तोकं पु येम तनयं शतं हमाः.. (१४) हे म द्गण! तुम ह दाता यजमान को ऐसे पु दे ते हो जो सभी काय करने म कुशल, सं ाम म अजेय, तेज वी, श ुनाशक, धनसंप , शंसापा एवं सव ह . हम इस कार के पु एवं पौ को सौ वष जी वत रखगे. (१४) नू रं म तो वीरव तमृतीषाहं र यम मासु ध . सह णं श तनं शूशुवांसं ातम ू धयावसुजग यात्.. (१५) हे म द्गण! हम थर, श शाली एवं श ुजयी पु पी धन दो. हमारे य कम से धन ा त करने वाले, श शाली एवं श ुजयी पु पी धन दो. हमारे य कम से धन ा त करने वाले, म द्गण इस कार के शतसह पु पी धन से यु हमारी र ा के लए आव. (१५)

सू —६५

दे वता—अ न

प ा न तायुं गुहा चत तं नमो युजानं नमो वह तम्. सजोषा धीराः पदै रनु म प ु वा सीद व े यज ाः.. (१-२) जैसे पशु चुराने वाला पशु स हत गुफा म छप जाता है और लोग उसके पैर के च दे खते ए उसके पास तक प ंच जाते ह, उसी कार मेधावी एवं समान म त दे वगण तु हारे चरण च के सहारे तुम तक प ंच गए. य पा सम त दे वगण तु हारे समीप आए थे, अतः तुम वयं ह का भ ण करो और अ य दे व के लए भी ले जाओ. (१-२) ऋत य दे वा अनु ता गुभुव प र न भूम. वध तीमापः प वा सु श मृत य योना गभ सुजातम्.. (३-४) दे व ने भागे ए अ न के कम क खोज क थी. यह खोज चार दशा म क गई. अ न को खोजने के लए इं आ द दे व धरती पर आए थे, इस लए धरती वग के तु य बन गई थी. य के कारणभूत, जल के गभ से उ प एवं ऋ वज क तु तय ारा बु अ न को छपाने के लए जल म वृ ई थी. (३-४) पु न र वा तन पृ वी ग रन भु म ोदो न शंभु. अ यो ना म सग त ः स धुन ोदः क वराते.. (५-६) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

अ न अ भमत के फल क वृ के समान रमणीय, धरती के समान व तीण, पवत के समान सबको भोजन दे ने वाले एवं जल के समान सुख द ह. यु म सतत गमनशील अ एवं बहते ए जल के समान शी गामी अ न को कौन रोक सकता है? (५-६) जा मः स धूनां ातेव व ा म या राजा वना य . य ातजूतो वना थाद नह दा त रोमा पृ थ ाः.. (७-८) अ न ब हन के हतैषी भाई के समान बहने वाले जल के हतैषी ह. अ न श ु के वनाशकारी राजा के समान वन का भ ण करते ह. वायु ारा े रत अ न जस समय वन को जलाते ह, उस समय पृ वी के रोग के समान सभी वन प तयां समा त हो जाती ह. (७-८) स य सु हंसो न सीदन् वा चे त ो वशामुषभुत्. सोमो न वेधा ऋत जातः पशुन श ा वभु रेभाः.. (९-१०) जस कार हंस पानी म बैठता है, उसी कार ातःकाल जागकर सबको सावधान करने वाला अ न जल म रहकर श ा त करता है. अ न सोम के समान सभी ओष धय को बढ़ाते एवं गभ म थत शशु के समान जल म सकुड़ कर बैठे थे. जब अ न ने वृ क तो इसका काश र तक फैल गया. (९-१०)

सू —६६

दे वता—अ न

र यन च ा सूरो न सं गायुन ाणो न यो न सूनुः. त वा न भू णवना सष पयो न धेनुः शु च वभावा.. (१-२) धन के समान व च प, सूय के समान सभी व तु को दखाने वाले, ाणवायु के समान जीवन सं थापक, पु के समान यकारी, ग तशील अ के समान लोकवाहन एवं गाय के समान पोषणकारी, द त एवं व श काशयु अ न वन को जलाने के लए आते ह. (१-२) दाधार म े मोको न र यो यवो न प वो जेता जनानाम्. ऋ षन तु वा व ु श तो वाजी न ीतो वयो दधा त.. (३-४) रमणीय घर के समान तोता को दए ए धन क र ा म समथ, पके ए जौ के समान सबके उपभोग यो य, मं ा ऋ षय के समान दे व के तु तक ा, यजमान म स एवं अ के समान हषयु अ न हम अ द. (३-४) रोकशो चः तुन न यो जायेव योनावरं व मै. च ो यद ाट् छ्वेतो न व ु रथो न मी वेषः सम सु.. (५-६) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

ा य तेज वाले अ न य कम करने वाले के समान न य, घर म बैठ ई प नी के समान य गृह के आभूषण, व च द त वाले होकर चमकने पर सूय के समान शु वण, जा के म य वण न मत रथ के समान तेज वी एवं सं ाम म भावशाली ह. (५-६) सेनेव सृ ामं दधा य तुन द ु वेष तीका. यमो ह जातो यमो ज न वं जारः कनीनां प तजनीनाम्.. (७-८) अ न सेनाप त के साथ वतमान सेना अथवा धानु क के द तमुख बाण के समान श ु को भय द ह. उ प एवं भ व य म ज म लेने वाला भूतसंघ अ न ही ह. वे कुमा रय के जार एवं ववा हता के प त ह. (७-८) तं व राथा वयं वस या तं न गावो न त इ म्. स धुन ोदः नीचीरैनो व त गावः व१ शीके.. (९-१०) जस कार गाय पशुशाला म प ंचती है, उसी कार हम पशु एवं धा य संबंधी आ तयां लेकर व लत अ न के समीप जाते ह. वे न नगामी जल के समान इधर-उधर वालाएं फैलाते है. दशनीय अ न क करण आकाश म मल जाती ह. (९-१०)

सू —६७

दे वता—अ न

वनेषु जायुमतषेु म ो वृणीते ु राजेवाजुयम्. ेमो न साधुः तुन भ ो भुव वाधीह ता ह वाट् .. (१-२) जस कार राजा जरार हत का आदर करता है, उसी कार अर य म यजमान एवं मानव सखा अ न शी ही यजमान पर कृपा करते ह. र क के समान कमसाधक, कायक ा के समान क याणकारी, दे व का य म आ ान करने वाले एवं ह वहन करने वाले अ न शोभनकमा ह. (१-२) ह ते दधानो नृ णा व ा यमे दे वा धाद्गुहा नषीदन्. वद तीम नरो धय धा दा य ा म ाँ अशंसन्.. (३-४) सम त ह प धन अपने हाथ म लेकर अ न के गुफा म छप जाने पर सभी दे व भयभीत हो गए. नेता एवं बु धारक दे व ने य ही बु न मत मं ारा अ न क तु त क , य ही अ न को पा लया. (३-४) अजो न ां दाधार पृ थव त त भ ां म े भः स यैः. या पदा न प ो न पा ह व ायुर ने गुहा गुहं गाः.. (५-६) अ न सूय के समान धरती और अंत र

को धारण करने के साथ-साथ साथक मं

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ारा आकाश को भी धारण कए ह. हे संपूण अ के वामी अ न! पशु के क र ा करो एवं ऐसे थान म जाओ जो गाय के संचार के अयो य हो. (५-६)

य थान

य चकेत गुहा भव तमा यः ससाद धारामृत य. व ये चृत यृता सप त आ द सू न ववाचा मै.. (७-८) अ न दे व ऐसे लोग को अ वलंब धन दान करते ह जो य थल म वतमान अ न को जानते ह, स य के धारणक ा ह व अ न के उ े य से तु तयां करते ह. (७-८) व यो वी सु रोध म ह वोत जा उत सू व तः. च रपां दमे व ायुः स ेव धीराः संमाय च ु ः.. (९-१०) मेधावी पु ष ओष धय म उनके गुण अव करने वाले, मातृ प ओष धय म पु प, फल आ द था पत करने वाले, जल म य थ य गृह म वतमान, ानदाता एवं सम त अ के वामी अ न क पहले घर के समान पूजा करके बाद म कम करते ह. (९-१०)

सू —६८

दे वता—अ न

ीण ुप था वं भुर युः थातु रथम ू ूण त्. प र यदे षामेको व ेषां भुव े वो दे वानां म ह वा.. (१-२) ह धारणक ा अ न ध आ द हवनीय को मलाते ए आकाश म प ंच जाते ह तथा अपने तेज ारा थावर, जंगम व के साथ-साथ रा को भी का शत करते ह. अ न इं ा द सम त दे व क अपे ा काशमान एवं थावर, जंगम को ा त कए ह. (१-२) आ द े व े तुं जुष त शु का े व जीवो ज न ाः. भज त व े दे व वं नाम ऋतं सप तो अमृतमेवैः.. (३-४) हे तेज वी अ न! तुम व लत होते ए अर ण प सूखे का से जब जब उ प होते हो, तभी यजमान य कम आरंभ करते ह. वे यजमान तो ारा तुझ मरणर हत अ न क सेवा करके दे व व ा त करते ह. (३-४) ऋत य ेषा ऋत य धी त व ायु व े अपां स च ु ः. य तु यं दाशा ो वा ते श ा मै च क वा य दय व.. (५-६) य ही अ न य भू म म पधारते ह, य ही उनक तु तयां एवं य कम आरंभ हो जाते ह. सब यजमान अ के वामी अ न को ल य करके य करते ह. हे अ न! जो यजमान तु ह ह दे ता है अथवा तु हारे य कम क श ा ा त करता है, तुम उसके कम को जानते ए उसे धन दो. (५-६) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

होता नष ो मनोरप ये स च वासां पती रयीणाम्. इ छ त रेतो मथ तनूषु सं जानत वैद ैरमूराः.. (७-८) हे अ न! तुम मनु क जा प यजमान के दे व आ ानकारी एवं उनके धन के वामी थे. उन जा ने पु उ प करने क इ छा से अपने शरीर म वीय क अ भलाषा क थी. वे मोह याग कर अपने समथ पु के साथ चरकाल तक जी वत ह. (७-८) पतुन पु ाः तुं जुष त ोष ये अ य शासं तुरासः. व राय औण रः पु ुः पपेश नाकं तृ भदमूनाः.. (९-१०) जस कार पु पता क आ ा का पालन करता है, उसी कार यजमान शी तापूवक अ न क आ ा सुनते ह एवं उनके आदे श के अनुसार काय करते ह. व वध अ के वामी अ न धन दे ते ह, जो य का साधन है. य गृह के त आस रखने वाले अ न ने आकाश को न से सुशो भत कया. (९-१०)

सू —६९

दे वता—अ न

शु ः शुशु वाँ उषो न जारः प ा समीची दवो न यो तः. प र जातः वा बभूथ भुवो दे वानां पता पु ः सन्.. (१-२) शु वण अ न उषा के जार सूय के समान सभी पदाथ को का शत करते ह एवं काशक सूय के समान अपने तेज से धरती और आकाश को भर दे ते ह. हे अ न! तुम ा भूत होकर अपने कम से सारे संसार को ा त कर लेते हो. तुम पु के समान दे व के त होते ए भी पता के समान उनके पालक हो. (१-२) वेधा अ तो अ न वजान ूधन गोनां वा ा पतूनाम्. जने न शेव आ यः स म ये नष ो र वो रोणे.. (३-४) मेधावी, दपर हत एवं क -अक को जानने वाले अ न उसी कार सम त अ को वा द बना दे ते ह, जस कार गाय का तन बनाता है. अ न य म बुलाए जाने पर लोक सुखकारी पु ष के समान य थल म आकर बैठते ह. (३-४) पु ो न जातो र वो रोणे वाजी न ीतो वशो व तारीत्. वशो यद े नृ भ सनीळा अ नदव वा व य याः.. (५-६) य गृह म उ प होकर अ न पु के समान आनंदकारी एवं स होकर सं ाम म अ के समान श ु को भगाने वाले ह. जब म ऋ षय के साथ मलकर एक नवास करने वाले दे व को बुलाता ं तो यह अ न वयं ही उन दे वता का प बना लेते ह. (५-६) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

न क एता ता मन त नृ यो यदे यः ु चकथ. त ु ते दं सो यदह समानैनृ भय ु ो ववे रपां स.. (७-८) हे अ न! रा सा द बाधक तुमसे संबं धत य का वनाश नह कर पाते, य क उन कम म संल न यजमान को तुम फल के प म सुख दान करते हो. य द तु हारे कम को रा सा द न करते ह तो तुम अपने साथी नेता म द्गण को लेकर उ ह भगा दे ते हो. (७-८) उषो न जारो वभावो ः सं ात प केतद मै. मना वह तो रो ृ व व त व े व१ शीके.. (९-१०) उषा के जार सूय के समान काशयु , नवास यो य एवं व व दत व प वाले अ न यजमान को जान. अ न क करण वयं ही ह वहन करती ई एवं य गृह के ार को ा त करती ई दशनीय आकाश म फैलती ह. (९-१०)

सू —७०

दे वता—अ न

वनेम पूव रय मनीषा अ नः सुशोको व ा य याः. आ दै ा न ता च क वाना मानुष य जन य ज म.. (१-२) बु ारा ा त , शोभनद त संप , दे व के त एवं मानव के ज म प कम समझकर सारे काय म ा त अ क याचना करते ह. (१-२) गभ यो अपां गभ वनानां गभ थातां गभ रथाम्. अ ौ चद मा अ त रोणे वशां न व ो अमृतः वाधीः.. (३-४) जो अ न जल, अर य, थावर एवं जंगम के गभ म थत रहते ह, उ ह लोग य मंडप एवं पवत के ऊपर ह व दे ते ह. जा के सुख का इ छु क राजा जस कार उनक र ा करता है, उसी कार मरणर हत अ न हमारे त शोभन कम कर. (३-४) स ह पावाँ अ नी रयीणां दाश ो अ मा अरं सू ै ः. एता च क वो भूमा न पा ह दे वानां ज म मता व ान्.. (५-६) जो यजमान मं ारा अ न क तु त करता है, रा के वामी अ न उसे धन दे ते ह. हे सव अ न! तुम दे व एवं मानव के ज म के वषय म जानते ए ा णसमूह का पालन करो. (५-६) वधा यं पूव ः पो व पाः थातु रथमृत वीतम्. अरा ध होता व१ नष ः कृ व व ा यपां स स या.. (७-८) उषा और रा का प भ है, फर भी वे अ न क वृ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

करती ह. इसी कार

थावर एवं जंगम अमृत प उदक घरी ई अ न को बढ़ाते ह. दे वय म थत होकर दे व को बुलाने वाले अ न सम त य कम को स यफल दे ते ए आरा धत ह . (७-८) गोषु श तं वनेषु धषे भर त व े ब ल वणः. व वा नरः पु ा सपय पतुन ज े व वेदो भर त.. (९-१०) हे अ न! हमारे काम आने वाले गाय आ द पशु को शंसनीय बनाओ. सम त मनु य हमारे लए भट के प म धन लाव. जस कार वृ पता से पु धन पाता है, उसी कार यजमान अनेक दे वय के थल म तु हारी भां त-भां त से सेवा करते एवं धनलाभ करते ह. (९-१०) साधुन गृ नुर तेव शूरो यातेव भीम वेषः सम सु.. (११) अ न साधक के समान सम त ह वीकार करते ह. वे धानु क के समान शूर, श ु के समान भयंकर एवं सं ाम म द त होकर हमारी सहायता कर. (११)

सू —७१

दे वता—अ न

उप ज व ुशती श तं प त न न यं जनयः सनीळाः. वसारः यावीम षीमजु च मु छ तीमुषसं न गावः.. (१) कामना करने वाली एवं एक साथ नवास करने वाली उंग लयां ह क अ भलाषा करने वाले अ न को ह दे कर उसी कार स करती ह, जस कार ववा हता नारी अपने प त को स करती है. पहले कृ णवण धारण करने वाली उषा क सेवा जस कार सूय करण करती ह, उसी कार उंग लयां पूजनीय अ न क अंज लबंधन से सेवा करती ह. (१) वीळु चद्वृळ्हा पतरो न उ थैर ज ङ् गरसो रवेण. च ु दवो बृहतो गातुम मे अहः व व व ः केतुमु ाः.. (२) हमारे पतर अं गरा ने मं ारा अ न क तु त करके उस तु त श द ारा ही बलवान् एवं ढ़ प ण असुर को समा त कया था एवं हमारे लए महान् ुलोक का माग बनाया था. इसके प ात् उ ह ने सुखपवक ा य दवस, संसार काशक सूय एवं प णय ारा चुराई गई गाय को जाना था. (२) दध त ृ ं धनय य धी तमा ददय द ध वो३ वभृ ाः. अतृ य तीरपसो य य छा दे वा म यसा वधय तीः.. (३) जस कार लोग धन धारण करते ह, उसी कार अं गरावंशी ऋ षय ने य क अ न ******ebook converter DEMO Watermarks*******

को धारण कया था. जो यजमान धन के वामी ह जो अ य वषय क तृ णा से र हत होकर अ न को धारण करते ए य कम म संल न रहते ह, वे ह व प अ के ारा दे व और मानव क वृ करते ए अ न के स मुख जाते ह. (३) मथी द वभृतो मात र ा गृहेगृहे येतो जे यो भूत्. आद रा े न सहीयसे सचा स ा यं१ भृगवाणो ववाय.. (४) ान पी वायु अ न को जब-जब मथते ह, तब-तब यह शु वण अ न सम त य गृह म उ प होते ह. जस कार म ता का आचरण करता आ राजा बली राजा के समीप अपना त भेजता है, उसी कार भृगु ऋ ष ने अ न को त के काम म लगाया. (४) महे य प रसं दवे करव सर पृश य क वान्. सृजद ता धृषता द ुम मै वायां दे वो हत र व ष धात्.. (५) हे अ न! जब यजमान महान् एवं पालनक ा दे वगण के लए धरती का सारभूत रस दे ता है, तब पश करने म कुशल रा स आ द तु ह ह वाहक जानकर पलायन कर जाते ह. बाण फकने म कुशल अ न अपने श ुनाशक धनुष से उन भागते ए रा स आ द पर काशयु बाण फकते ह एवं अपनी पु ी उषा म द तमान् अ न दे व अपना तेज था पत करते ह. (५) व आ य तु यं दम आ वभा त नमो वा दाशा शतो अनु ून्. वध अ ने वयो अ य बहा यास ाया सरथं यं जुना स.. (६) हे बहा अ न दे व! जो यजमान तु ह अपने य गृह म शा ीय मयादा के अनुसार का से चार ओर व लत करता है एवं कामना करने वाले तु हारे लए त दन नम कार करता है, तुम उसके अ क वृ करते हो. जो रथस हत यु ा भलाषी पु ष को रण म े रत करता है, वह पु ष धन ा त करता है. (६) अ नं व ा अ भ पृ ः सच ते समु ं न वतः स त य ः. न जा म भ व च कते वयो नो वदा दे वेषु म त च क वान्.. (७) जस कार वशाल सात स रताएं सागर के पास प ंचती ह, उसी कार सम त ह अ अ न को ा त होते ह. हमारे पास इतना कम अ है क हमारी जा त वाले उसका भाग नह पाते. इस लए तुम दे व म मननीय धन को जानकर हम ा त कराओ. (७) आ य दषे नृप त तेज आनट् छु च रेतो न ष ं ौरभीके. अ नः शधमनव ं युवानं वा यं जनय सूदय च.. (८) अ न का शु एवं द त तेज अ के लए जठरा न के प म यजमान को ा त कर ले. उसी तेज ारा प रप व वीय गभ थान म प ंचकर पु उ प करे तथा उसे शुभ कम म ******ebook converter DEMO Watermarks*******

े रत करे. (८) मनो न योऽ वनः स ए येकः स ा सुरो व व ईशे. राजाना म ाव णा सुपाणी गोषु यममृतं र माणा.. (९) आकाश माग म मन के समान शी जाने वाले एकाक सूय अनेक थान म रखे ए धन को ा त करते ह. काशमान एवं सुंदर बा यु म और व ण स ताकारक तथा अमृत तु य ध क र ा करते ए हमारी गाय म थत रह. (९) मा नो अ ने स या प या ण म ष ा अ भ व क वः सन्. नभो न पं ज रमा मना त पुरा त या अ भश तेरधी ह.. (१०) हे अ न! हमारे त तु हारी जो परंपरागत म ता है, उसे न मत करो, य क तुम भूत, भ व यत् एवं वतमान सबके ाता हो. जस कार आकाश को सूय क करण ढक लेती ह, उसी कार हमारा वनाश करने वाले बुढ़ापे को हमसे र रखने का य न करो. (१०)

सू —७२

दे वता—अ न

न का ा वेधसः श त कह ते दधानो नया पु ण. अ नभुव यपती रयीणां स ा च ाणो अमृता न व ा.. (१) मनु य के लए हतकारक धन हाथ म धारण करते ए न य एवं ानसंप अ न संबंधी मं को वीकार करते ह. तु तक ा को अमृत दान करते ए अ न उ कृ धन के वामी होते ह. (१) अ मे व सं प र ष तं न व द छ तो व े अमृता अमूराः. मयुवः पद ो धयंधा त थुः पदे परमे चाव नेः.. (२) मरणर हत सम त दे वगण एवं मोहहीन म द्गण चाहने पर भी हमारे य एवं सब ओर वतमान अ न को ा त नह कर सके. अ न के बना वे ःखी हो गए एवं पैदल चलते ए थक कर काश को दे खते ए अ न के थान म उप थत ए. (२) त ो यद ने शरद वा म छु च घृतेन शुचयः सपयान्. नामा न च धरे य या यसूदय त त व१: सुजाताः.. (३) हे शु अ न! द तसंप म त ने तीन वष तक घृत से तु हारी पूजा क , तब तुम कट ए. तभी तु हारी अनुकंपा से उ ह ने य म योग करने यो य नाम एवं शरीर ा त कए. (३) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

आ रोदसी बृहती वे वदानाः या ज रे य यासः. वद मत नेम धता च क वान नं पदे परमे त थवांसम्.. (४) य पा दे व ने व तृत आकाश एवं धरती के बीच रहकर अ न के यो य तु तयां क थ . म द्गण ने इं के साथ जाना क अ न उ म थान म छपे ह. इसके प ात् उ ह ा त कया. (४) संजानाना उप सीद भ ु प नीव तो नम यं नम यन्. र र वांस त वः कृ वत वाः सखा स यु न म ष र माणाः.. (५) हे अ न! दे वगण तु ह भली कार जानकर बैठ गए एवं अपनी य के साथ तु हारी पूजा करने लगे. तुम उनके सामने घुटन के सहारे बैठे थे. दे वता तु हारे सखा एवं तु हारे ारा र त थे. उ ह ने अपने म अ न को दे खा तो अपने शरीर को सुखाते ए य करने लगे. (५) ः स त यद्गु ा न वे इ पदा वद हता य यासः. तेभी र ते अमृतं सजोषाः पशू च थातॄ चरथं च पा ह.. (६) हे अ न! यजमान ने तु हारे भीतर छपे ए इ क स त व को जाना. जानकर वे उ ह से तु हारी र ा करते ह. तुम यजमान के त उतना ेम रखते ए उनके पशु एवं थावर-जंगम धन क र ा करो. (६) व ाँ अ ने वयुना न तीनां ानुष छु धो जीवसे धाः. अ त व ाँ अ वनो दे वयानानत ो तो अभवो ह ववाट् .. (७) हे अ न! सम त ात बात को जानते ए तुम यजमान पी जा के जीवन के लए भूख पी रोग को र करो. धरती और आकाश के म य दे व के जाने के माग को जानते ए तुम आल य छोड़कर दे व के त प म ह व वहन करो. (७) वा यो दव आ स त य रायो रो ृत ा अजानन्. वदद्ग ं सरमा हमूव येना नु कं मानुषी भोजते वट् .. (८) हे अ न! तुमने शोभन कम यु सात महान् न दय को आकाश से नकालकर धरती पर बहाया है. य को जानने वाले अं गरागो ीय ऋ षय ने बल नामक असुर ारा चुराई गई गाय का माग तुमसे जाना था. तु हारी ही कृपा से सरमा ने अं गरा से गो ध पाया था. उसी गो ध से मानव क र ा होती है. (८) आ ये व ा वप या न त थुः कृ वानासो अमृत वाय गातुम्. म ा मह ः पृ थवी व त थे माता पु ैर द तधायसे वेः.. (९) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

आ द य ने अमरण भाव क स के लए उपाय करते ए पतनर हत होने के लए कम कए एवं उन महानुभाव के स हत उनक अद ना माता पृ वी ने सम त जगत् को धारण करने के लए वशेष मह व ा त कया था. हे अ न दे व! यह सब इसी कारण हो सका क तुमने उस य का ह व भ ण कया था. (९) अ ध यं न दधु ा म म दवो यद ी अमृता अकृ वन्. अध र त स धवो न सृ ाः नीचीर ने अ षीरजानन्.. (१०) यजमान ने इस अ न म शोभन य संप था पत क एवं य का च ु प घृत डाला. इससे मरणर हत दे व य का समय जानकर आए. हे अ न! तु हारी काशयु वालाएं स रता के समान सम त दशा म फैल ग एवं आए ए दे व ने उ ह जाना. (१०)

सू —७३

दे वता—अ न

र यन यः पतृ व ो वयोधाः सु णी त कतुषो न शासुः. योनशीर त थन ीणानो होतेव स वधतो व तारीत्.. (१) अ न पैतृक धन के समान अ दान करते ह. वे धमशा के व ान् के समान सरल नेता ह. वे सुखासन से बैठे ए अ त थ के समान तपणीय एवं होमक ा के समान यजमान के घर क उ त करते ह. (१) दे वो न यः स वता स यम मा वा नपा त वृजना न व ा. पु श तो अम तन स य आ मेव शेवो द धषा यो भूत्.. (२) जो अ न काश यु सूय के समान यथाथदश होकर अपने कम से लोग को सब ःख से बचाते ह, यजमान से शं सत होकर प के समान प रवतनहीन एवं आ मा के समान सुखदायक ह, ऐसे अ न को सब यजमान धारण करते ह. (२) दे वो न यः पृ थव व धाया उप े त हत म ो न राजा. पुरः सदः शमसदो न वीरा अनव ा प तजु ेव नारी.. (३) जो अ न काशवान् सूय के समान सारे जगत् को धारण करते ह, अनुकूल म वाले राजा के समान धरती पर नवास करते ह एवं जस अ न के सामने संसार इस कार बैठता है, जैसे पु पता के स मुख, वे अ न अ न दता एवं प त ारा वीकृत नारी के समान शु कम वाले ह. (३) तं वा नरो दम आ न य म म ने सच त तषु ुवासु. अ ध ु नं न दधुभूय म भवा व ायुध णो रयीणाम्.. (४) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हे अ न! यजमान उप वर हत गांव म बने अपने य गृह म नरंतर का जलाकर सामने बैठे तु हारी सेवा करते ह एवं अनेक कार का ह अ दे ते ह. तुम सब अ के वामी बनकर हम दे ने के लए धन धारण करो. (४) व पृ ो अ ने मघवानो अ यु व सूरयो ददतो व मायुः. सनेमं वाजं स मथे वय भागं दे वेषु वसे दधानाः.. (५) हे अ न! ह व प धन से यु यजमान अ ा त कर एवं तु हारी तु त करने वाले तथा ह व दे ने वाले व ान् संपूण जीवन ा त कर. हम सं ाम म श ु के अ पर अ धकार करने के प ात् यश के लए दे व को ह व का भाग द. (५) ऋत य ह धेनवो वावशानाः म नीः पीपय त भ ु ाः. परावतः सुम त भ माणा व स धवः समया स रु म्.. (६) अ न क बार-बार अ भलाषा करती न य धशा लनी एवं तेज वनी गाएं य दे श म ा त अ न को ध पलाती ह. बहती ई स रताएं अ न से अनु ह क याचना करती पवत के समीप से र दे श को बहती ह. (६) वे अ ने सुम त भ माणा द व वो द धरे य यासः. न ा च च ु षसा व पे कृ णं च वणम णं च सं धुः.. (७) हे ोतमान अ न! य के वामी दे व ने तु हारे अनु ह क याचना करते ए तुम म ह व था पत कया. इसके प ात् इस अनु ान के न म उषा और रा को भ - भ पवाला बनाया अथात् नशा को काला और उषा को अ ण बनाया. (७) या ाये मता सुषूदो अ ने ते याम मघवानो वयं च. छायेव व ं भुवनं सस याप वा ोदसी अ त र म्.. (८) हे अ न! तुम जन लोग को धन ा त करने के लए य कम के त े रत करते हो, वे और हम य ा त कर. तुमने आकाश, धरती और अंत र को अपने तेज से भर दया है तथा तुम छाया के समान सारे संसार क र ा करते हो. (८) अव र ने अवतो नृ भनॄ वीरैव रा वनुयामा वोताः. ईशानासः पतॄ व य रायो व सूरयः शत हमा नो अ युः.. (९) हे अ न! तु हारे ारा र त होकर हम अपने अ से श ु के अ का, अपने भट ारा श ु के भट का एवं अपने पु क सहायता से श ु के पु का वध करगे. परंपरा से ा त धन के वामी एवं व ान् हमारे पु सौ वष जी वत रहकर सुख भोग. (९) एता ते अ न उचथा न वेधो जु ा न स तु मनसे दे च. ******ebook converter DEMO Watermarks*******

शकेम रायः सुधरो यमं तेऽ ध वो दे वभ ं दधानाः.. (१०) हे अ न! हमारे सम त तो तु हारे मन और अंतःकरण को य ह . हम दे व के भोग करने यो य धन तुम म था पत करके तु हारे उस धन क र ा करना चाहते ह जो हमारी द र ता मटा सके. (१०)

दे वता—अ न

सू —७४

उप य तो अ वरं म ं वोचेमा नये. आरे अ मे च शृ वते.. (१) र रहकर भी हमारी तु तयां सुनने वाले एवं य अ न क हम तु त करते ह. (१) यः नी हतीषु पू ः संज मानासु कृ षु. अर श ु भाव से पूण एवं ह या करने म वृ जा के धन के र क अ न क हम तु त करते ह. (२) उत ुव तु ज तव उद नवृ हाज न. धन

म शी ता से उप थत होने वाले

ाशुषे गयम्.. (२) के म य थत ह व दे ने वाले यजमान

यो रणेरणे.. (३)

श ुनाशक एवं सं ाम म श ु के धन पर अ धकार करने वाले अ न के उ प होते ही सब लोग उनक तु त कर. (३) य य तो अ स ये वे ष ह ा न वीतये. द म कृणो य वरम्.. (४) हे अ न! जस यजमान के य गृह म तुम दे व त बनकर आते हो एवं उन दे व के भोग के लए ह व हण करके य क शोभा बढ़ाते हो. (४) त म सुह म रः सुदेवं सहसो यहो. जना आ ः सुब हषम्.. (५) हे बलपु अ न! उसी यजमान को सब लोग शोभन ह वसंप , सुंदर दे व वाला एवं उ म य यु कहते ह. (५) आ च वहा स ताँ इह दे वाँ उप श तये. ह ा सु

वीतये.. (६)

हे शोभन एवं आ ादक अ न! हमारी तु त वीकार करने के लए इस य म दे व को हमारे समीप ले आओ एवं उनके भ ण के लए ह दान करो. (६) न यो प दर

ः शृ वे रथ य क चन. यद ने या स

यम्.. (७)

हे अ न! जब तुम दे व के त बनकर जाते हो तो शी चलने के कारण तु हारे रथ का ******ebook converter DEMO Watermarks*******

श द नह सुनाई पड़ता. (७) वोतो वा य योऽ भ पूव मादपरः.

दा ाँ अ ने अ थात्.. (८)

हे अ न! नकृ पु ष भी तु ह ह दान करके तु हारे ारा र त अ का वामी एवं ऐ यशाली बन जाता है. (८) उत ुम सुवीय बृहद ने ववास स. दे वे यो दे व दाशुषे.. (९) हे काशमान अ न! दे व को ह धन दो. (९)

दे ने वाले यजमान को ौढ़, द त एवं श

संप

दे वता—अ न

सू —७५

जुष व स थ तमं वचो दे व सर तमम्. ह ा जु ान आस न.. (१) हे अ न दे व! अपने मुख म ह हण करते ए दे व को भली कार स करो एवं हमारी व तीण तु तयां वीकार करो. (१) अथा ते अ र तमा ने वेध तम

यम्. वोचेम

सान स.. (२)

हे अं गरागो ीय ऋ षय एवं मेधा वय म े अ न! हम तु हारे हण करने यो य एवं स तादायक तो का उ चारण करते ह. (२) क ते जा मजनानाम ने को दा

वरः. को ह क म स

तः.. (३)

हे अ न! मनु य के बीच म तु हारा बंधु कौन है? कौन तु हारा य करने म समथ है? अथात् कोई नह . तुम कौन हो और कहां रहते हो? (३) वं जा मजनानाम ने म ो अ स हे अ न! तुम सबके बंधु एवं

यः. सखा स ख य ई

य म हो. तुम म

ः.. (४)

के तु त यो य म हो. (४)

यजा नो म ाव णा यजा दे वाँ ऋतं बृहत्. अ ने य

वं दमम्.. (५)

हे अ न! हमारे न म म , व ण एवं अ य दे व को ल य करके यजन करो. तुम वशाल एवं यथाथ फल वाले य को पूरा करने के लए अपने य गृह म जाओ. (५)

सू —७६

दे वता—अ न

का त उपे तमनसो वराय भुवद ने शंतमा का मनीषा. ******ebook converter DEMO Watermarks*******

को वा य ैः प र द ं त आप केन वा ते मनसा दाशेम.. (१) हे अ न! हमारे त तु हारा मन स होने का या उपाय है? तु ह सुख दे ने वाली तु त कैसी होगी? तु हारी मता के अनुकूल य कौन यजमान कर सकता है? हम कस मन से तु ह ह दान कर? (१) ए न इह होता न षीदाद धः सु पुरएता भवा नः. अवतां वा रोदसी व म वे यजा महे सौमनसाय दे वान्.. (२) हे अ न! इस य म आओ और दे व के आ ानक ा बनकर बैठो. रा सा द तु हारी हसा नह कर सकते, इस लए तुम हमारे अ गामी नेता बनो. तुम सम त आकाश एवं धरती ारा र त होकर दे व को परम स करने के लए ह व ारा उनक पूजा करो. (२) सु व ा सो ध य ने भवा य ानाम भश तपावा. अथा वह सोमप त ह र यामा त यम मै चकृमा सुदा ने.. (३) हे अ न! सम त रा स को भली कार न करके हसा से य क र ा करो. संपूण सोमरस के पालनक ा इं को उसके ह र नामक अ स हत इस य म लाओ, य क हम शोभन फलदाता इं का अ त थ स कार करगे. (३) जावता वचसा व रासा च वे न च स सीह दे वैः. वे ष हो मुत पो ं यज बो ध य तज नतवसूनाम्.. (४) म मुख ारा ह हण करने वाले अ न का आ ान ऐसे तो ारा करता ं जो संतान आ द फल दे ने म समथ ह. हे य कम यो य अ न! तुम अ य दे व के साथ बैठो एवं होता तथा पोता ारा कए जाने वाले कम करो. तुम धन के वामी एवं सबके ज मदाता बनकर हम जगाओ. (४) यथा व य मनुषो ह व भदवाँ अयजः क व भः क वः सन्. एवा होतः स यतर वम ा ने म या जु ा यज व.. (५) हे अ न! तुमने ांतदश बनकर मेधावी ऋ वज के साथ जस कार मेधावी मनु के य मह ारा दे व क पूजा क थी, हे य संप क ा साधु अ न! इसी कार तुम इस य म दे व क पूजा आनंददायक जु नामक ुक् ारा करो. (५)

सू —७७

दे वता—अ न

कथा दाशेमा नये का मै दे वजु ो यते भा मने गीः. यो म य वमृत ऋतावा होता य ज इ कृणो त दे वान्.. (१) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

मरणर हत, स ययु , दे व का आ ान करने वाले, य पूण कराने वाले एवं मनु य के बीच नवास करके भी दे व को ह वयु करने वाले अ न के अनु प ह हम कैसे दे सकगे? हम तेज वी अ न के त दे वो चत तु त कस कार करगे. (१) यो अ वरेषु शंतम ऋतावा होता तमू नमो भरा कृणु वम्. अ नय े मताय दे वा स चा बोधा त मनसा यजा त.. (२) हे यजमानो! जो अ न य म अ तशय सुखकारी, यथाथदश और दे व का आ ान करने वाले ह, उ ह तु तय ारा हमारे अ भमुख करो. जस समय अ न यजमान के न म दे व के समीप जाते ह, उस समय वे दे व को य पा जानकर मन से उनक पूजा करते ह. (२) स ह तुः स मयः स साधु म ो न भूद त य रथीः. तं मेधेषु थमं दे वय ती वश उप ुवते द ममारीः.. (३) दे व क अ भलाषा करने वाली जाएं य क ा, व संहारक, उ पादनक ा, म के समान अ ा त धन के ा त कराने वाले एवं दशनीय अ न के समीप जाकर उ ह य का धान दे व मानत एवं उनक तु त करती ह. (३) स नो नृणां नृतमो रशादा अ न गरोऽवसा वेतु धी तम्. तना च ये मघवानः श व ा वाज सूता इषय त म म.. (४) य के नेता के म य अ तशय नेता एवं श ु के भ णक ा अ न हमारी तु तय एवं ह से यु य क कामना कर. जो धनी और श शाली यजमान ह दान करके अ न के मननीय तो को करना चाहते ह, अ न भी उनक तु त क कामना कर. (४) एवा नग तमे भऋतावा व े भर तो जातवेदाः. स एषु ु नं पीपय स वाजं स पु या त जोषमा च क वान्.. (५) य के वामी एवं सव ाता अ न क गौतम आ द ऋ षय ने इसी कार तु त क थी. अ न ने स होकर उन ऋ षय का तेज वी सोम पया था एवं अ भ ण कया था. वे अ न हमारे ारा दए ह को जानकर पु होते ह. (५)

सू —७८ अ भ वा गोतमा गरा जातवेदो वचषणे. ु नैर भ

दे वता—अ न णोनुमः.. (१)

हे जातवेद एवं सवदशक अ न! गौतम ऋ ष ने तु हारी तु त क थी. हम भी तु हारे गुण काशक मं से बार-बार तु हारी तु त करते ह. (१) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

तमु वा गोतमो गरा राय कामो व य त. ु नैर भ

णोनुमः.. (२)

धन क इ छा वाले गौतम ऋ ष जस अ न क तो ारा सेवा करते ह, हम भी गुण काशक तो ारा उसी अ न क बार-बार तु त करते ह. (२) तमु वा वाजसातमम र व वामहे. ु नैर भ

णोनुमः.. (३)

हे अ न! हम अं गरा ऋ ष के समान सवा धक अ दे ने वाले तु ह बुलाते ह एवं तु हारे गुण काशक मं से बार-बार तु त करते ह. (३) तमु वा वृ ह तमं यो द यूंरवधूनुषे. ु नैर भ

णोनुमः.. (४)

हे अ न! तुम द यु एवं अनाय को थान युत करो. हम सवापे ा श ुहंता तु हारी तु त तु हारे गुण काशक मं से बार-बार करते ह. (४) अवोचाम र गणा अ नये मधुम चः. ु नैर भ

णोनुमः.. (५)

म र गणवंशीय गौतम अ न के त मधुरवचन का योग करता आ गुण काशक तो ारा उनक बार-बार तु त करता ं. (५)

सू —७९

दे वता—अ न

हर यकेशो रजसो वसारेऽ हधु नवात इव जीमान्. शु च ाजा उषसो नवेदा यश वतीरप युवो न स याः.. (१) हर यकेश व ुत् प अ न मेघ को कं पत करने वाले, वायु के समान शी ग तयु एवं शोभनद त वाले बनकर मेघ से जल बरसाना जानते ह, अ यु , अपने काम म लगी ई एवं सीधीसाद जा के समान उषा यह काय नह जानती. (१) आ ते सुपणा अ मन तँ एवैः कृ णो नोनाव वृषभो यद दम्. शवा भन मयमाना भरागा पत त महः तनय य ा.. (२) हे अ न! तु हारी शोभन पतनशील करण म त के साथ मलकर वषा के उ े य से मेघ को ता ड़त करती ह. तभी कृ ण वण एवं वषाकारी मेघ गरजता है और सुखका रणी तथा हंसती ई सी ेत बूंद के साथ आता है, फर पानी गरता है और बादल गरजता है. (२) यद मृत य पयसा पयानो नय ृत य प थभी र ज ैः. अयमा म ो व णः प र मा वचं पृ च युपर य योनौ.. (३) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

जब ये अ न उदक के रस से संसार को भगोते ह एवं नान, पान आ द के प म जल के उपयोग का सरल उपाय बताते ह, उस समय अयमा, म , व ण एवं चार ओर ग तशील म द्गण मेघ के जलो प थान के आ छादन को न करते ह. (३) अ ने वाज य गोमत ईशानः सहसो यहो. अ मे धे ह जातवेदो म ह वः.. (४) हे श पु अ न! तुम ब सं यक गाय से यु पया त अ दो. (४)

अ के वामी हो. हे जातवेद! हम

स इधानो वसु क वर नरीळे यो गरा. रेवद म यं पुवणीक द द ह.. (५) हे द पनशील, सबको नवास दे ने वाले, ांतदश , तो ारा शंसनीय एवं अनेक वाला यु अ न! तुम इस कार द त बनो, जस कार हमारे पास धनयु अ हो सके. (५) पो राज ुत मना ने व तो तोषसः. स त मज भ र सो दह

त.. (६)

हे तेज वी अ न! दवस अथवा रा म अपने आप या अपने पु ष को बा धत करो. हे ती णमुख! येक रा स को जलाओ. (६) अवा नो अ न ऊ त भगाय य भम ण. व ासु धीषु व

.. (७)

हे सम त य कम म वंदनीय अ न! हमारे गाय ी छं द वाले सू स होकर हमारी र ा करो. (७) आ नो अ ने र य भर स ासाहं वरे यं. व ासु पृ सु

ारा रा स आ द

के संपादन के कारण

रम्.. (८)

हे अ न! हम दा र य ् का अ वलंब वनाश करने वाला, वरणीय एवं सम त सं ाम म श ु ारा तर धन दो. (८) आ नो अ ने सुचेतुना र य व ायुपोषसम्. माड कं धे ह जीवसे.. (९) हे अ न! हमारे जीवन के लए शोभन ानयु , सुखहेत,ु संपूण आयु पयत दे ह आ द का पोषक धन दान करो. (९) पूता त मशो चषे वाचो गोतमा नये. भर व सु नयु गरः.. (१०) हे शोभन धन के अ भलाषी गौतम! वशु तु त करो. (१०)

वचन से ती ण वाला

यो नो अ नेऽ भदास य त रे पद सः. अ माक मद्वृधे भव.. (११) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

वाले अ न क

हे अ न! जो श ु हमारे समीप या र रहकर हम हा न प ंचाता है, उसे न करके हमारी वृ करो. (११) सह ा ो वचष णर नी र ां स सेध त. होता गृणीत उ यः.. (१२) असं य वाला वाले एवं सबको वशेष प से दे खने वाले अ न रा स को य भू म से भगाते ह, वे हमारे ारा तो क सहायता से तुत होकर दे व को बुलाते एवं उनक तु त करते ह. (१२)

सू —८०

दे वता—इं

इ था ह सोम इ मदे ा चकार वधनम्. शव व ोजसा पृ थ ा नः शशा अ हमच नु वरा यम्.. (१) हे अ तशय श शाली एवं व धारी इं ! जब तुमने स तादायक सोमरस पी लया तो तोता ने तु हारी वृ करने वाली तु तयां क इसी लए तुमने अपनी श से धरती पर खड़े होकर अ ह नामक रा स को पीटते ए अपना अ धकार कट कया था. (१) स वामदद्वृषा मदः सोमः येनाभृतः सुतः. येना वृ ं नरद् यो जघ थ व ोजसाच नु वरा यम्.. (२) हे इं ! गीले करने वाले मादक येन प ी का प धारण करने वाली गाय ी ारा लाए गए एवं नचोड़े ए सोमरस ने तु ह स कया था. हे व ी! तुमने अपना अ धकार कट करते ए अपनी श से आकाश म वृ रा स को मारा था. (२) े भी ह धृ णु ह न ते व ो न यंसते. इ नृ णं ह ते शवो हनो वृ ं जया अपोऽच नु वरा यम्.. (३) हे इं ! जाओ और श ु के सामने प च ं कर उ ह हराओ कोई भी न तो तु हारे व का नयमन कर सकता है और न तु हारी श को अ भभूत करने म समथ है, इस लए तुम वृ रा स का वध करके उसके ारा रोके ए जल को ा त करो एवं अपने भु व का दशन करो. (३) न र भू या अ ध वृ ं जघ थ न दवः. सृजा म वतीरव जीवध या इमा अपोऽच नु वरा यम्.. (४) हे इं ! तुमने धरती और आकाश के ऊपर वृ का वध कया था तथा अपना भु व प करते ए म द्गण से यु एवं जीव को तृ त करने वाला जल बरसाया था. (४) इ ो वृ य दोधतः सानुं व ेण ही ळतः. ******ebook converter DEMO Watermarks*******

अभ व (५)

याव ज नतेऽपः समाय चोदय च नु वरा यम्.. (५)

ोध म भरे इं वृ असुर के सामने जाकर उसे कंपाते ह, उसक उठ ई ठोड़ी पर का हार करते ह एवं अपने अ धकार का दशन करते ए वषा के जल को बहाते ह. अ ध सानौ न ज नते व ेण शतपवणा. म दान इ ो अ धसः स ख यो गातु म छ यच नु वरा यम्.. (६)

इं शतधारा वाले व से वृ असुर के उठे अपना भु व दखाते ए स होकर तोता के करते ह. (६)

ए कपोल पर आघात करते ह एवं तअ ा त के उपाय क इ छा

इ तु य मद वोऽनु ं व वीयम्. य यं मा यनं मृगं तमु वं माययावधीरच नु वरा यम्.. (७) हे मेघवाहन व व धारी इं ! तु हारी ही साम य श ु ारा अ तर कृत है, य क तुमने अपना भु व दखाते ए मृग पधारी वृ का माया ारा वध कया था. (७) व ते व ासो अ थर व त ना ा३ अनु. मह इ वीय बा ो ते बलं हतमच नु वरा यम्.. (८) हे इं ! तु हारा व न बे न दय के ऊपर व थत आ था. तुम अपने पया त वीय एवं बलशा लनी भुजा से अपना भु व द शत करो. (८) सह ं साकमचत प र ोभत वश तः. शतैनम वनोनवु र ाय ो तमच नु वरा यम्.. (९) हजार मनु य ने एक साथ इं क पूजा एवं बीस ने तु त क थी. सौ ऋ षय ने इं क बार-बार तु त क थी. इं के न म ह अ सबसे ऊपर रखा गया था, इसी लए इं ने अपना अ धकार द शत कया. (९) इ ो वृ य त वष नरह सहसा सहः. मह द य प यं वृ ं जघ वाँ असृजदच नु वरा यम्.. (१०) इं ने वृ रा स का बल अपने बल से न कया एवं अ भभव के साधन आयुध से वृ के आयुध समा त कए. इं का बल अ त ौढ़ है, य क उ ह ने वृ को मारकर उसके ारा रोका आ जल बहाया एवं अपने भु व का दशन कया. (१०) इमे च व म यवे वेपेते भयसा मही. ******ebook converter DEMO Watermarks*******

यद



ोजसा वृ ं म वाँ अवधीरच नु वरा यम्.. (११)

हे व धारी इं ! तु हारे ोध से ये वशाल धरती-आकाश भयभीत होकर कांपते ह, य क तुमने म त के साथ मलकर अपनी श से वृ का वध कया एवं अपना अ धकार द शत कया. (११) न वेपसा न त यते ं वृ ो व बीभयत्. अ येनं व आयसः सह भृ रायताच नु वरा यम्.. (१२) वृ अपने कंपन से इं को नह डरा पाया. इं ारा छोड़ा आ लौह न मत एवं हजार धार वाला व वृ को मारने के लए उसक ओर गया. इस कार इं ने अपना भु व द शत कया. (१२) यद्वृ ं तव चाश न व ण े समयोधयः. अ ह म जघांसतो द व ते ब धे शवोऽच नु वरा यम्.. (१३) हे इं ! जब वृ ने तु ह मारने के लए अश न छोड़ी और तुमने उसे अपने व से न कर दया, उस समय तुमने अ ह अथात् वृ के नाश के लए संक प कया और तु हारा बल आकाश म ा त हो गया. इस कार तुमने अपना भु व द शत कया. (१३) अ भ ने ते अ वो य था जग च रेजते. व ा च व म यव इ वे व यते भयाच नु वरा यम्.. (१४) हे व धारी इं ! जब तुम सहनाद करते हो तो थावर और जंगम सभी कांप उठते ह तथा व नमाता व ा भी तु हारे कोप से भयभीत हो उठते ह. इस कार तुम अपना अ धकार दखाते हो. (१४) न ह नु यादधीमसी ं को वीया परः. त म ृ णमुत तुं दे वा ओजां स सं दधुरच नु वरा यम्.. (१५) सव ापक इं को हम नह जान सकते, य क अ यंत र अव थत इं क साम य को कौन जान सकता है? दे व ने इं म अपना धन, तु एवं बल था पत कया था, इस लए इं ने अपना भु व था पत कया. (१५) यामथवा मनु पता द यङ् धयम नत. त म ा ण पूवथे उ था सम मताच नु वरा यम्.. (१६) अथवा ऋ ष, सम त जा के पता तु य मनु एवं अथवा के पु द यंग ऋ ष ने जतने भी य कम कए, उन म यु ह व प अ एवं तो ाचीन ऋ षय के य के समान इं को ही मले. इस लए इं ने अपने अ धकार का दशन कया. (१६) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

सू —८१ इ ो मदाय वावृधे शवसे वृ हा नृ भः. त म मह वा जषूतेमभ हवामहे स वाजेषु

दे वता—इं नोऽ वषत्.. (१)

वृ हंता इं ऋ वज क तु त ारा बल और हष पाने के लए बढ़. हम उ ह बड़े और छोटे यु म बुलाते ह. वे यु म हमारी र ा कर. (१) अ स ह वीर से योऽ स भू र पराद दः. अ स द य चद्वृधो यजमानाय श स सु वते भू र ते वसु.. (२) हे वीर इं ! तुम अकेले होने पर भी सेना के समान हो. तुम श ु के वपुल धन को छ न लेते हो एवं अपने अ प तु तक ा को भी बढ़ाते हो. तुम य करने वाले सोमरसदाता को अपे त धन दे ते हो, य क तु हारे पास ब त धन है. (२) य द रत आजयो धृ णवे धीयते धना. यु वा मद युता हरी कं हनः कं वसौ दधोऽ माँ इ

वसौ दधः.. (३)

यु आरंभ होने पर वजेता अपने हारे ए श ु का धन ा त करता है. हे इं ! अपने रथ म श ु का गव मटाने वाले घोड़े जोड़ो. तुम अपनी सेवा से वमुख राजा को मारते तथा सेवापरायण को दान दे ते हो, इस लए हम धन दो. (३) वा महाँ अनु वधं भीम आ वावृधे शवः. य ऋ व उपाकयो न श ी ह रवा दधे ह तयोव मायसम्.. (४) य कम ारा महान् एवं श ु को भयंकर, सोम पी अ का भ ण करके अपना बल बढ़ाने वाले, दशनीय ना सका तथा ह र नाम के अ से यु इं हम संप दे ने के लए अपने समीपवत बा म लौह न मत व धारण करते ह. (४) आ प ौ पा थवं रजो ब धे रोचना द व. न वावाँ इ क न न जातो न ज न यतेऽ त व ं वव थ.. (५) इं ने अपने तेज से धरती एवं आकाश को ा त कया है तथा आकाश म चमक ले न था पत कए ह. हे इं ! तु हारी समानता करने वाला न कोई उ प आ है और न भ व य म होगा. तुम संपूण जगत् को धारण करने के इ छु क हो. (५) यो अय मतभोजनं पराददा त दाशुषे. इ ो अ म यं श तु व भजा भू र ते वसु भ ीय तव राधसः.. (६) पालनक ा एवं यजमान को मानव भोगो चत अ दे ने वाले इं हम भी उसी कार का ******ebook converter DEMO Watermarks*******

अ द. हे इं ! हम दे ने के लए धन का बंटवारा कर दो, य क तु हारे पास असं य धन है. हम तु हारे धन का एक अंश ा त कर. (६) मदे मदे ह नो द दयूथा गवामृजु तुः. सं गृभाय पु शतोभयाह या वसु शशी ह राय आ भर.. (७) हे सोमपान ारा ह षत होकर हम गोसमूह दे ने वाले इं ! हम दे ने के लए अपने दोन हाथ म अप र मत धन हण करो. हम ती ण बु यु करो और धन दान करो. (७) मादय व सुते सचा शवसे शूर राधसे. व ा ह वा पु वसुमुप कामा ससृ महेऽथा नोऽ वता भव.. (८) हे शौयसंप इं ! सोम के नचुड़ जाने पर आकर हम धन एवं बल दे ने के न म सोमरस पीकर तृ त बनो. हम तु ह वपुल धनसंप जानते ह तथा अपनी अ भलाषा तु ह बताते ह. तुम हमारे र क बनो. (८) एते त इ ज तवो व ं पु य त वायम्. अ त ह यो जनानामय वेदो अदाशुषां तेषां नो वेद आ भर.. (९) हे इं ! तु हारे यजमान सबके उपभोग यो य ह व को बढ़ाते ह. हे सम त जंतु वामी! तुम ह न दे ने वाल का धन जानते हो. उनका धन हम दान करो. (९)

दे वता—इं

सू —८२ उपो षु शृणुही गरो मघव मातथा इव. यदा नः सूनृतावतः कर आदथयास इ ोजा व

के

ते हरी.. (१)

हे धनप त इं ! हमारे समीप आकर ही हमारी तु तयां सुनो. तुम पहले से भ मत हो जाना. तुम जब हम स य, या एवं तु त पी वाणी से यु करते हो तभी हम तु हारी ाथना करते ह. इस कारण अपने ह र नामक दोन घोड़ को रथ म जोड़ो. (१) अ मीमद त व या अधूषत. अ तोषत वभानवो व ा न व या मती योजा व

ते हरी.. (२)

हे इं ! तु हारा दया आ अ खाकर यजमान तृ त ए ह एवं स ता ा त करने के लए उ ह ने अपना शरीर कं पत कया है. द तसंप मेधावी व ने नवीन तो ारा तु हारी तु त क है, इस लए अपने ह र नाम के घोड़ को रथ म जोड़ो. (२) सुसं शं वा वयं मघव व दषीम ह. नूनं पूणव धुरः तुतो या ह वशाँ अनु योजा व ते हरी.. (३) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हे धनप त इं ! सबको अनु हपूण से दे खने वाले तु हारी हम तु त करते ह. हमारी तु त सुनकर तुम तोता को दे ने यो य धन से रथ पू रत करके कामना करने वाले यजमान के समीप आओ एवं इसके लए अपने ह र नामक घोड़ को रथ म जोड़ो. (३) स घा तं वृषणं रथम ध त ा त गो वदम्. यः पा ं हा रयोजनं पूण म चकेत त योजा व

ते हरी.. (४)

हे इं ! आप अ , सोम स हत गाय को दे ने म समथ ह तथा ढ़ रथ को भली कार जानते ह और उसी पर आ ढ़ होते ह. अतः इं दे व अपने घोड़ को रथ म जोड़ो. (४) यु ते अ तु द ण उत स ः शत तो. तेन जायामुप यां म दानो या धसो योजा व

ते हरी.. (५)

हे शत तु! तु हारे रथ क दा एवं बा ओर घोड़े जुड़े ह . सोम प अ के उपभोग से म त होकर तुम उसी रथ ारा अपनी ेयसी के समीप जाओ. (५) युन म ते णा के शना हरी उप या ह द धषे गभ योः. उ वा सुतासो रभसा अम दषुः पूष वा व समु प यामदः.. (६) हे व धारी इं ! तु हारे शखा वाले घोड़े को म तो पी मं क सहायता से तु हारे रथ म जोड़ता ं. दोन बा म घोड़ क रास पकड़कर अपने घर जाओ. तुम नचोड़े ए तीखे सोम से मतवाले होकर अपनी ेयसी के साथ मोद ा त करो. (६)

सू —८३

दे वता—इं

अ ाव त थमो गोषु ग छ त सु ावी र म य तवो त भः. त म पृण वसुना भवीयसा स धुमापो यथा भतो वचेतसः.. (१) हे इं ! तु हारे ारा र त मनु य ब त से घोड़ वाले घर म रहता आ सबसे पहले गाएं ा त करता है. जस कार वचरणशील स रताएं सभी दशा म समु को भरती ह, उसी कार तुम भी अपने ारा र त मनु य को व वध कार के धन से यु करते हो. (१) आपो न दे वी प य त हो यमवः प य त वततं यथा रजः. ाचैदवासः णय त दे वयुं यं जोषय ते वरा इव.. (२) जस समय चमकता आ जल चमस नामक य पा म आता है, उसी समय ऊपर रहने वाले दे व क सूय करण के समान व तृत य पा चमस पर पड़ती है. जैसे ब त से वर एक ही क या से ववाह करना चाहते ह, उसी कार दे वगण वेद क उ र दशा म रखे ए इस सोमपूण एवं दे व य पा क अ भलाषा करते ह. (२) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

अ ध योरदधा उ यं१ वचो यत ुचा मथुना या सपयतः. असंय ो ते ते े त पु य त भ ा श यजमानाय सु वते.. (३) हे इं ! अपने त सम पत य पा म तुमने मं पी वचन को मला दया है. ऐसे य पा वाला यजमान यु थल म न जाकर तु हारी पूजा म लीन रहकर पु होता है, य क तु ह नचुड़ा आ सोम दे ने वाला अव य श ा त करता है. (३) आद राः थमं द धरे वय इ ा नयः श या ये सुकृ यया. सव पणेः सम व द त भोजनम ाव तं गोम तमा पशुं नरः.. (४) पहले प णय ारा गाएं चुराने पर अं गरा ऋ ष ने इं के लए ह व तुत कया था. इस कारण य नेता अं गरावं शय ने गाय, अ एवं अ य पशु से यु धन पाया था. (४) य ैरथवा थमः पथ तते ततः सूय तपा वेन आज न. आ गा आज शना का ः सचा यम य जातममृतं यजामहे.. (५) अथवा नामक ऋ ष ने इं संबंधी य करके प ण ारा चुराई ई गाय का माग सबसे पहले जान लया था. इसके प ात् य र क एवं तेज वी सूय पी इं कट ए एवं अथवा ने गाएं ा त क . क व के पु उशना ने जसक सहायता क एवं जो असुर को भगाने के लए उ प ए थे, ऐसे मरणर हत इं क हम ह व ारा पूजा करते ह. (५) ब हवा य वप याय वृ यतेऽक वा ोकमाघोषते द व. ावा य वद त का य१ त ये द ो अ भ प वेषु र य त.. (६) शोभन फल वाले य न म जब-जब कुश काटे जाते ह, तब-तब तो बनाने वाला होता काशयु य म तो बोलता है. जस समय सोम कुचलने के काम आने वाला प थर तु तकारी तोता के समान श द करता है, उस समय इं स होते ह. (६)

सू —८४

दे वता—इं

असा व सोम इ ते श व धृ णवा ग ह. आ वा पृण व यं रजः सूय न र म भः.. (१) हे इं ! तु हारे न म सोम नचोड़ लया गया है, अतएव हे बलशाली एवं श ुघषक! य थल म आओ. जस कार सूय अपनी करण ारा आकाश को भर दे ते ह, उसी कार सोमपान से उ प श तु ह पूण करे. (१) इ म री वहतोऽ तधृ शवसम्. ऋषीणां च तुती प य ं च मानुषाणाम्.. (२) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

ह र नामक दोन घोड़े अ ध षत बल वाले इं को व स आ द ऋ षय तथा अ य मनु य क तु त एवं य के समीप प ंचाव. (२) आ त वृ ह थं यु ा ते णा हरी. अवाचीनं सु ते मनो ावा कृणोतु व नुना.. (३) हे श ु व वंसकारी इं ! तु हारे दोन घोड़ को हमने मं ारा रथ म जोड़ दया है, इस लए रथ पर चढ़ो. सोम कूटने के लए यु प थर का श द तु हारा मन हमारी ओर फेरे. (३) इम म सुतं पब ये मम य मदम्. शु य वा य र धारा ऋत य सादने.. (४) हे इं ! अ तशय शंसनीय, अमारक एवं मादक सोम को पओ. य वतमान तेज वी सोम क धाराएं तु हारी ओर बहती ह. (४)

संबंधी घर म

इ ाय नूनमचतो था न च वीतन. सुता अम सु र दवो ये ं नम यता सहः.. (५) हे ऋ वजो! इं का शी पूजन करो. इं को ल य करके तु तयां करो. नचोड़ा आ सोम इं को स करे. इसके प ात् परम शंसनीय एवं श शाली इं को णाम करो. (५) न क ् व थीतरो हरी य द य छसे. न क ् वानु म मना न कः व आनशे.. (६) हे इं ! जब तुम अपने ह र नामक अ को रथ म जोड़ दे ते हो, उस समय तुमसे रथी कोई नह होता. तु हारे समान बली एवं सुंदर अ का वामी भी कोई नह है. (६)



य एक इ दयते वसु मताय दाशुषे. ईशानो अ त कुत इ ो अ .. (७) (७)



दे ने वाले यजमान को धन दे ने वाले इं , शी ही सम त जगत् के ईश बन जाते ह.

कदा मतमराधसं पदा ु प मव फुरत्. कदा नः शु वद् गर इ ो अ .. (८) जैसे बरसात म उगी छत रय को सहज ही पैर से कुचल दया जाता है, उसी कार इं य न करने वाल का हनन करगे. इं हमारी ाथनाएं न जाने कब सुनगे? (८) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

य वा ब य आ सुतावाँ आ ववास त. उ ं त प यते शव इ ो अ .. (९) हे इं ! तुम नचुड़े ए सोम ारा सेवा करने वाले यजमान को शी ही बल दान करते हो. (९) वादो र था वषूवतो म वः पब त गौयः. या इ े ण सयावरीवृ णा मद त शोभसे व वीरनु वरा यम्.. (१०) े वण गाएं रसयु एवं सभी कार के य म ापक मधुर सोम का पान करती ह. त वे शोभा बढ़ाने के लए कामवष इं के साथ चलती ई स होती ह. ध दे कर नवास करने वाली वे गाएं इं का अ धकार द शत करती ह. (१०) ता अ य पृशनायुवः सोमं ीण त पृ यः. या इ य धेनवो व ं ह व त सायकं व वीरनु वरा यम्.. (११) इं को छू ने क अ भलाषा करने वाली ये व भ रंग क गाएं इं के पीने यो य सोम को अपने ध से म त कर दे ती ह. ये गाएं इं म ऐसा मद उ प करती ह क वे श ुनाशक व को चला सक. ये गाएं इं का अ धकार द शत करती ह. (११) ता अ य नमसा सहः सपय त चेतसः. ता य य स रे पु ण पूव च ये व वीरनु वरा यम्.. (१२) कृ ान यु ये गाएं अपना ध पलाकर इं क श बढ़ाती ह. ये श ु क जानकारी के लए इं के श ु- वनाश आ द कम पहले ही बता दे ती ह. इस कार ये इं का अ धकार द शत करती ह. (१२) इ ो दधीचो अ थ भवृ ा य त कुतः. जघान नवतीनव.. (१३) तकूल श दर हत इं ने दधी च ऋ ष क ह ड् डय रा स को आठ से दस बार हराया था. (१३) इछ

ारा बने ए व

से वृ आ द

य य छरः पवते वप तम्. त द छयणाव त.. (१४)

इं ने अ संबंधी दधी च के पवत म छपे ए म तक को पाने क इ छा क एवं शयणाव त नामक तालाब म ा त कया. (१४) अ ाह गोरम वत नाम व ु रपी यम्. इ था च मसो गृहे.. (१५) इस ग तशील चं मंडल म जो तेज छपा है, वे सूय क करण ह, ऐसा जानो. (१५) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

को अ युङ् े धु र गा ऋत य शमीवतो भा मनो णायून्. आस षू वसो मयोभू य एषां भृ यामृणध स जीवात्.. (१६) आज य म जाते ए इं के रथ के अ भाग म वीयकमयु , तेज वी, श ु ारा असहनीय ोध से यु घोड़ को कौन जोड़ सकता है? श ु पर हार करने के लए उन घोड़ के मुख म बाण लगे ह. वे अपने पैर से श ु का दय कुचलकर म को स करते ह. जो यजमान अ क शंसा करता है, वही जीवन ा त करता है. (१६) क ईषते तु यते को बभाय को मंसते स त म ं को अ त. क तोकाय क इभायोत रायेऽ ध व वे३ को जनाय.. (१७) अनु हक ा इं के होते ए श ु से भयभीत होकर कौन नकलता एवं श ु ारा न होता है? अथात् कोई नह . हमारे समीप थ इं को र क के प म कौन जानता है? पु क , अपनी, धन क एवं शरीर क र ा के लए इं क ाथना कौन करता है? अथात् ाथना के बना ही इं र ा करते ह. (१७) को अ नमीट् टे ह वषा घृतेन ुचा यजाता ऋतु भ ुवे भः. क मै दे वा आ वहानाशु होम को मंसते वी तहो ः सुदेवः.. (१८) इं को जानना क ठन है, इस लए कौन यजमान इं के न म ह व दे कर अ न क तु त करता है? वसंत आ द ऋतु को ल त करके ुच नामक पा म घी लेकर कौन इं क पूजा करता है? कस यजमान के लए दे वगण अ वलंब शंसनीय धन दे ते ह? य क ा एवं दे व य कौन यजमान ह जो इं को जानता है? अथात् कोई नह . (१८) वम शं सषो दे वः श व म यम्. न वद यो मघव त म डते वी म ते वचः.. (१९) हे श शाली इं ! तुम अपनी तु त करने वाले मनु य क शंसा करो. हे मघवन्! तु हारे अ त र कोई सुख दे ने वाला नह है. इसी कारण म तु हारी तु त करता ं. (१९) मा ते राधां स मा त ऊतयो वसोऽ मा कदा चना दभन्. व ा च न उप ममी ह मानुष वसू न चष ण य आ.. (२०) हे नवासदाता इं ! तु हारे संबंधी ा णसमूह तथा सहायक म द्गण कभी हमारा वनाश न कर. हे मनु य हतकारक इं ! हम मं ा को सभी संप यां दो. (२०)

सू —८५

दे वता—म द्गण

ये शु भ ते जनयो न स तयो याम ु य सूनवः सुदंससः. ******ebook converter DEMO Watermarks*******

रोदसी ह म त

रे वृधे मद त वीरा वदथेषु घृ वयः.. (१)

गमन के न म अपने शरीर को ना रय के समान अलंकृत करने वाले, गमनशील, के पु , धरती और आकाश क वृ करने के कारण शोभन कमा, श ु को भगाने वाले एवं वृ ा द के भंजनक ा म द्गण य म सोमपान के कारण स होते ह. (१) त उ तासो म हमानमाशत द व अच तो अक जनय त इ यम ध

ासो अ ध च रे सदः. यो द धरे पृ मातरः.. (२)

दे व ारा अ भषेक पाकर म द्गण ने मह व ा त कया है. उन पु ने आकाश म थान पाया है. पूजा यो य इं क पूजा एवं उ ह श शाली करके पृ वीपु म त ने अ धक ऐ य पाया है. (२) गोमातरो य छु भय ते अ भ तनूषु शु ा द धरे व मतः. बाध ते व म भमा तनमप व मा येषामनु रीयते घृतम्.. (३) भू मपु म द्गण अपने को शोभासंप करते समय उ वल आभूषण धारण करते ह. ये सभी श ु का नाश करते ह. इनके माग का अनुगमन करके पानी बरसता है. (३) व ये ाज ते सुमखास ऋ भः यावय तो अ युता चदोजसा. मनोजुवो य म तो रथे वा वृष ातासः पृषतीरयु वम्.. (४) शोभन य म द्गण आयुध के कारण वशेष प से द त होते ह. वे वयं अ युत रहकर ढ़ पवत आ द को अपनी श ारा चंचल करते ह. हे म द्गण! तुम जब अपने रथ म बुंद कय वाली ह र णय को जोड़ते हो, उस समय मन के समान ग तशील एवं वषा करने म समथ हो जाते हो. (४) य थेषु पृषतीरयु वं वाजे अ म तो रंहय तः. उता ष य व य त धारा मवोद भ ु द त भूम.. (५) हे म द्गण! अ उ प के न म बादल को े रत करते ए बुंद कय वाली ह र णय को रथ म जोड़ो. उस समय काशशील सूय से नकलने वाली जलधारा सम त धरती को भगो दे ती है. (५) आ वो वह तु स तयो रघु यदो रघुप वानः जगात बा भः. सीदता ब ह वः सद कृतं मादय वं म तो म वो अंधसः.. (६) हे म द्गण! शी चलने वाले एवं ग तशील घोड़े तु ह हमारे य म लाव. शी चलने वाले आप लोग भी हाथ म धन लेकर हम दे ने के न म आव. आप वेद पर बछे ए कुश पर बै ठए एवं मधुर सोमरस को पीकर तृ त लाभ क जए. (६) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

तेऽवध त वतवसो म ह वना नाकं त थु च ये सदः. व णुय ावद्वृषणं मद युतं वयो न सीद ध ब ह ष ये.. (७) अपनी श के सहारे वृ ा त करने एवं अपने ही मह व से वग म थान पाने वाले म द्गण ने अपने नवास थल को व तीण बनाया है. व णु आकर उ ह के न म कामवषक एवं हष द य क र ा करते ह. वे प य के समान शी आकर हमारे य म बछे ए कुश पर बैठ. (७) शूरा इवे ुयुधयो न ज मयः व यवो न पृतनासु ये तरे. भय ते व ा भुवना म यो राजान इव वेषसं शो नरः.. (८) यु

शी चलने वाले म द्गण शूर , यु म य नशील ह. वषा आ द के नेता

चाहने वाल एवं अ ा भलाषी पु ष के समान एवं उ प म त से संसार डरता है. (८)

व ा य ं सुकृतं हर ययं सह भृ वपा अवतयत्. ध इ ो नयपां स कतवेऽह वृ ं नरपामौ जदणवम्.. (९) शोभनकमा व ा ने इं को जो ठ क से बना आ, सुवणमय एवं हजार धार वाला व दया था, उसी को सं ाम म श ुनाश करने के न म उठाकर इं ने वषाजल को रोकने वाले वृ को मारा एवं उसके ारा रोक ई जलधारा नीचे क ओर गराई. (९) ऊ व नुनु े ऽवतं त ओजसा दा हाणं च भ व पवतम्. धम तो वाणं म तः सुदानवो मदे सोम य र या न च रे.. (१०) म त् अपनी श से कुएं को उखाड़कर ले चले. रा ते म पवत ने बाधा डाली तो उ ह तोड़ दया. शोभनदानयु म त ने वीणा बजाते ए एवं सोमरस पीकर आनं दत होते ए रमणीय धन दया. (१०) ज ं नुनु े ऽवतं तया दशा स च ु सं गोतमाय तृ णजे. आ ग छ तीमवसा च भानवः कामं व य तपय त धाम भः.. (११) म द्गण ने गौतम ऋ ष क ओर कुआं टे ढ़ा करके उ ह पानी पलाकर यास बुझाई. काश वाले म त ने गौतम ऋ ष क र ा के न म आकर जीवनधारी जल से उ ह तृ त कया. (११) या वः शम शशमानाय स त धातू न दाशुषे य छता ध. अ म यं ता न म तो व य त र य नो ध वृषणः सुवीरम्.. (१२) हे म द्गण! तुम अपने इ दाता यजमान को धरती आ द तीन लोक म अपने से संबं धत सुख दान करो. हे कामवषक म तो! हम पु ा द शोभन वीर स हत धन दो. (१२) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

सू —८६

दे वता—म द्गण

म तो य य ह ये पाथा दवो वमहसः. स सुगोपातमो जनः.. (१) हे व श काश वाले म तो! तुम अंत र से आकर जस यजमान के य गृह म सोमपान करते हो, वह शोभन र क वाला हो जाता है. (१) य ैवा य वाहसो व य वा मतीनाम्. म तः शृणुता हवम्.. (२) हे य वहन करने वाले म तो! य क ा यजमान अथवा य र हत तोता का आ ान सुनो. (२) उत वा य य वा जनोऽनु व मत त. स ग ता गोम त जे.. (३) जस यजमान का ह वहन करने के लए ऋ वज् म द्गण को ती ण करते ह, वह अनेक गाय वाले गोठ म जाता है. (३) अ य वीर य ब ह ष सुतः सोमो द व षु. उ थं मद श यते.. (४) यजनीय दवस म य म वीर म द्गण के लए सोम नचोड़ा जाता है एवं उ ह को स करने के लए तो पढ़े जाते ह. (४) अ य ोष वा भुवो व ा य षणीर भ. सूरं च स ुषी रषः.. (५) अ

सम त श ु को परा जत करने वाले म द्गण यजमान क तु त सुन एवं तोता को ा त हो. (५) पूव भ ह ददा शम शर

म तो वयम्. अवो भ षणीनाम्.. (६)

हे म द्गण! हम तुमसे अनेक वष से र त ह एवं तु ह ह

दे ते ह. (६)

सुभगः स य यवो म तो अ तु म यः. य य यां स पषथ.. (७) हे अ तशय यजनीय म द्गण! जस यजमान का ह धनसंप हो. (७)

तुम वीकार करते हो, वह

शशमान य वा नरः वेद य स यशवसः. वदा काम य वेनतः.. (८) हे यथाथबलसंप नेता म तो! उन यजमान क इ छा पूरी करो जो तु ह ल य करके तु त मं बोलते-बोलते पसीने से नहा उठे ह एवं तु हारी कामना करते ह. (८) यूयं त स यशवस आ व कत म ह वना. व यता व ुता र ः.. (९) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हे यथाथ श वाले म तो! तुम अपना उ रा स को समा त करो. (९)

वल मह व

कट करके उप वकारी

गूहता गु ं तमो व यात व म णम्. यो त कता य म स.. (१०) हे म द्गणो! सव वतमान अंधकार को न करो, सबका भ ण करने वाले रा स को भगाओ एवं हम मनचाहा काश दो. (१०)

सू —८७

दे वता—म द्गण

व सः तवसो वर शनोऽनानता अ वथुरा ऋजी षणः. जु तमासो नृतमासो अ भ ान े के च ा इव तृ भः.. (१) श ुनाश म अ त कुशल, कृ बलयु , व वध जयघोष से यु सव कृ , संघीभूत, य क ा ारा अ तशय से वत, अव श सोमरस का सेवन करने वाले, मेघ आ द के नेता म द्गण अपने शरीर पर धारण कए आभूषण से आकाश म सूय करण के समान चमकते ह. (१) उप रेषु यद च वं य य वय इव म तः केन च पथा. ोत त कोशा उप वो रथे वा घृतमु ता मधुवणमचते.. (२) हे म द्गणो! जस कार प ी आकाशमाग से शी चलते ह, उसी कार तुम हमारे समीपवत आकाश म जब चलते ए बादल को एक करते हो तो मेघ तु हारे रथ से लपटकर पानी बरसाने लगते ह. इसी हेतु तुम अपनी पूजा करने वाले यजमान पर मधु के समान व छ जल बरसाओ. (२) ै ाम मेषु वथुरेव रेजते भू मयामेषु य यु ते शुभे. ष ते ळयो धुनयो ाज यः वयं म ह वं पनय त धूतयः.. (३) जस समय म द्गण शोभन जल क वषा के लए बादल को तैयार करते ह, उस समय उठे ए बादल को दे खकर धरती उसी कार कांप उठती है, जस कार प त वहीना नारी राजा आ द के उप व को दे खकर कांपती है. इस कार वहारशील, चंचल वभाव एवं चमक ले आयुध वाले म द्गण पवत आ द को कं पत करके अपना मह व कट करते ह. (३) स ह वसृ पृषद ो युवा गणो३ या ईशान त व ष भरावृतः. अ स स य ऋणयावाने ोऽ या धयः ा वताथा वृषा गणः.. (४) वयं े रत, सफेद बुंद कय यु

ह र णय वाले, न य त ण, असाधारण श

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संप ,

स यकमा, तोता को ऋणमु क र ा करते ह. (४)

करने वाले, अ न दत एवं जलवषक म द्गण हमारे य

पतुः न य ज मना वदाम स सोम य ज ा जगा त च सा. यद म ं श यृ वाण आशता द ामा न य या न द धरे.. (५) हम अपने पता र गण ारा बताई ई बात कहते ह क सोमरस क आ त के साथ क गई तु त म त को ा त होती है. इं ारा संप वृ वध के समय म द्गण उप थत थे और इं क तु त कर रहे थे. इस कार उ ह ने ‘य पा ’ नाम धारण कया. (५) यसे कं भानु भः सं म म रे ते र म भ त ऋ व भः सुखादयः. ते वाशीम त इ मणो अभीरवो व े य य मा त य धा नः.. (६) म द्गण चमकती ई सूय क करण के साथ वह जल बरसाना चाहते ह, जसक ा णय को आव यकता है वे तोता और ऋ वज के साथ ह भ ण करते ह. शोभन तु तवचन से यु , ग तशील एवं भयर हत म द्गण ने व श थान ा त कए ह. (६)

सू —८८

दे वता—म द्गण

आ व ु म म तः वक रथे भयात ऋ म र पणः. आ व ष या न इषा वयो न प तता सुमायाः.. (१) हे म द्गणो! तुम अपने द तशाली, शोभन ग त वाले, श संप एवं घोड़ वाले रथ पर चढ़कर हमारे य म आओ. हे शोभनकमा म तो! हम दे ने के लए अ लेकर सुंदर प ी के समान आओ. (१) तेऽ णे भवरमा पश ै ः शुभे कं या त रथतू भर ैः. मो न च ः व धतीवा प ा रथ य जङ् घन त भूम.. (२) रथ को ख चने वाले लाल या पीले रंग के घोड़ क सहायता से म द्गण कस तु तक ा यजमान का क याण करने को आते ह? चमकते ए सोने के समान सुंदर एवं श ुनाशक आयुध से सुशो भत म द्गण रथ के प हय ारा धरती को ःखी करते ह. (२) ये कं वो अ ध तनूषु वाशीमधा वना न कृणव त ऊ वा. यु म यं कं म तः सुजाता तु व ु नासो धनय ते अ म्.. (३) हे म द्गणो! तु हारे कंध पर ऐ य के च प म श ुसंहारक आयुध ह. वे वन के समान य को भी उ त करते ह. हे शोभन ज म वाले म तो! तु ह स करने के लए संप शाली यजमान सोम कुचलने वाले प थर को संप करते ह. (३) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

अहा न गृ ाः पया व आगु रमां धयं वाकाया च दे वीम्. कृ व तो गोतमासो अक व नुनु उ स ध पब यै.. (४) हे जल के इ छु क गौतमवंशी ऋ षयो! तु हारे शोभन दवस ने आकर तु हारे उदक न पादक य को सुशो भत कया था. उ ह दन म गौतमवंशी ऋ षय ने तु त उ चारण के साथ ह दे ते ए जल पीने के न म कुआं ऊपर उठाया था. (४) एत य योजनमचे त स वह य म तो गोतमो वः. प य हर यच ानयोदं ा वधावतो वरा न्.. (५) वण न मत प हय वाले रथ पर बैठे ए, धार वाले लौहच से यु , इधर-उधर धावमान एवं श ुसंहारक म द्गण को दे खकर गौतम ऋ ष ने जो तो बोला था, वह यही है. (५) एषा या वो म तो ऽनुभ त ोभ त वाघतो न वाणी. अ तोभयद्वृथासामनु वधां गभ योः.. (६) हे म द्गणो! हमारी तु त आपके अनुकूल है एवं आपम से येक का गुणगान करती है. इस समय इन तो ारा ऋ षय क वाणी ने अनायास ही आपका यशगान कया है, य क आपने अनेक कार का अ हमारे हाथ पर रख दया है. (६)

सू —८९

दे वता— व ेदेव

आ नो भ ाः तवो य तु व तोऽद धासो अपरीतास उद् भदः. दे वा नो यथा सद मद्वृधे अस ायुवो र तारो दवे दवे.. (१) सम त क याणकारक, असुर ारा अ ह सत एवं श ुनाश म समथ य सब ओर से हम ा त ह . अपने र ण काय का याग न करने वाले एवं त दन हमारी र ा करने वाले दे वगण हम सदा बढ़ाव. (१) दे वानां भ ा सुम तऋजूयतां दे वानां रा तर भ नो न वतताम्. दे वानां स यमुप से दमा वयं दे वा न आयुः तर तु जीवसे.. (२) अपने यजमान से म े करने वाले दे व का क याणकारक अनु ह एवं दान हम ा त हो. हम उनक म ता ा त कर, वे हमारी आयु म वृ कर. (२) ता पूवया न वदा महे वयं भगं म म द त द म धम्. अयमणं व णं सोमम ना सर वती नः सुभगा मय करत्.. (३) हम वेद पी पूवकालीन वाणी ारा भग, म , अ द त, द , म द्गण, अयमा, व ण, ******ebook converter DEMO Watermarks*******

सोम, अ नीकुमार आ द दे व को बुलाते ह. शोभन धन से यु

सर वती हम सुखी कर. (३)

त ो वातो मयोभु वातु भेषजं त माता पृ थवी त पता ौः. तद् ावाणः सोमसुतो मयोभुव तद ना शृणुतं ध या युवम्.. (४) माता के समान वायु, पता के तु य धरती, आकाश एवं सोम कुचलने के साधन प थर हमारे पास सुखकारक ओष ध ले आव. हे बु संप अ नीकुमारो! आप लोग हमारी ाथना सुन. (४) तमीशानं जगत त थुष प त धय वमवसे महे वयम्. पूषा नो यथा वेदसामसद्वृधे र ता पायुरद धः व तये.. (५) ऐ यसंप , थावर-जंगम के वामी एवं य कम से स होने वाले इं को हम अपनी र ा के न म बुला रहे ह. सर ारा अ ह सत पूषा जस कार हमारा धन बढ़ाने के लए र ा कर रहे ह, उसी कार हमारे अ वनाश के लए हमारी र ा कर. (५) व त न इ ो वृ वाः व त नः पूषा व वेदाः. व त न ता य अ र ने मः व त नो बृह प तदधातु.. (६) अग णत तु तय के यो य और सव पूषा हमारा क याण कर. जनके रथ के प हय को कोई हा न नह प ंचा सकता है, ऐसे ग ड़ एवं बृह प त हमारा क याण कर. (६) पृषद ा म तः पृ मातरः शुभंयावानो वदथेषु ज मयः. अ न ज ा मनवः सूरच सो व े नो दे वा अवसा गम ह.. (७) सफेद बूंद से यु घोड़ वाले, नाना वण वाली गौ के पु , शोभन ग तशील, अ न क जीभ पर वतमान, सब कुछ जानने वाले एवं सूय के समान ने यो तयु म द्गण हमारी र ा के न म यहां आव. (७) भं कण भः शृणुयाम दे वा भ ं प येमा भयज ाः. थरैर ै तु ु वांस तनू भ शेम दे व हतं यदायुः.. (८) हे दे वो! हम अपने कान से क याणकारक वचन सुन. हे य पा दे वो! हम अपनी आंख से शोभन व तु दे ख एवं ढ़ ह तचरणा द वाले शरीर से आपक तु त करते ए जाप त ारा था पत आयु को ा त कर. (८) शत म ु शरदो अ त दे वा य ा न ा जरसं तनूनाम्. पु ासो य पतरो भव त मा नो म या री रषतायुग तोः.. (९) हे दे वो! आप लोग ने मानव क आयु सौ वष न त क है. इसी काल म आप हमारे ******ebook converter DEMO Watermarks*******

शरीर म वृ ाव था उ प करते ह. उस अव था म पु हमारे र क बन जाते ह. हम उस अव था के म य म न मत करना. (९) अ द त र द तर त र म द तमाता स पता स पु ः. व े दे वा अ द तः प च जना अ द तजातम द तज न वम्.. (१०) आकाश, अंत र , माता, पता, सम त दे व, पंचजन, ज म और ज म का कारण—ये सब अखंडनीय अथात् अ द त ह. (१०)

दे वता— व ेदेव

सू —९०

ऋजुनीती नो व णो म ो नयतु व ान्. अयमा दे वैः सजोषाः.. (१) उ म थान को जानने वाले व ण, म एवं इं आ द दे व के साथ समान ेम रखने वाले अयमा हम सरल माग से गंत पर प ंचाव. (१) ते ह व वो वसवाना ते अ मूरा महो भः. ता र धन दे ने वाले, मूढ़ताशू य एवं बु कर अपना कम करते ह. (२)

ते व ाहा.. (२)

संप वे दे व अपने तेज ारा सदा संसार क र ा

ते अ म यं शम यंस मृता म य यः. बाधमाना अप वे मरणर हत दे व हमारे श ु

षः.. (३)

का नाश करके हम मरणशील को सुख द. (३)

व नः पथः सु वताय चय व ो म तः. पूषा भगो व

ासः.. (४)

तु त के यो य इं , म द्गण, पूषा एवं भग हम वगलाभ के न म दखाव. (४)

उ म माग

उत नो धयो गोअ ाः पूष व णवेवयावः. कता नः व तमतः.. (५) हे पूषा, व णु और म द्गण! हमारे य वनाशर हत बनाओ. (५)

को गाय आ द पशु

से यु

एवं हम

मधु वाता ऋतायते मधु र त स धवः. मा वीनः स वोषधीः.. (६) यजमान के लए हवाएं एवं न दयां मधु क वषा कर. हमारे लए ओष धयां माधुययु ह . (६) मधु न मुतोषसो मधुम पा थवं रजः. मधु ौर तु नः पता.. (७) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हमारी नशाएं एवं उषाएं माधुययु पालनक ा आकाश हम सुखद हो. (७)

ह . पृ वी से संबंध रखने वाले जन एवं सबका

मधुमा ो वन प तमधुमाँ अ तु सूयः. मा वीगावो भव तु नः.. (८) वन प तयां, सूय एवं गाएं हमारे लए मधुयु

ह . (८)

शं नो म ः शं व णः शं नो भव वयमा. शं न इ ो बृह प तः शं नो व णु मः.. (९) म , व ण, अयमा, इं , बृह प त एवं लंबे डग भरने वाले व णु हमारे लए सुखदाता ह . (९)

सू —९१

दे वता—सोम

वं सोम च कतो मनीषा वं र ज मनु ने ष प थाम्. तव णीती पतरो न इ दो दे वेषु र नमभज त धीराः.. (१) हे सोम! तुम हमारी बु ारा भली-भां त ात हो. तुम हम सरल माग से ले चलो. हे व को अमृतमय करने वाले सोम! तु हारे नदश के अनुसार चलकर हमारे पतर ने दे व के म य धन ा त कया था. (१) वं सोम तु भः सु तुभू वं द ैः सुद ो व वेदाः. वं वृषा वृष वे भम ह वा ु ने भ ु यभवो नृच ाः.. (२) हे सव सोम! तुम अपने शोभन य के कारण य संप करने वाले, अपने बल ारा श शाली एवं अभी वषा के मह व से कामवधक हो. तुम यजमान के मनोवां छत फलदाता होकर उनके ारा वपुल मा ा म दए गए अ से संप हो. (२) रा ो नु ते व ण य ता न बृहद्गभीरं तव सोम धाम. शु च ् वम स यो न म ो द ा यो अयमेवा स सोम.. (३) हे सोम! ा ण के राजा व ण से संबं धत य तु हारे ही ह, इस लए तु हारा तेज व तृत एवं गंभीर है. तुम व ण के समान सबके सुधारक ा एवं अयमा के समान वृ करने वाले हो. (३) या ते धामा न द व या पृ थ ां या पवते वोषधी व सु. ते भन व ैः सुमना अहेळ ाज सोम त ह ा गृभाय.. (४) हे शोभनयु

सोम! आकाश, धरती, पवत , ओष धय एवं जल म वतमान अपने तेज

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से तेज वी होकर

ोध न करते ए हमारा ह

वीकार करो. (४)

वं सोमा स स प त वं राजोत वृ हा. वं भ ो अ स

तुः.. (५)

हे सोम! तुम स कम म ा ण के वामी, तेज वी एवं शोभन य वं च सोम नो वशो जीवातुं न मरामहे.

वाले हो. (५)

य तो ो वन प तः.. (६)

हे तु त य एवं वन प तपालक सोम! य द तुम हम यजमान के लए जीवनदा यनी ओष ध क अ भलाषा करो तो हम मृ युर हत हो सकते ह. (६) वं सोम महे भगं वं यून ऋतायते. द ं दधा स जीवसे.. (७) हे सोम! तुम वृ

एवं युवा यजमान को जीवनोपयोगी धन दे ते हो. (७)

वं नः सोम व तो र ा राज घायतः. न र ये वावतः सखा.. (८) हे तेज वी सोम! जो लोग हम ःख दे ना चाहते ह, उनसे हम बचाओ, य क तुम जैसे दे व का म कभी वन नह होता. (८) सोम या ते मयोभुव ऊतयः स त दाशुषे. ता भन ऽ वता भव.. (९) हे सोम! यजमान को दे ने के लए तु हारे पास सुखद र ासाधन ह, उ ह के हमारे र क बनो. (९)

ारा

इमं य मदं वचो जुजुषाण उपाग ह. सोम वं नो वृधे भव.. (१०) हे सोम! हमारे इस य और तु तवचन को वीकार करके हमारे समीप आओ और हमारे य क वृ करो. (१०) सोम गी भ ् वा वयं वधयामो वचो वदः. सुमृळ को न आ वश.. (११) हे सोम! तु तय के जानने वाले हम लोग तु तवचन से तु ह बढ़ाते ह. तुम हम सुखी करते ए आओ. (११) गय फानो अमीवहा वसु व पु वधनः. सु म ः सोम नो भव.. (१२) हे सोम! तुम हमारे धनव क, रोगनाशक, संप दाता, संप बनो. (१२) सोम रार ध नो

बढ़ाने वाले एवं सु म

द गावो न यवसे वा. मय इव व ओ ये.. (१३)

हे सोम! जस कार गाएं सुंदर घास से एवं मनु य अपने घर म रहने से स होते ह, ******ebook converter DEMO Watermarks*******

उसी कार तुम हमारे ारा दए गए ह

से तृ त होकर हमारे दय म नवास करो. (१३)

यः सोमः स ये तव रारण े व म यः. तं द ः सचते क वः.. (१४) हे सवदश एवं सवकाय समथ सोम! तु हारी म ता के कारण जो यजमान तु हारी तु त करता है, तुम उस पर अनु ह करते हो. (१४) उ या णो अ भश तेः सोम न पा ंहसः. सखा सुशेव ए ध नः.. (१५) (१५)

हे सोम! हम नदा एवं पाप से बचाओ तथा शोभन सुख दे कर हमारे हतकारी बनो. आ याय व समेतु ते व तः सोम वृ यम्. भवा वाज य स थे.. (१६)

हे सोम! तुम वृ दे ने वाले बनो. (१६)

ा त करो एवं तु ह चार ओर अपनी श

ा त हो. तुम हम अ

आ याय व म द तम सोम व े भरंशु भः. भवा नः सु व तमः सखा वृधे.. (१७) हे अ तशय मदयु सोम! तुम सम त लता अ से यु होकर हमारे म बनो. (१७)

के भाग से वृ

ा त करो एवं शोभन

सं ते पयां स समु य तु वाजाः सं वृ या य भमा तषाहः. आ यायमानो अमृताय सोम द व वां यु मा न ध व.. (१८) हे श ुनाशक सोम! तुम म ध, अ एवं वीय स मलत हो. तुम हमारी अमरता के लए बढ़ते ए वग म उ कृ अ धारण करो. (१८) या ते धामा न ह वषा यज त ता ते व ा प रभूर तु य म्. गय फानः तरणः सुवीरोऽवीरहा चरा सोम यान्.. (१९) हे सोम! यजमान ह के ारा तु हारे जन तेज क पूजा करते ह, वे ही हमारे य को चार ओर ा त ह . हे धनव क! पाप से र ा करने वाले, शोभन वीर से यु एवं पु के र क सोम! तुम हमारे घर म आओ. (१९) सोमो धेनुं सोमो अव तमाशुं सोमो वीरं कम यं ददा त. साद यं वद यं सभेयं पतृ वणं यो ददाशद मै.. (२०) जो यजमान सोमदे व को ह व प अ दे ता है, उसे वे धा गाय, शी गामी अ एवं लौ कक कम करने म कुशल, गृहकाय म द , य का अनु ान करने वाला, सकल ******ebook converter DEMO Watermarks*******

शा

ाता तथा पता का नाम



करने वाला पु दे ते ह. (२०)

अषाळहं यु सु पृतनासु प वषाम सां वृजन य गोपाम्. भरेषुजां सु त सु वसं जय तं वामनु मदे म सोम.. (२१) हे सोम! हम यु म न य वजयी, सेना को वजयी बनाने वाले, वग के दाता, जलवषक, बल के र क, य म ा भूत, सुंदर नवास वाले, उ म यश वाले एवं श ुपराभवकारी तु ह ल य करके स ह . (२१) व ममा ओषधीः सोम व ा वमपो अजनय वं गाः. वमा तत थोव१ त र ं वं यो तषा व तमो ववथ.. (२२) हे सोम! तुमने धरती पर वतमान सम त ओष धयां, वषा का जल एवं गाएं बनाई ह. तुमने व तीण आकाश को फैलाया एवं काश ारा उसका अंधकार मटाया है. (२२) दे वेन नो मनसा दे व सोम रायो भागं सहसाव भ यु य. मा वा तनद शषे वीय योभये यः च क सा ग व ौ.. (२३) हे बलवान् सोमदे व! हमारे धन का अपहरण करने वाले श ु से यु करो. कोई भी श ु तु ह न न करे. यु रत दोन प के बल के वामी तु ह हो. यु म हमारे उप व का नाश करो. (२३)

सू —९२

दे वता—उषा एवं अ नीकुमार

एता उ या उषसः केतुम त पूव अध रजसो भानुम ते. न कृ वाना आयुधानीव धृ णवः त गावोऽ षीय त मातरः.. (१) उषा ने अंधकार से ढके संसार का ान कराने वाला काश कया है. ये आकाश के पूव भाग म सूय का काश करती ह. जैसे आ मणशील यो ा अपने आयुध का सं कार करते ह, उसी कार ग तशील, चमक ली एवं सूय काश का नमाण करने वाली उषाएं अपने काश से संसार का सुधार करती ई त दन आती ह. (१) उदप त णा भानवो वृथा वायुजो अ षीगा अयु त. अ ुषासो वयुना न पूवथा श तं भानुम षीर श युः.. (२) चमकती ई सूयर मयां अनायास उ दत . उषा ने रथ म जोतने यो य शु करण को रथ म जोता एवं पूवकाल के समान सम त ा णय को ानशील बनाया. इसके प ात् चमक ली उषा ने शु वण वाले सूय का आ य लया. (२) अच त नारीरपसो न व भः समानेन योजनेना परावतः. ******ebook converter DEMO Watermarks*******

इषं वह तीः सुकृते सुदानवे व ेदह यजमानाय सु वते.. (३) नेतृ व करने वाली उषाएं, शोभन कम करने वाले, सोमरस नचोड़ने एवं ऋ वज को द णा दे ने वाले यजमान के लए सम त अ दान करती अ धारी यो ा के समान अपने उपयोग ारा र तक के दे श को भी तेज से पू रत करती ह. (३) अ ध पेशां स वपते नृतू रवापोणुते व उ ेव बजहम्. यो त व मै भुवनाय कृ वती गावो न जं ु१षा आवतमः.. (४) जस कार नाई बाल को काट दे ता है, उसी कार उषाएं संसार से लपटे ए काले अंधकार को पूरी तरह न कर दे ती ह. जस कार गौ ध काढ़ने के समय अपना थन कट करती है, उसी कार उषाएं अपने सीने को कट करती ह. वे गोशाला म जाने वाली गाय के समान पूव दशा म जाती ह. (४) यच शद या अद श व त ते बाधते कृ णम वम्. व ं न पेशो वदथे व च ं दवो हता भानुम ेत्.. (५) उषा का द यमान तेज पहले पूव दशा म दखाई दे ता है, इसके बाद सभी दशा म फैल जाता है एवं काले रंग के अंधकार को र भगा दे ता है. जैसे अ वयु य म यूप को आ य ारा कट करते ह, वैसे ही उषाएं आकाश म अपना प दखाती है एवं वगपु ी बनकर तेज वी सूय क सेवा करती ह. (५) अता र म तमस पारम योषा उ छ ती वयुना कृणो त. ये छ दो न मयते वभाती सु तीका सौमनसायाजीगः.. (६) हम रा के अंधकार के पार आ गए ह. नशा के अंधकार का नाश करती ई उषा सम त ा णय को ान दे ती है. जस कार वशीकरण म समथ पु ष धनी के समीप जाकर उसे स करने के लए हंसता है, उसी कार काश फैलाती उषाएं हंसती सी जान पड़ती ह. सुंदर शरीर वाली उषा ने सबक स ता के लए अंधकार का भ ण कया है. (६) भा वती ने ी सूनृतानां दवः तवे हता गोतमे भः. जावतो नृवतो अ बु यानुषो गोअ ाँ उप मा स वाजान्.. (७) हम गौतमवंशी तेज वनी एवं स य भाषण े मय का नेतृ व करने वाली आकाशपु ी उषा क तु त करते ह. हे उषा! हम पु , पौ , दास, अ एवं गाय से यु अ दान करो. (७) उष तम यां यशसं सुवीरं दास वग र यम बु यम्. सुदंससा वसा या वभा स वाज सूता सुभगे बृह तम्.. (८) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हे उषा! हम यश, वीर पु ष , दास एवं अ से यु अ ा त कर. हे शोभन धन वाली उषा! शोभनय यु तो से स होकर हमारे लए अ एवं पया त धन कट करो. (८) व ा न दे वी भुवना भच या तीची च ु वया व भा त. व ं जीवं चरसे बोधय ती व य वाचम वद मनायोः.. (९) चमकती ई उषाएं सम त ा णय को का शत करने के प ात् प म दशा म अपने तेज से व तृत होती ई उद्द त हो रही ह. वे सम त जीव को अपने-अपने काम म वृ होने के लए जगाती ह एवं भाषणकुशल लोग क बात सुनती ह. (९) पुनः पुनजायमाना पुराणी समानं वणम भ शु भमाना. नीव कृ नु वज आ मनाना मत य दे वी जरय यायुः.. (१०) त दन बार-बार उ प , न य एवं समान प धारण करने वाली उषाएं सम त मरणधमा ा णय के जीवन का दन- दन उसी कार ास करती ह, जस कार भीलनी उड़ते ए प य के पंख काटकर उनक हसा करती है. (१०) ू वती दवो अ ताँ अबो यप वसारं सनुतयुयो त. मनती मनु या युगा न योषा जार य च सा व भा त.. (११) आकाश को अंधकार से मु करती ई उषा को लोग जानते ह. वे अपने आप चलती ई रात को छपाती ह. अपने गमनागमन से त दन मानव के युग को समा त करती ई ेमी सूय क प नयां उषाएं का शत होती ह. (११) पशू च ा सुभगा थाना स धुन ोद उ वया ैत्. अ मनती दै ा न ता न सूय य चे त र म भ शाना.. (१२) जैसे वाला वन म पशु को चरने के लए फैला दे ता है, उसी कार सुभगा एवं पूजनीया उषाएं तेज का व तार करती ह. जैसे बहता आ पानी नीची जगह पर शी फैल जाता है, वैसे ही महती उषाएं सारे व को घेर लेती ह एवं दे वय म व न न डालती सूय क करण के साथ दखाई दे ती ह. (१२) उष त च मा भरा म यं वा जनीव त. येन तोकं च तनयं च धामहे.. (१३) हे अ क वा मनी उषाओ! हम ऐसा व च धन दो, जससे हम पु पालन कर सक. (१३) उषो अ ेह गोम य ाव त वभाव र. रेवद मे

ु छ सूनृताव त.. (१४)

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और पौ

का

हे उषा! तुम गौ, अ , स यभाषण एवं तेज से यु करके धन से यु करो. (१४)

हो. आज हमारे य को का शत

यु वा ह वा जनीव य ाँ अ ा णाँ उषः. अथा नो व ा सौभगा या वह.. (१५) हे अ यु लाओ. (१५)

उषा! आज लाल रंग के घोड़े रथ म जोड़ो एवं सम त सौभा य हमारे लए

अ ना व तर मदा गोम ा हर यवत्. अवा थं समनसा न य छतम्.. (१६) हे श ुनाशक अ नीकुमारो! तुम दोन समान वचार बनाकर हमारे घर को गाय एवं रमणीय धन से यु करने के लए अपने रथ पर बैठकर हमारे घर को आओ. (१६) या व था ोकमा दवो यो तजनाय च थुः. आ न ऊज वहतम ना युवम्.. (१७) हे अ नीकुमारो! तुमने आकाश से शंसनीय यो त नीचे भेजी है. तुम हमारे लए बल दे ने वाला अ लाओ. (१७) एह दे वा मयोभुवा द ा हर यवतनी. उषबुधो वह तु सोमपीतये.. (१८) अ नीकुमार दाना दगुणयु , आरो य एवं सुख दे ने वाले, वण न मत रथ के वामी एवं श ु व वंसकारी ह. उनके घोड़े सोमरस पीने के लए उ ह इस य म लाव. (१८)

सू —९३

दे वता—अ न एवं सोम

अ नीषोमा वमं सु मे शृणुतं वृषणा हवम्. त सू ा न हयतं भवतं दाशुषे मयः.. (१) हे कामवषक अ न एवं सोम! इस आ ान को सुनो, हमारी तु तय को वीकार करो एवं ह दे ने वाले यजमान को सुख दे ने वाले बनो. (१) अ नीषोमा यो अ वा मदं वचः सपय त. त मै ध ं सुवीय गवां पोषं व म्.. (२) श

हे अ न और सोम! जो यजमान आज तु ह तु त वचन से पू जत करता है, उसे शाली गाएं एवं पु अ दो. (२)

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अ नीषोमा य आ त यो वां दाशा व कृ तम्. स जया सुवीय व मायु वत्.. (३) हे अ न और सोम! जो यजमान तु ह आ य क आ त और ह पु -पौ आ द से यु श संप पूणजीवन ा त हो. (३)

दान करता है, उसे

अ नीषोमा चे त त य वां यदमु णीतमवसं प ण गाः. अवा तरतं बृसय य शेषोऽ व दतं यो तरेकं ब यः.. (४) हे अ न और सोम! हम तु हारे उस पौ ष को जानते ह, जससे तुमने प णय के पास से गाय को छ ना था एवं वृषय अथात् व ा के पु वृ को मारकर आकाश म चलते ए सूय को सबके उपकाराथ पाया था. (४) युवमेता न द व रोचना य न सोम स तू अध म्. युवं स धूँर भश तेरव ाद नीषोमावमु चतं गृभीतान्.. (५) हे अ न और सोम! तुम दोन ने समानक ा बनकर इन चमकते ए न को आकाश म धारण कया है एवं इं क ह या के पाप अंश से यु न दय को कट दोष से छु ड़ाया है. (५) आ यं दवो मात र ा जभाराम नाद यं प र येनो अ े ः. अ नीषोमा णा वावृधानो ं य ाय च थु लोकम्.. (६) हे अ न और सोम! तुम दोन म से अ न को मात र ा आकाश से तथा सोम को बाज प ी पवत से यजमान के न म बलपूवक लाया है. तुम दोन ने तो ारा वृ ात करके दे वय के न म धरती का व तार कया है. (६) अ नीषोमा ह वषः थत य वीतं हयतं वृषणा जुषेथाम्. सुशमाणा ववसा ह भूतमथा ध ं यजमानाय शं योः.. (७) हे अ न और सोम! य के न म दए अ का भ ण करो एवं उसके बाद हमारी अ भलाषा पूरी करो. हे कामवषको! हमारी सेवा वीकार करो, हमारे लए सुखदाता एवं र णक ा बनो तथा यजमान के रोग और भय र करो. (७) यो अ नीषोमा ह वषा सपया े व चा मनसा यो घृतेन. त य तं र तं पातमंहसो वशे जनाय म ह शम य छतम्.. (८) हे अ न और सोम! जो यजमान दे व के त भ यु मन से तुम दोन क सेवा करता है, उसके य कम क र ा करो, यजमान को पाप से बचाओ तथा य काय म संल न उस को पया त सुख दो. (८) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

अ नीषोमा सवेदसा स ती वनतं गरः. सं दे व ा बभूवथुः.. (९) हे अ न और सोम! तुम समान धन वाले एवं एक साथ आ ान करने यो य हो. तुम हमारी तु त सुनो. तुम सभी दे व से अ धक स हो. (९) अ नीषोमावनेन वां यो वां घृतेन दाश त. त मै द दयतं बृहत्.. (१०) हे अ न एवं सोम! जो यजमान तु ह घृत से यु दो. (१०)

ह व दान करता है, उसे पया त धन

अ नीषोमा वमा न नो युवं ह ा जुजोषतम्. आ यातमुप नः सचा.. (११) हे अ न और सोम! हमारा यह ह आओ. (११)

वीकार करो एवं इस काय के लए एक साथ

अ नीषोमा पपृतमवतो न आ याय तामु या ह सूदः. अ मे बला न मघव सु ध ं कृणुतं नो अ वरं ु म तम्.. (१२) हे अ न और सोम! हमारे अ का पालन करो. ीर आ द ह को उ प करने वाली हमारी गाएं बढ़. तुम धनयु हम लोग को बल दो एवं हमारे य को धनसंप करो. (१२)

सू —९४

दे वता—अ न

इमं तोममहते जातवेदसे रथ मव सं महेमा मनीषया. भ ा ह नः म तर य संस ने स ये मा रषामा वयं तव.. (१) जस कार बढ़ई रथ का नमाण करता है, उसी कार हम पू य एवं सब ा णय को जानने वाले अ न के त बु न मत यह तु त सम पत करते ह. इस अ न क सेवा से हमारी बु क याणी बनती है. हे अ न! तु हारी म ता ा त कर लेने पर हम हसा को ा त न ह . (१) य मै वमायजसे स साध यनवा े त दधते सुवीयम्. स तूताव नैनम ो यंह तर ने स ये मा रषामा वयं तव.. (२) हे अ न! तुम जस यजमान के न म य करते हो, वह अभी ा त कर लेता है, श ु क पीड़ा से र हत होकर नवास करता है, उ म श धारण करता है एवं वृ पाता है. उसे कभी द र ता नह मलती. हम तु हारी म ता को पाकर कसी के ारा सताए न जाव. (२) शकेम वा स मधं साधया धय वे दे वा ह वरद या तम्. ******ebook converter DEMO Watermarks*******

वमा द याँ आ वह ता

१ म य ने स ये मा रषामा वयं तव.. (३)

हे अ न! हम तु ह भली कार व लत कर सक एवं तुम हमारे य को पूरा करो, य क ऋ वज ारा तुम म डाला गया ह दे वगण भ ण करते ह. तुम अ द तपु अथात् दे व को यहां ले आओ, य क हम उनक कामना करते ह. तु हारी म ता ा त कर लेने पर कोई हमारी हसा न करे. (३) भरामे मं कृणवामा हव ष ते चतय तः पवणापवणा वयम्. जीवातवे तरं साधया धयोऽ ने स ये मा रषामा वयं तव.. (४) हे अ न! हम तु हारे य के लए धन एक करते ह एवं त पव पर दशपौणमास य करते ए तु ह ान कराकर ह दे ते ह. तुम हमारे जीवनकाल को बढ़ाने के लए य पूण कराओ. तुम हमारे म बन गए हो, अब कोई हमारी हसा न करे. (४) वशां गोपा अ य चर त ज तवो प च य त चतु पद ु भः. च ः केत उषसो महाँ अ य ने स ये मा रषामा वयं तव.. (५) इसक करण सम त ा णय क र ा करती वचरण करती ह. दो पैर और चार पैर वाले जंतु इसक करण से यु हो जाते ह. हे अ न, तुम व च द तसंप , सबका ान कराने वाले एवं उषा से भी महान् हो. तु हारी म ता ा त करके हम कसी के ारा ह सत न ह . (५) वम वयु त होता स पू ः शा ता पोता जनुषा पुरो हतः. व ा व ाँ आ व या धीर पु य य ने स ये मा रषामा वयं तव.. (६) हे अ न! तुम य को दे व के त प ंचाने वाले, अ वयु, होता, शा ता, य के शोधक अथात् पोता एवं ज म से ही पुरो हत हो. तुम ऋ वज् के सम त कम को जानते हो, इस लए हमारा य पूरा करो. तु हारी म ता ा त करके हम कसी के ारा ह सत न ह . (६) यो व तः सु तीकः स ङ् ङ स रे च स त ळ दवा त रोचसे. रा या द धो अ त दे व प य य ने स ये मा रषामा वयं तव.. (७) हे अ न! तुम शोभन-अंग वाले होते ए भी सबके समान हो एवं र रहकर भी समीप दखाई दे ते हो. हे दे व! तुम रात के अंधकार का नाश करके चमकते हो. तु हारी म ता ा त करके हम कसी के ारा ह सत न ह . (७) पूव दे वा भवतु सु वतो रथोऽ माकं शंसो अ य तु ढ् यः. तदा जानीतोत पु यता वचोऽ ने स ये मा रषामा वयं तव.. (८) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हे दे वो! सोम नचोड़ने वाले यजमान का रथ अ य यजमान के रथ से आगे हो. हमारा पाप हमारे श ु को बाधा प ंचावे. तुम हमारी तु त पर यान दो और उसके अनुकूल चलकर हम पु करो. हे अ न! तु हारी म ता ा त कर लेने पर हमारी कोई हसा न कर सके. (८) वधै ःशंसाँ अप ढ् यो ज ह रे वा ये अ त वा के चद ण. अथा य ाय गृणते सुगं कृ य ने स ये मा रषामा वयं तव.. (९) हे अ न! तुम हननसाधन आयुध से अपवाद के पा एवं बु लोग का वध करो. जो श ु हमारे समीप या र ह, उनका नाश करो. इस कार तुम अपनी तु त करने वाले यजमान का माग शोभन बनाओ. तु हारी म ता ा त करके हम कसी के ारा ह सत न ह . (९) यदयु था अ षा रो हता रथे वातजूता वृषभ येव ते रवः. आ द व स व ननो धूमकेतुना ने स ये मा रषाम वयं तव.. (१०) हे अ न! तुम तेज वी, लाल रंग वाले एवं वायु वेग वाले दोन घोड़ को रथ म जोतते समय बैल के समान श द करते हो एवं अपने झंडे पी धूम से वन को घेर लेते हो. तु हारी म ता ा त करके हम कसी के ारा ह सत न ह . (१०) अध वना त ब युः पत णो सा य े यवसादो थरन्. सुगं त े तावके यो रथे योऽ ने स ये मा रषामा वयं तव.. (११) हे अ न! वन दे श को जलाने वाला तु हारा श द सुनकर प ी डर जाते ह. जब तु हारी वालाएं वन म वतमान तनक को भ ण करके सभी ओर फैलती ह, तब तु हारे लए एवं तु हारे रथ के लए सम त अर य सुगम बन जाता है. तु हारी म ता ा त करके हम कसी के ारा ह सत न ह . (११) अयं म य व ण य धायसे ऽवयातां म तां हेळो अ तः. मृळा सु नो भू वेषां मनः पुनर ने स ये मा रषामा वयं तव.. (१२) अ न के तोता को म और व ण धारण कर. अंत र म वतमान म त का ोध महान् होता है. हे अ न! हमारी र ा करो. इन म त का मन हमारे त स हो. हे अ न! तु हारी म ता ा त करके हम कसी के ारा ह सत न ह . (१२) दे वो दे वानाम स म ो अ तो वसुवसूनाम स चा र वरे. शम याम तव स थ तमेऽ ने स ये मा रषामा वयं तव.. (१३) हे तेज वी अ न! तुम सब दे व के परम म , सुंदर एवं य क सम त संप य के नवास हो. हम तु हारे अ त व तृत य गृह म वतमान ह . तु हारी म ता ा त करके हम ******ebook converter DEMO Watermarks*******

कसी के ारा ह सत न ह . (१३) त े भ ं य स म ः वे दमे सोमा तो जरसे मृळय मः. दधा स र नं वणं च दाशुषेऽ ने स ये मा रषामा वयं तव.. (१४) हे अ न! जस समय तुम अपने थान पर व लत एवं सोम ारा आ त होकर ऋ वज क तु त का वषय बनते हो, उस समय अ यंत भ ा त करते हो. तुम हमारे लए परम सुखकारक एवं यजमान के लए रमणीय य फल एवं धन दे ने वाले बनो, तु हारी म ता ा त करके हम कसी के ारा ह सत न ह . (१४) य मै वं सु वणो ददाशोऽनागा वम दते सवताता. यं भ े ण शवसा चोदया स जावता राधसा ते याम.. (१५) हे शोभनधनसंप एवं अखंडनीय अ न! सम त य म वतमान जस यजमान को तुम पाप से र हत करके क याणकारी बल से यु करते हो, वह समृ होता है. तु हारी तु त करने वाले हम पु -पौ ा द वाले धन से यु ह . (१५) स वम ने सौभग व य व ान माकमायुः तरेह दे व. त ो म ो व णो मामह ताम द तः स धुः पृ थवी उत ौः.. (१६) हे अ न! तुम सौभा य को जानते ए इस य कम म हमारी आयुवृ व ण, अ द त, सधु, पृ वी एवं आकाश हमारी उस आयु क र ा कर. (१६)

सू —९५

करो. म ,

दे वता—अ न

े व पे चरतः वथ अ या या व समुप धापयेते. ह रर य यां भव त वधावा छु ो अ य यां द शे सुवचाः.. (१) हे दवस और रा ! तुम सुंदर योजन वाले एवं पर पर व प से यु होकर चलते हो. रात और दन दोन , दोन के पु —अ न और सूय क र ा करते ह. रा के पास से सूय ह व प अ ा त करता है एवं सरा दन के पास से शोभन काश वाला दखाई दे ता है. (१) दशेमं व ु जनय त गभमत ासो युवतयो वभृ म्. त मानीकं वयशसं जनेषु वरोचमानं प र ष नय त.. (२) अपने जग पोषण प काय म आल यर हत, न य युवा, दश दशा व मेघ म गभ प से वतमान वायु सब पदाथ म वतमान, ती ण तेजयु एवं अ तशय यश वी अ न को उ प करती है. इसी अ न को सब जगह ले जाया जाता है. (२) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

ी ण जाना प र भूष य य समु एकं द ेकम सु. पूवामनु दशं पा थवानामृतू शास दधावनु ु .. (३) समु , आकाश और अंत र —ये अ न के तीन ज म थान ह. सूय प अ न ने ऋतु को वभ करके बताते ए पृ वी पर रहने वाले सम त ा णय के न म पूव दशा को अनु म से बनाया. (३) क इमं वो न यमा चकेत व सो मातॄजनयत वधा भः. ब नां गभ अपसामुप था महा क व न र त वधावान्.. (४) हे यजमानो! जल, वन आ द म गभ प से थत अ न को तुम म से कौन जानता है? अथात् कोई नह . यह पु होकर भी अपनी जल पी माता को ह ारा ज म दे ता है. यह ौढ़ तेज वाला, ांतदश एवं ह व प अ से यु अ न अनेक कार के जल को उ प करने का कारण बनकर समु से सूय प म नकलता है. (४) आ व ो वधते चा रासु ज ानामू वः वयशा उप थे. उभे व ु ब यतुजायमाना तीची सहं त जोषयेते.. (५) मेघ म तरछे रहने वाले जल क गोद म रहकर भी ऊपर क ओर जलता आ अ न शोभन द त वाला बनकर चमकता एवं बढ़ता है. व ा से उ प अ न से धरती और आकाश दोन डरते ह एवं सहनशील अ न के समीप आकर सेवा करते ह. (५) उभे भ े जोषयेते न मेने गावो न वा ा उप त थुरेवैः. स द ाणां द प तबभूवा त यं द णतो ह व भः.. (६) रात और दन दोन शोभन य के समान अ न क सेवा करते एवं रंभाती ई गाय के समान पास म आकर ठहरते ह. आ ानीय अ न के द ण भाग म थत होकर ऋ वज् ह ारा जस अ न को तृ त करते ह, वह सम त बल का वामी बनता है. (६) उ ंयमी त स वतेव बा उभे सचौ यतते भीम ऋ न्. उ छु म कमजते सम मा वा मातृ यो वसना जहा त.. (७) भयंकर अ न सूय क भुजा पी करण के समान अपने तेज को व तृत करते एवं धरती-आकाश दोन को अलंकृत करके उनके काम म लगाते ह तथा सम त पदाथ से तेज वी एवं सार प रस हण करते ह. वे अपनी माता प जल से सारे संसार को ढकने वाला नवीन तेज बनाते ह. (७) वेषं पं कृणुत उ रं य संपृ चानः सदने गो भर ः. क वबु नं प र ममृ यते धीः सा दे वताता स म तबभूव.. (८) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

जब अ न अंत र म चलने वाले जल से संयु , तेज वी एवं सव म काश धारण करते ह, तब ांतदश एवं सवाधार अ न सम त जल के मूलभूत आकाश को अपने तेज के ारा ढक लेते ह. तेज वी अ न ारा फैलाई ई चमक तेजसमूह बन गई थी. (८) उ ते यः पय त बु नं वरोचमानं म हष य धाम. व े भर ने वयशो भ र ोऽद धे भः पायु भः पा मान्.. (९) हे महान् अ न! तु हारा सबको पराभूत करने वाला एवं चमकता आ तेज जल के मूल कारण आकाश को सब ओर से घेरे ए है. तु हारा तेज अ य एवं पालक है. तुम हमारे ारा व लत होकर अपने तेज के साथ यहां आओ. (९) ध व ोतः कृणुते गातुमू म शु ै म भर भ न त ाम्. व ा सना न जठरेषु ध ेऽ तनवासु चर त सूषु.. (१०) अ न आकाश म गमनशील जलसमूह को वाह का प दे ते एवं उसी नमल करण वाले जलसमूह से धरती को भगोते ह. वे जठर म संपूण अ को धारण करते ह, इसी लए वषा के प ात् उ प नवीन फसल के भीतर रहते ह. (१०) एवा नो अ ने स मधा वृधानो रेव पावक वसे व भा ह. त ो म ो व णो मामह ताम द तः स धुः पृ थवी उत ौः.. (११) हे शोधक अ न! स मधा के कारण व लत होकर हम धनयु अ दे ने के लए वशेष प से चमको. म , व ण, अ द त, सधु, धरती और आकाश उस अ क पूजा कर. (११)

सू —९६

दे वता—अ न

स नथा सहसा जायमानः स ः का ा न बळध व ा. आप म ं धषणा च साध दे वा अ नं धारय वणोदाम्.. (१) बलपूवक का घषण से उ प अ न शी ही चरंतन के समान ांतद शय के सम त य कम को धारण करते ह. उस व ुत् प अ न को वायु और जल म बना लेते ह. ऋ वज ने धनदाता अ न को धारण कया है. (१) स पूवया न वदा क तायो रमाः जा अजनय मनूनाम्. वव वता च सा ामप दे वा अ नं धारय वणोदाम्.. (२) अ न ने आयु क पूवकाल कृत एवं गुण न तु त को सुनकर इस मानवी जा को उ प कया है एवं आ छादक तेज के आकाश को ा त कया है. ऋ वज ने धनदाता ******ebook converter DEMO Watermarks*******

अ न को धारण कया है. (२) तमीळत थमं य साधं वश आरीरा तमृ सानम्. ऊजः पु ं भरतं सृ दानुं दे वा अ नं धारय वणोदाम्.. (३) हे मनु यो! दे व म मुखतया य साधक, ह ारा आ त, तो ारा स , अ के पु , जा के पोषक एवं दानशील वामी अ न के समीप जाकर उनक तु त करो. ऋ वज ने धनदाता अ न को धारण कया है. (३) स मात र ा पु वारपु वदद्गातुं तनयाय व वत्. वशां गोपा ज नता रोद योदवा अ नं धारय वणोदाम्.. (४) अंत र म वतमान अ न हमारे पु के लए अनेक अनु ान माग ा त कराव. वे वरणीय पु वाले, वगदाता, जा के र क, दे व, धरती और आकाश के उ प क ा ह. ऋ वज ने धनदाता अ न को धारण कया है. (४) न ोषासा वणमामे याने धापयेते शशुमेकं समीची. ावा ामा मो अ त व भा त दे वा अ नं धारय वणोदाम्.. (५) दन और रात बार-बार एक- सरे का प न करके मलते ए अ न पी एक ही बालक का पालन करते ह. वे तेज वी अ न, धरती और आकाश के म य म वशेष प से का शत होते ह. ऋ वज ने धनदाता अ न को धारण कया है. (५) रायो बु नः संगमनो वसूनां य य केतुम मसाधनो वेः. अमृत वं र माणास एनं दे वा अ नं धारय वणोदाम्.. (६) अपने अमृत व क र ा करने वाले दे व ने धन के मूल नवास हेत,ु धन को मलाने वाले, तोता क अ भलाषा के पूरक तथा य के केतु प धनदाता अ न को धारण कया था. (६) नू च पुरा च सदनं रयीणां जात य च जायमान य च ाम्. सत गोपां भवत भूरेदवा अ नं धारय वणोदाम्.. (७) ाचीनकाल म एवं आजकल होने वाले सम त धन के नवास थान, उ प एवं भ व य म होने वाले कायसमूह के नवासभूत तथा इस समय उप थत एवं भ व य म ज म लेने वाले पदाथ के र क तथा धनदाता अ न को दे व ने धारण कया. (७) वणोदा वणस तुर य वणोदाः सनर य यंसत्. वणोदा वीरवती मषं नो वणोदा रासते द घमायुः.. (८) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

यु

धन दे ने वाले अ न हम थावर एवं जंगम संप अ एवं द घ आयु द. (८)

का एक अंश द. वे हम वीर पु ष से

एवा नो अ ने स मधा वृधानो रेव पावक वसे व भा ह. त ो म ो व णो मामह ताम द तः स धुः पृ थवी उत ौः.. (९) हे प व करने वाले अ न! स मधा के कारण व लत होकर हम धनयु अ दे ने के लए वशेष प से का शत बनो. म , व ण, अ द त, सधु, धरती और आकाश उस अ क पूजा कर. (९)

दे वता—अ न

सू —९७

अप नः शोशुचदघम ने शुशु या र यम्. अप नः शोशुचदघम्.. (१) हे अ न! हमारा पाप न हो. तुम हमारे धन को सब ओर से का शत करो. हमारा पाप न हो. (१) सु े या सुगातुया वसूया च यजामहे. अप नः शोशुचदघम्.. (२) हे अ न! हम शोभन े , शोभन माग और धन क इ छा से ह व ारा तु हारी पूजा करते ह. हमारा पाप न हो. (२) य

द एषां ा माकास सूरयः. अप नः शोशुचदघम्.. (३)

हे अ न! हमारे तोता कु स के समान पाप न हो. (३) य े अ ने सूरयो जायेम ह

े ह . वे सभी तोता

म उ म ह. हमारा

ते वयम्. अप नः शोशुचदघम्.. (४)

हे अ न! तु हारी तु त करने वाले पु -पौ ा द पाकर बढ़ते ह, इसी लए हम भी तु हारी तु त करके बढ़. हमारे पाप न ह . (४) यद नेः सह वतो व तो य त भानवः. अप नः शोशुचदघम्.. (५) श ु को परा जत करने वाली अ न क करण सभी जगह जाती ह, इस लए हमारे पाप न ह . (५) वं ह व तोमुख व तः प रभूर स. अप नः शोशुचदघम्.. (६) हे अ न! तु हारे मुख चार ओर ह, इस लए तुम चार ओर से हमारी र ा करो. हमारा पाप न हो. (६) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

षो नो व तोमुखा त नावेक पारय. अप नः शोशुचदघम्.. (७) हे सवतोमुख अ न! जस कार नाव से नद को पार करते ह, उसी कार तुम हमारे क याण के लए हम श ुर हत दे श म प ंचाओ. हमारे पाप न ह . (७) स नः स धु मव नावया त पषा व तये. अप नः शोशुचदघम्.. (८) हे अ न! जस कार नाव से नद को पार करते ह, उसी कार तुम हमारे क याण के लए हम श ुर हत दे श म प ंचाकर हमारा पालन करो. हमारे पाप न ह . (८)

सू —९८

दे वता—अ न

वै ानर य सुमतौ याम राजा ह कं भुवनानाम भ ीः. इतो जातो व मदं व च े वै ानरो यतते सूयण.. (१) हम पर वै ानर अ न क अनु हबु हो. वे सामने से सेवनीय एवं सबके वामी ह. दो का से उ प होकर अ न संसार को दे खते ह एवं ातःकाल उदय होते ए सूय से मल जाते ह. (१) पृ ो द व पृ ो अ नः पृ थ ां पृ ो व ा ओषधीरा ववेश. वै ानरः सहसा पृ ो अ नः स नो दवा स रषः पातु न म्.. (२) अ न आकाश म सूय प से तथा धरती पर गाहप या द प से वतमान ह. अ न ने सारी ओष धय म उ ह पकाने के लए वेश कया है. वही हम दवस एवं रा म श ु से बचाव. (२) वै ानर तव त स यम व मा ायो मघवानः सच ताम्. त ो म ो व णो मामह ताम द तः स धुः पृ थवी उत ौः.. (३) हे वै ानर! तुमसे संबं धत यह य सफल हो, हम धन ा त हो एवं अ त शी पु हमारी सेवा कर. म , व ण, अ द त, सधु, धरती और आकाश हमारे धन क र ा कर. (३)

सू —९९

दे वता—अ न

जातवेदसे सुनवाम सोममरातीयतो न दहा त वेदः. स नः पषद त गा ण व ा नावेव स धुं रता य नः.. (१) हम सब भूत को जानने वाले अ न के न म सोमरस नचोड़ते ह. अ न हमारे त श ुता का वहार करने वाल का धन न कर. जस कार नाव क सहायता से नद पार ******ebook converter DEMO Watermarks*******

करते ह, वैसे ही अ न हम ःख एवं पाप से पार कराव. (१)

सू —१००

दे वता—इं

स यो वृषा वृ ये भः समोका महो दवः पृ थ ा स ाट् . सतीनस वा ह ो भरेषु म वा ो भव व ऊती.. (१) जो इं कामवष , श तथा सं ाम म तु तक ा बन. (१)

संप , महान्, आकाश और धरती के ई र, जल बरसाने वाले ारा बुलाने यो य ह, वे म त के साथ मलकर हमारे र क

य याना तः सूय येव यामो भरेभरे वृ हा शु मो अ त. वृष तमः स ख भः वे भरेवैम वा ो भव व ऊती.. (२) जस कार सूय क चाल को सरा कोई नह पा सकता, उसी कार जनक ग त सर के लए अ ा य है, जो अपने ग तशील म -म त के साथ अ तशय कामवधक ह, जो सभी सं ाम म श ु के हंता और शोषक ह, वे इं म त के सहयोग से हमारे र क बन. (२) दवो न य य रेतसो घानाः प थासो य त शवसापरीताः. तरद् े षाः सास हः प ये भम वा ो भव व ऊती.. (३) जसक बलयु एवं सर ारा अ ा य करण सूय के समान आकाश म वषा के जल को गराती इधर-उधर फैलती ह, वे ही जतश ु एवं श ारा श ु को परा जत करने वाले इं म त के सहयोग से हमारे र क बन. (३) सो अ रो भर र तमो भूदवृ ् षा वृष भः स ख भः सखा सन्. ऋ म भऋ मी गातु भ य ो म वा ो भव व ऊती.. (४) जो ग तशील म अ यंत ती ग त, अभी दाता म सव म कामपूरक, म म परम हतकारी, अचनीय म सवा धक पूजापा एवं तु तपा म सवा धक तु त यो य ह, वे इं म त के सहयोग से हमारे र क बन. (४) स सूनु भन े भऋ वा नृषा े सास ाँ अ म ान्. सनीळे भः व या न तूव म वा ो भव व ऊती.. (५) जो पु म त क सहायता से महान् बनकर सं ाम म मनु य के श ु को परा जत करते ह एवं अपने सहवासी म त क सहायता से अ के कारण जल को बादल से नीचे गराते ह, वे इं म त के सहयोग से हमारे र क बन. (५) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

स म युमीः समदन य कता माके भनृ भः सूय सनत्. अ म ह स प तः पु तो म वा ो भव व ऊती.. (६) श ु हसक, सं ामक ा, स जन के पालक एवं अनेक यजमान ारा बुलाए गए इं आज के दन हम सूय के काश का उपभोग करने द एवं म त के सहयोग से हमारे र क बन. (६) तमूतयो रणय छू रसातौ तं ेम य तयः कृ वत ाम्. स व य क ण येश एको म वा ो भव व ऊती.. (७) वीर पु ष ारा लड़े गए सं ाम म म त् श द ारा जस इं को स करते ह एवं मनु य जसे र णीय धन का रखवाला बनाते ह, वे अ भमत फल दे ने म एकमा समथ इं म त क सहायता से हमारे र क बन. (७) तम स त शवस उ सवेषु नरो नरमवसे तं धनाय. सो अ धे च म स यो त वद म वा ो भव व

ऊती.. (८)

तोता लोग सं ाम म र ा एवं धन पाने के उ े य से इं क शरण म जाते ह, य क वे यु म वजय पी काश दे ते ह. वे इं म त के सहयोग से हमारे र क बन. (८) स स ेन यम त ाधत स द णे संगृभीता कृता न. स क रणा च स नता धना न म वा ो भव व ऊती.. (९) इं बाएं हाथ से श ु को रोकते ह, दाएं हाथ से यजमान ारा दया आ ह वीकार करते ह एवं तोता क तु त सुनकर धन दे ते ह. वे म त के सहयोग से हमारे र क बन. (९) स ामे भः स नता स रथे भ वदे व ा भः कृ भ व१ . स प ये भर भभूरश तीम वा ो भव व ऊती.. (१०) जो इं म त के साथ धन दे ते ह, वे आज अपने रथ के कारण सभी मनु य ारा पहचाने जा रहे ह एवं ज ह ने अपने बल से श ु को परा जत कया है, वे म त के सहयोग से हमारे र क बन. (१०) स जा म भय समजा त मीळ् हेऽजा म भवा पु त एवैः. अपां तोक य तनय य जेषे म वा ो भव व ऊती.. (११) जो इं ब त से यजमान ारा बुलाए जाने पर अपने बांधव एवं बांधवहीन मानव के साथ यु े म स म लत होते ह और दोन कार के शरणागत लोग एवं उनके पु -पौ को वजय दलाते ह, वे म त के सहयोग से हमारे र क बन. (११) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

स व भृ युहा भीम उ ः सह चेताः शतनीथ ऋ वा. च ीषो न शवसा पा चज यो म वा ो भव व ऊती.. (१२) व धारी, असुरहंता, भयहेतु, तेज वी, सव , भूत तु तय के पा , भासमान, सोमरस के समान पांच कार के जन के र क इं म त के सहयोग से हमारे र क बन. (१२) त य व ः द त म वषा दवो न वेषो रवथः शमीवान्. तं सच ते सनय तं धना न म वा ो भव व ऊती.. (१३) जनका व श ु को ब त लाता है, जो शोभन उदक के दाता, सूय के समान तेज वी, गजन-श दक ा एवं लोकानु ह संबंधी कम म संल न ह, धन और धन का दान जनक सेवा करते ह, वे इं म त के सहयोग से हमारे र क बन. (१३) य याज ं शवसा मानमु थं प रभुज ोदसी व तः सीम्. स पा रष तु भम दसानो म वा ो भव व ऊती.. (१४) जस इं का सव पमान एवं शंसनीय बल धरती और आकाश का सवदा एवं भलीभां त पालन करता है, वे हमारे य से स होकर हम पाप से बचाव एवं म त के सहयोग से हमारे र क बन. (१४) न य य दे वा दे वता न मता आप न शवसो अ तमापुः. स र वा व सा मो दव म वा ो भव व ऊती.. (१५) दे व, मानव एवं जल जन इं के बल का अंत ा त नह करते, वे अपने श ुनाशक बल से धरती एवं आकाश से भी आगे बढ़ गए ह. वे म त के सहयोग से हमारी र ा कर. (१५) रो ह ावा सुमदं शुललामी ु ा राय ऋ ा य. वृष व तं ब ती धूषु रथं म ा चकेत ना षीषु व ु.. (१६) इं के अ लाल एवं काले रंग वाले, द घ अवयव से यु , आभूषणधारी एवं आकाश म नवास करने वाले ह. वे ऋजा ऋ ष को धन दे ने के न म आने वाले कामवष इं से अ ध त रथ के जुए को ख चते ह. मनु य सेना इन स तादायक अ को जानती है. (१६) एत य इ ऋ ा ः

वृ ण उ थं वाषा गरा अ भ गृण त राधः. भर बरीषः सहदे वो भयमानः सुराधाः.. (१७)

हे अभी दाता इं ! वृषा ग र के पु अथात् ऋजा , अंबरीष, सहदे व, भयमान एवं सुराधर तु हारी स ता के न म यह तो बोलते ह. (१७) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

द यू छ यूँ पु त एवैह वा पृ थ ां शवा न बह त्. सन े ं स ख भः ये भः सन सूय सनदपः सुव ः.. (१८) अनेक यजमान ारा बुलाए गए इं ने ग तशील म त के सहयोग को पाकर धरती पर रहने वाले श ु एवं रा स पर आ मण करके हसक व ारा उनका वध कया. शोभन व यु इं ने ेत वण के अलंकार से द तांग म त के साथ उनक श ु ारा अ धकृत भू म, सूय एवं जल को बांट लया. (१८) व ाहे ो अ धव ा नो अ वप रह्वृताः सनुयाम वाजम्. त ो म ो व णो मामह ताम द तः स धुः पृ थवी उत ौः.. (१९) सभी काल म वतमान इं हमारे प पाती बनकर बोल एवं हम अकु टल ग त बनकर ह पी अ का उपभोग कर. म , व ण, अ द त, सधु धरती एवं आकाश उसक पूजा कर. (१९)

सू —१०१

दे वता—इं

म दने पतुमदचता वचो यः कृ णगभा नरह ृ ज ना. अव यवो वृषणं व द णं म व तं स याय हवामहे.. (१) ऋ वजो! जन इं ने राजा ऋ ज ा क म ता के कारण कृ ण असुर क ग भणी प नय को मारा था, उ ह तु तपा इं के उ े य से ह व प अ के साथ-साथ तु त वचन बोलो. वे कामवष दाएं हाथ म व धारण करते ह. र ा के इ छु क हम उ ह इं का म त स हत आ ान करते ह. (१) यो ंसं जा षाणेन म युना यः श बरं यो अह प ुम तम्. इ ो यः शु णमशुषं यावृणङ् म व तं स याय हवामहे.. (२) जन इं ने अ तशय कोप के कारण बना बांह वाले वृ असुर का वध कया, ज ह ने शंबर, य न करने वाले प ु एवं व शोषक शु ण का नाश कया, हम उ ह इं को म त के स हत अपना म बनाने के लए बुलाते ह. (२) य य ावापृ थवी प यं मह य ते व णो य य सूयः. य ये य स धवः स त तं म व तं स याय हवामहे.. (३) हम म बनाने हेतु इं को म त के साथ बुलाते ह. न दयां उनके नयम मानते ह. (३)

ौ, पृ थवी, सूय, व ण एवं

यो अ ानां यो गवां गोप तवशी य आ रतः कम णकम ण थरः. ******ebook converter DEMO Watermarks*******

वीळो

द ो यो असु वतो वधो म व तं स याय हवामहे.. (४)

जो अ एवं सम त गाय के वामी, वतं , तु त ा तक ा, सम त य कम म थत एवं य म सोम नचोड़ने वाल के बल श ु को न करते ह, हम उ ह इं को म त के साथ अपना म बनाने के लए बुलाते ह. (४) यो व य जगतः ाणत प तय णे थमो गा अ व दत्. इ ो यो द यूँरधराँ अवा तर म व तं स याय हवामहे.. (५) जो चलने वाले एवं सांस लेने वाले ा णय के वामी ह, ज ह ने प ण ारा अप त गाय का सभी दे व से पहले ा ण के न म उ ार कया था एवं ज ह ने असुर को नकृ बनाकर मारा था, उ ह इं को हम अपना सखा बनाने के लए म त के साथ बुलाते ह. (५) यः शूरे भह ो य भी भय धाव यते य ज यु भः. इ ं यं व ा भुवना भ संदधुम व तं स याय हवामहे.. (६) जो शूर और कायर ारा बुलाने यो य ह, यु म हारकर भागने वाले एवं वजयी दोन ही ज ह बुलाते ह एवं सभी ाणी ज ह अपने-अपने काय म आगे रखते ह, उ ह इं को हम अपना म बनाने के लए म त के साथ बुलाते ह. (६) ाणामे त दशा वच णो े भय षा तनुते पृथु यः. इ ं मनीषा अ यच त ुतं म व तं स याय हवामहे.. (७) काशमान इं सभी ा णय म ाण प से वतमान पु —म त को मनु य के लए दान करते ए आकाश म उ दत होते ह एवं उ ह म त के साथ ा णय म म यमा वाणी का व तार करते ह. तु त पी वाणी उ ह इं क पूजा करती है. उ ह हम म त के साथ अपना म बनाने के लए बुलाते ह. (७) य ा म वः परमे सध थे य ावमे वृजने मादयासे. अत आ या वरं नो अ छा वाया ह व कृमा स यराधः.. (८) हे म त स हत इं ! तुम उ म घर अथवा नवीन थान म स रहते हो. तुम हमारे य म आओ. हे स यधन! तु हारी कामना से हम ह दे ते ह. (८) वाये सोमं सुषुमा सुद अधा नयु वः सगणो म

वाया ह व कृमा वाहः. र म य े ब ह ष मादय व.. (९)

हे शोभन बल वाले इं ! हम तु हारी कामना से सोमरस नचोड़ते ह. हे तु त ारा बुलाने यो य इं ! हम तु हारी कामना से ह व दे ते ह. हे अ के वामी! तुम म त के साथ ******ebook converter DEMO Watermarks*******

गण प म वतमान य म बछे ए कुश पर तृ त बनो. (९) मादय व ह र भय त इ व य व श े व सृज व धेने. आ वा सु श हरयो वह तूश ह ा न त नो जुष व.. (१०) हे इं ! अपने घोड़ के साथ स बनो, सोमपान के न म अपने जबड़ , ज ा एवं उप ज ा को खोलो. हे सुंदर ठोड़ी वाले इं ! घोड़े तु ह यहां लाव. तुम हमारी कामना करते ए हमारा ह हण करो. (१०) म तो य वृजन य गोपा वय म े ण सनुयाम वाजम्. त ो म ो व णो मामह ताम द तः स धुः पृ थवी उत ौः.. (११) म त के साथ तु त कए जाने वाले एवं श ुहंता इं के ारा सुर त हम उनसे अ ा त कर. म , व ण, अ द त, सधु, पृ वी और आकाश उस अ क पूजा कर. (११)

सू —१०२

दे वता—इं

इमां ते धयं भरे महो महीम य तो े धषणा य आनजे. तमु सवे च सवे च सास ह म ं दे वासः शवसामद नु.. (१) हे इं ! तुझ महान् के उ े य से म यह महती तु त कर रहा ,ं य क तु हारी अनु ह बु मेरे तो पर ही आधा रत है. ऋ वज ने अ भवृ एवं धन पाने के लए श ु पराभवकारी इं को तु तय ारा स कया है. (१) अ य वो न ः स त ब त ावा ामा पृ थवी दशतं वपुः. अ मे सूयाच मसा भच े े क म चरतो वततुरम्.. (२) गंगा आ द सात स रताएं इं क क त एवं आकाश, पृ वी तथा अंत र इं का दशनीय प धारण करते ह. हे इं ! पदाथ को हमारे सामने का शत करने एवं हमारी ा उ प करने के लए सूय और चं बारीबारी से बार-बार घूमते ह. (२) तं मा रथं मघव ाव सातये जै ं यं ते अनुमदाम संगमे. आजा न इ मनसा पु ु त वायद् यो मघव छम य छ नः.. (३) हे हमारी बु ारा अनेक बार तु त कए गए इं ! तु हारे जस जयशील रथ को श ु के साथ होने वाले सं ाम म दे खकर हम स होते ह, हे धन वामी इं ! हम धन दे ने के लए उसी रथ को चलाओ एवं अपने अ भलाषी हम लोग को सुख दो. (३) वयं जयेम वया युजा वृतम माकमंशमुदवा भरेभरे. अ म य म व रवः सुगं कृ ध श ूणां मघव वृ या ज.. (४) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हे इं ! तु ह सहायक पाकर हम तोता श ु को जीत लगे. सं ाम म हमारे भाग क र ा करो. हे मघवन्! हम धन सुलभ कराओ तथा श ु क श बा धत करो. (४) नाना ह वा हवमाना जना इमे धनानां धतरवसा वप यवः. अ माकं मा रथमा त सातये जै ं ही नभृतं मन तव.. (५) हे धनधारणक ा इं ! अपनी र ा के न म ब त से लोग तु हारी तु त करते एवं तु ह बुलाते ह, उन म केवल हम धन दान करने के लए रथ पर बैठो. हे इं ! तु हारा मन अ ाकुल एवं जयशील है. (५) गो जता बा अ मत तुः समः कम कम छतमू तः खजङ् करः. अक प इ ः तमानमोजसाथा जना व य ते सषासवः.. (६) हे इं ! तु हारी भुजाएं श -ु वजय ारा गाय को ा त कराने वाली एवं तु हारा ान असी मत है. तुम े हो और तोता के य क अनेक कार से र ा करते हो. तुम सं ामक ा, वतं एवं सम त ा णय क श के तमान हो. इसी लए धन पाने के इ छु क तु ह अनेक कार से बुलाते ह. (६) उ े शता मघव ु च भूयस उ सह ा रचे कृ षु वः. अमा ं वा धषणा त वषे म धा वृ ा ण ज नसे पुर दर.. (७) हे धन वामी इं ! मनु य को तु हारे ारा दया गया अ सौ धन से अ धक, शता धक से भी अ धक अथवा हजार से भी अ धक है. अग णत गुण से यु तुमको हमारी तु त का शत करती है. हे पुरंदर! तुम श ु का वनाश करते हो. (७) व धातु तमानमोजस त ो भूमीनृपते ी ण रोचना. अतीदं व ं भुवनं वव था श ु र जनुषा सनाद स.. (८) हे मनु य के पालनक ा इं ! जस कार तगुनी बट ई र सी ढ़ होती है, उसी कार तुम बल म सभी ा णय के तमान हो. हे इं ! तुम अपने ज मकाल से ही श ुर हत थे, इस लए तुम तीन लोक म तीन कार के तेज एवं इस संसार को ढोने म पूरी तरह समथ हो. (८) वां दे वेषु थमं हवामहे वं बभूथ पृतनासु सास हः. सेमं नः का मुपम युमु द म ः कृणोतु सवे रथं पुरः.. (९) हे इं ! तुम दे व म े एवं सं ाम म श प ु राभवक ा हो. हम तु ह बुलाते ह. तुम हम तु तक ा, सव एवं श ुनाशक पु दो तथा यु होने पर हमारा रथ अ य रथ से आगे करो. (९) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

वं जगेथ न धना रो धथाभ वाजा मघव मह सु च. वामु मवसे सं शशीम यथा न इ हवनेषु चोदय.. (१०) हे इं ! तुम श ु को जीतते हो एवं उनका धन छपाकर नह रखते. हे मघवन्! छोटे एवं बड़े सं ाम म हम तु त ारा तुझ उ को अपनी र ा के न म बुलाते ह. हम यु के न म आ ान से े रत करो. (१०) व ाहे ो अ धव ा नो अ वप रह्वृताः सनुयाम वाजम्. त ो म ो व णो मामह ताम द तः स धुः पृ थवी उत ौ.. (११) सभी काल म वतमान इं हमारे प पाती बनकर बोल एवं हम अकु टल ग त बनकर ह पी अ का उपभोग कर. म , व ण, अ द त, सधु, धरती एवं आकाश उसक पूजा कर. (११)

सू —१०३

दे वता—इं

त इ यं परमं पराचैरधारय त कवयः पुरेदम्. मेदम य १ यद य समी पृ यते समनेव केतुः.. (१) हे इं ! ाचीन काल म ांतदश तोता ने तु हारे इस स बल को स मुख धारण कया था. इं क धरती पर रहने वाली एवं आकाश म रहने वाली यो तयां इस कार मल जाती ह, जस कार यु म वरोधी यो ा के झंडे मल जाते ह. (१) स धारय पृ थव प थ च व ण े ह वा नरपः ससज. अह हम भन ौ हणं ह संसं मघवा शची भः.. (२) इं ने असुर पी ड़त धरती को धारण एवं व तृत कया है, व से श ु को मारकर वषा का जल बहाया है, अंत र म वतमान मेघ का वध कया है, रो हण असुर को वद ण कया है एवं अपने शौय से बा हीन वृ को समा त कया है. (२) स जातूभमा धान ओजः पुरो व भ द चर दासीः. व ा व द यवे हे तम याय सहो वधया ु न म .. (३) व ायुध एवं श सा य काय म ा रखने वाले इं ने द यु के नगर का वनाश करके व वध गमन कया था. हे व धारी! हमारी तु तय को समझते ए तुम हमारे श ु पर आयुध छोड़ो एवं तु तक ा का बल तथा यश बढ़ाओ. (३) त चुषे मानुषेमा युगा न क त यं मघवा नाम ब त्. उप य द युह याय व ी य सूनुः वसे नाम दधे.. (४) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

वृ ा द द यु को मारने के लए घर से नकलते ए व धारी एवं श ु ेरक इं ने जय ल ण के लए जो नाम धारण कया था, उससे बल का वणन करने वाले यजमान के लए धन वामी इं सूय प से मानवोपयोगी दनरात के समूह का नमाण करते ह. (४) तद येदं प यता भू र पु ं द य ध न वीयाय. स गा अ व द सो अ व दद ा स ओषधीः सो अपः स वना न.. (५) हे यजमानो! इं के बु एवं व तृत शौय को दे खो एवं इस पर गाय , अ ओष धय , जल एवं वन को ा त कया. (५)

ा करो. इं ने

भू रकमणे वृषभाय वृ णे स य शु माय सुनवाम सोमम्. य आ या प रप थीव शूरोऽय वनो वभज े त वेदः… (६) अनेक वध कमयु , दे व म े , इ छापू त म समथ एवं यथाथ श वाले इं के न म हम सोम नचोड़ते ह. जस कार बटमार जानेवाले भले मनु य का धन छ न लेता है, उसी कार शूर इं धन का आदर करके य न करने वाल का धन छ नकर उसे यजमान को दे ने के लए ले जाते ह. (६) तद ेव वीय चकथ य सस तं व ेणाबोधयोऽ हम्. अनु वा प नी षतं वय व े दे वासो अमद नु वा.. (७) हे इं ! तुमने यह वीरता का कम कया जो सोते ए अ ह रा स को अपने व ारा जगा दया. तब तु ह ह षत दे खकर दे वप नय ने स ता अनुभव क . ग तशील म द्गण एवं अ य दे व भी तु हारे साथ-साथ स ए थे. (७) शु णं प ुं कुयवं वृ म यदावधी व पुरः श बर य. त ो म ो व णो मामह ताम द तः स धुः पृ थवी उत ौः.. (८) हे इं ! तुमने शु ण, प ु एवं कुयव का वध तथा शंबर असुर के नगर को वद ण कया था. हमने इस तो ारा जो चाहा है, उसक पूजा म , व ण, अ द त, सधु, धरती और आकाश कर. (८)

सू —१०४

दे वता—इं

यो न इ नषदे अका र तमा न षीद वानो नावा. वमु या वयोऽवसाया ा दोषा व तोवहीयसः प वे.. (१) हे इं ! तु हारे बैठने के लए जो थान बनाया गया है, उस पर हंसते ए घोड़े के समान आकर शी बैठो. जो र सयां घोड़ को रथ से बांधती ह, उ ह खोलकर घोड़ को रथ से ******ebook converter DEMO Watermarks*******

अलग कर दो, य क य काल आने पर वे घोड़े रात- दन तु ह ढोते ह. (१) ओ ये नर इ मूतये गुनू च ा स ो अ वनो जग यात्. दे वासो म युं दास य न ते न आ व सु वताय वणम्.. (२) य के नेता यजमान क र ा क इ छा से इं के समीप आते ह और इं उनको उसी समय य के अनु ान म लगाते ह. दे वगण असुर का ोध समा त कर एवं हमारे य के न म इं को लाव. (२) अव मना भरते केतवेदा अव मना भरते फेनमुदन्. ीरेण नातः कुयव य योषे हते ते यातां वणे शफायाः.. (३) सर के धन को जानने वाला कुयव असुर वयं धन का अपहरण करता है एवं जल म रहकर फेन वाले जल को चुराता है. चुराए ए जल म नान करने वाली कुयव क दो यां शफा नामक नद के गहरे जल म न ह . (३) युयोप ना भ पर यायोः पूवा भ तरते रा शूरः. अ सी कु लशी वीरप नी पयो ह वाना उद भभर ते.. (४) उदक के म य म थत एवं सर को परेशान करने के न म इधर-उधर जाने वाले कुयव का थान जल म गु त था. वह शूर अप त जल से बढ़ता एवं तेज वी बनता है. अंजसी, कु लशी एवं व रप नी नाम क न दयां अपने जल से उसे स करके धारण करती ह. (४) त य या नीथाद श द योरोको ना छा सदनं जानती गात्. अध मा नो मघव चकृता द मा नो मघेव न षपी परा दाः.. (५) अपने बछड़े को जानती ई गाय जस कार अपने नवास थान म प ंचती है, उसी कार हमने भी कुयव असुर के घर क ओर जाता आ माग दे खा है. हे इं ! हमारी र ा करो, हम इस कार मत यागो, जस कार दासी का प त धन याग दे ता है. (५) स वं न इ सूय सो अ वनागा व आ भज जीवशंसे. मा तरां भुजमा री रषो नः तं ते महत इ याय.. (६) हे इं ! हम सूय के त, जल के त एवं पापर हत होने के कारण जीव ारा शं सत मानव के त भ बनाओ. हमारी गभ थ संतान क हसा मत करना. हम तु हारे महान् बल के त ालु ह. (६) अधा म ये े अ मा अधा य वृषा चोद व महते धनाय. मा नो अकृते पु त योना व ु यद् यो वय आसु त दाः.. (७) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हे इं ! हम तु ह मन से जानते ह एवं तु हारी श पर ा रखते ह. हे कामवष ! तुम हम महान् धन के न म े रत करो. हे अनेक यजमान ारा बुलाए गए इं ! हम धनर हत घर म मत रखो तथा अ य भूख को अ एवं ध दो. (७) मा नो वधी र मा परा दा मा नः या भोजना न मोषीः. आ डा मा नो मघव छ नभ मा नः पा ा भे सहजानुषा ण.. (८) हे इं ! हम मत मारना, हमारा याग मत करना एवं हमारे य उपभोग पदाथ को मत छ नना. हे धन वामी एवं श शाली इं ! हमारे गभ थ एवं घुटने के बल चलने वाले ब च को न मत करो. (८) अवाङे ह सोमकामं वा रयं सुत त य पबा मदाय. उ चा जठर आ वृष व पतेव नः शृणु ह यमानः.. (९) हे इं ! हमारे स मुख आओ, य क ाचीन लोग ने तु ह सोम य बताया है. यह सोम नचुड़ा आ रखा है, इसे पीकर स बनो. व तीण शरीर वाले बनकर हमारे उदर म सोमरस क वषा करो. जस कार पता पु क बात सुनता है, उसी कार हमारे ारा बुलाए ए तुम हमारी बात सुनो. (९)

सू —१०५

दे वता— व ेदेव

च मा अ व१ तरा सुपण धावते द व. न वो हर यनेमयः पदं व द त व ुतो व ं मे अ य रोदसी.. (१) उदकमय मंडल म वतमान सुंदर करण वाला चं मा आकाश म दौड़ता है. हे सुवणमयी चं करणो! कुएं से ढक होने के कारण मेरी इं यां तु हारे अ भाग को नह ा त करत . हे धरती और आकाश! हमारे इस तो को जानो. (१) अथ म ा उ अ थन आ जाया युवते प तम्. तु ाते वृ यं पयः प रदाय रसं हे व ं मे अ य रोदसी.. (२) धन चाहने वाले लोग को न त प से धन मल रहा है. सर क यां अपने प तय को समीप ही पाती ह, उनसे समागम करती ह एवं गभ म वीय धारण करके संतान उ प करती ह. हे धरती और आकाश! मेरे इस क को जानो. (२) मो षु दे वा अदः व१रव पा द दव प र. मा सो य य शंभुवः शूने भूम कदा चन व ं मे अ य रोदसी.. (३) हे दे वो! वग म वतमान हमारे पूवपु ष वहां से प तत न ह . सोमपान यो य पतर के ******ebook converter DEMO Watermarks*******

सुख के न म (३)

पु से र हत कभी न ह . हे धरती और आकाश! मेरी इस बात को समझो.

य ं पृ छा यवमं स तद् तो व वोच त. व ऋतं पू गतं क त भ त नूतनो व ं मे अ य रोदसी.. (४) म दे व म आ दभूत एवं य के यो य अ न से नवेदन करता ं क वे मेरी बात दे व के त के प म उ ह बता द. हे अ न! तुम पूवकाल म तोता का जो क याण करते थे, वह कहां गए? उस गुण को अब कौन धारण करता है? हे धरती और आकाश! मेरी यह बात जानो. (४) अमी ये दे वाः थन वा रोचने दवः. क ऋतं कदनृतं व ना व आ त व ं मे अ य रोदसी.. (५) हे दे वो! सूय ारा का शत तीन लोक म तुम वतमान रहो. तु हारा स य, अस य एवं ाचीन आ त कहां है? हे धरती और आकाश! मेरी यह बात जानो. (५) क ऋत य धण स क ण य च णम्. कदय णो मह पथा त ामेम ो व ं मे अ य रोदसी.. (६) हे दे वो! तु हारा स यधारण कहां है? व ण क कृपा कहां है? महान् अयमा का वह माग कहां है, जस पर चलकर हम पापबु श ु से र जा सक? हे धरती और आकाश! हमारी इस बात को जानो. (६) अहं सो अ म यः पुरा सुते वदा म का न चत्. तं मा या यो३ वृको न तृ णजं मृगं व ं मे अ य रोदसी.. (७) हे दे वो! म वही ,ं जसने ाचीनकाल म तु हारे न म सोम नचोड़े जाने पर कुछ तो बोले थे. जस कार यासे हरन को ा खा जाते ह, उसी कार मान सक क मुझे खा रहे ह. हे धरती और आकाश! मेरे इस क को जानो. (७) सं मा तप य भतः सप नी रव पशवः. मूषो न श ा द त मा यः तोतारं ते शत तो व ं मे अ य रोदसी.. (८) हे इं ! कुएं क आसपास क द वार मुझे उसी कार ःखी कर रही ह, जस कार दो सौत बीच म थत अपने प त को क दे ती ह. हे शत तु! जस तरह चूहा सूत को काटता है, उसी कार ःख मुझे खा रहे ह. हे धरती और आकाश! मेरी यह बात जानो. (८) अमी ये स त र मय त ा मे ना भरातता. त त े दा यः स जा म वाय रेभ त व ं मे अ य रोदसी.. (९) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

ये जो सूय क सात करण ह, उन म मेरी ना भ संब जानता ं और कुएं से नकलने के लए सूय करण क आकाश! मेरी यह बात जानो. (९)

है. आ य ऋ ष अथात् म यह तु त करता ं. हे धरती और

अमी ये प चो णो म ये त थुमहो दवः. दे व ा नु वा यं स ीचीना न वावृतु व ं मे अ य रोदसी.. (१०) आकाश म थत इं , व ण, अ न, अयमा और स वता—पांच कामवष दे व हमारे शंसनीय तो को एक साथ दे व के समीप ले जाव और लौट आव. हे धरती और आकाश! मेरी यह बात जानो. (१०) सुपणा एत आसते म य आरोधने दवः. ते सेध त पथो वृकं तर तं य तीरपो व ं मे अ य रोदसी.. (११) सूय क र मयां सबको आवरण करने वाले आकाश म वतमान ह. वे वशाल जल को पार करने वाले भे ड़ए को रोकती ह. हे धरती और आकाश! मेरी यह बात जानो. (११) न ं त यं हतं दे वासः सु वाचनम्. ऋतमष त स धवः स यं तातान सूय व ं मे अ य रोदसी.. (१२) हे दे वो! तुम म छपे ए नवीन, तु य एवं वणनीय बल के कारण बहने वाली न दयां जल वा हत करती एवं सूय अपना न य वतमान तेज फैलाता है. हे धरती और आकाश! हमारी इस बात को जानो. (१२) अ ने तव य यं दे वे व या यम्. स नः स ो मनु वदा दे वा य व रो व ं मे अ य रोदसी.. (१३) हे अ न! दे व के साथ तु हारी शंसनीय ाचीन बंधुता है एवं तुम अ यंत ाता हो. मनु के य के समान ही हमारे य म भी बैठकर दे व क ह व के ारा पूजा करो. हे धरती और आकाश! हमारी यह बात जानो. (१३) स ो होता मनु वदा दे वाँ अ छा व रः. अ नह ा सुषूद त दे वो दे वेषु मे धरो व ं मे अ य रोदसी.. (१४) मनु के य के समान हमारे य म थत, दे व को बुलाने वाले, परम ानी, दे व म अ धक मेधावी अ न दे व दे व को शा ीय मयादा के अनुसार हमारे ह क ओर े रत कर. हे धरती और आकाश! हमारी यह बात जानो. (१४) ा कृणो त व णो गातु वदं तमीमहे. ूण त दा म त न ो जायतामृतं व ं मे अ य रोदसी.. (१५) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

व ण अ न का नवारण करते ह. हम उन मागदशक व ण से अ भमत फल मांगते ह. हमारा तोता मन उन व ण क मननीय तु त करता है. वे ही तु त यो य व ण हमारे लए स चे बन. हे धरती और आकाश! हमारी बात जानो. (१५) असौ यः प था आ द यो द व वा यं कृतः. न स दे वा अ त मे तं मतासो न प यथ व ं मे अ य रोदसी.. (१६) हे दे वगण! जो सूय आकाश म सततगामी माग के समान सबके ारा दे खे जाते ह, उनका अ त मण तुम भी नह कर सकते. हे मानवो! तुम उ ह नह जानते. हे धरती और आकाश! हमारी बात जानो. (१६) तः कूपेऽव हतो दे वा हवत ऊतये. त छु ाव बृह प तः कृ व ं रणा व ं मे अ य रोदसी.. (१७) कुएं म गरा आ त ऋ ष अपनी र ा के लए दे व को बुलाता है. बृह प त ने उसे पाप प कुएं से नकालकर उसक पुकार सुनी. हे धरती और आकाश! हमारी बात जानो. (१७) अ णो मा सकृद्वृकः पथा य तं ददश ह. उ जहीते नचा या त ेव पृ ् यामयी व ं मे अ य रोदसी.. (१८) लाल रंग के वृक ने मुझे एक बार माग म जाते ए दे खा. वह मुझे दे खकर इस कार ऊपर उछला, जस कार पीठ क वेदना वाला काम करते-करते सहसा उठ पड़ता है. हे धरती और आकाश! मेरे इस क को जानो. (१८) एनाङ् गूषेण वय म व तोऽ भ याम वृजने सववीराः. त ो म ो व णो मामह ताम द तः स धुः पृ थवी उत ौः.. (१९) घोषणा यो य इस तो के कारण इं का अनु ह पाए ए हम लोग पु , पौ आ द के साथ सं ाम म श ु को हराव. म , व ण, अ द त, सधु, पृ वी एवं आकाश हमारी इस ाथना का आदर कर. (१९)

सू —१०६

दे वता— व ेदेव

इ ं म ं व णम नमूतये मा तं शध अ द त हवामहे. रथं न गा सवः सुदानवो व मा ो अंहसो न पपतन.. (१) हम र ा के लए इं , म , व ण, अ न, म द्गण एवं अ द त को बुलाते ह. नवास थान दे ने वाले शोभनदानयु दे व पाप से बचाकर हमारा उसी कार पालन कर, ******ebook converter DEMO Watermarks*******

जैसे सार थ रथ को ऊंचे-नीचे माग से बचाकर ले जाता है. (१) त आ द या आ गता सवतातये भूत दे वा वृ तूयषु श भुवः. रथं न गा सवः सुदानवो व मा ो अंहसो न पपतन.. (२) हे आ द यो! तुम यु म हमारी सहायता करने के लए आओ एवं यु म हमारे सुखदाता बनो. नवास थान दे ने वाले एवं शोभनदानयु दे व पाप से बचाकर हमारा उसी कार पालन कर, जैसे सार थ रथ को ऊंचे-नीचे माग से बचाकर ले जाता है. (२) अव तु नः पतरः सु वाचना उत दे वी दे वपु े ऋतावृधा. रथं न गा सवः सुदानवो व मा ो अंहसो न पपतन.. (३) सुखसा य तु त वाले पतर एवं दे व के पता-माता के समान य वधक ावापृ वी हमारी र ा कर. नवास थान दे ने वाले एवं शोभनदानयु दे व पाप से बचाकर हमारा उसी कार पालन कर, जैसे सार थ रथ को ऊंचेनीचे माग से बचाकर ले जाता है. (३) नराशंसं वा जनं वाजय ह य रं पूषणं सु नैरीमहे. रथं न गा सवः सुदानवो व मा ो अंहसो न पपतन.. (४) हम मनु य ारा शंसनीय एवं अ के वामी अ न को व लत करके तथा परम बली पूषा के समीप जाकर सुखकर तो ारा याचना करते ह. नवास थान दे ने वाले एवं शोभनदानयु दे व पाप से बचाकर हमारा उसी कार पालन कर, जैसे सार थ रथ को ऊंचेनीचे थान से बचाकर ले जाता है. (४) बृह पते सद म ः सुगं कृ ध शं योय े मनु हतं तद महे. रथं न गा सवः सुदानवो व मा ो अंहसो न पपतन.. (५) हे बृह प त! हम सदा सुख दो. तुमम रोग के शमन एवं भय को र करने क जो मानवानुकूल श है, हम उसे भी मांगते ह. नवास थान दे ने वाले एवं शोभनदानयु दे व पाप से बचाकर हमारा उसी कार पालन कर, जस तरह सार थ रथ को ऊंचेनीचे थान से बचाकर ले जाता है. (५) इ ं कु सो वृ हणं शचीप त काटे नबाळ् ह ऋ षर तये. रथं न गा सवः सुदानवो व मा ो अंहसो न पपतन.. (६) कुएं म गरे ए कु स ऋ ष ने अपनी र ा के लए वृ हंता एवं शचीप त इं को बुलाया. नवास थान दे ने वाले एवं शोभनदानयु दे व पाप से बचाकर हमारा उसी कार पालन कर, जैसे सार थ रथ को ऊंचे-नीचे थान से बचाकर ले जाता है. (६) दे वैन दे

द त न पातु दे व ाता ायताम यु छन्.

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त ो म ो व णो मामह ताम द तः स धुः पृ थवी उत ौः.. (७) दे व के साथ-साथ दे वी अ द त भी हमारी र ा कर एवं सबके र क स वता जाग क होकर हमारा पालन कर. म , व ण, अ द त, सधु, पृ वी और आकाश हमारी ाथना का पालन कर. (७)

सू —१०७

दे वता— व ेदेव

य ो दे वानां ये त सु नमा द यासो भवता मृळय तः. आ वोऽवाची सुम तववृ यादं हो ा व रवो व रासत्.. (१) हमारा य दे व को सुख दे . हे आ द यो! हम सुखी करो. जो द र पु ष को भी धनलाभ कराने वाला है, तु हारा वही अनु ह हम ा त हो. (१) उप नो दे वा अवसा गम व रसां साम भः तूयमानाः. इ इ यैम तो म रा द यैन अ द तः शम यंसत्.. (२) अं गरागो ीय ऋ षय ारा गाए ए मं से तुत दे व र ा के न म हमारे समीप आव. इं धन के साथ, म द्गण ाण आ द वायु के साथ तथा अ द त आ द य के साथ हम सुख द. (२) त इ त ण तद न तदयमा त स वता चनो धात्. त ो म ो व णो मामह ताम द तः स धुः पृ थवी उत ौः.. (३) हमारे ारा चाहा गया अ इं , व ण, अ न, अयमा और स वता हम द. म , व ण, अ द त, सधु, पृ वी और आकाश हमारे उस अ क र ा कर. (३)

सू —१०८

दे वता—इं और अ न

य इ ा नी च तमो रथो वाम भ व ा न भुवना न च े. तेना यातं सरथं त थवांसाथा सोम य पबतं सुत य.. (१) हे इं और अ न! तु हारा जो अ त व च रथ सम त संसार को का शत करता है, उसी एक रथ के ारा हमारे य म आओ और ऋ वज ारा नचोड़े ए सोम को पओ. (१) याव ददं भुवनं व म यु चा व रमता गभीरम्. तावाँ अयं पातवे सोमो अ वर म ा नी मनसे युव याम्.. (२) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हे इं और अ न! सव ापक एवं अपने गौरव से गंभीरतायु जो सम त संसार का प रमाण है, वही सोम तुम दोन के पीने के लए एवं मन संतोष के लए पया त हो. (२) च ाथे ह स यङ् नाम भ ं स ीचीना वृ हणा उत थः. ता व ा नी स य चा नष ा वृ णः सोम य वृषणा वृषेथाम्.. (३) हे इं और अ न! तुम दोन ने अपने क याणकारक दोन नाम को संयु कर लया है. हे वृ हंताओ! तुम वृ वध म एक साथ थे. हे कामव षयो! तुम साथ-साथ बैठकर ही सोम को अपने उदर म थान दो. (३) स म े व न वानजाना यत च ु ा ब ह त तराणा. ती ैः सौमैः प र ष े भरवागे ा नी सौमनसाय यातम्.. (४) अ न के भली-भां त द त होने पर दो अ वयु ने घी से भरा पा लेकर स चते ए कुश फैलाए ह. हे इं और अ न! ती मद करने वाले एवं चार ओर पा म भरे ए सोम के कारण हमारे स मुख आओ एवं हम पर कृपा करो. (४) यानी ा नी च थुव या ण या न पा युत वृ या न. या वां ना न स या शवा न ते भः सोम य पबतं सुत य.. (५) हे इं और अ न! तुमने जो वीरता के काम कए ह, जन दखाई दे ने वाले जीव क सृ एवं वषा आ द कम कए ह तथा तुम दोन क ाचीन क याणकारी म ता है, उन सबके स हत आकर नचोड़ा आ सोमरस पओ. (५) यद वं थमं वां वृणानो ३ऽयं सोमो असुरैन वह ः. तां स यां ाम या ह यातमथा सोम य पबतं सुत य.. (६) हे इं और अ न! मने य कम के ारंभ म ही जो कहा था क तुम दोन का वरण करके तु ह सोम से स क ं गा, मेरी वही स ची ा वचारकर आओ और नचोड़े ए सोम को पओ. यह सोम ऋ वज ारा वशेष आ त दे ने यो य है. (६) य द ा नी मदथः वे रोणे यद् ण राज न वा यज ा. अतः प र वृषणावा ह यातमथा सोम य पबतं सुत य.. (७) हे य पा एवं अभी दाता इं और अ न! चाहे तुम अपने नवास म आनंद से बैठे हो, चाहे कसी ा ण या राजा के य म प ंचकर स हो रहे हो, इन सम त थान से आओ एवं नचोड़ा आ सोमरस पऔ. (७) य द ा नी य षु तुवशेषु यद् वनुषु पू षु थः. अतः प र वृषणावा ह यातमथा सोम य पबतं सुत य.. (८) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हे कामवषक इं और अ न! य द तुम य , तुवश, अनु, ह्यु एवं पु जन समूह के बीच थत हो, तब भी इन सम त थान से आओ एवं नचोड़ा आ सोमरस पओ. (८) य द ा नी अवम यां पृ थ ां म यम यां परम यामुत थः. अतः प र वृषणावा ह यातमथा सोम य पबतं सुत य.. (९) हे कामवषक इं और अ न! य द तुम नचली धरती अथवा म य थ आकाश म थत हो, तब भी वहां से आओ और नचोड़ा आ सोमरस पओ. (९) य द ा नी परम यां पृ थ ां म यम यामवम यामुत थः. अतः प र वृषणावा ह यातमथा सोम य पबतं सुत य.. (१०) हे कामवषक इं और अ न! य द तुम आकाश के परवत , म यवत या न नवत धरातल म वतमान हो, तब भी इन थान से आओ और नचोड़ा आ सोमरस पओ. (१०) य द ा नी द व ो य पृ थ ां य पवते वोषधी व सु. अतः प र वृषणावा ह यातमथा सोम य पबतं सुत य.. (११) हे कामवषक इं और अ न! तुम चाहे आकाश, पृ वी, पवत , ओष धय अथवा जल म थत हो, तब भी इन थान से आओ और नचोड़ा आ सोमरस पओ. (११) य द ा नी उ दता सूय य म ये दवः वधया मादयेथे. अतः प र वृषणावा ह यातमथा सोम य पबतं सुत य.. (१२) हे कामवषक इं और अ न! य द तुम उ दत सूय के कारण का शत आकाश म अपने ही तेज से स हो रहे हो, तब भी वहां से आओ और नचोड़ा आ सोम पओ. (१२) एवे ा नी प पवांसा सुत य व ा म यं सं जयतं धना न. त ो म ा व णो मामह ताम द तः स धुः पृ थवी उत ौः.. (१३) हे इं और अ न! नचोड़े ए सोमरस को इस कार पीकर हमारे लए सभी संप यां दो. म , व ण, अ द त, सधु, पृ वी और आकाश हमारे इस धन का आदर कर. (१३)

सू —१०९

दे वता—इं और अ न

व यं मनसा व य इ छ ा नी ास उत वा सजातान्. ना या युव म तर त म ं स वां धयं वाजय तीमत म्.. (१) हे इं और अ न! धन क कामना करता आ म तु ह जा त या बंधु के समान समझता .ं मेरी उ म बु तु हारे अ त र कसी अ य क द ई नह है. उसी बु से मने तु हारी ******ebook converter DEMO Watermarks*******

अ े छापूण एवं यानयु

तु त क है. (१)

अ वं ह भू रदाव रा वां वजामातु त वा घा यालात्. अथा सोम य यती युव या म ा नी तोमं जनया म न म्.. (२) हे इं और अ न! गुणहीन जामाता क यालाभ के लए अथवा गुणहीन क या का भाई उ म वर लाभ के लए जतना धन दे ते ह, तुम उससे भी अ धक दे ने वाले हो, यह मने सुना है. इस लए तुमको नचोड़े ए सोम दे ने के साथ ही यह अ तशय नवीन तु त भी न मत करता ं. (२) मा छे र म र त नाधमानाः पतॄणां श रनुय छमानाः. इ ा न यां कं वृषणो मद त ता धषणाया उप थे.. (३) र सी के समान लंबी पु -पौ परंपरा को हम कभी छ न कर, ऐसी ाथना करते ए एवं पतर को श दे ने वाले पु -पौ ा द को उ प करते ए हम यजमान इं एवं अ न क सुखपूवक तु त करते ह. श ु का नाश करते ए इं और अ न इस तु त के समीप रह. (३) युवा यां दे वी धषणा मदाये ा नी सोममुशती सुनो त. ताव ना भ ह ता सुपाणी आ धावतं मधुना पृङ् म सु.. (४) हे इं और अ न! तु हारी स ता के लए हम तेज वी एवं तु हारी कामना से पूण ाथना करते ए सोमरस नचोड़ते ह. हे अ संप शोभनबा यु एवं सुंदर हथे लय वाले इं और अ न! शी आओ एवं जल म वतमान माधुय से हमारे सोम को संप करो. (४) युवा म ा नी वसुनो वभागे तव तमा शु व वृ ह ये. तावास ा ब ह ष य े अ म चषणी मादयेथां सुत य.. (५) हे इं और अ न! हमने सुना है क तोता को धन बांटने के अ भ ाय से तुमने वृ वध म अ तशय बल का दशन कया था. हे सबको दे खने वाले! तुम हमारे य म कुश पर बैठकर एवं नचोड़े ए सोम को पीकर स बनो. (५) चष ण यः पृतनाहवेषु पृ थ ा ररीचाथे दव . स धु यः ग र यो म ह वा े ा नी व ा भुवना य या.. (६) हे इं और अ न! सं ाम म र ा के उ े य से बुलाए जाने पर तुम सभी मनु य क अपे ा महान् बनते हो. तुम धरती, आकाश, नद एवं पवत क अपे ा महान् बनते हो. तुम सम त व क अपे ा महान् हो. (६) आ भरतं श तं व बा अ माँ इ ा नी अवतं शची भः. ******ebook converter DEMO Watermarks*******

इमे नु ते र मयः सूय य ये भः स प वं पतरो न आसन्.. (७) हे व बा इं एवं अ न! धन लाओ, हम दो एवं अपने काय के ारा हमारी र ा करो. सूय क जन र मय ारा हमारे पूव पु ष लोक को गए थे, वे ये ही ह. (७) पुरंदरा श तं व ह ता माँ इ ा नी अवतं भरेषु. त ो म ो व णो मामह ताम द तः स धुः पृ थवी उत ौः.. (८) हे व ह त एवं असुरनाशक इं और अ न! हम धन दो एवं यु म हमारी र ा करो. म , व ण, अ द त, सधु, पृ वी एवं आकाश हमारी इस ाथना क पूजा कर. (८)

सू —११०

दे वता—ऋभुगण

ततं मे अप त तायते पुनः वा द ा धी त चथाय श यते. अयं समु इह व दे ः वाहाकृत य समु तृ णुत ऋभवः.. (१) हे ऋभुओ! मने बार-बार अ न ोम आ द का पहले अनु ान कया है एवं इस समय पुनः कर रहा ं. उस म तु हारी शंसा के लए अ तशय स ताकारक तो पढ़ा जा रहा है. इस य म सभी दे व के लए पया त सोमरस संपा दत है. तुम वाहा श द के साथ अ न म डाले गए सोम को पीकर तृ त बनो. (१) आभोगयं य द छ त ऐतनापाकाः ा चो मम के चदापयः. सौध वनास रत य भूमनाग छत स वतुदाशुषो गृहम्.. (२) हे ऋभुओ! तुम ाचीन काल म अप रप व ान वाले एवं मेरे जातीय बंधु थे. उस समय तुमने उपभोग के यो य सोमरस क इ छा क थी. हे सुध वा के पु ो! उस समय तुमने अपने तप से उपा जत मह व ारा ऐसे स वता के घर गमन कया था, जसे सोमपान दया जा चुका था. (२) त स वता वोऽमृत वमासुवदगो ं य वय त ऐतन. यं च चमसमसुर य भ णमेकं स तमकृणुता चतुवयम्.. (३) हे ऋभुओ! उस समय स वता ने तु हारे अ भमुख होकर अमरता द थी, जस समय तुम सबके ारा यमान स वता को अपनी सोमपान क इ छा बताते ए आए थे एवं व ा के सोमपान के साधन के चार टु कड़े कर दए थे. (३) व ् वी शमी तर ण वेन वाघतो मतासः स तो अमृत वमानशुः. सौध वना ऋभवः सूरच सः संव सरे समपृ य त धी त भः.. (४) ऋ वज के साथ मले ए ऋभु ने शी ही य , दान आ द कम करके मरणधमा ******ebook converter DEMO Watermarks*******

होते ए भी अमरता ा त क थी. उस समय सुध वा के पु एवं सूय के समान तेज वी ऋभु ने संव सर पयत चलने वाले य म अ धकार ा त कया था. (४) े मव व ममु तेजनेनँ एकं पा मृभवो जेहमानम्. उप तुता उपमं नाधमाना अम यषु व इ छमानाः.. (५) जस कार नापने का बांस लेकर खेत नापा जाता है, उसी कार समीप थ ऋ षय ारा तुत ऋभु ने शंसनीय सोम क याचना करके एवं मरणर हत दे व के बीच म ह क इ छा करके ती ण अ ारा चमस नाम के य पा को चार भाग म बांटा था. (५) आ मनीषाम त र य नृ यः ुचेव घृतं जुहवाम व ना. तर ण वा ये पतुर य स र ऋभवो वाजम ह दवो रजः.. (६) हम अंत र संबंधी य को नेता ऋभु को ुच नामक पा के समान घी से भरा आ ह दे ने के साथ ही ान भरी तु त करते ह. उ ह ने जगत्पालक सूय के समान संसार को पार करने क कुशलता एवं वगलोक का अ ा त कया था. (६) ऋभुन इ ः शवसा नवीयानृभुवाजे भवसु भवसुद दः. यु माकं दे वा अवसाह न ये३ भ त ेम पृ सुतीरसु वताम्.. (७) बल के कारण अ त स ऋभुगण हमारे ई र ह. हम अ एवं धन के दे ने वाले ऋभु नवास के कारण ह, इस लए वे हम वरदान द. हे दे वो! हम तु हारी र ा के कारण अनुकूल दन म सोमा भषवर हत श ु को हरा द. (७) न मण ऋभवो गाम पशत सं व सेनासृजता मातरं पुनः. सौध वनासः वप यया नरो ज ी युवाना पतराकृणोतन.. (८) हे ऋभुओ! तुमने चमड़े के ारा गाय को आ छा दत करके पुनः उसके बछड़े से मला दया था. हे सुध वा के पु ो एवं य के नेताओ! तुमने शोभन कम क इ छा से अपने वृ माता- पता को पुनः युवा बना दया है. (८) वाजे भन वाजसाताव वड् ृभुमाँ इ च मा द ष राधः. त ो म ो व णो मामह ताम द तः स धुः पृ थवी उत ौः.. (९) हे इं ! ऋभु का सहयोग पाकर हम य के न म भूत अ एवं धन दो. म , व ण, अ द त, सधु, धरती एवं आकाश हमारे उस धन एवं अ क पूजा कर. (९)

सू —१११

दे वता—ऋभुगण

त थं सुवृतं व नापस त हरी इ वाहा वृष वसू. ******ebook converter DEMO Watermarks*******



पतृ यामृभवो युव य त

व साय मातरं सचाभुवम्.. (१)

उ म ानपूवक कम करने वाले ऋभु ने अ नीकुमार के न म सुंदर प हय वाला रथ तथा इं के वाहन प ह र नाम के दोन घोड़ को बनाया. उ म धन से यु ऋभु ने अपने माता- पता को यौवन एवं बछड़े को सहचरी माता दान क थी. (१) आ नो य ाय त त ऋभुम यः वे द ाय सु जावती मषम्. यथा याम सववीरया वशा त ः शधाय धासथा व यम्.. (२) हे ऋभुओ! हमारे य के लए उ वल अ पैदा करो. हमारे य कम एवं बल के न म शोभन पु -पौ ा द से यु धन दो, जससे हम अपनी वीर संतान के साथ सुखपूवक नवास कर. हम बल के लए अ दो. (२) आ त त सा तम म यमृभवः सा त रथाय सा तमवते नरः. सा त नो जै सं महेत व हा जा ममजा म पृतनासु स णम्.. (३) हे य के नेता ऋभुओ! हमारे लए उपभोग यो य अ दो. हमारे रथ के लए धन एवं अ के उपभोग के लए अ दो. सारा संसार हमारे जयशील अ क सदा पूजा करे एवं हम यु म उप थत या अनुप थत श ु का नाश कर. (३) ऋभु ण म मा व ऊतय ऋभू वाजा म तः सोमपीतये. उभा म ाव णा नूनम ना ते नो ह व तु सातये धये जषे.. (४) हम अपनी र ा के उ े य से महान् इं , ऋभु एवं म त को सोमरस पीने के लए बुलाते ह. वे हम धन, य कम और वजय के लए े रत कर. (४) ऋभुभराय सं शशातु सा त समय ज ाजो अ माँ अ व ु . त ो म ो व णो मामह ताम द तः स धुः पृ थवी उत ौः.. (५) ऋभु हम सं ाम के न म धन द. सं ाम म वजयी बाज हमारी र ा कर. म , व ण, अ द त, सधु, धरती और आकाश हमारी ाथना का आदर कर. (५)

सू —११२

दे वता—अ नीकुमार

ईळे ावापृ थव पूव च येऽ नं घम सु चं याम ये. या भभरे कारमंशाय ज वथ ता भ षु ऊ त भर ना गतम्.. (१) म अ नीकुमार को व ा पत करने के लए पहले ावा और पृ वी क तु त करता ं. अ नीकुमार के य म आ जाने पर था पत, द त एवं शोभनकां तयु अ न क तु त करता ं. हे अ नीकुमारो! सं ाम म अपना वजय भाग पाने के न म जन र ा ******ebook converter DEMO Watermarks*******

संबंधी उपाय के साथ आकर शंख बजाते हो, उ ह उपाय के साथ हमारे समीप भी आओ. (१) युवोदानाय सुभरा अस तो रथमा त थुवचसं न म तवे. या भ धयोऽवथः कम ये ता भ षु ऊ त भर ना गतम्.. (२) हे अ धनलाभ के जानने वाले लगे व श

नीकुमारो! अ य दे व म आस र हत, शोभन तो धारण करने वाले तोता लए तु हारे रथ के समीप उसी कार प ंचते ह, जस कार यायपूण वचन पं डत के पास लोग अपना फैसला कराने जाते ह. तुम जन उपाय से य म ा नय क र ा करते हो, उ ह उपाय के साथ आओ. (२)

युवं तासां द य शासने वशां यथो अमृत य म मना. या भधनुम वं१ प वथो नरा ता भ षु ऊ त भर ना गतम्.. (३) हे नेता पी अ नीकुमारो! तुम दोन वग म उ प सोम पी अमृतपान से ा त बल के कारण तीन लोक म वतमान जा का शासन करने म समथ हो. र ा के जन उपाय से तुमने सव म असमथ गाय को शंयु नामक ऋ ष के लए धा बना दया था, उ ह उपाय के साथ आओ. (३) या भः प र मा तनय य म मना माता तूषु तर ण वभूष त. या भ म तुरभव च ण ता भ षु ऊ त भर ना गतम्.. (४) हे अ नीकुमारो! चार ओर गमनशील वायु अपने पु एवं माता से उ प अ न के बल से यु होकर तथा पालनोपाय ारा धावनशील म अ त शी गामी बनकर सव ात हो जाता है. जन उपाय ारा क ीवान् ऋ ष व श ानयु ए थे, उ ह उपाय ारा आओ. (४) याभी रेभं नवृतं सतमद् य उ दनमैरयतं व शे. या भः क वं सषास तमावतं ता भ षु ऊ त भर ना गतम्.. (५) हे अ नीकुमारो! तुमने जन र ोपाय से असुर ारा कुएं म फके गए एवं पाशब कए गए रेभ ऋ ष को जल से बाहर नकाला था, इसी कार वंदन नामक ऋ ष को सूय दशन के लए जल से नकाला था, असुर ारा अंधकार म डाले गए एवं काश क इ छा वाले क व ऋ ष को जन उपाय से बचाया था, उ ह उपाय से यहां आओ. (५) या भर तकं जसमानमारणे भु युं या भर थ भ ज ज वशुः. या भः कक धुं व यं च ज वथ ता भ षु ऊ त भर ना गतम्.. (६) हे अ नीकुमारो! तुमने जन र ा संबंधी उपाय से असुर ारा कुएं म गराकर मारे जाते ए राज ष अंतक क र ा क , समु म डू बते ए भु यु क र ा जन थार हत ******ebook converter DEMO Watermarks*******

उपाय ारा क तथा जन उपाय से ककधु एवं व य को बचाया था, उ ह उपाय से यहां आओ. (६) या भः शुच तं धनसां सुषंसदं त तं घममो याव तम ये. या भः पृ गुं पू कु समावतं ता भ षु ऊ त भर ना गतम्.. (७) हे अ नीकुमारो! तुमने जन उपाय ारा शुचं त को धनसंप एवं शोभनगृह का वामी बनाया, अ को जलाने वाली त त अ न को सुखदायक बनाया एवं पृ गु तथा पु कु स क र ा क , उ ह उपाय से यहां आओ. (७) या भः शची भवृषणा परावृजं ा धं ोणं च स एतवे कृथः. या भव तकां सतामु चतं ता भ षु ऊ त भर ना गतम्.. (८) हे कामवषक अ नीकुमारो! तुमने जन कम ारा पंगु परावृज को चलने म समथ, अंधे ऋजा को दे खने म कुशल, जानुर हत ोण को ग तशील एवं वृक ारा गृहीत प णी व का को मु कया था, उ ह उपाय से आओ. (८) या भः स धु मधुम तमस तं व स ं या भरजराव ज वतम्. या भः कु सं ुतय नयमावतं ता भ षु ऊ त भर ना गतम्.. (९) हे जरार हत अ नीकुमारो! जन उपाय से सधु नद को मधुर वाह वाली, व श को स एवं कु स, ुतय तथा नय ऋ षय को सुर त कया था, उ ही उपाय स हत हमारे पास आओ. (९) या भ व पलां धनसामथ सह मीळह आजाव ज वतम्. या भवशम ं े णमावतं ता भ षु ऊ त भर ना गतम्.. (१०) हे अ नीकुमारो! जन उपाय से तुमने धन क वा मनी एवं चलने म असमथ वप ला को हजार संप य से पूण एवं सं ाम म जाने यो य बनाया तथा अ ऋ ष के तु तक ा पु वश ऋ ष क र ा क थी, उ ह उपाय से यहां आओ. (१०) या भः सुदानू औ शजाय व णजे द घ वसे मधु कोशो अ रत्. क ीव तं तोतारं या भरावतं ता भ षु ऊ त भर ना गतम्.. (११) हे सुंदर दान वाले अ नीकुमारो! तुमने जन उपाय से उ शजा के पु एवं वा ण य कम करने वाले द घ वा के न म मेघ से जल बरसाया एवं तु तक ा क ीवान् क र ा क , उ ह उपाय को लेकर यहां आओ. (११) या भ रसां ोदसोद्नः प प वथुरन ं याभी रथमावतं जषे. या भ शोक उ या उदाजत ता भ षु ऊ त भर ना गतम्… (१२) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हे अ नीकुमारो! तुमने जन उपाय ारा स रता के तट को जलपूण कया था, अ वर हत रथ को वजय के लए चलाया था तथा शोक को अपनी चुराई ई गाय को पाने म समथ कया था, उ ह उपाय को साथ लेकर आओ. (१२) या भः सूय प रयाथः पराव त म धातारं ै प ये वावतम्. या भ व ं भर ाजमावतं ता भ षु ऊ त भर ना गतम्.. (१३) हे अ नीकुमारो! तुम जन उपाय ारा सूय को हण के अंधकार से मु करने जाते हो, तुमने जन उपाय ारा मांधाता क े प त कम म र ा क एवं मेधावी भर ाज को अ दे कर बचाया, उ ह उपाय के साथ यहां आओ. (१३) या भमहाम त थ वं कशोजुवं दवोदासं श बरह य आवतम्. या भः पू भ े सद युमावतं ता भ षु ऊ त भर ना गतम्.. (१४) हे अ नीकुमारो! तुमने जन उपाय ारा महान् अ त थ स कार करने वाले एवं रा स के भय से जल म घुसने को तुत दवोदास को शंबर असुर ारा मारे जाते समय बचाया था तथा सं ाम म सद यु ऋ ष क र ा क , उ ह उपाय को लेकर आओ. (१४) या भव ं व पपानमुप तुतं क ल या भ व जा न व यथः. या भ मुत पृ थमावतं ता भ षु ऊ त भर ना गतम्.. (१५) हे अ नीकुमारो! तुमने जन उपाय ारा पीने म संल न एवं तु त कए गए व क , प नी ा त करने वाले क ल क एवं अ हीन पृ थ क र ा क थी, उ ह उपाय के साथ आओ. (१५) या भनरा शयवे या भर ये या भः पुरा मनवे गातुमीषथुः. या भः शारीराजतं यूमर मये ता भ षु ऊ त भर ना गतम्.. (१६) हे नेता प अ नीकुमारो! तुमने जन उपाय ारा शंयु, अ एवं थम मनु को ःख से नकलने का माग बताया था एवं यूमर म क र ा के उ े य से उनके श ु पर बाण चलाया था, उ ह उपाय के साथ यहां आओ. (१६) या भः पठवा जठर य म मना ननाद दे चत इ ो अ म ा. या भः शयातमवथो महाधने ता भ षु ऊ त भर ना गतम्.. (१७) हे अ नीकुमारो! जन उपाय ारा पठवा ऋ ष शरीर बल पाकर सं ाम म उसी कार द त ए, जस कार का ारा जलाई गई अ न चमकती है. जन उपाय से यु म शयात क र ा क गई, उ ह उपाय के साथ आओ. (१७) या भर रो मनसा नर यथोऽ ं ग छथो ववरे गोअणसः. ******ebook converter DEMO Watermarks*******

या भमनुं शूर मषा समावतं ता भ

षु ऊ त भर ना गतम्.. (१८)

हे अ नीकुमारो! तुमने जन उपाय से मननीय तो ारा स होकर अं गरा क र ा क थी, प णय ारा गुफा म छपाई गई गाय के थान पर सबसे पहले प ंचे थे एवं अ दे कर वीयवान मनु क र ा क थी, उ ह उपाय स हत आओ. (१८) या भः प नी वमदाय यूहथुरा घ वा या भर णीर श तम्. या भः सुदास ऊहथुः सुदे ं१ ता भ षु ऊ त भर ना गतम्.. (१९) हे अ नीकुमारो! तुमने जन उपाय ारा वमद ऋ ष के लए प नी एवं लाल रंग क गाएं द एवं सुदास को स धन दया, उ ह उपाय स हत आओ. (१९) या भः शंताती भवथो ददाशुषे भु युं या भरवथो या भर गुम्. ओ यावत सुभरामृत तुभं ता भ षु ऊ त भर ना गतम्.. (२०) हे अ नीकुमारो! तुम दोन जन उपाय ारा ह वदाता यजमान के लए सुखक ा बनते हो, भु यु एवं अ धगु क र ा क तथा ऋतु तुभ ऋ ष को सुखकर और भरण यो य अ दान कया था, उ ह उपाय के साथ आओ. (२०) या भः कृशानुमसने व यथो जवे या भयूनो अव तमावतम्. मधु यं भरथो य सरड् य ता भ षु ऊ त भर ना गतम्.. (२१) हे अ नीकुमारो! तुम दोन ने जन उपाय से यु म कृशानु क र ा क , युवा पु कु स के दौड़ते ए घोड़े को बचाया तथा मधुम खय को सव य मधु दान कया, उ ह उपाय के साथ आओ. (२१) या भनरं गोषुयुधं नृषा े े य साता तनय य ज वथः. याभी रथाँ अवथो या भरवत ता भ षु ऊ त भर ना गतम्.. (२२) हे अ नीकुमारो! तुम जन उपाय ारा गौ ा त के न म यु करने वाले मनु य क सं ाम म र ा करते हो, े एवं धन ा त म यजमान के सहायक होते हो एवं उसके रथ तथा घोड़ क र ा करते हो, उ ह के साथ आओ. (२२) या भः कु समाजुनेयं शत तू तुव त च दभी तमावतम्. या भ वस तं पु ष तमावतं ता भ षु ऊ त भर ना गतम्.. (२३) हे शत तु अ नीकुमारो! तुमने जन उपाय से अजुन के पु कु स, तुव त एवं दधी त क र ा क थी तथा वसं त और पु षं त नामक ऋ षय को सुर त कया, उ ह उपाय के साथ यहां आओ. (२३) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

अ वतीम ना वाचम मे कृतं नो द ा वृषणा मनीषाम्. अ ू येऽवसे न ये वां वृधे च नो भवतं वाजसातौ.. (२४) हे कामवष अ नीकुमारो! हमारी वाणी को व हत कम से यु एवं बु को वेद ान म समथ बनाओ. काशर हत रा के अं तम हर म हम तु ह अपनी र ा के न म बुलाते ह. हमारे अ लाभ म सहायक बनो. (२४) ु भर ु भः प र पातम मान र े भर ना सौभगे भः. त ो म ो व णो मामह ताम द तः स धुः पृ थवी उत ौः.. (२५) हे अ नीकुमारो! हम दवस , नशा एवं वनाशर हत सौभा य ारा सुर त बनाओ, म , व ण, अ द त, सधु, पृ वी एवं आकाश इस तु त का आदर कर. (२५)

सू —११३

दे वता—उषा और रा

इदं े ं यो तषां यो तरागा च ः केतो अज न व वा. यथा सूता स वतुः सवायँ एवा रा युषसे यो नमारैक्.. (१) ोतमान हन ा द म े यो त उषा आई. इसक ब रंगी एवं व को का शत करने वाली र मयां सभी जगह फैल ग . जस कार रा सूय से उ प होती है, उसी कार उषा का उ प थान रा है. (१) श सा शती े यागादारैगु कृ णा सदना य याः. समानब धू अमृते अनूची ावा वण चरत आ मनाने.. (२) सूय क माता, तेज वनी एवं ेतवण वाली उषा आई है. कृ णवणा रा ने उसे अपना थान दे दया है. य प ये दोन एक ही सूय से संबं धत एवं मरणर हता ह, तथा प एकसरी के पीछे आती ह एवं एक- सरे का प न करती ई आकाश म वचरण करती ह. (२) समानो अ वा व ोरन त तम या या चरतो दे व श े. न मेथेते न त थतुः सुमेके न ोषासा समनसा व पे.. (३) इन दोन ब हन का अनंत गमनमाग एक ही है, जस पर सूय ारा नदश पाकर ये एक-एक करके चलती ह. वे सुंदर ज मदा ी एवं पर पर भ प वाली होकर एकमत को ा त करके आपस म कसी क हसा नह करत तथा कभी थर नह रहत . (३) भा वती ने ी सूनृतानामचे त च ा व रो न आवः. ा या जगद् ु नो रायो अ य षा अजीगभुवना न व ा.. (४) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हम काशसंप एवं वा णय क ने ी उषा को जानते ह. व च उषा ने हमारे लए अंधकार के बंद ार खोल दए ह, सारे संसार को का शत करके हम धन दए ह एवं सम त लोक को का शत कया है. (४) ज ये३च रतवे मघो याभोगय इ ये राय उ वं. द ं प य य उ वया वच उषां अजीगभुवना न व ा.. (५) उषा टे ढ़े सोए ए लोग म कुछ को अपने अपे त थान को जाने के लए, कुछ को भोग के लए, कुछ को य के लए एवं कुछ को धन के लए जगाती है. यह अंधकार के कारण थोड़ा दे खने वाल के व श काश के लए सारे भुवन को का शत करती है. (५) ाय वं वसे वं महीया इ ये वमथ मव व म यै. वस शा जी वता भ च उषा अजीगभुवना न व ा.. (६) उषा कसी को धन के लए, कसी को अ के लए, कसी को महाय के लए एवं कसी को अभी व तु ा त के लए जगाती है. वह नाना प जी वका के न म सम त व को का शत करती है. (६) एषा दवो हता यद श ु छ ती युव तः शु वासाः. व येशाना पा थव य व व उषो अ ेह सुभगे ु छ.. (७) आकाश क पु ी यह उषा मनु य ारा न य यौवना, ेतवसना, तमो वना शनी एवं सम त संप य क अधी री के प म दे खी गई है. हे शोभनधनसंप उषा! तुम आज यहां अंधकार न करो. (७) परायतीनाम वे त पाथ आयतीनां थमा श तीनाम्. ु छ ती जीवमुद रय युषा मृतं कं चन बोधय ती.. (८) अतीत उषा के माग का अनुवतन वतमान उषा करती है. यह आने वाली अग णत उषा क आ द है. यह अंधकार को मटाती, ा णय को जागृत करती एवं न ा म मृतवत् बने लोग को चेतन बनाती है. (८) उषो यद नं स मधे चकथ व यदाव सा सूय य. य मानुषा य यमाणाँ अजीग त े वेषु चकृषे भ म ः.. (९) हे उषा! तुमने जो अ न को व लत कया है, अंधकारावृत व को सूय के काश से प कया है एवं य करते ए मनु य को अंधकार से छु टकारा दलाया है, ये काम तुमने दे व के क याण के लए कए ह. (९) कया या य समया भवा त या

ूषुया नूनं

ु छान्.

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अनु पूवाः कृपते वावशाना द याना जोषम या भरे त.. (१०) पता नह कतने समय से उषा उ प हो रही है और कतने समय तक उ प होती रहेगी? वतमान उषा पूवव तनी उषा का अनुकरण करती है तथा आगा मनी उषाएं इसके काश का अनुवतन करगी. (१०) ईयु े ये पूवतरामप य ु छ तीमुषसं म यासः. अ मा भ नु तच याभूदो ते य त ये अपरीषु प यान्.. (११) जन मनु य ने अ तशय पूवव तनी उषा को काश करते दे खा था, वे समा त हो ग . उषा हमारे ारा इस समय दे खी जाती है. होने वाली उषा को जो लोग दे खगे, वे आ रहे ह. (११) यावयद् े षा ऋतपा ऋतेजाः सु नावरी सूनृता ईरय ती. सुम ली ब ती दे ववी त महा ोषः े तमा ु छ.. (१२) हे उषा! तुम हमसे े ष करने वाल को र हटाने वाली, स य क पालनक , य के न म उ प सुखयु वचन क ेरक, क याणस हता एवं दे व के अ भल षत य को धारण करने वाली हो, तुम उ म कार से आज इस थान को का शत करो. (१२) श पुरोषा व ु ास दे थो अ ेदं ावो मघोनी. अथो ु छा राँ अनु ूनजरामृता चर त वधा भः.. (१३) दे वी उषा पूवकाल म त दन काश दे ती थी, धन क वा मनी उषा आज भी इस व को अंधकार से छु टकारा दलाती है एवं इसी कार भ व य के दन म काश दान करेगी. वह जरा एवं मरण से र हत होकर अपने तेज से वचरण करती है. (१३) १ भ दव आता व ौदप कृ णां न णजं दे ावः. बोधय य णे भर ैरोषा या त सुयुजा रथेन.. (१४) आकाश क व तृत दशा म उषा काशक तेज से उ दत होती है एवं उसने रा ारा न मत काला प समा त कर दया है. वह सोते ए ा णय को जगाती ई लाल रंग के घोड़ वाले अपने रथ से आ रही है. (१४) आवह ती पो या वाया ण च ं केतुं कृणुते चे कताना. ईयुषीणामुपमा श तीनां वभातीनां थमोषा ैत्.. (१५) उषा पोषण समथ, वरणीय धन को लाती ई एवं सम त मनु य को चेतनायु करती ई व च करण का शत करती है. पूवव तनी उषा क उपमान एवं आगा मनी वशेष काशयु उषा क थमा यह उषा अपने तेज से बढ़ती है. (१५) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

उद व जीवो असुन आगादप ागा म आ यो तरे त. आरै प थां यातवे सूयायाग म य तर त आयुः.. (१६) हे मनु यो! उठो, हमारे शरीर का ेरक जीव आ गया है. अंधकार चला गया एवं काश आ रहा है. उषा सूय के गमन के लए रा ता साफ करती है. हे उषा! हम उस दे श म जाते ह, जसम तुम अ क वृ करती हो. (१६) यूमना वाच उ दय त व ः तवानो रेभ उषसो वभातीः. अ ा त छ गृणते मघो य मे आयु न दद ह जावत्.. (१७) तु तय को वहन करने वाला तोता काशमान उषा क तु त करता आ सु व थत वेद वचन बोलता है. हे धन वा मनी उषा! इस लए आज इस तोता का रा संबंधी अंधकार मटाओ तथा हम जायु धन दो. (१७) या गोमती षसः सववीरा ु छ त दाशुषे म याय. वायो रव सुनृतानामुदक ता अ दा अ व सोमसु वा.. (१८) गोसंप एवं सम त शूर से यु जो उषाएं तु त वचन समा त होते ही ह दे ने वाले यजमान का वायु के समान शी अंधकार न करती ह, वे ही अ दे ने वाली उषाएं सोमरस नचोड़ने वाले यजमान को ा त कर. (१८) माता दे वानाम दतेरनीकं य य केतुबृहती वभा ह. श तकृद् णे नो ु१ छा नो जने जनय व वारे.. (१९) हे दे व क माता एवं अ द त से त पधा करने वाली उषा! तुम य का ापन करती ई एवं मह व ा त करती ई का शत एवं हमारे तो क शंसा करती ई उ दत बनो. हे वरणीय उषा! हम संसार म स बनाओ. (१९) य च म उषसो वह तीजानाय शशमानाय भ म्. त ो म ो व णो मामह ताम द तः स धुः पृ थवी उत ौः.. (२०) उषाएं जो व च एवं ा त करने यो य धन लाती ह, वह ह व दे ने वाले एवं तु त करने वाले पु ष के लए क याणकारी है. म , व ण, सधु धरती एवं आकाश इस ाथना क पूजा कर. (२०)

सू —११४

दे वता—

इमा ाय तवसे कप दने य राय भरामहे मतीः. यथा शमसद् पदे चतु पदे व ं पु ं ामे अ म नातुरम्.. (१) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हम वृ जटाधारी एवं वीरनाशक के लए ये मननीय तु तयां इस लए अ पत कर रहे ह, जससे पद एवं चतु पद क रोगशां त हो. गांव म सब लोग पु तथा अनातुर रह. (१) मृळा नो ोत नो मय कृ ध य राय नमसा वधेम ते. य छं च यो मनुरायेजे पता तद याम तव णी तषु.. (२) हे ! हमारे न म तुम सुखकारक बनी एवं हम सुख दान करो. हम नम कारपूवक वीरनाशक क सेवा करते ह. पता मनु ने जो रोगशां त और नभयता ा त क थी, हे ! तु ह नम कार करने पर हम भी उ ह ा त कर. (२) अ याम ते सुम त दे वय यया य र य तव मीढ् वः. सु नाय शो अ माकमा चरा र वीरा जुहवाम ते ह वः.. (३) हे कामवषक ! हम वीरनाशक एवं म त् सहयोगी तु हारी कृपा दे वय के ारा पाव. हमारी जा के सुख क इ छा करते ए तुम उनके समीप आओ. जा को हा नर हत दे खकर हम तु हारे लए ह दगे. (३) वेषं वयं ं य साधं वङ् कक वमवसे न यामहे. आरे अ म ै ं हेळो अ यतु सुम त म यम या वृणीमहे.. (४) हम र ा के न म द त, य साधक, कु टलग त एवं ांतदश को बुलाते ह. अपना द त ोध र कर एवं हम उनक शोभन कृपा ा त कर. (४) दवो वराहम षं कप दनं वेषं पं नमसा न यामहे. ह ते ब े षजा वाया ण शम वम छ दर म यं यंसत्.. (५) हम वराह के समान ढ़ांग, काशशील, जटाधारी, तेजोद त एवं न पणजीव को नम कार ारा बुलाते ह. वे अपने हाथ म वरणीय ओष धयां धारण करते ए हम सुख, कवच एवं गृह दान कर. (५) इदं प े म तामु यते वचः वादोः वाद यो दाय वधनम्. रा वा च नो अमृत मतभोजनं मने तोकाय तनयाय मृळ.. (६) म त के पता को ल य करके हम वा द पदाथ से भी मधुर एवं वृ कारक तु त वचन बोल रहे ह. हे मरणर हत ! हम मानव का भोजन दान करो एवं अपने पु प मेरी तथा मेरे पु क र ा करो. (६) मा नो महा तमुत मा नो अभकं मा न उ तमुत मा न उ तम्. मा नो वधीः पतरं मोत मातरं मा नः या त वो री रषः.. (७) ******ebook converter DEMO Watermarks*******

हे ! हम लोग म से वयोवृ , बालक, गभाधान समथ युवक एवं गभ थ शशु क हसा मत करना, हमारी माता अथवा पता क हसा एवं हमारे य शरीर का नाश भी मत करना. (७) मा न तोके तनये मा न आयौ मा नो गोषु मा नो अ ेषु री रषः. वीरा मा नो भा मतो वधीह व म तः सद म वा हवामहे.. (